
Vijay
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समर शेष है,अभी मनुज भक्षी हुंकार रहे हैं, गांधी का पी रुधिर ,जवाहर पर फुंकार रहे हैं समर शेष है,अहंकार इनका हरना बाकी है, वृक को दंतहीन, अहि को निर्विष करना
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● राहुल गांधी की VDO को एडिट कर वापस फ़र्ज़ी VDO बनाया जा रहा है.. ● इस बार मुद्दा' है बलात्कार..सावरकर, नरिंदर मोदी, आरएसएस और हिंदू महासभा का पसंदीदा.. ● VDO में एक महिला ने दिखाया कि राहुल गांधी कह रहे हैं ~ 80% बलात्कार महिलाओं की वजह से होते हैं.. = सच : मनोहर खट्टर ने यह बात कही थी जिसे राहुल गांधी हाईलाइट कर रहे थे ~ इंडिया में बलात्कार होता है मगर भारत में बलात्कार नहीं होता है.. = सच : यह बात मोहन भागवत ने कही थी..राहुल गांधी बता रहे थे ~ लड़की की एक जगह है वो पिंजरे में बंद होनी चाहिए = सच : राहुल गांधी महिलाओं के ख़िलाफ़ इस माइंडसेट पर बोल रहे थे ◆ ये बात जान बूझ कर एक महिला से कहलवाई गई ताकि यक़ीन दिलाया जा सके..इस महिला ने यह एक बार भी नहीं सोचा कि वो दूसरी महिलाओं के ख़िलाफ़ बलात्कार में मदद कर रही है ◆ ठीक इसी तरह मोदी का कहा हुआ "आलू से सोना" राहुल गांधी के नाम पर चलाया गया था ◆ ये लोग काइर, नपुंसक होते हैं जो पीठ पीछे वार करते हैं..इनके सामने का हिस्सा काम नहीं करता है..मगर पीछे का हिस्सा काफ़ी ताक़तवर होता है..इसी लिए पीछे से आते हैं.. ✋ इस VDO में जिस 'औरत ने राहुल गांधी के ख़िलाफ़ झूट फैलाया है उसे सजा मिलनी चाहिए कानून द्वारा कृष्णन अय्यर काँग्रेस पेज को फॉलो कीजिए कृष्णन अय्यर को फॉलो कीजिए KrishnanIyerForINC को X पर फॉलो कीजिए
Vijay27,974 次观看 • 21 天前

रावण ने ख़ुद ठाना था राम के हाथों मरने का। कथा है कि रावण को पता चल गया था कि राम विष्णु अवतार हैं। और राम के हाथों मरकर उसके सारे पाप धुल जाएंगे और वो बैकुंठ पहुंच जायेगा। ●● कथाएं बहुत अर्थ लिए रहती हैं। जिन्हें हम मिथ कहते हैं, वे किसी दृश्य के पेंटिंग की तरह होती हैं। घटना कोई घटती है, उस घटना को एक फोटोग्राफर कैप्चर करता है। जो हुआ है उस क्षण , कैमरे में बिल्कुल वही आता है। पेंटर अपनी कल्पना उस घटना में उड़ेलता है। इसलिए पेंटिंग ज्यादा महंगी बिकती है, फोटो की तुलना में। अतः इसपर बहस किए बिना आगे बढ़ते हैं कि ये सच था या झूठ... तो रावण चाहता था कि उसकी मृत्यु राम के हाथों हो। उसने सारा खेल रचा, खुद को राम से मरवाने का। जिस बैकुंठ की प्राप्ति के लिए ऋषि मुनि हजारों वर्षों तप करते, वो उसे एक तीर मात्र लगने से मिल जाता। अगर राम को वनवास न मिला होता तो क्या महलों में पलने।वाले राम की वानर, भालू, भीलों और राजा से तुच्छ माने जाने वाले लोगों से मित्रता होती? अगर सीता का हरण न हुआ होता तो क्या राम रावण को मारने जाते? ●● मुझे लगता है ये रामलीला नहीं रावण की लीला थी। राम को तपाने की, निखारने की। या नियति की लीला थी। वरना राम अयोध्या के राजा बनते, ऐसे हजारों चक्रवर्ती सम्राट हुए हैं, कौन याद रखता है। इतनी आसानी से सत्ता मिल जाती तो कौन याद रखता। ●● पृथ्वीराज कपूर अपने ज़माने के स्टार थे, चाहते तो अपने बेटे को शानदार तरीके से लॉन्च कर देते। लेकिन अपने तीनों बेटों को लोकल ट्रेन से धक्के खाने कहा, स्टूडियो घूमने कहा। क्लैप बॉय बनवाया। थप्पड़ भी पड़े। होगा पृथ्वीराज कपूर का बेटा घर पर। तीनों आज सिनेमा जगत में अमर है। उनके बच्चों ने वो संघर्ष नहीं किया, तो वे उस मुकाम पर नहीं पहुंच पाए। ●● राहुल गांधी 2004 से 2014 तक कभी भी सत्ता के सर्वोच्च पद पर बैठ सकते थे। बिना किसी संघर्ष के। लेकिन वो सत्ता उन्हें बिना किसी मेहनत के मिलती। हो सकता है एक सौम्य प्रधानमंत्री होते फिर। लेकिन नियति चाहती थी, राहुल गांधी नेहरू की तरह तपें, इंदिरा की तरह अपमानित हों। तब उनके अंदर यदि कोई अहंकार बचा हो, वो खत्म हो जाएगा। इतना अपमानित होने पर भी उनके अंदर कोई घृणा होगी वो दिख जाएगी। कोई लोभ, कोई भय हो, वो सामने।आ जायेगा। हो सकता है रावण ने जान कर न किया हो, नियति ने उससे करवाया ताकि राम वो बनें जिन्हें दुनिया जानती है। राम को तपाना था, नियति ने रावण का सहारा लिया। ●● लगता है नियति ने इस बार मोदी का सहारा लिया है, एक ऐसा राहुल बनाने को जो शायद राहुल खुद नहीं बन सकते थे। आपके विरोधी ही आपकी ज़िंदगी लिखते हैं। गावस्कर और सचिन अपना सर्वश्रेष्ठ अपने समय के सर्वश्रेष्ठ टीम के खिलाफ़ ही ज़्यादा करते थे। आपका असली चरित्र आपके सबसे कड़े दुश्मन के विरोध में ही निखरता है। भारत को पुर्तगालियों या फ्रांस ने गुलाम बनाया होता तो शायद मोहनदास गांधी महात्मा नहीं बनते, सर्वश्रेष्ठ मनुष्य का।सर्वश्रेष्ठ सबसे खतरनाक विरोधी के आगे ही आता है। ब्रिटिश साम्राज्य जितना विस्तार ज्ञात इतिहास में शायद किसी का नहीं था। ●● राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के बाद से खुद को निखारा है। वो न भी करते हों, नियति उनसे करवा रही है। एक से बढ़कर एक चैलेंज उनके सामने आता है। दरवाजे हर तरफ से बंद होते हैं। जितने द्वार बंद होते हैं, राहुल गांधी उतने ही निखरते जा रहे हैं। तपस्वी राहुल , तेजस्वी राहुल... राहुल का ये रूप शायद देश कभी नहीं देख पाता। आने वाली पीढ़ियों को अब्राहम लिंकन की तरह राहुल गांधी भी पढ़ाए जाएंगे। असली राहुल को देश के सामने लाने के लिए कम से कम इस बार दिल से थैंक्यू मोदी... #VijayShukla
Vijay10,416 次观看 • 1 个月前
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