
Arvind Mohan Singh
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Socio-Political Analyst | Columnist | Entrepreneur | Hindu Nationalist | Swayamsevak | Foodie Backup @iarvindmohan मौन तपस्वी साधक बन कर हिमगिरि सा चुपचाप गलें
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दृश्य हनुमानगढ़ी, अयोध्या के हैं… भगवत दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार में एक भक्त के कंधे पर बैठा नन्हा बालक, बगल में खड़े श्रद्धालु के प्रसाद को चुपके-चुपके चख रहा है। कभी-कभी ईश्वर मंदिर के गर्भगृह में ही नहीं, ऐसी निष्कपट मुस्कानों, बाल-सुलभ चंचलताओं और सहज भावों में भी दर्शन दे जाते हैं। तभी तो संतों ने कहा है - “ना जाने किस भेष में नारायण मिल जाए”
Arvind Mohan Singh42,490 views • 6 days ago

सुवेंदु दा… ममता बनर्जी के उस धमकी का जवाब दे रहे हैं जिसमें वो कह रही थी, "मैं हूँ इसलिए सभी है। यदि मैं नहीं रहूँगी तो एक कम्युनिटी एक सेकंड में सबको दिखा देती।" अकबरुद्दीन ओवैसी तो पन्द्रह मिनट की बात कर रहा था। ममता बनर्जी उस पन्द्रह मिनट को एक सेकंड पर ले आयी हैं। सुवेंदु अधिकारी ममता बनर्जी से कह रहे हैं कि जरा उस कम्युनिटी को भेजिए जो आपके नहीं रहने पर हमलोगों को एक सेकंड में देख लेगा… भेजिए-भेजिए हम लड़ लेंगे… हम संगठित हैं..
Arvind Mohan Singh73,667 views • 1 month ago

वीडियो UP के सुल्तानपुर जिले का है। दलित उत्थान के नाम बनी संस्था के कार्यक्रम में एक वक्ता जनरल कास्ट को अपशब्द कह रहा था… इस पर वहाँ के #भाजपा_विधायक राजेश गौतम जी ( Rajesh gautam (मोदी का परिवार) ) जो स्वयं #दलित_समाज से हैं ने वक्ता का ना सिर्फ़ माइक छीना बल्कि आपत्ति वक्ता को फटकारा की उनके रहते मंच का इस्तमाल किसी समाज को गाली देने के लिए नहीं किया जा जाएगा। जातियों के नाम पर जब सभी और से अपशब्द बोले जा रहे हों उसमे विधायक जी मिसाल है।
Arvind Mohan Singh125,612 views • 8 months ago

A Wise Man once said… “BJP से आपको लड़ना है एक दिन… मगर राम से मत लड़िए निपट जाओगे”
Arvind Mohan Singh98,923 views • 6 months ago

ये भावुक संवाद मैथिली में है तो हिंदी अनुवाद कर रहा हूँ। पत्रकार : चाची मतदान है, कौन छाप पर वोट दोगी? BJP, RJD,JDU? अम्मा : देखो बाबू, बूढ़े माँ-बाप को उनके अपने बेटे कभी एक कौर खाना नहीं देते, और मोदी चावल देता है, 30 किलो अन्न देता है, हम दोनों बूढ़े पति-पत्नियों को 11 सौ- 11 सौ रुपया देता है… नमक हराम नहीं हैं बाबू… नमक हराम नहीं हैं…
Arvind Mohan Singh87,760 views • 7 months ago

एक बादशाह को केवल प्रशंसा करने वाले दरबारी पसन्द थे। इन दरबारियों ने कभी भी बादशाह को मुल्क की वास्तविक स्थिति नही जानने दी, ना ही बादशाह ने कभी जमीनी हकीकत को समझना चाहा। वह अपनी पिछली पीढ़ियों की हराम की कमाई से मजे ले रहा था। धीरे धीरे उस अय्यास बादशाह के शासन की जड़े खोखली हो रही थी… आज वह अपनी आधे से ज्यादा रियासतें हार चुका है, बाकी हारने वाला है… लोग तो ये भी कहते हैं कि अब वह मुल्क से भागने की फिराक में है।
Arvind Mohan Singh76,268 views • 6 months ago

