Adv. Anil Mishra's banner
Adv. Anil Mishra's profile picture

Adv. Anil Mishra

@Adv_Anil_Mishra30,778 subscribers

Advocate, High Court of Madhya Pradesh Ex President, High Court Bar Association, Gwalior

Shorts

Oh, look the drama! Some groups storming with #ArrestAnilMishra #अनिलमिश्राकोफाँसीदो, while I am laughing it off with chai. Protests so fierce, they even forgot to check if I am even scared! 😂 #HypocrisyUnleashed

Oh, look the drama! Some groups storming with #ArrestAnilMishra #अनिलमिश्राकोफाँसीदो, while I am laughing it off with chai. Protests so fierce, they even forgot to check if I am even scared! 😂 #HypocrisyUnleashed

60,925 просмотров

यह सवाल आज पूरे समाज को खुद से पूछना चाहिए— क्या लोकतंत्र में न्याय माँगना अपराध बन चुका है? क्या शांतिपूर्ण आंदोलन का जवाब पानी, लाठी और गिरफ्तारी से दिया जाएगा? यह केवल मेरे साथ हुआ अन्याय नहीं है, यह हर उस नागरिक के अधिकारों पर हमला है जो शांति से अपनी बात रखने का साहस करता है। मैं आप सभी से अपील करता हूँ— इस दमन के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ उठाइए। हम सत्य के साथ हैं, हम न्याय के साथ हैं, और यह लड़ाई डर से नहीं, संकल्प से लड़ी जाएगी। संघर्ष जारी रहेगा। आवाज़ दबेगी नहीं।

यह सवाल आज पूरे समाज को खुद से पूछना चाहिए— क्या लोकतंत्र में न्याय माँगना अपराध बन चुका है? क्या शांतिपूर्ण आंदोलन का जवाब पानी, लाठी और गिरफ्तारी से दिया जाएगा? यह केवल मेरे साथ हुआ अन्याय नहीं है, यह हर उस नागरिक के अधिकारों पर हमला है जो शांति से अपनी बात रखने का साहस करता है। मैं आप सभी से अपील करता हूँ— इस दमन के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ उठाइए। हम सत्य के साथ हैं, हम न्याय के साथ हैं, और यह लड़ाई डर से नहीं, संकल्प से लड़ी जाएगी। संघर्ष जारी रहेगा। आवाज़ दबेगी नहीं।

16,445 просмотров

Dr. Bhim Rao Ambedkar's statue removed from Govt. School, Chinor, Dabra, Gwalior (MP) after our efforts & High Court intervention. Why did authorities stay silent on this illegal act on state property? Who’s accountable for disrupting kids’ education? #JusticeForKids

Dr. Bhim Rao Ambedkar's statue removed from Govt. School, Chinor, Dabra, Gwalior (MP) after our efforts & High Court intervention. Why did authorities stay silent on this illegal act on state property? Who’s accountable for disrupting kids’ education? #JusticeForKids

20,017 просмотров

Videos

Adv_Anil_Mishra's profile picture

UGC Roll Back

Adv. Anil Mishra

21,957 просмотров • 27 дней назад

Adv_Anil_Mishra's profile picture

सनातियों के विरुद्ध निरंतर की जा रही एकतरफ़ा कार्यवाही इस देश में उनके समानता के अधिकार का घोर उल्लंघन है। यह अत्यंत चौंकाने वाला एवं दुखद है कि आज मेरे घर के समीप स्थित मंदिर में आयोजित रामायण पाठ को, जो कि पूर्व से विधिवत निर्धारित था, पुलिस अधिकारियों द्वारा बलपूर्वक रुकवा दिया गया। यह कृत्य न केवल धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रहार है, बल्कि यह दर्शाता है कि सनातन धर्म के अनुयायियों के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, मेरे विरुद्ध लगातार भ्रामक एवं झूठी जानकारियाँ प्रसारित की जा रही हैं, परंतु मैं आज भी अपने सत्य एवं धर्मसंगत वक्तव्य पर दृढ़ता से अडिग हूँ। मैं स्पष्ट कहना चाहता हूँ कि चाहे जितनी भी FIR दर्ज हों, हर एक FIR हमारे लिए न्यायालय में सत्य को सिद्ध करने का एक नया अवसर लेकर आएगी। 🚩 सत्य की विजय अवश्य होगी। #मैं_भी_अनिल_मिश्रा #जयसनातन

Adv. Anil Mishra

88,678 просмотров • 9 месяцев назад

Adv_Anil_Mishra's profile picture

देश के साथ सबसे बड़ा बौद्धिक धोखा यह किया गया कि सकपाल (अंबेडकर) को जबरन “संविधान निर्माता” घोषित कर दिया गया, जबकि सच्चाई यह है कि उन्होंने भारतीय संविधान का एक भी मूल आर्टिकल नहीं लिखा। इससे भी बड़ा और निर्विवाद तथ्य यह है कि स्वयं भारत सरकार ने RTI के उत्तर में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि डॉ. बी.आर. आंबेडकर को “संविधान निर्माता” घोषित करने का कोई आधिकारिक प्रमाण या प्रमाण-पत्र मौजूद नहीं है। तो फिर सवाल सीधा है— जब न लेखन है, न प्रमाण है, न संवैधानिक घोषणा है, तो यह झूठा नैरेटिव आखिर किसने और क्यों गढ़ा? यह इतिहास नहीं, राजनीतिक प्रोपेगैंडा है। कुछ संगठनों ने सत्ता, वोट और सामाजिक विभाजन के लिए एक व्यक्ति को देवतुल्य बना दिया और असली संवैधानिक निर्माता सर श्री बी०एन० राउ साहब, एवं अन्य सदस्यों के सामूहिक योगदान और वास्तविक तथ्यों को पूरी तरह दबा दिया। झूठ को बार-बार दोहराकर उसे सच बनाने की साजिश रची गई। संविधान किसी भी स्थिति में सकपाल की देन नहीं थी, बल्कि सर श्री बी०एन० राउ साहब एवं अन्य सदस्यों का सामूहिक बौद्धिक प्रयास था। सकपाल (अंबेडकर) के नाम को थोपकर बाकी योगदानकर्ताओं को मिटा देना न केवल ऐतिहासिक अपराध है, बल्कि संविधान का भी अपमान है। आज जो लोग सवाल पूछने वालों को चुप कराना चाहते हैं, वही इस झूठी महिमा के सबसे बड़े लाभार्थी हैं। अब बहुत हो चुका। झूठे नारे, झूठे प्रतीक और झूठे इतिहास के सहारे समाज को गुमराह करने की यह राजनीति अब स्वीकार नहीं की जाएगी। इतिहास भावनाओं से नहीं, तथ्यों से लिखा जाता है—और सच चाहे कितना भी कड़वा हो, उसे सामने आना ही होगा

Adv. Anil Mishra

68,036 просмотров • 7 месяцев назад

Adv_Anil_Mishra's profile picture

सभी को नमस्ते! 🙏 कल शाम से X पर हनुमान मंदिर में हुए विवाद को लेकर भ्रामक और आधारहीन जानकारी फैलाई जा रही है। यह अपने आप में आश्चर्यजनक है कि कैसे कुछ लोग सत्य को भटकाने के लिए नए-नए मुद्दे गढ़ लेते हैं। मैं यहाँ पूरी सच्चाई आपके सामने रखना चाहता हूँ, ताकि आप स्वयं सही और गलत का निर्णय कर सकें। रामायण पाठ की जानकारी स्थानीय प्रशासन को कई दिन पहले से दी गई थी। 13 तारीख़ को ही दोनों पक्षों ने शांति की अपील कर दी थी, तो कोई विवाद की संभावना भी नहीं थी। इस आयोजन की सभी तैयारियाँ प्रशासन के निर्देशानुसार और उनकी अनुमति के साथ की गई थीं। कई दिनों से इस पाठ की तैयारी चल रही थी, और यह सुनिश्चित किया गया था कि सभी नियमों का पालन हो। कल जब रामायण मंदिर में लाई गई और मैं जब पंडित जी को ऑफिस से मंदिर लेकर की ओर जा रहा था, तभी हमें पता चला कि मंदिर के दोनों गेट्स पर अचानक ताला लगा दिया गया है। यह समझ से परे था, क्योंकि प्रशासन को आयोजन की पूरी जानकारी थी। यह पाठ केवल कुछ लोगों की उपस्थिति में हो रहा था, जैसा कि प्रशासन के नियमों में निर्धारित था। वीडियो फुटेज में भी साफ दिखता है कि वहाँ कोई भीड़ नहीं थी, और सभी नियमों का पालन हो रहा था। लेकिन मंदिर के गेट्स पर ताला लगाए जाने से लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं। यह स्वाभाविक ही था कि हनुमान जी के मंदिर में ताला देखकर लोग “जय श्री राम” के नारे लगाएँ। ये नारे किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रशासन के इस अप्रत्याशित कदम के विरोध में थे। इस घटना के दौरान महिला अफ़सर हिना खान ने शायद यह समझा कि “जय श्री राम” के नारे उनके खिलाफ लगाए गए। जो पूर्णतः असत्य है, क्योंकि उस समय किसी को उनकी पहचान तक नहीं थी। नारे प्रशासन के ताले लगाने के खिलाफ थे, न कि किसी व्यक्ति विशेष के। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस घटना को गलत रंग देकर भ्रामक narrative बनाया जा रहा है। मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूँ कि रामायण पाठ का आयोजन और प्रसाद वितरण के लिए टेंट लगाना किसी भी तरह से धारा 144 CrPC या धारा 163 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) का उल्लंघन नहीं करता। यह एक शांतिपूर्ण धार्मिक आयोजन था, जो पूरी तरह से नियमों के दायरे में था मैं आप सभी से अपील करता हूँ कि भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें। सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों के बजाय तथ्यों पर विश्वास करें। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम सत्य को सामने लाएँ और शांति बनाए रखें। आइए, हम सब मिलकर सही जानकारी को बढ़ावा दें और किसी भी तरह के भ्रम से बचें। #सच_जानें #जय_श्री_राम

Adv. Anil Mishra

81,982 просмотров • 9 месяцев назад

Adv_Anil_Mishra's profile picture

स्पष्ट वीडियो में दिखता है कि पुलिस प्रशासन ने मंदिर पर ताला लगाया। दूसरे वीडियो में एक महिला अफसर कहती हैं कि यहाँ हमेशा रामायण का पाठ होता है, फिर 15 तारीख (मंगलवार) को मंदिर क्यों बंद किया गया? जब रिपोर्टर ने मंदिर के संबंध में पूछा, तो अफसर ने जवाब देने से मना कर दिया। मेरा निवास मंदिर के बगल में है, जो वीडियो में दर्शित है, पेंटिंग और शटर मेरे मकान के साइड की वाल पर दिख रहे हैं। मैं स्पष्ट करता हूँ कि जय श्री राम के नारे किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रशासन के इस अन्यायपूर्ण कृत्य के खिलाफ हैं। हम किसी प्रोपेगंडा के बहकावे में नहीं आएँगे। हमारा उद्देश्य स्पष्ट है: अपने आंदोलन को दृढ़ता से जारी रखना और रिजर्वेशन मुक्त भारत एवं सर श्री बी एन राउ साहब जी की स्थापना की माँग को सरकार के समक्ष रखना। आप सभी से अनुरोध है कि वीडियो देखें, सच्चाई समझें। जय श्री राम! #जय_श्री_राम #रिजर्वेशन_मुक्त_भारत

Adv. Anil Mishra

69,596 просмотров • 9 месяцев назад

Adv_Anil_Mishra's profile picture

आज मैं भोपाल में अपने स्वर्ण समाज के हक़ और न्याय की शांतिपूर्ण आवाज़ लेकर पहुँचा था। हमारा उद्देश्य साफ़ था — बिना हिंसा, बिना अराजकता, सिर्फ़ अपने अधिकारों की बात रखना। लेकिन बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है कि सरकार ने इस शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने के लिए अवैध और अनुचित तरीकों का सहारा लिया। वॉटर कैनन का प्रयोग, कड़ाके की ठंड में लोगों पर पानी छोड़ा जाना, और फिर मेरी गिरफ्तारी के साथ‑साथ मेरे कई साथियों को भी पुलिस द्वारा पकड़ लिया जाना — यह साफ़ दिखाता है कि आज सच बोलना सत्ता को कितना असहज कर रहा है। यह सवाल आज पूरे समाज को खुद से पूछना चाहिए— क्या लोकतंत्र में न्याय माँगना अपराध बन चुका है? क्या शांतिपूर्ण आंदोलन का जवाब पानी, लाठी और गिरफ्तारी से दिया जाएगा? यह केवल मेरे साथ हुआ अन्याय नहीं है, यह हर उस नागरिक के अधिकारों पर हमला है जो शांति से अपनी बात रखने का साहस करता है। मैं आप सभी से अपील करता हूँ— इस दमन के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ उठाइए। हम सत्य के साथ हैं, हम न्याय के साथ हैं, और यह लड़ाई डर से नहीं, संकल्प से लड़ी जाएगी। संघर्ष जारी रहेगा। आवाज़ दबेगी नहीं। #न्यायमांगो #सनातनीएकता #अन्यायबर्दाश्तनहीं #शांति_कीआवाज़ #सत्यकेसाथ #जनहितमेंसंघर्

Adv. Anil Mishra

45,649 просмотров • 7 месяцев назад

Adv_Anil_Mishra's profile picture

मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में श्री बरैया द्वारा यह कहना कि “ दो कोडी का वकील अनिल मिश्रा”—यह बयान किसी तर्क, तथ्य या बौद्धिक क्षमता का नहीं, बल्कि उनकी कुंठा, बौद्धिक खोखलेपन और स्तरहीन मानसिकता का प्रमाण है। इस तरह की भाषा वही व्यक्ति प्रयोग करता है, जिसके पास न तथ्य होते हैं, न तर्क और न ही बौद्धिक साहस। यदि श्री बरैया वास्तव में मेरी योग्यता और मेरिट को परखने की हैसियत रखते हैं, तो बयानबाज़ी करने के बजाय उच्च न्यायालय के संवैधानिक मंच पर आएँ, जहाँ न भीड़ का शोर चलता है और न ही भावनात्मक ड्रामा—वहाँ केवल कानून, तथ्य और बुद्धि की कसौटी होती है, और वहीं यह तय हो जाएगा कि “दो कौड़ी का” वास्तव में कौन है। श्री बरैया ने पूरे आत्मविश्वास के साथ यह झूठा दावा किया कि सकपाल ने वर्ष 1930 से लगातार पाँच वर्षों तक मंदिर प्रवेश के लिए आंदोलन चलाया। यह दावा न केवल असत्य है, बल्कि इतिहास के साथ खुली बेईमानी है। 1931 से 1935 के बीच सकपाल का जीवन राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस, पृथक निर्वाचन मंडल, पूना पैक्ट पर केंद्रित रहा। ऐसा कोई प्रमाणिक ऐतिहासिक रिकॉर्ड, दस्तावेज़ या शोध आज तक मौजूद नहीं है जो यह सिद्ध कर सके कि उन्होंने पाँच वर्षों तक लगातार मंदिर प्रवेश आंदोलन चलाया हो। बरैया जी, इतिहास भावनाओं, नारों और मनगढ़ंत कहानियों से नहीं लिखा जाता—इतिहास तथ्यों से लिखा जाता है, और आपके पास इस झूठे दावे के समर्थन में एक भी ठोस तथ्य नहीं है। सबसे हास्यास्पद और बौद्धिक रूप से शर्मनाक वक्तव्य तब सामने आया, जब आपने सकपाल को पृथ्वी का “सबसे बुद्धिमान व्यक्ति” घोषित कर दिया। यह केवल अज्ञान का प्रदर्शन है। इस देश की बौद्धिक परंपरा ऋषि-मुनियों, वेदों के रचयिताओं, गुरुकुल और विश्वविद्यालय की अवधारणा देने वाले आचार्यों, आर्यभट्ट, चरक, सुश्रुत जैसे महान मनीषियों तथा मानव सभ्यता को दिशा देने वाले असंख्य दार्शनिकों और वैज्ञानिकों से भरी पड़ी है। इन सबको नकार कर इस प्रकार की बातें करना केवल आपकी ओछी सोच और सीमित मानसिक दायरे को उजागर करता है। भारतीय संविधान किसी एक व्यक्ति की देन नहीं, बल्कि श्री बी. एन. राऊ जैसे महान संवैधानिक सलाहकारों, ड्राफ्टिंग कमेटी, संविधान सभा के सदस्यों, अनेक विद्वानों, विधिवेत्ताओं और अंतरराष्ट्रीय संवैधानिक स्रोतों के संयुक्त प्रयास का परिणाम है। इन स्थापित तथ्यों को नकार कर सारा श्रेय सकपाल को देना आपकी संकीर्ण, सतही और गैर-जिम्मेदार समझ को ही दर्शाता है। और सबसे चिंताजनक प्रश्न यह है कि जब विधानसभा जैसे संवैधानिक मंच पर इस तरह का तथ्यहीन, भड़काऊ और बौद्धिक रूप से दिवालिया भाषण दिया जा रहा था, तब वहाँ उपस्थित सभी सवर्ण विधायक—जो स्वयं जनप्रतिनिधि और संविधान की शपथ लेकर बैठे हैं—मौन क्यों थे? किसी ने आपत्ति क्यों नहीं की? क्या तथ्य, इतिहास और संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी केवल चुनिंदा लोगों की है, या फिर यह मौन सहमति इस तरह के झूठ और उन्माद को बढ़ावा देने का साधन बन चुका है? यह चुप्पी अत्यंत चिंताजनक है और लोकतांत्रिक विमर्श पर गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। श्री बरैया जी, आपमें जरा भी साहस और ईमानदारी है, तो प्रमाण, दस्तावेज़ और प्रमाणिक ऐतिहासिक स्रोतों के साथ सामने आइए और इस बहस को मीडिया के शोर और भीड़ की तालियों से निकालकर संवैधानिक और अकादमिक मंच पर लाइए। अन्यथा यह स्पष्ट माना जाएगा कि आपको केवल शोर मचाना आता है—तथ्यों के साथ खड़े होने की क्षमता आपमें है ही नहीं।

Adv. Anil Mishra

38,820 просмотров • 7 месяцев назад