
Afsar Khan Raipuri
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Official Twitter Account Afsar khan गरीबों और वंचितों की आवाज़ | अन्याय के खिलाफ़ कलम। मेरी पोस्ट पर किए गए कमेंट का जवाब देह मैं नहीं हुं।।
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ये कौन सी परम्परा है ? अगर किसी को जानकारी है तो बताएं जरूर
Afsar Khan Raipuri1,792,115 views • 2 months ago

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रिपोर्टर ने बोला प्रधानमंत्री तो पढ़े लिखे है अमित अंकल ने डिग्री दिखाई है। नेहा भारती - कहाँ डिग्री, कैसी डिग्री ? अरे तो फिर teleprompter का यूज क्यों करते हो भाई। पढ़े लिखे लोग दूसरे देशों के प्रेसिडेंट के सामने खी खी नहीं करते , जवाब देते है प्रेस कांफ्रेंस करते है जिनके पास डिग्री होती है। एक दलित लड़की ने सत्ता के नाक में दम कर रखा है। ~दिल्ली जंतर मंतर~ नेहा भारती
Afsar Khan Raipuri287,981 views • 3 months ago

अगर नौकरी जाने का डर होता तो मै वर्दी पहनकर नहीं आता , यूपी का DGP मुझे न्याय नहीं दिलवा पा रहा। और मैं 9 जुलाई 2024 का बलात्कारी हूँ साला मुझे जेल भी नहीं भिजवा पा रहा है - यूपी पुलिस का जवान इनके अपमानजनक शब्दों को सुनकर तो लगता है कि यूपी पुलिस इनका अच्छा इलाज करेगी।
Afsar Khan Raipuri265,723 views • 3 months ago

मै भगत सिंह को मानने वाला हूं , मै सावरकर को मानने वाला नहीं हूं जो माफीवीर बन जाऊंगा। भगत सिंह को पढ़ा है मैने , सुखदेव को पढ़ा है मैने , राजगुरु को पढ़ा है मैने , मौलाना हुसैन अहमद मदनी को पढ़ा है मैने। जिन अंग्रेजों ने मौलाना हुसैन अहमद मदनी से कहा था ए हुसैन अहमद मदनी या तो तू अपना फैसला बदल दे या फिर तुझे तोप के सामने रखकर उड़ा देंगे। तब मौलाना हुसैन अहमद मदनी जी ने कहा था कि मुझे मरना मंजूर है लेकिन तुम्हारी फ़ौज में भर्ती होना हराम है , हराम है , हराम है। तो वही मेरा उसूल है, डंके की चोट पर कह रहा हूँ कि इनकी गुलामी नहीं करूंगा। सवाल करते करते मर जाऊं , नौकरी नहीं मिले तो चाय का ठेला लगा लूंगा , पानी की बोतल बेच लूंगा मगर इनकी गुलामी नहीं करूंगा ।। वीडियो जंतर मंतर से है।
Afsar Khan Raipuri151,034 views • 3 months ago

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर भड़की एक युवा लड़की लड़की पूछ रही द्रौपदी मुर्मू की सच्चाई क्या है सत्ता में कुछ औरते बैठ जाती है फांसीवादियों के पक्ष में इसका मतलब ये नहीं है इस देश की आम मेहनतकश औरतें और छात्र युवा सब सुरक्षित है। साथ में RSS को भी लपेट लिया !!!
Afsar Khan Raipuri231,690 views • 9 months ago

दरिंदे हैं उनको, दरिंदा कहूंगा। ससुराल बेटी दी थी, कोई अधिकार-रहित वस्तु नहीं। फिर भी ज़ुल्म उसी पर, सवाल उसी से क्यों ? दर्द दिखता है, मगर समाज चुप रहता है क्यों ? याद रखिए, आज की खामोशी कल किसी और घर का मातम बनेगी। अब चुप रहना विकल्प नहीं इंसाफ़ और सम्मान हर बेटी का हक़ है।
Afsar Khan Raipuri190,825 views • 7 months ago