
Dr. Laxman Yadav
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Author of the Best-Selling books 'Professor ki Diary' & 'Jaati Janaganana', Socialist, Constitutionalist, Political Analyst, Intercessor of Social Justice.
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आज़मगढ़ में प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही युवाओं को कथित तौर पर चेतावनी दी गई - "ज़्यादा देर तक दिखे तो मुक़दमे हो जाएँगे, बुद्धि ठिकाने आ जाएगी।" लेकिन सवाल यह है कि बुद्धि ठिकाने किसकी आने की ज़रूरत है? उन युवाओं की, जो शिक्षा, रोज़गार और अपने भविष्य की बात कर रहे हैं, या उस सत्ता की, जिसे जनता ने उनकी आवाज़ सुनने और समस्याओं का समाधान करने के लिए चुना था? लोकतंत्र में सवालों का जवाब धमकियों से नहीं, संवाद से दिया जाता है।
Dr. Laxman Yadav472,047 görüntüleme • 18 gün önce

RSS का असली चेहरा फिर सामने आ गया। RSS के सह-सरकार्यवाह अतुल लिमये ने अपने अधिकार, शिक्षा और रोज़गार की माँग करने वाली Gen Z को ही 'देशद्रोही' और 'संविधान-विरोधी' बता दिया। अब साफ़ है कि उन्हें जागरूक युवा नहीं, सिर्फ़ चुप रहने वाली पीढ़ी चाहिए। मुखौटा एक बार फिर उतर गया।
Dr. Laxman Yadav123,595 görüntüleme • 6 gün önce

"सत्ता से सवाल करना अब आसान नहीं रहा..." News24 छोड़ने के बाद वरिष्ठ पत्रकार गरिमा सिंह ने टीवी मीडिया का ऐसा सच सामने रखा है, जिसे हर नागरिक को सुनना चाहिए। अगर किसी सरकार के दौर में पत्रकारों को सवाल पूछने से पहले दबाव, ट्रोलिंग और स्टूडियो तक पहुँचने वाली भीड़ का डर सताने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है। जब पत्रकार निर्भीक नहीं रहेंगे, तो जनता भी सच से वंचित होती जाएगी। इसलिए यह मुद्दा किसी एक पत्रकार या एक चैनल का नहीं, पूरे लोकतंत्र का है। बाक़ी, आपकी समझदारी पर छोड़ता हूँ।
Dr. Laxman Yadav109,308 görüntüleme • 6 gün önce

देश का दुर्भाग्य यह है कि यहाँ युवाओं के भविष्य पर नहीं, मंत्रियों की कुर्सियों पर मातम मनाया जाता है।
Dr. Laxman Yadav185,604 görüntüleme • 14 gün önce

RSS द्वारा देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों पर क़ब्ज़े की कहानी : भाग 2 आजकल शिक्षा जगत पर RSS के बढ़ते प्रभाव और विश्वविद्यालयों के भगवाकरण को लेकर देशभर में गंभीर चर्चा चल रही है। ऐसे समय में मैं आपके लिए कुछ ऐसे सबूत साझा करने की यह श्रृंखला लेकर आया हूँ, जिन्हें हमने पिछले कई वर्षों से लगातार आपके सामने रखा था, ताकि समय रहते आपको आगाह किया जा सके। आज वही सवाल राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुके हैं। यह वीडियो भी कुछ महीने पुराना है, जिसे मैंने अपने सोशल मीडिया संग्रहालय से आपके लिए निकाला है। इस वीडियो को स्वतंत्र पत्रकार Harsh Yadav ने बनाया था। आज इसे दोबारा साझा करने का उद्देश्य केवल इतना है कि लोग देखें—जो बातें तब कही जा रही थीं, वे आज किस तरह वास्तविकता के रूप में हमारे सामने खड़ी हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में "युवा कुंभ" जैसे आयोजनों के नाम पर RSS से जुड़े कार्यक्रम खुलेआम आयोजित किए जा रहे थे। कई जगह कॉलेज प्रशासन अलग-अलग नामों से अनुमति देकर इन कार्यक्रमों का हिस्सा बनता दिखाई दिया। ऐसे आयोजनों को लेकर छात्र संगठनों और शिक्षकों के एक वर्ग ने विश्वविद्यालय की संस्थागत निष्पक्षता पर सवाल उठाए और विरोध भी दर्ज कराया। विश्वविद्यालय विचार, बहस, शोध और आलोचनात्मक चिंतन के केंद्र होने चाहिए। लेकिन जब सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थानों का उपयोग किसी एक वैचारिक एजेंडे के प्रचार के लिए होने लगे, तो यह केवल एक कार्यक्रम का सवाल नहीं रह जाता, बल्कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक चरित्र का प्रश्न बन जाता है। छात्र विरोध में उतर चुके हैं, जनता सवाल पूछ रही है और कैंपस का माहौल बिगाड़ने की यह कोशिश अब सबके सामने है। सरकारी संस्थानों को किसी भी वैचारिक या राजनीतिक प्रभाव का माध्यम बनाने की प्रवृत्ति पर गंभीर बहस और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं। यह श्रृंखला आगे भी जारी रहेगी। दस्तावेज़ों, वीडियो और तथ्यों के साथ हम उन घटनाओं को सामने लाते रहेंगे, जिन्हें उस समय नज़रअंदाज़ किया गया, लेकिन जिनके परिणाम आज पूरे देश के सामने दिखाई दे रहे हैं।
Dr. Laxman Yadav112,998 görüntüleme • 11 gün önce

देश का सबसे बड़ा मज़ाक देखिए - एक तरफ़ लाखों B.Ed., D.El.Ed. और TET पास युवा भर्ती का इंतज़ार कर रहे हैं, दूसरी तरफ़ सरकारी स्कूलों में शिक्षक ही नहीं हैं। कहीं बच्चे धरने पर हैं, तो कहीं चपरासी बच्चों को पढ़ाने पर मजबूर है। अब यह साफ़ होता जा रहा है कि भाजपा सुनियोजित तरीके से सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को कमज़ोर करके बंद कराने की दिशा में बढ़ रही है, ताकि देश की वंचित और शोषित आबादी पढ़-लिख ही न पाए।
Dr. Laxman Yadav22,514 görüntüleme • 3 gün önce

निलंबन से आवाज़ें नहीं दबतीं, बल्कि और बुलंद होती हैं। सुनिए, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इस छात्र की बात।
Dr. Laxman Yadav37,411 görüntüleme • 5 gün önce

ज़ुल्म की उम्र लंबी नहीं होती; समय अंततः हर तानाशाही से हिसाब लेता है।
Dr. Laxman Yadav143,751 görüntüleme • 20 gün önce
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पुलिस बल के ऐसे सराहनीय कार्यों की जितनी प्रशंसा की जाए, कम है। बहुत बढ़िया!
Dr. Laxman Yadav98,870 görüntüleme • 20 gün önce

संसद मार्च से पहले जंतर-मंतर पर माहौल लगातार तनावपूर्ण होता जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस लगातार बल प्रयोग की चेतावनी दे रही है। बीती रात जंतर-मंतर के बाहर करीब 10 फीट ऊँची बैरिकेडिंग लगाकर पूरे इलाके को घेर दिया गया, मानो संसद मार्च को हर हाल में रोकने की तैयारी हो। अब प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग के दोनों ओर डटे हुए हैं।
Dr. Laxman Yadav93,846 görüntüleme • 21 gün önce

प्रयागराज की सड़कों पर उमड़ा छात्रों का जनसैलाब इस बात का संकेत है कि शिक्षा और युवाओं के भविष्य का सवाल अब किसी एक शहर तक सीमित नहीं रहा। जब तक छात्रों की आवाज़ सुनी नहीं जाएगी और उनकी चिंताओं का समाधान नहीं होगा, तब तक यह आंदोलन थमने वाला नहीं दिखता।
Dr. Laxman Yadav66,033 görüntüleme • 18 gün önce

जो लोग आज यह कह रहे हैं कि "हम कलाकार हैं, हमें राजनीति से क्या लेना-देना," उनसे एक सीधा सवाल है। जब कैमरे के सामने एक जैसी भाषा, एक जैसे भाव और लगभग एक जैसी स्क्रिप्ट के साथ बधाइयों वाले वीडियो रिकॉर्ड किए जा रहे थे, तब क्या वह राजनीति नहीं थी? अगर सत्ता के पक्ष में बोलना केवल "शुभकामना" माना जाएगा, लेकिन जनता के मुद्दों पर बोलना "राजनीति" कहलाएगा, तो यह दोहरा मापदंड है।
Dr. Laxman Yadav78,640 görüntüleme • 23 gün önce
3:27
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"झूठ बोलकर बच निकलने का दौर अब आसान नहीं रहा।" समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट कृष्ण कन्हैया पाल ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को जवाब देते हुए कहा: "जिस पोस्ट को निशिकांत दुबे ने रीपोस्ट किया, वह समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ आपत्तिजनक थी। मैंने पार्टी के संवैधानिक पदाधिकारी और अधिवक्ता के नाते कानूनी नोटिस भेजा। यदि उन्हें लगता है कि मेरी मानहानि कैसे हुई, तो उन्हें अपने कानूनी विशेषज्ञों से इसकी सलाह लेनी चाहिए।" यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि सोशल मीडिया पर आरोप उछालना आसान है, लेकिन अदालत और कानून के सामने हर शब्द का हिसाब देना पड़ता है। भाजपा की राजनीति में झूठ, आधी-अधूरी जानकारी और प्रोपेगेंडा के सहारे राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कोई नई बात नहीं है। लेकिन जब ऐसे दावों की कानूनी जांच होती है, तो वही लोग सफाई देते और खेद जताते दिखाई देते हैं। लोकतंत्र झूठ के शोर से नहीं, बल्कि सच, सबूत और संविधान के राज से चलता है।
Dr. Laxman Yadav85,847 görüntüleme • 27 gün önce

जिस देश में चपरासी को शिक्षक बनकर बच्चों को पढ़ाना पड़े, वहाँ की अहंकारी सत्ता 'विश्वगुरु' के सपने बेचने में व्यस्त है। यह वीडियो राजस्थान के एक सरकारी स्कूल का है। स्कूल में शिक्षक नहीं थे, तो बच्चों को चपरासी पढ़ा रहा था। इसके विरोध में कल छात्रों ने स्कूल पर ताला लगा दिया और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ़ अपना विरोध दर्ज कराया।
Dr. Laxman Yadav11,719 görüntüleme • 3 gün önce