
छोटी कविता
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जितनी छोटी हो कविता उतना ही ज्यादा बसेगी मन में। साहित्य। सिनेमा। संगीत। जीवन।
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मोहम्मद रफ़ी साहब को अपना गुरु मानने वाले सोनू निगम जब उनके घर पहुँचे, तो ख़ुद को उनके हारमोनियम पर गुनगुनाने से रोक नहीं पाए। इस ख़ूबसूरत पल में उनके साथ उनके पिता अगम निगम, सचिन तेंदुलकर, और संगीतकार सलीम मर्चेंट भी मौजूद थे। रफ़ी साहब के छोटे बेटे शाहिद रफ़ी ने सभी का स्वागत किया। शाहिद ख़ुद भी ख़ास मौक़ों पर अपने पिता के गीत गाते रहते हैं।
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नन्ही-सी सुनिधि चौहान और उनके शुरुआती सफ़र की एक ख़ूबसूरत याद...
छोटी कविता31,690 просмотров • 11 дней назад

एक दुर्लभ वीडियो। भीमसेन जोशी और मन्ना डे जी की जुगलबंदी और एक-दूसरे के प्रति उनके सुंदर विचार।
छोटी कविता29,307 просмотров • 13 дней назад

फ़िल्म वो लम्हे (2006) का गाना ‘तू जो नहीं है तो कुछ भी नहीं है’ बेहद लोकप्रिय हुआ था। प्रीतम के संगीत निर्देशन में इसे ग्लेन जॉन ने गाया था। दरअसल, इस गीत को पाकिस्तानी गायक एस. बी. जॉन, ग्लेन जॉन के पिता, ने पाकिस्तानी फ़िल्म सवेरा (1959) में गाया था। फ़िल्म वो लम्हे में गीतकार सईद क़ादरी ने कुछ अतिरिक्त बोल जोड़कर इसे थोड़ा लंबा किया था। ख़ैर, आइए सुनते हैं एस. बी. जॉन को एक कार्यक्रम में यही गीत गाते हुए।
छोटी कविता26,903 просмотров • 17 дней назад

71 वर्षीय शब्बीर कुमार अपनी नवासी शिफा रूबी के साथ अपना आइकॉनिक गीत गाते हुए...
छोटी कविता101,603 просмотров • 3 месяцев назад

क्या वजह है कि फ़िल्मों में अब सैड सॉन्ग्स नहीं होते हैं..?
छोटी कविता82,131 просмотров • 3 месяцев назад