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Wg Cdr Anuma Acharya (Retd)

@AnumaVidisha132,770 subscribers

Veteran @IAF_MCC, 1st Batch of Women Logistics Officers (1993-2017). General Secretary MPCC. Defence Analyst.

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लड़कियों ने मोर्चा सम्हाल लिया है. भाजपा के नेताओं ने गलत राग छेड़ दिया है Gen Z के साथ. अब ये लोग रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं. घमंड को ‘धराशायी’ तो पहले ही कर चुके हैं, अब ‘भूमिगत’ करा कर ही दम लेंगे ✊🏹👍

लड़कियों ने मोर्चा सम्हाल लिया है. भाजपा के नेताओं ने गलत राग छेड़ दिया है Gen Z के साथ. अब ये लोग रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं. घमंड को ‘धराशायी’ तो पहले ही कर चुके हैं, अब ‘भूमिगत’ करा कर ही दम लेंगे ✊🏹👍

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हमारे विदिशा-वासी भाई की दहाड़, जिसे 4.2 मिलियन लोगों ने इंस्टा पर सुना और हज़ारों ने लाखों से साझा किया. “अगर भगवान श्रीराम मंदिर में 200 करोड़ रुपये की चोरी के बाद भी तुम्हें गुस्सा नहीं आ रहा, लेकिन मोदी जी के बारे में कोई कुछ कह दे तो गुस्सा आ जाता है, तो क्षमा करना, तुम ‘रामजी के भक्त’ नहीं हो, तुम ‘मोदी के अंधभक्त’ हो.” Arpit Upadhyay

हमारे विदिशा-वासी भाई की दहाड़, जिसे 4.2 मिलियन लोगों ने इंस्टा पर सुना और हज़ारों ने लाखों से साझा किया. “अगर भगवान श्रीराम मंदिर में 200 करोड़ रुपये की चोरी के बाद भी तुम्हें गुस्सा नहीं आ रहा, लेकिन मोदी जी के बारे में कोई कुछ कह दे तो गुस्सा आ जाता है, तो क्षमा करना, तुम ‘रामजी के भक्त’ नहीं हो, तुम ‘मोदी के अंधभक्त’ हो.” Arpit Upadhyay

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जब ‘अपने ईकोसिस्टम’ के हर कार्यक्रम में जा ही रहे हैं, तो ‘देश के ईकोसिस्टम’ की संसद से क्यों भागे भागे फिरना? ये संयोग है या प्रयोग !!

जब ‘अपने ईकोसिस्टम’ के हर कार्यक्रम में जा ही रहे हैं, तो ‘देश के ईकोसिस्टम’ की संसद से क्यों भागे भागे फिरना? ये संयोग है या प्रयोग !!

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हम बार बार याद दिलायेंगे कि मोदी सरकार देश की एकमात्र सरकार हुई, जिसने अपने वीर सपूतों की शहादत देश से छिपाने का घोर अपराध किया है. इन्हें कठोरतम दंड मिलना चाहिये.

हम बार बार याद दिलायेंगे कि मोदी सरकार देश की एकमात्र सरकार हुई, जिसने अपने वीर सपूतों की शहादत देश से छिपाने का घोर अपराध किया है. इन्हें कठोरतम दंड मिलना चाहिये.

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जब दो राष्ट्राध्यक्ष सार्वजनिक भाषण दे रहे हों या मीडिया के सामने बोल रहे हों, तब अक्सर वे नाम या पद का प्रयोग करते हैं, जैसे: “President Macron” “Prime Minister Modi” पर पीएम मोदी ने “एक्सीलेंसी” का प्रयोग किया, यानि झुककर दोहरे हो गये, जबकि उनके ट्रांसलेटर ने सुधार करते हुए “मिस्टर प्रेसिडेंट” कहा. वैसे प्रशंसा और इतनी ख़ुशामद किस बात की ? हमारे तीन नाविकों की मौत भी इस कॉन्फ्लिक्ट का हिस्सा है. ट्रम्प से जवाबदेही माँगना था मिस्टर प्राइम मिनिस्टर!

जब दो राष्ट्राध्यक्ष सार्वजनिक भाषण दे रहे हों या मीडिया के सामने बोल रहे हों, तब अक्सर वे नाम या पद का प्रयोग करते हैं, जैसे: “President Macron” “Prime Minister Modi” पर पीएम मोदी ने “एक्सीलेंसी” का प्रयोग किया, यानि झुककर दोहरे हो गये, जबकि उनके ट्रांसलेटर ने सुधार करते हुए “मिस्टर प्रेसिडेंट” कहा. वैसे प्रशंसा और इतनी ख़ुशामद किस बात की ? हमारे तीन नाविकों की मौत भी इस कॉन्फ्लिक्ट का हिस्सा है. ट्रम्प से जवाबदेही माँगना था मिस्टर प्राइम मिनिस्टर!

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गाड़ी वाला आया, घर से कचरा निकाल ! #zenZ_कर_सकती_है

गाड़ी वाला आया, घर से कचरा निकाल ! #zenZ_कर_सकती_है

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करा के ही रहूँगा 🔥🌧️ #ceasefire

करा के ही रहूँगा 🔥🌧️ #ceasefire

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“मैं तो गणना करके कह रहा हूँ कि फरवरी-मार्च में कोई दुर्घटना होगी, रोक सको तो रोक लो.” इनकी गणना में बस 3-4 दिन की कसर रह गई! #AjitPawar #AirCrash

“मैं तो गणना करके कह रहा हूँ कि फरवरी-मार्च में कोई दुर्घटना होगी, रोक सको तो रोक लो.” इनकी गणना में बस 3-4 दिन की कसर रह गई! #AjitPawar #AirCrash

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न रहे घर के, न घाट के 🙃

न रहे घर के, न घाट के 🙃

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ये आज सुबह सुबह मिला 😂 "Ha ha ha... इसको(PM मोदी को) बाजू में करो, टीम ISRO को दिखाओ.." ISRO से लाइव टेलीकास्ट के दौरान किसी वैज्ञानिक ने ये क्या मजाक कर डाला? इज्जत का फालूदा कर दिया। लगता है किसी की नौकरी जाएगी?

ये आज सुबह सुबह मिला 😂 "Ha ha ha... इसको(PM मोदी को) बाजू में करो, टीम ISRO को दिखाओ.." ISRO से लाइव टेलीकास्ट के दौरान किसी वैज्ञानिक ने ये क्या मजाक कर डाला? इज्जत का फालूदा कर दिया। लगता है किसी की नौकरी जाएगी?

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एक ही गला है, या दो गला?

एक ही गला है, या दो गला?

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आतंकवादियों के सामने वे महिलाएं भी तो गिड़गिड़ाई थीं. क्या आतंकवादियों ने उनकी याचना पर कोई रहम किया? तो फिर जब पाकिस्तान गिड़गिड़ाया, तो आपने रहम कैसे किया? आपके हिसाब से जब पाकिस्तान शरण में आया, तो शरण दी क्यों?

आतंकवादियों के सामने वे महिलाएं भी तो गिड़गिड़ाई थीं. क्या आतंकवादियों ने उनकी याचना पर कोई रहम किया? तो फिर जब पाकिस्तान गिड़गिड़ाया, तो आपने रहम कैसे किया? आपके हिसाब से जब पाकिस्तान शरण में आया, तो शरण दी क्यों?

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“आपको नहीं बोलने दूँगी मैं.” “आप मेरे स्टूडियो से बाहर चली जाइये”… मार्च 2025 के तीसरे सप्ताह की एक चर्चा में चित्रा त्रिपाठी के ये शब्द थे, जब उनके BJP जनित नैरेटिव को मैंने चलाने से रोका था. दो दिनों से ट्विटर (X) पर रागिनी नायक जी और चित्रा त्रिपाठी की ट्वीट्स चर्चा का विषय बनी हुई हैं. करीब चार महीने पहले जब चित्रा त्रिपाठी औरंगज़ेब वाला शो कर रही थीं, तो उन्होंने पत्रकार और एंकर की मर्यादा को पीछे छोड़ते हुए मुझसे कहा था कि “आप मेरे डिबेट से निकल जाइये”. उस समय मैंने उनके चीफ़ एडिटर रजनीश आहूजा से बात की और बाद में खुद चित्रा त्रिपाठी ने मुझसे माफ़ी माँगी थी. लेकिन चित्रा त्रिपाठी की उस माफ़ी को किसने देखा या सुना ? मेरा अपमान और उनकी बदतमीज़ी बहरहाल, दर्शकों ने देखी भी थी और सुनी भी थी. लेकिन आज फिर वही घटना याद आ गई। सच यह है कि जो शख़्स अपने पेशेवर चरित्र में इतना बायस्ड हो, उसे दूसरों पर टिपणियाँ करने का कोई हक़ नहीं. चित्रा त्रिपाठी निष्पक्ष पत्रकार नहीं हैं — यह सब लोग जानते हैं. हमारा मीडिया चैनलों पर जाना सिर्फ़ इसलिए है कि संवाद की संभावनाएँ पूरी तरह खत्म न हों, वरना मुख्यधारा का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तो वैसे ही एकतरफ़ा चल रहा है. मगर इसका मतलब यह नहीं कि चित्रा त्रिपाठी या अंजना ओम कश्यप जैसे एंकर किसी के सम्मान से खिलवाड़ करें. हर कोई प्रतिष्ठित घरों से आता है, अपनी प्रोफ़ेशनल लाइफ़ में संघर्ष और उपलब्धियाँ लेकर चलता है. अगर आप किसी पर उंगली उठाएँगे तो सामने वाला भी चोट करेगा. इसलिए बेहतर यही होगा कि सभी, ख़ास तौर पर एंकर (जो अब पत्रकार नहीं बचे, सिर्फ़ एंकर हैं) अपने-अपने प्रोफ़ेशन में निष्पक्ष रहें—तब ऐसे टकराव नहीं होंगे….और इसे महिलाओं का टकराव कहकर कुछ तथाकथित पत्रकार चटखारे नहीं ले पाएंगे. बहरहाल, मैं दोबारा कहूंगी — चित्रा त्रिपाठी पिछले करीब 8 वर्षों से निष्पक्ष पत्रकार नहीं रही हैं.

“आपको नहीं बोलने दूँगी मैं.” “आप मेरे स्टूडियो से बाहर चली जाइये”… मार्च 2025 के तीसरे सप्ताह की एक चर्चा में चित्रा त्रिपाठी के ये शब्द थे, जब उनके BJP जनित नैरेटिव को मैंने चलाने से रोका था. दो दिनों से ट्विटर (X) पर रागिनी नायक जी और चित्रा त्रिपाठी की ट्वीट्स चर्चा का विषय बनी हुई हैं. करीब चार महीने पहले जब चित्रा त्रिपाठी औरंगज़ेब वाला शो कर रही थीं, तो उन्होंने पत्रकार और एंकर की मर्यादा को पीछे छोड़ते हुए मुझसे कहा था कि “आप मेरे डिबेट से निकल जाइये”. उस समय मैंने उनके चीफ़ एडिटर रजनीश आहूजा से बात की और बाद में खुद चित्रा त्रिपाठी ने मुझसे माफ़ी माँगी थी. लेकिन चित्रा त्रिपाठी की उस माफ़ी को किसने देखा या सुना ? मेरा अपमान और उनकी बदतमीज़ी बहरहाल, दर्शकों ने देखी भी थी और सुनी भी थी. लेकिन आज फिर वही घटना याद आ गई। सच यह है कि जो शख़्स अपने पेशेवर चरित्र में इतना बायस्ड हो, उसे दूसरों पर टिपणियाँ करने का कोई हक़ नहीं. चित्रा त्रिपाठी निष्पक्ष पत्रकार नहीं हैं — यह सब लोग जानते हैं. हमारा मीडिया चैनलों पर जाना सिर्फ़ इसलिए है कि संवाद की संभावनाएँ पूरी तरह खत्म न हों, वरना मुख्यधारा का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तो वैसे ही एकतरफ़ा चल रहा है. मगर इसका मतलब यह नहीं कि चित्रा त्रिपाठी या अंजना ओम कश्यप जैसे एंकर किसी के सम्मान से खिलवाड़ करें. हर कोई प्रतिष्ठित घरों से आता है, अपनी प्रोफ़ेशनल लाइफ़ में संघर्ष और उपलब्धियाँ लेकर चलता है. अगर आप किसी पर उंगली उठाएँगे तो सामने वाला भी चोट करेगा. इसलिए बेहतर यही होगा कि सभी, ख़ास तौर पर एंकर (जो अब पत्रकार नहीं बचे, सिर्फ़ एंकर हैं) अपने-अपने प्रोफ़ेशन में निष्पक्ष रहें—तब ऐसे टकराव नहीं होंगे….और इसे महिलाओं का टकराव कहकर कुछ तथाकथित पत्रकार चटखारे नहीं ले पाएंगे. बहरहाल, मैं दोबारा कहूंगी — चित्रा त्रिपाठी पिछले करीब 8 वर्षों से निष्पक्ष पत्रकार नहीं रही हैं.

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मेरे बेटे ने, जो छुट्टी में आया हुआ है, मुझसे पूछा कि मां, क्या राहुल गांधी जी के संसद भवन की सीढ़ियों पर बैठकर चाय पीने का मुद्दा इतना बड़ा है कि नेशनल चैनल पर डिबेट किया जाए? तो मैंने उसे बताया कि विपक्ष को लोगों की नजरों में गिराने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से आदेश के रूप में जो भी विषय आते हैं, नेशनल चैनलों को उन्हीं पर डिबेट करने के लिए बाध्य होना पड़ता है, यह उनकी मजबूरी है. इस पर एंकर की ‘स्वीकारोक्ति’ बड़ी ईमानदार रही 😂👌

मेरे बेटे ने, जो छुट्टी में आया हुआ है, मुझसे पूछा कि मां, क्या राहुल गांधी जी के संसद भवन की सीढ़ियों पर बैठकर चाय पीने का मुद्दा इतना बड़ा है कि नेशनल चैनल पर डिबेट किया जाए? तो मैंने उसे बताया कि विपक्ष को लोगों की नजरों में गिराने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से आदेश के रूप में जो भी विषय आते हैं, नेशनल चैनलों को उन्हीं पर डिबेट करने के लिए बाध्य होना पड़ता है, यह उनकी मजबूरी है. इस पर एंकर की ‘स्वीकारोक्ति’ बड़ी ईमानदार रही 😂👌

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आज नॉर्थ के लोग सरप्राइज्ड हैं कि साउथ के लोगों ने एक एक्टर को सीएम कैसे चुन लिया? अरे लेकिन तुम लोग सरप्राइज्ड कैसे हो सकते हो? तुम लोगों ने तो खुद आज से 12 साल पहले एक एक्टर को अपना पीएम चूज़ किया था !! 😂😂😂

आज नॉर्थ के लोग सरप्राइज्ड हैं कि साउथ के लोगों ने एक एक्टर को सीएम कैसे चुन लिया? अरे लेकिन तुम लोग सरप्राइज्ड कैसे हो सकते हो? तुम लोगों ने तो खुद आज से 12 साल पहले एक एक्टर को अपना पीएम चूज़ किया था !! 😂😂😂

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“पाकिस्तान में लोग खाने को मोहताज हो रहे हैं !” और हिंदुस्तान में लोग रोज दो-दो किलो देसी घी पीकर सो रहे हैं,.. 😂😂😂

“पाकिस्तान में लोग खाने को मोहताज हो रहे हैं !” और हिंदुस्तान में लोग रोज दो-दो किलो देसी घी पीकर सो रहे हैं,.. 😂😂😂

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चुभा इन्हें चीखें उनकी निकलीं 🥹😂😂

चुभा इन्हें चीखें उनकी निकलीं 🥹😂😂

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मध्यप्रदेश BJP के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय कृषि मंत्री मँहगाई से त्रस्त होकर वही गाना गा रहे हैं, जिसे सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से डिलीट करवा रही है. तुम करो तो रासलीला और आज के लोग करें तो चेहरा लाल पीला !!

मध्यप्रदेश BJP के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय कृषि मंत्री मँहगाई से त्रस्त होकर वही गाना गा रहे हैं, जिसे सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से डिलीट करवा रही है. तुम करो तो रासलीला और आज के लोग करें तो चेहरा लाल पीला !!

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याद करिए कि नायब सिंह सैनी ने कहा था कि हमारे पास सरकार बनाने की पूरी व्यवस्था है. #hydrogenbomb

याद करिए कि नायब सिंह सैनी ने कहा था कि हमारे पास सरकार बनाने की पूरी व्यवस्था है. #hydrogenbomb

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अच्छा हुआ, कि BJP ने सुधा मूर्ति को राज्यसभा भेजकर उनके बौद्धिक स्तर और भारत देश की समझ का पर्दाफाश कर दिया है. संसद में उनका यह वक्तव्य कि "भारत की सड़कें शानदार हैं और लोग किसी तरह कुछ ले दे कर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाकर ‘ट्रैफिक मेनस’ करते हैं", इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि इन्हें भारत की जमीनी हकीकत का कोई अता-पता नहीं है, बल्कि इस ‘दादी माँ की नसीहतें’ जैसी भाषा में इनके भीतर उनका ‘सवर्ण घमंड’ साफ साफ़ झलकता है. वैसे भी जो महिला गर्व से हर जगह अपनी चम्मच खुद लेकर चलने की बातें बताती हो, उससे और उम्मीद भी क्या की जा सकती है? एक दौर में इस इन्हें 'बुद्धिमान, संघर्षशील और साहसी' होने की कहानियाँ गढ़ी गईं थीं, उनकी ख़ुद की नासमझी ने उस ‘फसाड’ को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है.

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वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट की वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा, “आज जिस याचिका पर सुनवाई हुई, वह तीन याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर की गई थी. पहले याचिकाकर्ता पूर्व IPS अधिकारी श्री यशोवर्धन आज़ाद हैं. अन्य दो याचिकाकर्ता वे युवा हैं, जो NEET पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन का हिस्सा थे और पैलेट गन से गंभीर रूप से घायल हुए. दोनों ही पैलेट गन से लगी चोटों के पीड़ित हैं. हमने इस मामले में कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं. सबसे पहले, यह एक शांतिपूर्ण सभा थी, जहां लोग अपने विरोध के संवैधानिक अधिकार का प्रयोग कर रहे थे. सुप्रीम कोर्ट भी कई बार स्पष्ट कर चुका है कि जब नागरिक किसी मुद्दे से असंतुष्ट हों, तो उन्हें शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करने का अधिकार है. ऐसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन में इस प्रकार के घातक बल (लीथल फोर्स) का इस्तेमाल, जो अपनी प्रकृति से ही गंभीर चोटें पहुंचाने की आशंका रखता है, पूरी तरह अस्वीकार्य है.” #RejectPoliceBrutality

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