
Piyush Babele||पीयूष बबेले
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Media Advisor || @officeofknath ||Author: Nehru Mithak aur Satya|| Journalist for Ever|| Past @IndiaToday, @EconomicTimes @PTI_News @DainikBhaskar
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14-15 अगस्त 1947 की दरमियानी रात जब भारत आज़ाद हो रहा था तब पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा को हिन्दी में संबोधित किया था। अंग्रेज़ी वाला भाषण इसके बाद दिया गया था। नेहरू और हिंदुस्तान में आज़ादी को लेकर ख़ुशी थी तो सांप्रदायिक हिंसा को लेकर रंज था। सुनिए पूरा भाषण...
Piyush Babele||पीयूष बबेले191,396 просмотров • 1 месяц назад

Gen-Z का नया वंदेमातरम नहीं सुना तो कुछ नहीं सुना।Congress
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नेहरूजी ने कमला नेहरू की मृत्यु के बाद किसी की तरफ़ नहीं देखा : महादेवी वर्मा आज महान कवयित्री और स्वतंत्रता सेनानी महादेवी वर्मा जी का जन्मदिन है। ऐसे में सुनिए उनका एक पुराना इंटरव्यू जिसमें ने बता रही हैं कि उन्होंने अपनी ज़िंदगी में निराला जी और नेहरूजी, दो ही ऐसे व्यक्ति देखे जो अपनी पत्नियों से अत्यधिक प्रेम करते थे। ये दो ही ऐसे व्यक्ति हैं जिनके जीवन पर कोई दाग़ नहीं है। इन्होंने अपनी पत्नी के सिवा किसी की तरफ़ नहीं देखा।
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सुनिए 25 जून 1975 को आपातकाल घोषित करने वाला इंदिरा गांधी का संदेश। कैबिनेट मंत्री की हत्या, चीफ जस्टिस पर प्राणघातक हमला, सेना से तख्तापलट की विपक्ष की अपील, विधायकों से जबरन इस्तीफ़े लिखवाकर सरकार गिराना और पूरे देश को हिंसा में झोंकना। इन हालात में प्रयोग हुआ था संविधान का आपातकाल का क्लॉज़।
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इमरजेंसी का केवल एक हिस्सा दिखाने वालों को 1978 का इंदिरा गाँधी का यह इण्टरव्यू ज़रूर सुनना चाहिए। वे कौन से हालात थे जिनमें में इंदिरा गांधी को इमरजेंसी लगानी पड़ी। विपक्ष के नेता कह रहे थे कि अगर हम बैलेट से नहीं जीतेंगे तो बुलेट से सत्ता हथिया लेंगे। पूरे देश में अराजकता की आंधी चला दी गई थी। एक बड़ा षड्यंत्र था जिसके ख़िलाफ़ इंदिरा गांधी झुकी नहीं। इमरजेंसी के बाद बनी जनता पार्टी सरकार ने किस तरह 23, हज़ार शिक्षकों को जेल में डाल दिया था।
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गृह मंत्री ने कहा कि 1946 में पंडित नेहरू वोट चोरी से कांग्रेस के अध्यक्ष बने। क्या 1946 में कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में सरदार पटेल को ज़्यादा वोट मिलने के बाद भी नेहरू जी को अध्यक्ष बना दिया, जिससे वे प्रधानमंत्री बने? पंडित नेहरू के ख़िलाफ़ फैलाए गए झूठ का पर्दाफ़ाश। #नेहरू_मिथक_और_सत्य
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नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी Rahul Gandhi ने इंडियन स्टेट कहा है। इंडियन नेशन या इंडियन रिपब्लिक नहीं। इंडियन स्टेट का मतलब होता है भारत सरकार और उससे जुड़े संस्थान और एजेंसियां। इन सब पर भाजपा और RSS ने क़ब्ज़ा कर लिया है, इसलिए इन सबसे मुक़ाबला करना होगा। इंडियन नेशन को भाजपा और RSS के क़ब्ज़े वाले इंडियन स्टेट से मुक़ाबला करना है।
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भारतीय जनता पार्टी बार बार एक सवाल खड़ा कर रही है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन में आने से रोका था। इस झूठ का पर्दाफ़ाश हम करें, उससे पहले क्या भाजपा इस बात का जवाब देगी कि मोदी सरकार के दौरान अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास में दलित समाज से आने वाले तत्कालीन राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी को किसने रोका था? मोदी सरकार के दौरान अयोध्या के राम मंदिर के उद्घाटन में आदिवासी समाज से आने वाली वर्तमान राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को आने से किसने रोका था? क्या इन दोनों राष्ट्रपतियों को इसलिए कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया क्योंकि वह दलित और आदिवासी समुदाय से आते हैं। और यह जगजाहिर बात है कि भाजपा और RSS के लिए नीति दलित और आदिवासी समाज के ख़िलाफ़ है। अब आइए ऐतिहासिक संदर्भ पर। 28 नवम्बर 1947 को भी दिल्ली में अपनी प्रार्थना सभा में महात्मा गांधी ने स्पष्ट कहा था कि जूनागढ़ कि सरकार सरकारी ख़ज़ाने से सोमनाथ मंदिर का निर्माण नहीं कर सकती। जब गांधीजी ने सरदार पटेल से पूछा कि क्या तुम सोमनाथ मंदिर के निर्माण के लिए सरकारी ख़ज़ाने से कुछ पैसा दे रहे हो। तो सरदार पटेल ने कहा था कि "जब तक मैं ज़िंदा हूँ सरकारी ख़ज़ाने से एक पैसा सोमनाथ मंदिर के निर्माण के लिए नहीं दिया जाएगा। हिन्दू समाज चंदा करके मंदिर का निर्माण कर सकता है।" जब 1951 में सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन का समय आया तो यह जानकारी प्राप्त हुई कि तत्कालीन सौराष्ट्र की सरकार ने मंदिर निर्माण में 5,00,000 रुपया दिया है। सरकारी धन से मंदिर का निर्माण राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल और भारतीय संविधान के प्रावधानों के प्रतिकूल था। पंडित नेहरू इसी नीति का पालन करते हुए मंदिर के निर्माण में सरकारी धन के उपयोग का विरोध कर रहे थे। 2 मार्च 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने ख़ुद पत्र लिखकर नेहरू जी से पूछा कि वे तो मंदिर के उद्घाटन में निजी हैसियत से जाना चाहते हैं। इसके जवाब में उसी दिन पंडित नेहरू ने लिखा है कि मेरा विरोध इस बात से है कि मंदिर के निर्माण में सरकारी धन का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में अगर सरकार इसमें शामिल होंगी तो यह हमारी सेकुलर नीतियों के ख़िलाफ़ होगा। लेकिन अगर आपने पहले से ही मंदिर के उद्घाटन में जाने का वादा कर दिया है तो मैं आपको नहीं रोकूँगा। 11 मार्च 1951 को चक्रवर्ती राजगोपालाचारी को लिखे पत्र में भी पंडित नेहरू ने यही बात दोहराई और कहा कि डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जाना चाहते हैं तो जाएं। 22 अप्रैल 1951 को के एम मुंशी को लिखे पत्र में भी पंडित नेहरू ने कहा कि सौराष्ट्र की सरकार का पाँच लाख रुपया देना उचित नहीं है। जो बात पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के बारे में कही थी वही बात अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के फ़ैसले के समय सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कही। सुप्रीम कोर्ट ने एक ट्रस्ट बनाने के लिए कहा, जिस ट्रस्ट ने सार्वजनिक चंदे से राम मंदिर का निर्माण किया। मोदी सरकार ने राम मंदिर के निर्माण के लिए एक पैसा नहीं दिया। जो बात राम मंदिर के लिए सही है, वह सोमनाथ मंदिर के लिए ग़लत कैसे हो सकती है। अगर दो वर्तमान राष्ट्रपतियों को राम मंदिर के शिलान्यास और उद्घाटन से बाहर रखना सही है तो तत्कालीन राष्ट्रपति से सरकारी धन से बने मंदिर के उद्घाटन में न आने की बात कहना, हालाँकि उस कार्यक्रम में शामिल हुए, कैसे ग़लत हो सकती है?
Piyush Babele||पीयूष बबेले25,922 просмотров • 8 месяцев назад

साल के अंतिम दिन मैंने ग्रॉक से पूछा कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं में पूरे साल पंडित नेहरू पर कौन कौन से आरोप लगाए। आरोपों की सूची सामने आयी तो पता चला, यह आरोप नहीं थे यह तो पंडित नेहरू पर बोले गए झूठ थे। जिनका समय समय पर मैं प्रतिवाद करता रहा हूँ। पंडित नेहरू पर बोले गए 2025 के झूठ की सूची नीचे उपलब्ध है। साथ ही मेरा वीडियो जिसमें कुछ झूठ बेनक़ाब किए गए। वर्ष 2025 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने पंडित जवाहरलाल नेहरू पर मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रमुख आरोप लगाए। ये आरोप विभिन्न संसदीय बहसों (जैसे वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा), प्रेस कॉन्फ्रेंस, रैलियों और सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आए, खासकर दिसंबर 2025 में जब सोनिया गांधी ने नेहरू की विरासत को बचाने की बात कही तो BJP ने तीखा पलटवार किया। यहाँ प्रमुख आरोपों की सूची है (स्रोतों के आधार पर): 1. जम्मू-कश्मीर और चीन-पाकिस्तान से संबंधित ऐतिहासिक गलतियाँ • नेहरू की वजह से पाकिस्तान और चीन को भारतीय क्षेत्र पर कब्जा करने दिया। • अनुच्छेद 370 को संविधान में शामिल कर विशेष दर्जा दिया, जिसे “ऐतिहासिक भूल” कहा गया। • (BJP प्रवक्ता गौरव भाटिया और अन्य नेताओं द्वारा दिसंबर 2025 में दोहराया गया।) 2. वंदे मातरम को “टुकड़ों में काटना” और तुष्टिकरण • नेहरू के काल में कांग्रेस ने वंदे मातरम के केवल दो छंदों को राष्ट्रीय गीत बनाया, बाकी को हटाया (मुस्लिम लीग के दबाव में तुष्टिकरण की राजनीति)। • अमित शाह और अन्य ने संसद में कहा कि नेहरू ने राष्ट्रगान का अपमान किया। 3. बाबरी मस्जिद निर्माण में सरकारी धन इस्तेमाल करने की कोशिश • नेहरू बाबरी मस्जिद को सरकारी खजाने से बनवाना चाहते थे, लेकिन सरदार पटेल ने रोका। • (रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा दिसंबर 2025 में कहा गया, BJP ने किताबों का हवाला दिया।) 4. दक्षिण भारत के मंदिरों से “घृणा” या अप्रिय भावना • नेहरू ने कुछ दक्षिण भारतीय मंदिरों को देखकर “घृणा” या “दमनकारी” महसूस किया (Sudhanshu Trivedi ने किताब का हवाला देकर कहा)। • सोमनाथ मंदिर उद्घाटन में राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को रोकने की कोशिश की। 5. अन्य नेताओं की उपेक्षा और परिवारवाद • नेहरू ने सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, आंबेडकर जैसे नेताओं की विरासत को दबाया, सिर्फ अपनी फैमिली को आगे बढ़ाया। • (संबित पात्रा ने सोनिया गांधी के बयान पर कहा कि कांग्रेस ने कई महान नेताओं की विरासत नष्ट की।) 6. घुसपैठ और असम/पूर्वोत्तर से जुड़े फैसले • नेहरू ने जिन्ना के करीबी मोहम्मद सादुल्ला जैसे लोगों को महत्वपूर्ण पद दिए, जिससे असम में घुसपैठ के बीज बोए गए। 7. अन्य पुराने/दोहराए गए आरोप (2025 में भी संदर्भित) • चीन को UNSC सीट देने की पेशकश (भारत के बदले)। • महात्मा गांधी की हत्या में अप्रत्यक्ष भूमिका (कर्नाटक BJP MLA बसंगौदा पाटिल यत्नाल द्वारा कहा गया, जिस पर FIR हुई)। ये आरोप ज्यादातर दिसंबर 2025 की संसदीय चर्चाओं (वंदे मातरम, इतिहास सुधार) और सोनिया गांधी के नेहरू बचाओ बयान के जवाब में लगाए गए। BJP ने इन्हें “ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने” के रूप में पेश किया, जबकि कांग्रेस ने इन्हें नेहरू की बदनामी का अभियान बताया।
Piyush Babele||पीयूष बबेले15,617 просмотров • 8 месяцев назад

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान Shivraj Singh Chouhan ने संविधान से धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद शब्द हटाने की वकालत कर स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा जैसी सिद्धांतविहीन और मौक़ापरस्त पार्टी दूसरी कोई नहीं है। पार्टी की स्थापना के दिन संस्थापक अध्यक्ष की हैसियत से अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों पर चलकर भारत का निर्माण करेगी। आज भाजपा को अपने ही घोषित सिद्धांतों से तक़लीफ़ हो रही है।जो लोग अपनी पार्टी के संस्थापक और संविधान को नहीं मानते उनसे क्या आशा की जाए कि वह देश के संविधान का सम्मान करेंगे?
Piyush Babele||पीयूष बबेले18,574 просмотров • 1 год назад

सुनिए 25 जून 1975 को आपातकाल घोषित करने वाला इंदिरा गांधी का संदेश। कैबिनेट मंत्री की हत्या, चीफ जस्टिस पर प्राणघातक हमला, सेना से तख्तापलट की विपक्ष की अपील, विधायकों से जबरन इस्तीफ़े लिखवाकर सरकार गिराना और पूरे देश को हिंसा में झोंकना। इन हालात में प्रयोग हुआ था संविधान का आपातकाल का क्लॉज़।
Piyush Babele||पीयूष बबेले18,313 просмотров • 1 год назад