
Akhilesh Mishra
@Akhilesh180519 • 13,568 subscribers
समानता • न्याय • अवसर 🇮🇳 आरक्षण, सामाजिक न्याय और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर विचार।
Shorts
Videos

अनुराधा तिवारी ने जो प्रेस कॉन्फ्रेंस किया वो किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, सिर्फ मेरिट और न्याय के पक्ष में हैं। ✅ एक परिवार — एक आरक्षण — एक बार ✅ न्यूनतम कट-ऑफ मार्क्स सभी के लिए ✅ 1950 से अब तक की पूर्ण समीक्षा ✅ SC/ST में क्रीमी लेयर ✅ जनरल कैटेगरी के लिए राष्ट्रीय आयोग ✅ UGC रोलबैक ✅ चुनाव में आरक्षण के वादों पर बैन ✅ गरीबी-आधारित मदद योग्यता को बचाओ, सिस्टम को सुधारो।
Akhilesh Mishra243,830 просмотров • 2 месяцев назад

सवर्ण समाज के बच्चे 99% लाकर भी भूखे मर रहे हैं, और SC-ST-OBC वाले माइनस 40 में भी एडमिशन ले रहे हैं। 80 साल बाद शिक्षा सुधारने की बजाय यूनिवर्सिटी-कॉलेज में जातिवादी जहर ठूंस दिया गया। UGC-SCST एक्ट ने जनरल को जन्म से ही अपराधी घोषित कर दिया है। —महिपाल सिंह मकराना
Akhilesh Mishra13,182 просмотров • 3 дней назад

अजीत भारती सही कह रहे हैं। यह कोई एक दिन की बात नहीं है। 2015 से लगातार चल रहा है। IIM उदयपुर की स्टडी के अनुसार: 2020-21 से 2023-24 के बीच जनरल कैटेगरी के 37 लाख बच्चों का एन्ट्री गिर गया। SC/ST/OBC का शेयर 61% पार कर गया। जनरल की सीटें अब सिर्फ 38-39% रह गई हैं, जिसमें सवर्ण, मुस्लिम और अन्य सब शामिल हैं। प्रतिशत ही नहीं, अब्सोल्यूट संख्या भी गिर रही है। सवाल ये है: सवर्णों का टैलेंट खत्म हो गया है, या अलग-अलग स्कीम्स और रिजर्वेशन बढ़ा-बढ़ाकर सिस्टम ही ऐसा बना दिया गया है कि जनरल कैटेगरी के बच्चे सिस्टम से बाहर हो रहे हैं? 38% में सबको ठूंस दिया गया है। इस पर चुप रहना मतलब अपनी ही पीढ़ी को धोखा देना। न मोदी जी राष्ट्र हैं, न योगी जी राष्ट्र हैं। राष्ट्र हम सब हैं। और जब टैलेंट पाइपलाइन ही सूखने लगे, तो बोलना जरूरी है।
Akhilesh Mishra50,851 просмотров • 23 дней назад

आज अजीत भारती जी एकदम 'फुल रोस्ट' मूड में हैं! निशाने पर आए हैं दृष्टि IAS वाले विकास दिव्यकीर्ति सर। मुद्दा क्या है? विकास दिव्यकीर्ती का दावा: "3000 सालों से पढ़ाई-लिखाई पर 100% आरक्षण ब्राह्मणों का ही था!" जिस पर अजीत भारती ने उन्हें लताड़ते हुए जवाब दिया— "सर जी, थोड़ा इतिहास पढ़ लेते! डेटा कहाँ है? साक्ष्य कहाँ है? बिना तथ्य के क्लास में बस ज्ञान पेलना है!" 🤣 अजीत भारती का कहना है कि इतिहास में 150 साल पहले के भी रिकॉर्ड उठा कर देख लो, समाज के हर वर्ग के लिए विद्यालय और गुरुकुल थे। 3000 साल वाले दावों का कोई ऐतिहासिक आधार या ऑथेंटिक डेटा ही नहीं है! ऐसे बयानों से भावी IAS अफसरों के मन में गलत धारणाएं भरी जा रही हैं।
Akhilesh Mishra120,400 просмотров • 2 месяцев назад

BJP सरकार ने सवर्णों के साथ विश्वासघात किया है। EWS का ढिंढोरा पीटने वाले सवर्ण सांसद-नेता बताएं — सवर्णों को इससे मिला क्या? न सस्ता लोन, न मुफ्त कोचिंग, न फॉर्म फीस में राहत। फिर ये EWS किसलिए? 73%, 64%, 72%, 71%... आरक्षण की ये स्थिति सिर्फ मोदी सरकार के EWS के कारण बनी। 10% का आंकड़ा किसी कमीशन या समीक्षा से नहीं आया — सीधे थोप दिया गया। नतीजा: पैसे होने के बावजूद अच्छे संस्थानों में सीट नहीं मिलती। विकसित भारत का सपना पूरा होने से पहले देश की योग्यता वाली पीढ़ी पीछे छूट रही है। शुक्र है सुप्रीम कोर्ट ने लिमिट लगा दी। —अजीत भारती
Akhilesh Mishra30,046 просмотров • 21 дней назад

BJP स्वर्णों को क्या दिया? 12 साल, 3 लोकसभा, 3 विधानसभा…छह बार वोट दिया। बदले में मिला क्या? खोखले नारे – “बटेंगे तो कटेंगे” और समाज को बाँटने का काम लगातार सवर्णों के पेट में लात मारी है भाजपा ने। बीजेपी ने सवर्णों का ठेका लिया ही नहीं तो अब हम भी ठेका नहीं लेंगे। —अजीत भारती
Akhilesh Mishra17,709 просмотров • 12 дней назад

"जाति खत्म करनी है, तो पहले तहसील से जाति प्रमाण पत्र बनाना बंद करो!" — ओम प्रकाश राजभर 🔥 UP विधानसभा में ओम प्रकाश राजभर ने कहा —सरकारी तंत्र ही कागजों पर ठप्पा मारकर जाति तय करता है। जब तक तहसीलों से जाति प्रमाण पत्र जारी होते रहेंगे, तब तक समाज से जाति प्रथा खत्म नहीं हो सकती!
Akhilesh Mishra68,066 просмотров • 2 месяцев назад

UGC नियम आया और तालमेल बिगड़ गया — ये बात किसी सवर्ण ने नहीं बल्कि खुद एक SC छात्र कैमरे पर बोल रहा है। इलाहाबाद में दोस्त रूम लेने गया, जनरल कैटेगरी का रूम था जो उसके दोस्त को नहीं मिला। जवाब साफ था: नहीं देंगे। नतीजा वही जो नियम लाने वाले नहीं सुनना चाहते — “तुम हमें नहीं देखना चाहते, हम तुम्हें नहीं देखना चाहते।” प्यार-मोहब्बत और मिलजुल कर रहना धीरे-धीरे सामान्य हो चुका था। नया नियम आया, पुरानी दूरी फिर खुल गई। नफरत फैलाने वाले कानून में संशोधन की मांग अब उन्हीं की तरफ से आ रही है जिनके नाम पर ये नियम लाए गए थे। समानता का कानून अगर कमरों तक जाति पूछने लगे, तो वो समानता नहीं, बंटवारा है।
Akhilesh Mishra30,575 просмотров • 25 дней назад

ये आदमी बिल्कुल मंदबुद्धि की तरह बात कर रहा है. बोल रहा है कि ये आंदोलन कोई सवर्ण समाज का आन्दोलन नहीं था... किसी जात पात को लेकर आंदोलन नहीं हो रहा था! इस व्यक्ति से कोई ये पूँछकर बताओ कि SCST एक्ट क्या जाति के आधार पर नहीं लगता... रिजर्वेश क्या जाती के आधार पर नहीं मिलता... सरकारी योजनाएं क्या जाति के आधार पर नहीं चल रही है...? यह बिल्कुल निर्लज्ज आदमी है, थोड़ा सा सवर्ण समाज के लोगों ने इसको भाव क्या दे दिया ये तो हवा में उड़ना शुरू कर दिया।
Akhilesh Mishra60,584 просмотров • 2 месяцев назад

2027 में किसी को हराना मुश्किल नहीं। असली खेल 2029 का है। तब तक किंगमेकर बनने का वक्त है। ढाई साल बचे हैं। फंड जुटाओ। लीडर खड़े करो। निर्दलीय पहचानो। उत्तर भारत के हर राज्य से दो-तीन सीट पर अपना उम्मीदवार उतारो। दस सांसद बन गए, तो सौदा हमारी शर्त पर होगा। दो भी बन गए, तो आवाज़ संसद तक पहुँच जाएगी। चंद्रशेखर आज़ाद देख लो। ओवैसी देख लो। अपने समाज के लिए खुलकर बोलते हैं। टारगेट छुपाते नहीं। बात सही है या गलत, अलग सवाल है। बोलते ज़रूर हैं। हमारे समाज की आवाज़ संसद में नहीं है। इसीलिए नीति हमारे खिलाफ बनती है। अजीत भारती साफ़ कह रहे हैं। राजनीतिक महत्वाकांक्षा उनकी नहीं। जो इस समाज के लिए खड़ा हो, उसे समर्थन है। —अजीत भारती
Akhilesh Mishra24,941 просмотров • 24 дней назад

हमने मोदी को सनातनी मानकर प्रधानमंत्री बनाया। जात-पात नहीं देखी। उन्होंने UGC और SC-ST एक्ट से पीठ में छुरा घोंप दिया। SC-ST एक्ट अब कमाने का धंधा बन गया है। फर्जी केस, 5 लाख मुआवजा, हजारों परिवार बर्बाद। UGC ने हमारे बच्चों के पैर बांध दिए। 99 नंबर वाला बैठा रहे, 30 नंबर वाला डॉक्टर-इंजीनियर बने। ऐसा डॉक्टर कैंची अंदर रख देगा, मकान 10 दिन में गिर जाएगा। देश कैसे बनेगा? 70 साल हो गए, गरीबी खत्म नहीं हुई। राष्ट्रपति कोविंद, द्रौपदी मुर्मू दलित बताए जाते हैं। खुद प्रधानमंत्री खुद को अति पिछड़ा कहते हैं। खड़गे अरबों के मालिक हैं, फिर भी दलित। दलित की परिभाषा क्या है? समाज एक है। जाति प्रमाण पत्र बंद करो। योग्यता और आर्थिक आधार पर आरक्षण दो। ये काले कानून खत्म करो, देश आगे बढ़े।
Akhilesh Mishra35,728 просмотров • 1 месяц назад

सवर्णों समाज ने हमेशा से सपोले पालने का काम किया था...आज यही सपोले सवर्ण समाज को डस रहे हैं !
Akhilesh Mishra46,598 просмотров • 2 месяцев назад

SC/ST एक्ट के केश इसलिए बढ़ गए क्योंकि 2018 के संशोधनों में मुआवज़ा लगभग 80 हज़ार से 8.5 लाख तक पहुँच गया। अब वही मुआवजा बढ़ाकर 12 लाख तक करने का प्लान है। पैसा बढ़ा, तो फर्जी केस भी 3–4 गुना बढ़े। आगे और इस एक्ट का दुरुपयोग होगा। देश की करीब 25% आबादी SC/ST है। उनके साथ जो भी घटना होती है, उसे SC/ST एक्ट में डालने को कहा जाता है। प्रीलिमिनरी इन्क्वायरी नहीं। इंस्पेक्टर मना करे तो उसी पर एक्ट लग सकता है। FIR खुद पहली किस्त ट्रिगर कर देती है। PCR Act इंदिरा गांधी के समय से था। राजीव गांधी ने दलित नेताओं के दबाव और राजनीतिक मजबूरी में SC/ST एक्ट लाया। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने तीन सेफगार्ड दिए, कांग्रेस ने ही भारत बंद का साथ देकर उन्हें वापस करवाया। और आँकड़ा यह है कि इन केसों का बड़ा हिस्सा OBC पर दर्ज होता है। फिर OBC प्रोटेक्शन एक्ट किससे बचाव के लिए? निशाने पर वही जनरल कैटेगरी है, जिसका इन केसों में हिस्सा सबसे कम है। — नेहा दास
Akhilesh Mishra23,517 просмотров • 1 месяц назад

Atrocity Act अब कई मामलों में असली अत्याचार रोकने का कानून कम, राजनीतिक हथियार ज्यादा बन गया है। हिंदू देवी-देवताओं पर गाली-गलौज चले — कोई केस नहीं लेकिन वहीं अंबेडकर या किसी दलित नेता की आलोचना हो तो तुरंत SC/ST Act लग जाता है। ये डबल स्टैंडर्ड ही असली समस्या है। कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए, न कि किसी एक समुदाय के लिए हथियार।
Akhilesh Mishra40,151 просмотров • 2 месяцев назад

सवर्ण समाज सिर्फ हिंदुओं में ब्राह्मण,राजपूत, बनिया तक में सीमित नहीं हो जाता... बल्कि सवर्ण जातियां सिख —ईसाई और मुसलमानों में भी होती है इसलिए सवर्णों को छोटी जनसंख्या के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। सवर्ण एकता सिर्फ हिंदु सवर्णों के दमपर नहीं हो सकती बल्कि जनरल कटेगरी में आने वाले अन्य धर्म के लोगों को भी एकत्रित करना होगा।
Akhilesh Mishra19,875 просмотров • 27 дней назад

मैं खुद UPPSC-PCS के कई एग्जाम दे चुकी हूँ… लेकिन आज आपके सामने खड़ी हूँ — कुछ भी नहीं हुआ! प्राइवेट जॉब कर रही हूँ। आरक्षण वाले कम मार्क्स लेकर अच्छी सरकारी नौकरी पा रहे हैं, और हम जनरल कैटेगरी वाले बाहर धूप में धक्के खा रहे हैं। मैं अकेली नहीं हूँ। बहुत सारे लोग हैं जो मेरे जैसे दर्द सह रहे हैं। इसी दर्द के कारण आज मैं यहाँ आई हूँ। PCS परीक्षा दी, आरक्षण के कारण कुछ नहीं हुआ!
Akhilesh Mishra42,030 просмотров • 2 месяцев назад

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बानी के MLA रामेश्वर सिंह की ललकार🔥 “ये कानून कोई माँग नहीं था। भारत सरकार ने जबरदस्ती थोपा है। मैं इसे काला कानून कहूँगा। UGC का ये नियम लागू नहीं होना चाहिए। इसे वापस लिया जाए। ये देश विरोधी कानून है। ये लोगों पर केस बनाने वाला कानून है। मैं इसके कड़े शब्दों में विरोध और निंदा करता हूँ।” किसी ने डिमांड नहीं की, फिर भी थोप दिया गया। अब सदन में भी आवाज़ उठ रही है — UGC वापस लो।
Akhilesh Mishra24,474 просмотров • 1 месяц назад