
छोटी कविता
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जितनी छोटी हो कविता उतना ही ज्यादा बसेगी मन में। साहित्य। सिनेमा। संगीत। जीवन।
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जैमिंग का अपना ही आनंद है, और जब गाना इतना ख़ूबसूरत हो, तो सोने पर सुहागा।
छोटी कविता55,064 просмотров • 21 дней назад

लेकिन आजकल लोग सलाह को ताना समझ लेते हैं और फ़िक्र को दख़लअंदाज़ी....
छोटी कविता72,143 просмотров • 29 дней назад

बच्चों ने कितना सुंदर बजाया है, वो भी 'शोले' फ़िल्म का टाइटल म्यूज़िक। वाकई तारीफ़ के क़ाबिल।
छोटी कविता24,655 просмотров • 11 дней назад

1989 में दूरदर्शन पर ‘इसी बहाने’ नामक एक सस्पेंस सीरियल प्रसारित होता था। इसमें प्रमुख भूमिकाओं में किरण खेर, सईद जाफ़री, सुष्मिता मुखर्जी और लिलिपुट जैसे कलाकार थे। यह सीरियल काफ़ी लोकप्रिय रहा था। आइए, इसी सीरियल की एक ख़ूबसूरत ग़ज़ल, ‘हम हैं कुछ अपने लिए, कुछ हैं ज़माने के लिए’ सुनते हैं। इसे चित्रा सिंह ने अपनी आवाज़ दी है जबकि बोल निदा फ़ाज़ली के हैं।
छोटी कविता65,262 просмотров • 1 месяц назад

आख़िर तक देखिए, क्योंकि अंत में आपका इंतज़ार कर रहा है एक ख़ूबसूरत सरप्राइज़।
छोटी कविता34,874 просмотров • 27 дней назад

मेरी ज़िंदगी न इम्तियाज़ अली की फ़िल्मों की तरह है–– सबा क़मर
छोटी कविता34,951 просмотров • 28 дней назад

जया प्रदा और दीपिका चिखालिया का यह खूबसूरत विज्ञापन याद है आपको? आजकल ऐसे विज्ञापन क्यों नहीं बनते!!
छोटी कविता74,803 просмотров • 3 месяцев назад

अगर तुम ही सबका इंतज़ार करते रहोगे तो जो तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं उनका क्या होगा....
छोटी कविता17,875 просмотров • 26 дней назад

ये बेंजामिन सिस्टर्स हैं, जो अपने गीतों के कारण 1970 के दशक के उत्तरार्ध और 1980 के शुरुआती वर्षों में पाकिस्तान में बेहद मशहूर हुईं। उत्तर भारत में भी उनकी लोकप्रियता कम नहीं थी। तीन बहनों का यह समूह 1987 के बाद मंच पर गाना लगभग बंद कर दिया, जब उनमें से एक की शादी हो गई। दिलचस्प बात यह है कि उस समय यह ग्रुप अपनी लोकप्रियता के शिखर पर था।
छोटी कविता71,054 просмотров • 4 месяцев назад

The magic you're looking for is in the work you're avoiding.
छोटी कविता107,334 просмотров • 8 месяцев назад

न शोर, न शब्द — बस सुकून और सुर। यही इंस्ट्रुमेंटल संगीत का जादू है।
छोटी कविता174,019 просмотров • 1 год назад

'रूप तेरा मस्ताना' आज जिस धुन में हमारे दिलों में बसा हुआ है वह शुरुआत में कुछ और ही थी। रिकॉर्डिंग से ठीक पहले किशोर कुमार ने एस. डी. बर्मन की अनुमति से उसमें एक बदलाव किया, और वही बदलाव आगे चलकर इस गीत की पहचान बन गया। आइए, यह दिलचस्प क़िस्सा अमित कुमार की ज़ुबानी सुनते हैं।
छोटी कविता21,131 просмотров • 1 месяц назад