
Dr. Laxman Yadav
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Author of the Best-Selling books 'Professor ki Diary' & 'Jaati Janaganana', Socialist, Constitutionalist, Political Analyst, Intercessor of Social Justice.
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OBC, SC और ST की हक़मारी देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में भी जारी है। ये आँकड़े चंद साल पुराने हैं, जिनमें साफ़ दिख रहा है कि इन वर्गों की हिस्सेदारी कितनी कम है। सरकार को अब नए आँकड़े सामने रखकर देश को बताना चाहिए कि देश की इतनी बड़ी आबादी के कितने लोग IITs और बड़े विश्वविद्यालयों तक पहुँच पाए हैं? आखिर हिस्सेदारी का सच क्या है? #IITs
Dr. Laxman Yadav49,433 görüntüleme • 2 gün önce

दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में आरोप है कि ABVP के द्वारा डीयू के प्रोफ़ेसर को कैंपस के भीतर पीटा गया है. ये RSS का ही छात्र संगठन है. जाँच हो और दोषी को सख्त सज़ा मिले. मगर अब ऐसा कहाँ होता है. भाजपा RSS ने देश के हर कैंपस में जितना हिंसक माहौल बना दिया है. ये बेहद चिंताजनक है. एक तरफ़ भाजपा शासित कई राज्यों में छात्रसंघ चुनाव पर बैन है, वहीं दूसरी तरफ ऐसी हिंसा. छात्र राजनीति को ऐसा बनाकर भाजपा भविष्य की राजनीति पर गहरा संकट पैदा कर रही है.
Dr. Laxman Yadav101,222 görüntüleme • 7 gün önce

आज़मगढ़ में प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही युवाओं को कथित तौर पर चेतावनी दी गई - "ज़्यादा देर तक दिखे तो मुक़दमे हो जाएँगे, बुद्धि ठिकाने आ जाएगी।" लेकिन सवाल यह है कि बुद्धि ठिकाने किसकी आने की ज़रूरत है? उन युवाओं की, जो शिक्षा, रोज़गार और अपने भविष्य की बात कर रहे हैं, या उस सत्ता की, जिसे जनता ने उनकी आवाज़ सुनने और समस्याओं का समाधान करने के लिए चुना था? लोकतंत्र में सवालों का जवाब धमकियों से नहीं, संवाद से दिया जाता है।
Dr. Laxman Yadav472,543 görüntüleme • 2 ay önce

साहिल के परिवार ने जातिगत अपमान के गंभीर आरोप लगाए हैं, उनकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। हमने समाज में ‘आरक्षण वाला’ कहकर दलित-पिछड़े छात्रों को अपमानित होते देखा है, जबकि आरक्षण EWS के लिए भी है। इसलिए चीटिंग की बहस अपनी जगह, लेकिन जातिगत भेदभाव के आरोपों को दबाया नहीं जा सकता।
Dr. Laxman Yadav23,559 görüntüleme • 3 gün önce

यह रोती हुई बच्ची विनोद साहनी की बेटी है… क्या सत्ता में बैठे लोग इसकी आँखों में देखकर कह सकते हैं कि यूपी में ‘क़ानून का राज’ है? एक पिता की जान चली गई, बेटी के हिस्से में आँसू आए और परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है। फिर किस मुँह से कानून-व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं? आज गोंडा में जो देखा, उसने भीतर तक झकझोर दिया। सवाल सिर्फ़ विनोद साहनी की हत्या का नहीं है—सवाल यह है कि आखिर यूपी में सत्ता का संरक्षण किसे है और क़ानून का डर किसके लिए? इस बिटिया के आँसू सत्ता से जवाब माँग रहे हैं—विनोद साहनी को न्याय कब मिलेगा?
Dr. Laxman Yadav82,834 görüntüleme • 13 gün önce

हुकूमत का नशा जब वर्दी तक उतर आए, भाषा ऐसी ही होती है।
Dr. Laxman Yadav58,268 görüntüleme • 15 gün önce

देश का दुर्भाग्य यह है कि यहाँ युवाओं के भविष्य पर नहीं, मंत्रियों की कुर्सियों पर मातम मनाया जाता है।
Dr. Laxman Yadav186,908 görüntüleme • 1 ay önce

RSS का असली चेहरा फिर सामने आ गया। RSS के सह-सरकार्यवाह अतुल लिमये ने अपने अधिकार, शिक्षा और रोज़गार की माँग करने वाली Gen Z को ही 'देशद्रोही' और 'संविधान-विरोधी' बता दिया। अब साफ़ है कि उन्हें जागरूक युवा नहीं, सिर्फ़ चुप रहने वाली पीढ़ी चाहिए। मुखौटा एक बार फिर उतर गया।
Dr. Laxman Yadav124,428 görüntüleme • 1 ay önce

ज़ुल्म की उम्र लंबी नहीं होती; समय अंततः हर तानाशाही से हिसाब लेता है।
Dr. Laxman Yadav144,373 görüntüleme • 2 ay önce

BJP-RSS बताए - दलित-पिछड़ों से इतनी नफ़रत आखिर क्यों? कन्नौज में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के मंदिर जाने के बाद परिसर धोया गया और अब हल्द्वानी में संसद के उच्च सदन राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम स्थल के कथित ‘शुद्धिकरण’ का मामला सामने आया है। यह कैसी राजनीति है? #BJPDalitVirodhi #BJPPichhdaVirodhi
Dr. Laxman Yadav95,230 görüntüleme • 1 ay önce

"सत्ता से सवाल करना अब आसान नहीं रहा..." News24 छोड़ने के बाद वरिष्ठ पत्रकार गरिमा सिंह ने टीवी मीडिया का ऐसा सच सामने रखा है, जिसे हर नागरिक को सुनना चाहिए। अगर किसी सरकार के दौर में पत्रकारों को सवाल पूछने से पहले दबाव, ट्रोलिंग और स्टूडियो तक पहुँचने वाली भीड़ का डर सताने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है। जब पत्रकार निर्भीक नहीं रहेंगे, तो जनता भी सच से वंचित होती जाएगी। इसलिए यह मुद्दा किसी एक पत्रकार या एक चैनल का नहीं, पूरे लोकतंत्र का है। बाक़ी, आपकी समझदारी पर छोड़ता हूँ।
Dr. Laxman Yadav110,414 görüntüleme • 1 ay önce

RSS द्वारा देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों पर क़ब्ज़े की कहानी : भाग 2 आजकल शिक्षा जगत पर RSS के बढ़ते प्रभाव और विश्वविद्यालयों के भगवाकरण को लेकर देशभर में गंभीर चर्चा चल रही है। ऐसे समय में मैं आपके लिए कुछ ऐसे सबूत साझा करने की यह श्रृंखला लेकर आया हूँ, जिन्हें हमने पिछले कई वर्षों से लगातार आपके सामने रखा था, ताकि समय रहते आपको आगाह किया जा सके। आज वही सवाल राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुके हैं। यह वीडियो भी कुछ महीने पुराना है, जिसे मैंने अपने सोशल मीडिया संग्रहालय से आपके लिए निकाला है। इस वीडियो को स्वतंत्र पत्रकार Harsh Yadav ने बनाया था। आज इसे दोबारा साझा करने का उद्देश्य केवल इतना है कि लोग देखें—जो बातें तब कही जा रही थीं, वे आज किस तरह वास्तविकता के रूप में हमारे सामने खड़ी हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में "युवा कुंभ" जैसे आयोजनों के नाम पर RSS से जुड़े कार्यक्रम खुलेआम आयोजित किए जा रहे थे। कई जगह कॉलेज प्रशासन अलग-अलग नामों से अनुमति देकर इन कार्यक्रमों का हिस्सा बनता दिखाई दिया। ऐसे आयोजनों को लेकर छात्र संगठनों और शिक्षकों के एक वर्ग ने विश्वविद्यालय की संस्थागत निष्पक्षता पर सवाल उठाए और विरोध भी दर्ज कराया। विश्वविद्यालय विचार, बहस, शोध और आलोचनात्मक चिंतन के केंद्र होने चाहिए। लेकिन जब सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थानों का उपयोग किसी एक वैचारिक एजेंडे के प्रचार के लिए होने लगे, तो यह केवल एक कार्यक्रम का सवाल नहीं रह जाता, बल्कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक चरित्र का प्रश्न बन जाता है। छात्र विरोध में उतर चुके हैं, जनता सवाल पूछ रही है और कैंपस का माहौल बिगाड़ने की यह कोशिश अब सबके सामने है। सरकारी संस्थानों को किसी भी वैचारिक या राजनीतिक प्रभाव का माध्यम बनाने की प्रवृत्ति पर गंभीर बहस और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं। यह श्रृंखला आगे भी जारी रहेगी। दस्तावेज़ों, वीडियो और तथ्यों के साथ हम उन घटनाओं को सामने लाते रहेंगे, जिन्हें उस समय नज़रअंदाज़ किया गया, लेकिन जिनके परिणाम आज पूरे देश के सामने दिखाई दे रहे हैं।
Dr. Laxman Yadav113,610 görüntüleme • 1 ay önce

बांग्लादेश में मस्जिद से लोगों ने ऐलान किया कि प्रिय नागरिकों, हम 'स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन' आपसे अपील करते हैं कि देश में अशांति के इस दौर में हम सभी को सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखना है. हमें हिंदू अल्पसंख्यकों की रक्षा करनी है, उपद्रवियों से उनके जान-माल की रक्षा करें। ये आपकी जिम्मेदारी है, हमारी जिम्मेदारी है, सबकी जिम्मेदारी है।
Dr. Laxman Yadav1,256,637 görüntüleme • 2 yıl önce

अविनाश पांडेय जी ख़ुद को ‘सिंघम’ समझ बैठे थे! शायद लगा - बंद कमरा है, कैमरा नहीं है, मारो और बाद में पीड़ित को ही झूठा बता दो। लेकिन साहब, आपका पुराना ‘सिंघम अवतार’ कैमरे में क़ैद है - प्रदर्शनकारियों पर थप्पड़ बरसाते और पुलिस वैन में युवक को लात-घूंसों से पीटते हुए। तो बंद कमरे में क्या हुआ होगा, इस पर जनता सवाल क्यों न करे? दिग्विजय भाटी के शरीर के घाव भी सवाल कर रहे हैं। योगी सरकार बताए - यूपी में पुलिस कानून से चलेगी या ‘गुंडाराज’ से?
Dr. Laxman Yadav65,704 görüntüleme • 1 ay önce