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Manish Mishra

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अध्यक्ष - देवरिया सेवा प्रन्यास। नेशनल कमिश्नर भारत स्काउट्स एंड गाइड। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर🥇

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चपरासी Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ गुवाहाटी में बैठकर भौंक रहा था कि, “केस करिए, मैं यहीं बैठा हूँ”… लेकिन जैसे ही केस दर्ज हुआ और असम व दिल्ली पुलिस उस बखेड़ा के घर पहुँची, वही भींगी बिल्ली बनकर गायब हो गया, और जाकर 10 जनपथ के दरबारी तेलंगाना के मुख्यमंत्री की शरण में छिप गया। बखेड़े जब इतना भरोसा था अपने आरोपों पर, तो मिल क्यों नहीं रहा है पुलिस से। अभी तो यह पहली मंजिल है, तुम तो अभी से घबरा गए। #BhagodaPawanKhera

चपरासी Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ गुवाहाटी में बैठकर भौंक रहा था कि, “केस करिए, मैं यहीं बैठा हूँ”… लेकिन जैसे ही केस दर्ज हुआ और असम व दिल्ली पुलिस उस बखेड़ा के घर पहुँची, वही भींगी बिल्ली बनकर गायब हो गया, और जाकर 10 जनपथ के दरबारी तेलंगाना के मुख्यमंत्री की शरण में छिप गया। बखेड़े जब इतना भरोसा था अपने आरोपों पर, तो मिल क्यों नहीं रहा है पुलिस से। अभी तो यह पहली मंजिल है, तुम तो अभी से घबरा गए। #BhagodaPawanKhera

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अब चपरासी Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ खुद कह रहा है कि इसने जो 3 पासपोर्ट क्लेम किए वो सही है या गलत उसकी हमें जानकारी नहीं है, सरकार जांच करे… तो बखेड़े जब तुझे जानकारी ही नहीं थी, तो PC करके भौंकने क्यों आ गया। किसी पर कुछ भी आरोप लगाकर किसी के परिवार को बदनाम करके क्या सोचा था कि बच जाएगा। इस बार नहीं बचने वाला है तू, चाहे किसी भी बिल में घुस जा।

अब चपरासी Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ खुद कह रहा है कि इसने जो 3 पासपोर्ट क्लेम किए वो सही है या गलत उसकी हमें जानकारी नहीं है, सरकार जांच करे… तो बखेड़े जब तुझे जानकारी ही नहीं थी, तो PC करके भौंकने क्यों आ गया। किसी पर कुछ भी आरोप लगाकर किसी के परिवार को बदनाम करके क्या सोचा था कि बच जाएगा। इस बार नहीं बचने वाला है तू, चाहे किसी भी बिल में घुस जा।

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शीला दीक्षित जी के चपरासी और Rahul Gandhi के जूते साफ करने वाला पवन "बखेड़ा", जो हर रोज सफेद कुर्ते में कांग्रेस की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए मुंह उठाकर आ जाता है। लेकिन सफेद कुर्ते के पीछे इसका चरित्र एकदम ही काला है। इस इंसान ने असम चुनाव को प्रभावित करने के लिए असम एवं असम की जनता को जिस तरह से धोखा दिया है, आप सुनेंगे तो आपके पांव के नीचे से जमीन खिसक जाएगी। चुनाव की जो प्रक्रिया होती है, उसका बड़ा सीधा सा नियम है। आप जाइए जनता के पास, अपनी बात रखिए। जनता आपके द्वारा रखी गई बातों के हिसाब से या अपनी पसंद के हिसाब से अपनी सरकार चुनेगी, लेकिन वर्णसंकर राहुल गांधी के चरणचुंबक और पाकिस्तानी एजेंट पाईजान गौरव गोगोई के लिए फील्डिंग कर रहे पवन "बखेड़ा" से देशभक्ति और संवैधानिक प्रक्रिया में भरोसा रखने की उम्मीद करना ही व्यर्थ है। यह आदमी पूर्वोत्तर भारत, असम और बांग्लादेश के जो militant organisations हैं, उनके साथ मिलकर असम के चुनाव में गड़बड़ी करने की और असम में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा है। इस मामले में इसके ऊपर FIR भी हुए हैं, लेकिन पहले शीला दीक्षित जी के और अब गांधी परिवार की चाटुकारिता करते-करते और उनके जूते चाटकर साफ करते-करते यह आदमी इतना ज्यादा ढीठ और बेशर्म हो चुका है कि अपने आकाओं को खुश करने के लिए देश से और असम की जनता से गद्दारी करना भी मंजूर कर रहा है। Pawan Khera 🇮🇳

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रैली से पहले उम्मीदवार का ही अपहरण हो जाए, उस स्थिति में कोई क्या करेगा? रजत शर्मा जी जो कुछ बता रहे हैं, मैं उस घटना का प्रत्यक्षदर्शी रहा हूँ। मैंने हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जो देखा, उसके बाद मुझे एहसास हुआ कि आख़िर कैसे देश के गृह मंत्री श्री Amit Shah जी, इतनी सारी चुनौतियों के बावजूद इतने धीरे-गंभीर और शांत रह लेते हैं। हमलोग संदेशखाली में थे। उस संदेशखाली में, जहाँ ममता के राज में ED अधिकारियों तक को खदेड़ दिया गया था, जहाँ दलितों व जनजातीय महिलाओं पर TMC के शाहजहाँ शेख द्वारा अत्याचार किया जाता था। जहाँ TMC के आतंकी की तूती बोलती थी। उस संदेशखाली में गृह मंत्री जी ने, एक पीड़ित दलित महिला को उम्मीदवार बनाया। रेखा पात्रा जी, वहाँ भाजपा की उम्मीदवार बनीं। चुनाव प्रचार के लिए मंच सज चुका था। गृह मंत्री जी, रेखा पात्रा जी के प्रचार के लिए आ रहे थे। मंच पर उस समय ऐसी स्थिति थी कि जिस उम्मीदवार के लिए गृहमंत्री जी प्रचार करने आए थे, उस उम्मीदवार का कहीं अता-पता ही नहीं था। चूँकि गृह मंत्री जी के आने से पहले सारी व्यवस्थाओं में माननीय Dr Nishikant Dubey जी शरीक थे। मैं भी वहीं पर था। इसलिए मैं देख पा रहा था, कि सभी लोग चिंतित थे कि आखिर हमारी प्रत्याशी कहां गई? TMC के गुंडो ने बंगाल में जो अराजकता फैला रखी थी, उससे भी हम भलीभांति परिचित थे। हमारे मन में कुछ शंकाएँ भी आ रही थीं। जैसे कि माननीय गृह मंत्री जी वहाँ पहुँचे, निशिकांत भैया ने उन्हें सारी बात बताते हुए थोड़ा इंतज़ार करने को कहा। लेकिन गृह मंत्री जी नहीं रुके, उन्होंने हमारी उम्मीदवार रेखा पात्रा का नंबर निशिकांत जी से लिया, और उसके बाद सब कुछ आसानी से होता गया। शायद पूरा महकमा alert हो गया होगा, और TMC के गुंडों को भी पता चल गया होगा, कि वो किसे छेड़ने का प्रयास कर रहे हैं। यही कारण था कि कुछ ही मिनटों के अंदर रेखा पात्रा को सफलतापूर्वक stage तक लाया गया। निर्भीक रेखा पात्रा ने अपने गृह मंत्री के सामने शांत स्वभाव में अपने क्षेत्र की माँग रखी और गृह मंत्री जी ने उन मांगों को स्वीकार करने के साथ-साथ बेहद शांत स्वभाव से पूरे मामले को handle कर लिया। मतलब पहले एक दलित महिला को उम्मीदवार बनाना और फिर उसके मान की रक्षा करना, श्री अमित शाह जी ने उस दिन जो किया वह हम जैसे करोड़ो कार्यकर्ताओं के लिए एक inspiration था। हमारी उम्मीदवार रेखा पात्रा के गायब होने की ख़बर के बाद जहाँ सबके माथे पर चिंता की लकीरें थीं, लेकिन माननीय गृहमंत्री जी ने उसे जैसे मिनटों में हैंडल किया, वो क्राइसिस मैनेजमेंट की वो अभूतपूर्व कला का प्रदर्शन था, जिसे आने वाले दिनों में case study के रूप में research किया जाएगा। और हाँ, माननीय सांसद श्री निशिकांत दुबे जी, गृहमंत्री जी के बताए रास्ते पर चलते हुए, किस तरह से इस संकट के समाधान के रथी बने, वह भी इस वीडियो में आप स्वयं ही देखिए और सुनिए।

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ये The Lallantop का Siddhant Mohan खुद कह रहा है कि कांग्रेस के मीडिया व कम्युनिकेशन से जुड़े लोग ही मान रहे हैं कि जो डॉक्यूमेंट दिखाए गए थे, वे फर्जी थे। इतना ही नहीं, कंपनी के रजिस्ट्रेशन तक की टाइमिंग भी PC से जस्ट पहले की है। प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले कंपनी का रजिस्ट्रेशन किया गया। एक भाजपा का नेता नहीं बल्कि कांग्रेस का दल्ला पत्तलकार ही कह रहा है कि पासपोर्ट से लेकर कंपनी तक के कागज़ फर्जी थे, लेकिन फिर भी उसी आधार पर माननीय मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma जी के परिवार और बच्चों को, जो राजनीति में भी नहीं है, उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया। और तो इतना सब जानते हुए भी यह दल्ला मुख्यमंत्री जी के भाषा पर ज्ञान दे रहा था।

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दस जनपथ के दरबारी पत्तलकार Aadesh Rawal ने बड़ी चालाकी से अपना यूट्यूब चैनल “मालिटिक्स” डिलीट कर दिया... फर्जी पत्रकार आदेश रावल, समय आने पर तुम्हारी पूरी कुंडली खोली जाएगी। बंगाल में बीजेपी के खिलाफ फर्जी वीडियो और भ्रम फैलाने का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट दस जनपथ से मिला था। मालिटिक्स के जरिए खूब प्रोपेगेंडा चलाया गया, लेकिन जनता ने सब खारिज कर दिया और बीजेपी ने बंगाल में प्रचंड जीत दर्ज की। अब हालात ये हैं कि आदेश रावल मालिटिक्स के कर्मचारियों का पैसा लेकर फरार हो गया है। पिछले तीन महीनों से कर्मचारियों को सैलरी तक नहीं मिली। कांग्रेस के मेरे करीबी मित्र ने बताया कि कॉन्ट्रैक्ट के पैसे मांगने आदेश रावल कांग्रेस सोशल मीडिया के जनरल सेक्रेटरी के आवास पर पहुंचा था, लेकिन दरवाजे पर ही चप्पलों से उसका स्वागत हो गया। गौरतलब है कि आदेश रावल ने मालिटिक्स यूट्यूब चैनल पर जयराम रमेश के खिलाफ भी अनर्गल बयानबाजी की थी। मेरी सूचना के अनुसार, आदेश रावल ने जयराम रमेश से संबंधित वीडियो डिलीट करने के लिए यूट्यूब चैनल कुछ समय के लिए प्राइवेट किया है। लेकिन कुछ भी कहो, कांग्रेस की आपसी नूरा-कुश्ती देखने में खूब मजा आ रहा है। सुधर जाओ आदेश रावल, नहीं तो तुम्हारा मालिक चपरासी पवन खेड़ा भी तुम्हें नहीं बचा पाएगा।

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दल्लनटॉप जब अलग-अलग तरह की conspiracy theories चलाकर मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma जी के खिलाफ नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रहा था, उसी वक्त India Today NE के एडिटर खुद बता रहे हैं कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ ही घंटों के भीतर उनकी टीम ने चपरासी पवन खेड़ा द्वारा दिखाए गए दस्तावेज़ों को जांच की थी तो पासपोर्ट से लेकर कंपनी के कागज़ तक फर्जी थे और कंपनी का रजिस्ट्रेशन भी प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले हुआ था। जब मीडिया में सब जगह यह साफ था कि दस्तावेज़ फर्जी हैं, तब भी The Lallantop की टीम ने जांच पड़ताल क्यों नहीं की? क्यों बिना फैक्ट चेक के एक परिवार और बच्चों को, जो राजनीति में भी नहीं है, उसे मानसिक रूप से परेशान कर रहे थे। पत्रकारिता का धर्म है फैक्ट चेक कर तथ्यों को सामने लाना, लेकिन यहाँ तो उल्टा ही चल रहा है, फर्जी नैरेटिव को हवा और फिर मुख्यमंत्री जी के भाषा पर ज्ञान देने।

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