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Dr. Laxman Yadav

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Author of the Best-Selling books 'Professor ki Diary' & 'Jaati Janaganana', Socialist, Constitutionalist, Political Analyst, Intercessor of Social Justice.

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NDA सरकार में भी इस्तीफ़े होते हैं.

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अपने विवेक को सबसे बड़ा मार्गदर्शक बनाइए।

अपने विवेक को सबसे बड़ा मार्गदर्शक बनाइए।

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उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एक युवक मोटर साइकिल पर अपनी मां को बैठाकर बाजार जा रहा था. कि बीच रास्ते में ही तीन मोटर साइकिलों पर सवार आधा दर्जन से अधिक युवकों ने रोक लिया। मारपीट कर तमंचे के बल पर अगवा कर लिया और फिर उसको बेरहमी से पीटा. लेकिन किसी टीवी चैनल में इतनी हिम्मत नहीं हो रही कि इसे जंगलराज बोल दे.

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एक युवक मोटर साइकिल पर अपनी मां को बैठाकर बाजार जा रहा था. कि बीच रास्ते में ही तीन मोटर साइकिलों पर सवार आधा दर्जन से अधिक युवकों ने रोक लिया। मारपीट कर तमंचे के बल पर अगवा कर लिया और फिर उसको बेरहमी से पीटा. लेकिन किसी टीवी चैनल में इतनी हिम्मत नहीं हो रही कि इसे जंगलराज बोल दे.

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जंतर-मंतर पर संघर्षरत युवाओं से मिलने पहुँचे Samajwadi Party के सांसद Dharmendra Yadav जी को मोदी सरकार की दिल्ली पुलिस ने रोकने की पूरी कोशिश की। एक निर्वाचित सांसद का हाथ पकड़कर सत्ता ने लोकतंत्र नहीं, बल्कि अपना अहंकार दिखाया। लेकिन तमाम रोक-टोक और दमन के बावजूद धर्मेंद्र यादव जी युवाओं के समर्थन में मजबूती से खड़े रहे और सत्ता को साफ़ संदेश दे दिया - जनता की आवाज़ को न पुलिस रोक सकती है, न बैरिकेड और न ही सत्ता का अहंकार।

जंतर-मंतर पर संघर्षरत युवाओं से मिलने पहुँचे Samajwadi Party के सांसद Dharmendra Yadav जी को मोदी सरकार की दिल्ली पुलिस ने रोकने की पूरी कोशिश की। एक निर्वाचित सांसद का हाथ पकड़कर सत्ता ने लोकतंत्र नहीं, बल्कि अपना अहंकार दिखाया। लेकिन तमाम रोक-टोक और दमन के बावजूद धर्मेंद्र यादव जी युवाओं के समर्थन में मजबूती से खड़े रहे और सत्ता को साफ़ संदेश दे दिया - जनता की आवाज़ को न पुलिस रोक सकती है, न बैरिकेड और न ही सत्ता का अहंकार।

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"खामोश हैं, जब तक भी रहा जाएगा हमसे, क़ातिल को मसीहा न कहा जाएगा।"

"खामोश हैं, जब तक भी रहा जाएगा हमसे, क़ातिल को मसीहा न कहा जाएगा।"

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बिहार में भी अमृतकाल आ गया है... भरोसा न हो तो ये बानगी देख लीजिए!

बिहार में भी अमृतकाल आ गया है... भरोसा न हो तो ये बानगी देख लीजिए!

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कावँड यात्रा के रास्ते पर बैरिकेडिंग बांधते मुसलमान।

कावँड यात्रा के रास्ते पर बैरिकेडिंग बांधते मुसलमान।

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देश में बेरोज़गारी, महंगाई और भर्ती घोटालों की चर्चा है, लेकिन प्रधानमंत्री जी फिर विदेश दौरे पर हैं - शायद भारत की समस्याएँ अब फ्रांस और स्लोवाकिया से ही हल होंगी।

देश में बेरोज़गारी, महंगाई और भर्ती घोटालों की चर्चा है, लेकिन प्रधानमंत्री जी फिर विदेश दौरे पर हैं - शायद भारत की समस्याएँ अब फ्रांस और स्लोवाकिया से ही हल होंगी।

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ये खेल भावना का सम्मान है. #OlimpiadasParis2024

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ये कितना दुर्भाग्यपूर्ण है देश के लिए!

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ये वीडिओ रुड़की का बताया जा रहा है. ख़बरों के मुताबिक कांवड़ियों से ई-रिक्शा साइड से 'टच' हो गया था. और कांवड़ियों ने ई-रिक्शा का ये हाल कर दिया। इन्हें देखकर ऐसा लग रहा है कि सरकार और प्रशासन का ज़रा भी भय नहीं है इनके अंदर। ये ऐसा क्यों कर पा रहे हैं, इसका जवाब कौन देगा?

ये वीडिओ रुड़की का बताया जा रहा है. ख़बरों के मुताबिक कांवड़ियों से ई-रिक्शा साइड से 'टच' हो गया था. और कांवड़ियों ने ई-रिक्शा का ये हाल कर दिया। इन्हें देखकर ऐसा लग रहा है कि सरकार और प्रशासन का ज़रा भी भय नहीं है इनके अंदर। ये ऐसा क्यों कर पा रहे हैं, इसका जवाब कौन देगा?

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सबूत तो चंडीगढ़ के मेयर चुनाव में लाइव मिल चुका था, हुआ क्या? सबूत तो Samajwadi Party के नेता Akhilesh Yadav जी ने 18,000 सबूत Election Commission of India को भिजवाए थे कि धांधली हुई है. मगर हुआ क्या? इस बार एटम बम तो फूटा है, देखना दिलचस्प है कि क्या होता है.

सबूत तो चंडीगढ़ के मेयर चुनाव में लाइव मिल चुका था, हुआ क्या? सबूत तो Samajwadi Party के नेता Akhilesh Yadav जी ने 18,000 सबूत Election Commission of India को भिजवाए थे कि धांधली हुई है. मगर हुआ क्या? इस बार एटम बम तो फूटा है, देखना दिलचस्प है कि क्या होता है.

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"गुलामों को गुलामी का एहसास करा दो, वह अपनी जंजीरें खुद तोड़ देगा." :- महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले #Bangladesh

"गुलामों को गुलामी का एहसास करा दो, वह अपनी जंजीरें खुद तोड़ देगा." :- महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले #Bangladesh

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शिक्षा का बजट- 2013 - 4.77% 2023 - 2.50% और ये प्रधानमंत्री रहते किया है इन्होंने। डंका बज रहा है न?

शिक्षा का बजट- 2013 - 4.77% 2023 - 2.50% और ये प्रधानमंत्री रहते किया है इन्होंने। डंका बज रहा है न?

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दिल्ली के ओल्ड राजेन्द्र नगर में कल रात Rau's IAS कोचिंग सेंटर के बेसमेंट की लाइब्रेरी में नाले का पानी भरने का वीडियो सामने आया है। बेसमेंट में पानी भरने से 3 छात्रों की दर्दनाक मौत।

दिल्ली के ओल्ड राजेन्द्र नगर में कल रात Rau's IAS कोचिंग सेंटर के बेसमेंट की लाइब्रेरी में नाले का पानी भरने का वीडियो सामने आया है। बेसमेंट में पानी भरने से 3 छात्रों की दर्दनाक मौत।

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सारे एक्ज़ामों पर सवाल उठाना सदन के लिए उचित नहीं, तो सड़क पर विद्यार्थी सवाल उठा रहे हैं अध्यक्ष महोदया। CBI जाँच हो रही है, साज़िश करने वाले पकड़ा रहे हैं, लाखों रुपए में पेपर मिल रहे, नौकरी बिक रही और आप हैं कि हर बार दिल ही जीत लेते हैं।

सारे एक्ज़ामों पर सवाल उठाना सदन के लिए उचित नहीं, तो सड़क पर विद्यार्थी सवाल उठा रहे हैं अध्यक्ष महोदया। CBI जाँच हो रही है, साज़िश करने वाले पकड़ा रहे हैं, लाखों रुपए में पेपर मिल रहे, नौकरी बिक रही और आप हैं कि हर बार दिल ही जीत लेते हैं।

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मारो... मारो... और मारो! लेकिन क्यों? क्या इसलिए कि ये शिक्षा की बात कर रहे हैं? क्या इसलिए कि ये रोज़गार माँग रहे हैं? या इसलिए कि ये बेहतर व्यवस्था और अपने भविष्य का अधिकार माँग रहे हैं? लोकतंत्र में सवालों का जवाब संवाद होना चाहिए, डंडा नहीं।

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मारो... मारो... और मारो! लेकिन क्यों? क्या इसलिए कि ये शिक्षा की बात कर रहे हैं? क्या इसलिए कि ये रोज़गार माँग रहे हैं? या इसलिए कि ये बेहतर व्यवस्था और अपने भविष्य का अधिकार माँग रहे हैं? लोकतंत्र में सवालों का जवाब संवाद होना चाहिए, डंडा नहीं।

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मुझे नहीं पता कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के ऊपर किस बात का दबाव है? लेकिन इनके बयान पर मुझे नायक फ़िल्म का ये एक दृश्य याद आ गया, जिसे मैं आपसे साझा कर रहा हूँ.

मुझे नहीं पता कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के ऊपर किस बात का दबाव है? लेकिन इनके बयान पर मुझे नायक फ़िल्म का ये एक दृश्य याद आ गया, जिसे मैं आपसे साझा कर रहा हूँ.

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अब लगता है सरकार को पुलिस की सुरक्षा का भी इंतेजाम करना पड़ेगा!

अब लगता है सरकार को पुलिस की सुरक्षा का भी इंतेजाम करना पड़ेगा!

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RSS द्वारा देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों पर क़ब्ज़े की कहानी : भाग 2 आजकल शिक्षा जगत पर RSS के बढ़ते प्रभाव और विश्वविद्यालयों के भगवाकरण को लेकर देशभर में गंभीर चर्चा चल रही है। ऐसे समय में मैं आपके लिए कुछ ऐसे सबूत साझा करने की यह श्रृंखला लेकर आया हूँ, जिन्हें हमने पिछले कई वर्षों से लगातार आपके सामने रखा था, ताकि समय रहते आपको आगाह किया जा सके। आज वही सवाल राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुके हैं। यह वीडियो भी कुछ महीने पुराना है, जिसे मैंने अपने सोशल मीडिया संग्रहालय से आपके लिए निकाला है। इस वीडियो को स्वतंत्र पत्रकार Harsh Yadav ने बनाया था। आज इसे दोबारा साझा करने का उद्देश्य केवल इतना है कि लोग देखें—जो बातें तब कही जा रही थीं, वे आज किस तरह वास्तविकता के रूप में हमारे सामने खड़ी हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में "युवा कुंभ" जैसे आयोजनों के नाम पर RSS से जुड़े कार्यक्रम खुलेआम आयोजित किए जा रहे थे। कई जगह कॉलेज प्रशासन अलग-अलग नामों से अनुमति देकर इन कार्यक्रमों का हिस्सा बनता दिखाई दिया। ऐसे आयोजनों को लेकर छात्र संगठनों और शिक्षकों के एक वर्ग ने विश्वविद्यालय की संस्थागत निष्पक्षता पर सवाल उठाए और विरोध भी दर्ज कराया। विश्वविद्यालय विचार, बहस, शोध और आलोचनात्मक चिंतन के केंद्र होने चाहिए। लेकिन जब सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थानों का उपयोग किसी एक वैचारिक एजेंडे के प्रचार के लिए होने लगे, तो यह केवल एक कार्यक्रम का सवाल नहीं रह जाता, बल्कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक चरित्र का प्रश्न बन जाता है। छात्र विरोध में उतर चुके हैं, जनता सवाल पूछ रही है और कैंपस का माहौल बिगाड़ने की यह कोशिश अब सबके सामने है। सरकारी संस्थानों को किसी भी वैचारिक या राजनीतिक प्रभाव का माध्यम बनाने की प्रवृत्ति पर गंभीर बहस और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं। यह श्रृंखला आगे भी जारी रहेगी। दस्तावेज़ों, वीडियो और तथ्यों के साथ हम उन घटनाओं को सामने लाते रहेंगे, जिन्हें उस समय नज़रअंदाज़ किया गया, लेकिन जिनके परिणाम आज पूरे देश के सामने दिखाई दे रहे हैं।

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112,998 次观看 • 11 天前

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"झूठ बोलकर बच निकलने का दौर अब आसान नहीं रहा।" समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट कृष्ण कन्हैया पाल ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को जवाब देते हुए कहा: "जिस पोस्ट को निशिकांत दुबे ने रीपोस्ट किया, वह समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ आपत्तिजनक थी। मैंने पार्टी के संवैधानिक पदाधिकारी और अधिवक्ता के नाते कानूनी नोटिस भेजा। यदि उन्हें लगता है कि मेरी मानहानि कैसे हुई, तो उन्हें अपने कानूनी विशेषज्ञों से इसकी सलाह लेनी चाहिए।" यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि सोशल मीडिया पर आरोप उछालना आसान है, लेकिन अदालत और कानून के सामने हर शब्द का हिसाब देना पड़ता है। भाजपा की राजनीति में झूठ, आधी-अधूरी जानकारी और प्रोपेगेंडा के सहारे राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कोई नई बात नहीं है। लेकिन जब ऐसे दावों की कानूनी जांच होती है, तो वही लोग सफाई देते और खेद जताते दिखाई देते हैं। लोकतंत्र झूठ के शोर से नहीं, बल्कि सच, सबूत और संविधान के राज से चलता है।

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85,847 次观看 • 27 天前