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आचार्य प्रशांत | दर्शन | वेदांत | अस्तित्ववाद | अध्यात्म | शुद्ध शाकाहार | जलवायु परिवर्तन | प्रोफाइल प्रशांतअद्वैत संस्था द्वारा मात्र ब्रॉडकास्ट हेतु संचालित
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चीनियों का कद कैसे बढ़ा? चीनियों का कद बहुत तेज़ी से बढ़ा है। अच्छा खाना-पीना और व्यायाम करने से दो पीढ़ियों में उन्होंने अपना कद तक बदल डाला। 80 के दशक के बाद उन्होंने बहुत कुछ बदल दिया, लेकिन भारत में हम आज भी पुरानी मान्यताओं और परंपराओं से बंधे हुए हैं। सवाल है-क्या हम भी अपने जीवन को बदलने की नई कहानी लिख पाएँगे?
Acharya Prashant176,308 Aufrufe • vor 1 Monat

बलि के नाम पर स्वाद का बहाना। कहते हैं कि बलि देवी को दी गई, या अल्लाह को दी गई। लेकिन असल में बकरा किसके पेट में जाता है? बलि के पीछे छिपा असली कारण यही है कि ज़ुबान को स्वाद चाहिए, और जब कोई और बहाना नहीं मिलता, तो धर्म को बहाना बना लिया जाता है। सच ये है कि किसी भी धर्म में पशु-बलि का धर्म से कोई रिश्ता नहीं है, बल्कि वो धर्म के विपरीत है।
Acharya Prashant44,522 Aufrufe • vor 16 Tagen

गंदगी दिख रही है, फिर भी खा रहे हो! नाली के किनारे ठेला लगा है, मक्खियाँ भिनभिना रही हैं, जगह सड़ी-गली है, फिर भी लोग स्ट्रीट फ़ूड के नाम पर कुछ भी खा रहे हैं। होना तो यह चाहिए कि ग्राहक ही ऐसी दुकानों पर जाना बंद कर दें, ताकि या तो दुकान अपने आप बंद हो जाए या दुकानदार सफ़ाई का इंतज़ाम कर ले।
Acharya Prashant39,990 Aufrufe • vor 18 Tagen

BRICS: नॉन वेज गायब यह जो पूरा इसमें debate ही रहता है। मेरी choice है, मेरी मर्जी है, मुझे जो खाना है मैं खाऊंगा। भाई जितना तुम्हें तुम्हारी मर्जी प्रिय है, कम से कम थोड़ा बहुत उस प्राणी की मर्जी भी पूछ लिया करो कि तू मरने को तैयार है, तेरी मर्जी है कि तू अब कटना चाहता है किसी के स्वाद के लिए?
Acharya Prashant60,383 Aufrufe • vor 1 Monat

अगर जीवन में आगे बढ़ना हो, तो घर में सहज, शांत रिश्ते रखो। घर में अपनी ऊर्जा और समय खराब मत करो। घर में सहज, शांत रिश्ते रखो।अगर घर में कलह-क्लेश है, तो आप ज़िंदगी में बाहर कुछ भी नहीं कर सकते। जिनसे आपके पुराने रिश्ते होते हैं, वे आपको इतनी गहराई से चोट दे सकते हैं कि उस चोट से उबरने में ही आपकी सारी ऊर्जा बह जाएगी। लड़ने के लिए हमारे पास हज़ारों अन्य ज़्यादा महत्त्वपूर्ण मोर्चे हैं। जो मूल समस्या है, उससे संघर्ष करने में साथ दो। अगर घरवालों के विरुद्ध संघर्ष करने लग गए, तो अपनी सारी ऊर्जा घर में ही खराब कर दोगे।
Acharya Prashant22,970 Aufrufe • vor 16 Tagen

जब तक दुनिया ऐसी रहेगी, तब तक खतरा भी रहेगा। इंसान के पास जीने के लिए कोई सही वजह, कोई मकसद नहीं है तो बात बहुत बड़ी नहीं है। सेक्स के साथ एक खतरा जुड़ा हुआ है, इसलिए उसके साथ जीना पड़ता है। इसका कोई रामबाण इलाज नहीं कि रातों-रात भारत में लड़की बिल्कुल सुरक्षित महसूस करने लगे। तब तक पुलिस व्यवस्था बेहतर हो, रातों को बेहतर Policing हो और Judicial System faster हो - ताकि आगे के लोगों को खतरा कम हो और दुनिया, समाज को बेहतर करने की कोशिश की जा सके।
Acharya Prashant48,610 Aufrufe • vor 1 Monat

ये गंदा पानी क्या कर रहा है हमारे साथ, इसका ज्ञान हमें है क्या?
Acharya Prashant22,089 Aufrufe • vor 18 Tagen

लड़की के कौमार्य को लेकर चिंता। दुनिया बिल्कुल तुम्हारे घर में, तुम्हारे व्यक्तिगत मसलों में, तुम्हारे बिस्तर में, तुम्हारे शरीर के अंदर घुस आएगी। तुम इनको कितनी अनुमति दे सकते हो? कहीं पर तो एक मर्यादा की रेखा खींचनी पड़ेगी न कि इससे ज़्यादा मत पूछना। न तुम्हारे लिए पूछना उचित है, न हमारे लिए बताना उचित है।
Acharya Prashant36,898 Aufrufe • vor 1 Monat

गँवार स्वैग: जो जितना गँवार, उतने स्वैग में! भारत में चल रही ‘गँवार स्वैग’ की लहर पर तीखी बात - पहले लोगों को प्रभावित करने के लिए शिक्षा दिखाई जाती थी, अब अपनी गँवारई दिखाकर प्रभाव जमाने की कोशिश हो रही है। ट्रेनों में हो रहे अशोभनीय व्यवहार का यह बढ़ता चलन सवाल खड़ा करता है।
Acharya Prashant33,309 Aufrufe • vor 1 Monat

सब प्रेमियों की एक ही निशानी है फोन पर दो-दो, चार-चार घंटे लगे रहना, आमने-सामने बैठकर एक दूसरे का भेजा चबाना, और उधर से कचरा फेंका जाए तो भी इधर से फ़ोन ना काटना, वरना बेवफ़ा कहलाने का डर - यही आजकल प्रेम की निशानी बन गई है। बेवकूफ़ी की बातें पेले जाना और सामने वाले का उन्हें झेले जाना, कहते हैं कि इसी पेलने और झेलने का नाम तो इश्क़ है। ना पेलो, ना झेलो।
Acharya Prashant31,583 Aufrufe • vor 1 Monat