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Dr. Laxman Yadav

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Author of the Best-Selling books 'Professor ki Diary' & 'Jaati Janaganana', Socialist, Constitutionalist, Political Analyst, Intercessor of Social Justice.

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NDA सरकार में भी इस्तीफ़े होते हैं.

NDA सरकार में भी इस्तीफ़े होते हैं.

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विश्वगुरु बनने का रास्ता शायद स्कूल की सड़क से होकर नहीं जाता!

विश्वगुरु बनने का रास्ता शायद स्कूल की सड़क से होकर नहीं जाता!

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मध्य प्रदेश के भोपाल के ये दृश्य देखिए। ये बच्चे स्कूल से नहीं भाग रहे, स्कूल को भागने से रोक रहे हैं!

मध्य प्रदेश के भोपाल के ये दृश्य देखिए। ये बच्चे स्कूल से नहीं भाग रहे, स्कूल को भागने से रोक रहे हैं!

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अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ी गांवों में, लोग जब भी अपना फोन चालू करते हैं, तो उन्हें एक चीनी मोबाइल नेटवर्क से मैसेज मिलता है। इसकी जांच हो. क्या ये आरोप सही है? यह सिर्फ नेटवर्क का मामला नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा लीक का बड़ा खतरा है! देश के सीमावर्ती नागरिकों की लोकेशन, कॉल और पर्सनल डेटा सीधे चीनी सर्वर तक पहुँचने का जोखिम है। 56 इंच की बात करने वाली सरकार का आईटी मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय आख़िर इस गंभीर डिजिटल घुसपैठ पर खामोश क्यों हैं? भारत सरकार को ऐसे गंभीर सवालों पर तत्काल जवाब देकर नागरिकों की शंका का समाधान करना चाहिए.

अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ी गांवों में, लोग जब भी अपना फोन चालू करते हैं, तो उन्हें एक चीनी मोबाइल नेटवर्क से मैसेज मिलता है। इसकी जांच हो. क्या ये आरोप सही है? यह सिर्फ नेटवर्क का मामला नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा लीक का बड़ा खतरा है! देश के सीमावर्ती नागरिकों की लोकेशन, कॉल और पर्सनल डेटा सीधे चीनी सर्वर तक पहुँचने का जोखिम है। 56 इंच की बात करने वाली सरकार का आईटी मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय आख़िर इस गंभीर डिजिटल घुसपैठ पर खामोश क्यों हैं? भारत सरकार को ऐसे गंभीर सवालों पर तत्काल जवाब देकर नागरिकों की शंका का समाधान करना चाहिए.

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पत्रकार ने पूछा - अखिलेश जी कह रहे हैं कि इस बार हम आएँगे। जवाब मिला - “अखिलेश अहीर… मट्ठा, दही, दूध निकाले!” यही कुछ शब्द बता देते हैं कि जाति इस समाज में कितनी गहरी बैठी है। जिस व्यक्ति ने मुख्यमंत्री रहते हुए एक्सप्रेसवे, मेट्रो, अस्पताल, शिक्षा और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के अनेक काम किए, उसकी योग्यता और राजनीतिक सफ़र पर बहस करने के बजाय उसे उसकी जाति से जोड़कर बनाए गए रूढ़िगत पेशों तक सीमित कर दिया जाता है। यह किसी एक महिला या एक व्यक्ति को निशाना बनाने की बात नहीं है। यह उस वर्चस्ववादी मानसिकता की एक बानगी है, जो आज भी इंसान की योग्यता से पहले उसकी जाति देखती है। इसीलिए जाति अभी गई नहीं है। और जब तक जाति पीछा नहीं छोड़ती, सामाजिक न्याय की लड़ाई भी पीछा नहीं छोड़ेगी। Akhilesh Yadav

पत्रकार ने पूछा - अखिलेश जी कह रहे हैं कि इस बार हम आएँगे। जवाब मिला - “अखिलेश अहीर… मट्ठा, दही, दूध निकाले!” यही कुछ शब्द बता देते हैं कि जाति इस समाज में कितनी गहरी बैठी है। जिस व्यक्ति ने मुख्यमंत्री रहते हुए एक्सप्रेसवे, मेट्रो, अस्पताल, शिक्षा और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के अनेक काम किए, उसकी योग्यता और राजनीतिक सफ़र पर बहस करने के बजाय उसे उसकी जाति से जोड़कर बनाए गए रूढ़िगत पेशों तक सीमित कर दिया जाता है। यह किसी एक महिला या एक व्यक्ति को निशाना बनाने की बात नहीं है। यह उस वर्चस्ववादी मानसिकता की एक बानगी है, जो आज भी इंसान की योग्यता से पहले उसकी जाति देखती है। इसीलिए जाति अभी गई नहीं है। और जब तक जाति पीछा नहीं छोड़ती, सामाजिक न्याय की लड़ाई भी पीछा नहीं छोड़ेगी। Akhilesh Yadav

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उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एक युवक मोटर साइकिल पर अपनी मां को बैठाकर बाजार जा रहा था. कि बीच रास्ते में ही तीन मोटर साइकिलों पर सवार आधा दर्जन से अधिक युवकों ने रोक लिया। मारपीट कर तमंचे के बल पर अगवा कर लिया और फिर उसको बेरहमी से पीटा. लेकिन किसी टीवी चैनल में इतनी हिम्मत नहीं हो रही कि इसे जंगलराज बोल दे.

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एक युवक मोटर साइकिल पर अपनी मां को बैठाकर बाजार जा रहा था. कि बीच रास्ते में ही तीन मोटर साइकिलों पर सवार आधा दर्जन से अधिक युवकों ने रोक लिया। मारपीट कर तमंचे के बल पर अगवा कर लिया और फिर उसको बेरहमी से पीटा. लेकिन किसी टीवी चैनल में इतनी हिम्मत नहीं हो रही कि इसे जंगलराज बोल दे.

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अविनाश पांडेय जी ख़ुद को ‘सिंघम’ समझ बैठे थे! शायद लगा - बंद कमरा है, कैमरा नहीं है, मारो और बाद में पीड़ित को ही झूठा बता दो। लेकिन साहब, आपका पुराना ‘सिंघम अवतार’ कैमरे में क़ैद है - प्रदर्शनकारियों पर थप्पड़ बरसाते और पुलिस वैन में युवक को लात-घूंसों से पीटते हुए। तो बंद कमरे में क्या हुआ होगा, इस पर जनता सवाल क्यों न करे? दिग्विजय भाटी के शरीर के घाव भी सवाल कर रहे हैं। योगी सरकार बताए - यूपी में पुलिस कानून से चलेगी या ‘गुंडाराज’ से?

अविनाश पांडेय जी ख़ुद को ‘सिंघम’ समझ बैठे थे! शायद लगा - बंद कमरा है, कैमरा नहीं है, मारो और बाद में पीड़ित को ही झूठा बता दो। लेकिन साहब, आपका पुराना ‘सिंघम अवतार’ कैमरे में क़ैद है - प्रदर्शनकारियों पर थप्पड़ बरसाते और पुलिस वैन में युवक को लात-घूंसों से पीटते हुए। तो बंद कमरे में क्या हुआ होगा, इस पर जनता सवाल क्यों न करे? दिग्विजय भाटी के शरीर के घाव भी सवाल कर रहे हैं। योगी सरकार बताए - यूपी में पुलिस कानून से चलेगी या ‘गुंडाराज’ से?

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कावँड यात्रा के रास्ते पर बैरिकेडिंग बांधते मुसलमान।

कावँड यात्रा के रास्ते पर बैरिकेडिंग बांधते मुसलमान।

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ये खेल भावना का सम्मान है. #OlimpiadasParis2024

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ये कितना दुर्भाग्यपूर्ण है देश के लिए!

ये कितना दुर्भाग्यपूर्ण है देश के लिए!

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अपने विवेक को सबसे बड़ा मार्गदर्शक बनाइए।

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यूपी में शिक्षकों के 60 हज़ार से ज़्यादा पद खाली पड़े हैं। बीएड, बीटीसी और डीएलएड करके लाखों युवा सड़कों पर धक्के खा रहे हैं। मगर योगी सरकार को न खाली पद दिख रहे, न बेरोज़गारों का दर्द! रोज़गार देने में नाकाम सरकार जवाब दे - खाली पदों पर भर्ती कब होगी? युवाओं की उम्र और सब्र की परीक्षा कब तक लेंगे?

यूपी में शिक्षकों के 60 हज़ार से ज़्यादा पद खाली पड़े हैं। बीएड, बीटीसी और डीएलएड करके लाखों युवा सड़कों पर धक्के खा रहे हैं। मगर योगी सरकार को न खाली पद दिख रहे, न बेरोज़गारों का दर्द! रोज़गार देने में नाकाम सरकार जवाब दे - खाली पदों पर भर्ती कब होगी? युवाओं की उम्र और सब्र की परीक्षा कब तक लेंगे?

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योगी जी, यूपी के नौजवानों की बेचैनी को हल्के में मत लीजिए! सालों पढ़ो, कोचिंग करो, फॉर्म भरो और फिर भर्ती के इंतज़ार में उम्र गँवा दो - यूपी के युवाओं की यही कहानी बना दी गई है। नौकरी माँगो तो तारीख़ मिलती है, भर्ती माँगो तो इंतज़ार! देश के कई राज्यों में युवाओं का गुस्सा सड़कों पर दिख चुका है। अब उसकी आहट यूपी में भी सुनाई दे रही है। सवाल नौकरी का है, सवाल भविष्य का है - और अब सवाल सरकार से होगा!

योगी जी, यूपी के नौजवानों की बेचैनी को हल्के में मत लीजिए! सालों पढ़ो, कोचिंग करो, फॉर्म भरो और फिर भर्ती के इंतज़ार में उम्र गँवा दो - यूपी के युवाओं की यही कहानी बना दी गई है। नौकरी माँगो तो तारीख़ मिलती है, भर्ती माँगो तो इंतज़ार! देश के कई राज्यों में युवाओं का गुस्सा सड़कों पर दिख चुका है। अब उसकी आहट यूपी में भी सुनाई दे रही है। सवाल नौकरी का है, सवाल भविष्य का है - और अब सवाल सरकार से होगा!

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ये वीडिओ रुड़की का बताया जा रहा है. ख़बरों के मुताबिक कांवड़ियों से ई-रिक्शा साइड से 'टच' हो गया था. और कांवड़ियों ने ई-रिक्शा का ये हाल कर दिया। इन्हें देखकर ऐसा लग रहा है कि सरकार और प्रशासन का ज़रा भी भय नहीं है इनके अंदर। ये ऐसा क्यों कर पा रहे हैं, इसका जवाब कौन देगा?

ये वीडिओ रुड़की का बताया जा रहा है. ख़बरों के मुताबिक कांवड़ियों से ई-रिक्शा साइड से 'टच' हो गया था. और कांवड़ियों ने ई-रिक्शा का ये हाल कर दिया। इन्हें देखकर ऐसा लग रहा है कि सरकार और प्रशासन का ज़रा भी भय नहीं है इनके अंदर। ये ऐसा क्यों कर पा रहे हैं, इसका जवाब कौन देगा?

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"गुलामों को गुलामी का एहसास करा दो, वह अपनी जंजीरें खुद तोड़ देगा." :- महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले #Bangladesh

"गुलामों को गुलामी का एहसास करा दो, वह अपनी जंजीरें खुद तोड़ देगा." :- महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले #Bangladesh

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सबूत तो चंडीगढ़ के मेयर चुनाव में लाइव मिल चुका था, हुआ क्या? सबूत तो Samajwadi Party के नेता Akhilesh Yadav जी ने 18,000 सबूत Election Commission of India को भिजवाए थे कि धांधली हुई है. मगर हुआ क्या? इस बार एटम बम तो फूटा है, देखना दिलचस्प है कि क्या होता है.

सबूत तो चंडीगढ़ के मेयर चुनाव में लाइव मिल चुका था, हुआ क्या? सबूत तो Samajwadi Party के नेता Akhilesh Yadav जी ने 18,000 सबूत Election Commission of India को भिजवाए थे कि धांधली हुई है. मगर हुआ क्या? इस बार एटम बम तो फूटा है, देखना दिलचस्प है कि क्या होता है.

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शिक्षा का बजट- 2013 - 4.77% 2023 - 2.50% और ये प्रधानमंत्री रहते किया है इन्होंने। डंका बज रहा है न?

शिक्षा का बजट- 2013 - 4.77% 2023 - 2.50% और ये प्रधानमंत्री रहते किया है इन्होंने। डंका बज रहा है न?

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दिल्ली के ओल्ड राजेन्द्र नगर में कल रात Rau's IAS कोचिंग सेंटर के बेसमेंट की लाइब्रेरी में नाले का पानी भरने का वीडियो सामने आया है। बेसमेंट में पानी भरने से 3 छात्रों की दर्दनाक मौत।

दिल्ली के ओल्ड राजेन्द्र नगर में कल रात Rau's IAS कोचिंग सेंटर के बेसमेंट की लाइब्रेरी में नाले का पानी भरने का वीडियो सामने आया है। बेसमेंट में पानी भरने से 3 छात्रों की दर्दनाक मौत।

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बिहार में भी अमृतकाल आ गया है... भरोसा न हो तो ये बानगी देख लीजिए!

बिहार में भी अमृतकाल आ गया है... भरोसा न हो तो ये बानगी देख लीजिए!

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RSS द्वारा देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों पर क़ब्ज़े की कहानी : भाग 2 आजकल शिक्षा जगत पर RSS के बढ़ते प्रभाव और विश्वविद्यालयों के भगवाकरण को लेकर देशभर में गंभीर चर्चा चल रही है। ऐसे समय में मैं आपके लिए कुछ ऐसे सबूत साझा करने की यह श्रृंखला लेकर आया हूँ, जिन्हें हमने पिछले कई वर्षों से लगातार आपके सामने रखा था, ताकि समय रहते आपको आगाह किया जा सके। आज वही सवाल राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुके हैं। यह वीडियो भी कुछ महीने पुराना है, जिसे मैंने अपने सोशल मीडिया संग्रहालय से आपके लिए निकाला है। इस वीडियो को स्वतंत्र पत्रकार Harsh Yadav ने बनाया था। आज इसे दोबारा साझा करने का उद्देश्य केवल इतना है कि लोग देखें—जो बातें तब कही जा रही थीं, वे आज किस तरह वास्तविकता के रूप में हमारे सामने खड़ी हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में "युवा कुंभ" जैसे आयोजनों के नाम पर RSS से जुड़े कार्यक्रम खुलेआम आयोजित किए जा रहे थे। कई जगह कॉलेज प्रशासन अलग-अलग नामों से अनुमति देकर इन कार्यक्रमों का हिस्सा बनता दिखाई दिया। ऐसे आयोजनों को लेकर छात्र संगठनों और शिक्षकों के एक वर्ग ने विश्वविद्यालय की संस्थागत निष्पक्षता पर सवाल उठाए और विरोध भी दर्ज कराया। विश्वविद्यालय विचार, बहस, शोध और आलोचनात्मक चिंतन के केंद्र होने चाहिए। लेकिन जब सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थानों का उपयोग किसी एक वैचारिक एजेंडे के प्रचार के लिए होने लगे, तो यह केवल एक कार्यक्रम का सवाल नहीं रह जाता, बल्कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक चरित्र का प्रश्न बन जाता है। छात्र विरोध में उतर चुके हैं, जनता सवाल पूछ रही है और कैंपस का माहौल बिगाड़ने की यह कोशिश अब सबके सामने है। सरकारी संस्थानों को किसी भी वैचारिक या राजनीतिक प्रभाव का माध्यम बनाने की प्रवृत्ति पर गंभीर बहस और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं। यह श्रृंखला आगे भी जारी रहेगी। दस्तावेज़ों, वीडियो और तथ्यों के साथ हम उन घटनाओं को सामने लाते रहेंगे, जिन्हें उस समय नज़रअंदाज़ किया गया, लेकिन जिनके परिणाम आज पूरे देश के सामने दिखाई दे रहे हैं।

Dr. Laxman Yadav

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