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Mohit Bharat

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PWD activist P-Poor || W-Weak || D-Depressed लठैतवाद की छाती पर, नेहरू - गाँधी - अम्बेडकर...✊ RTs ≠ Endorsements

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निहाल शुक्ला और रजत शुक्ला की दुःखद मौत...! ब्राह्मण चाहे सफाईकर्मी के रूप में काम करके मर जाए। लेकिन... जातिवादियों को... सारे ब्राह्मण राम मंदिर के पुजारी और CJI के रिश्तेदार नज़र आते हैं।

निहाल शुक्ला और रजत शुक्ला की दुःखद मौत...! ब्राह्मण चाहे सफाईकर्मी के रूप में काम करके मर जाए। लेकिन... जातिवादियों को... सारे ब्राह्मण राम मंदिर के पुजारी और CJI के रिश्तेदार नज़र आते हैं।

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गुर्जर विदेशी हैं। भैंसचोरी करने के उद्देश्य से बाहर से आए। 20 वर्षों से हमारा पानी रोककर बैठे हैं। ~ मीणा समाज पटेल। इस तरह के बयानों से बचना चाहिए। 🙏🙏🙏

गुर्जर विदेशी हैं। भैंसचोरी करने के उद्देश्य से बाहर से आए। 20 वर्षों से हमारा पानी रोककर बैठे हैं। ~ मीणा समाज पटेल। इस तरह के बयानों से बचना चाहिए। 🙏🙏🙏

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राहुल यादव 30 वर्ष तक फॉर्म भरेगा। अंकित अग्रवाल 24 में ही ओवर एज है। यह जातिगत भेदभाव क्यों? 😭

राहुल यादव 30 वर्ष तक फॉर्म भरेगा। अंकित अग्रवाल 24 में ही ओवर एज है। यह जातिगत भेदभाव क्यों? 😭

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मेरी क्या गलती है? 😃 मुझे ऐसे क्रांति कृत्य करने वाले जमींदार ही दिखते हैं। ये दोनों भी जमींदार हैं। जमीनों के फुल मजे ले रहे हैं। राजस्थान के किसी बनिया या कुम्हार को ऐसे रील बनाते देखा है क्या आपने? 🤔

मेरी क्या गलती है? 😃 मुझे ऐसे क्रांति कृत्य करने वाले जमींदार ही दिखते हैं। ये दोनों भी जमींदार हैं। जमीनों के फुल मजे ले रहे हैं। राजस्थान के किसी बनिया या कुम्हार को ऐसे रील बनाते देखा है क्या आपने? 🤔

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⛔️ भागवत कथा सब के लिए है। सब सुन सकते हैं तो सब बोल क्यों नही सकते ? - अखिलेश यादव। ⛔️ भैंस का दूध सब के लिए है। सब पी सकते हैं तो सब बेच क्यों नही सकते ? - मोहित भारत। Note : कुतर्क का जवाब कुतर्क से देना पड़ेगा।🙏

⛔️ भागवत कथा सब के लिए है। सब सुन सकते हैं तो सब बोल क्यों नही सकते ? - अखिलेश यादव। ⛔️ भैंस का दूध सब के लिए है। सब पी सकते हैं तो सब बेच क्यों नही सकते ? - मोहित भारत। Note : कुतर्क का जवाब कुतर्क से देना पड़ेगा।🙏

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उत्तरप्रदेश के ब्राह्मणों... 🔰 जहाँ BJP तुम्हें गाली पड़वा रही है... 🔰 जहाँ...सपा लठ्ठ लेकर डरा रही है... 🔰 वहीं...BSP खुले मंच तुमसे हाथ मिला रही है। फैसला तुमको करना है.... 🙏 बंधुआ मजदूरी या सम्मानजनक भागीदारी? 🤔🙏 जय भगवान परशुराम... 🚩

उत्तरप्रदेश के ब्राह्मणों... 🔰 जहाँ BJP तुम्हें गाली पड़वा रही है... 🔰 जहाँ...सपा लठ्ठ लेकर डरा रही है... 🔰 वहीं...BSP खुले मंच तुमसे हाथ मिला रही है। फैसला तुमको करना है.... 🙏 बंधुआ मजदूरी या सम्मानजनक भागीदारी? 🤔🙏 जय भगवान परशुराम... 🚩

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मैं कक्षा 8 में बैठा था... कम ही बच्चे थे तो ऐसे ही चर्चा शुरू हो गई। मैं और मेरे 2 छात्र... 🔰 एक दलित 🔰 दूसरा 'भूमिहीन OBC' दोनों एक बार गाँव के एक जमींदार के घर किसी कार्यक्रम में गए। एक ने अपने हाथ से पानी पी लिया... ज़ब दलित बच्चे का नंबर आया तो जमींदार ने बोला कि तू रुक... मैं पानी पिला देता हूँ तुझे। फिर वह दलित बच्चा बिना पानी पिए ही अपने घर लौट गया। वे बच्चे अभी वामपंथ का नाम भी नहीं सुने होंगे। यह कहा जा सकता है कि वामपंथ ने चीजें बढ़ा-चढ़ा कर प्रस्तुत की होंगी... लेकिन ये चीजें समाज में बहुत पहले से विद्यमान रही हैं। एक सवर्ण एक्टिविस्ट ने दलित उत्पीड़न को फर्जी बताया है। मुझे भी इस बयान का समर्थन करना चाहिए...? 🤔 अगर मैं भूमिहीन न होता तो शायद कर पाता। मेरी जाति का इकलौता घर है... हमारा। हम भी कुआँ से पानी लेकर आए... लेकिन कुआँ हमारा नहीं था। कुआँ खोदने के लिए मानव श्रम के साथ ही जमीनों पर नियंत्रण चाहिए। जो 100% ऐतिहासिक तौर पर गाँव में बाहुल्यता रखने वाली जमींदार जाति का ही होता है। दलित, ब्राह्मण, बनिया, कुम्हार, नाई, सुथार आदि भूमिहीन जातियाँ जमीन की नियंत्रणकर्ता नहीं हुआ करती थीं... 🙏 आज भी कई जमींदार बंधु स्वयं को गाँव का मालिक व अन्य को शरणार्थी समझते हैं। राजस्थान के गाँवों में सर्वे करवा लें तो स्पष्ट हो जाएगा कि सारी सरकारी जमीन पर उन्हीं का नियंत्रण है, जिसकी बाहुल्यता है। दूसरी बात... दलितों की केकट्स से तुलना आपत्तिजनक है। घर में तो सभी पानी पी भी ले रहे थे। लेकिन सार्वजनिक स्थान पर सभी जातियों के लोग एक ही जगह से पानी नहीं लेते थे। आज भी बहुत सी ऐसी घटनाएं देखने को मिल जाती हैं। मेरे पिता एक प्रसंग बताते हैं... एक महिला सफाईकर्मी ( सरकार द्वारा नियुक्त नहीं, अपितु जाति आधारित परम्परागत ) गाँव में आती थीं तो गाँव के ज्यादातर लोग उन्हें पानी पिलाने से मना कर देते थे... मेरे पिता पानी पिलाया करते थे। जातिगत आरक्षण की विसंगति पर सवाल उठना जायज है। मैं भी उठाता हूँ। बात होनी ही चाहिए कि कई सक्षम, समर्थ, सम्पन्न व ताकतवर जमींदार समूह स्वयं को 'पिछड़ा' बतलाकर असल पिछड़ों के हिस्से की सीट ले रहे हैं। लेकिन... अजीत भारती द्वारा प्रयुक्त अप्रोच सोल्यूशन ओरिएण्टेड नहीं है। ब्राह्मण सहित अन्य सवर्ण जातियों को इन तर्क से दूरी बनानी चाहिए... क्योंकि इससे कुछ हासिल होने वाला नहीं। दलितों को आरक्षण 1950 में मिला। किसी सवर्ण ने कभी विरोध नहीं किया। जातिगत आरक्षण का विरोध 1990 में शुरू हुआ। ज़ब दलितों पर होने वाले अत्याचारों में लिप्त जमींदार समूहों को भी दलितों के समान जातिगत आरक्षण का लाभ दिया जाने लगा। हमें भी 1990 के षड्यंत्र पर ही फोकस रखना है। 🙏

मैं कक्षा 8 में बैठा था... कम ही बच्चे थे तो ऐसे ही चर्चा शुरू हो गई। मैं और मेरे 2 छात्र... 🔰 एक दलित 🔰 दूसरा 'भूमिहीन OBC' दोनों एक बार गाँव के एक जमींदार के घर किसी कार्यक्रम में गए। एक ने अपने हाथ से पानी पी लिया... ज़ब दलित बच्चे का नंबर आया तो जमींदार ने बोला कि तू रुक... मैं पानी पिला देता हूँ तुझे। फिर वह दलित बच्चा बिना पानी पिए ही अपने घर लौट गया। वे बच्चे अभी वामपंथ का नाम भी नहीं सुने होंगे। यह कहा जा सकता है कि वामपंथ ने चीजें बढ़ा-चढ़ा कर प्रस्तुत की होंगी... लेकिन ये चीजें समाज में बहुत पहले से विद्यमान रही हैं। एक सवर्ण एक्टिविस्ट ने दलित उत्पीड़न को फर्जी बताया है। मुझे भी इस बयान का समर्थन करना चाहिए...? 🤔 अगर मैं भूमिहीन न होता तो शायद कर पाता। मेरी जाति का इकलौता घर है... हमारा। हम भी कुआँ से पानी लेकर आए... लेकिन कुआँ हमारा नहीं था। कुआँ खोदने के लिए मानव श्रम के साथ ही जमीनों पर नियंत्रण चाहिए। जो 100% ऐतिहासिक तौर पर गाँव में बाहुल्यता रखने वाली जमींदार जाति का ही होता है। दलित, ब्राह्मण, बनिया, कुम्हार, नाई, सुथार आदि भूमिहीन जातियाँ जमीन की नियंत्रणकर्ता नहीं हुआ करती थीं... 🙏 आज भी कई जमींदार बंधु स्वयं को गाँव का मालिक व अन्य को शरणार्थी समझते हैं। राजस्थान के गाँवों में सर्वे करवा लें तो स्पष्ट हो जाएगा कि सारी सरकारी जमीन पर उन्हीं का नियंत्रण है, जिसकी बाहुल्यता है। दूसरी बात... दलितों की केकट्स से तुलना आपत्तिजनक है। घर में तो सभी पानी पी भी ले रहे थे। लेकिन सार्वजनिक स्थान पर सभी जातियों के लोग एक ही जगह से पानी नहीं लेते थे। आज भी बहुत सी ऐसी घटनाएं देखने को मिल जाती हैं। मेरे पिता एक प्रसंग बताते हैं... एक महिला सफाईकर्मी ( सरकार द्वारा नियुक्त नहीं, अपितु जाति आधारित परम्परागत ) गाँव में आती थीं तो गाँव के ज्यादातर लोग उन्हें पानी पिलाने से मना कर देते थे... मेरे पिता पानी पिलाया करते थे। जातिगत आरक्षण की विसंगति पर सवाल उठना जायज है। मैं भी उठाता हूँ। बात होनी ही चाहिए कि कई सक्षम, समर्थ, सम्पन्न व ताकतवर जमींदार समूह स्वयं को 'पिछड़ा' बतलाकर असल पिछड़ों के हिस्से की सीट ले रहे हैं। लेकिन... अजीत भारती द्वारा प्रयुक्त अप्रोच सोल्यूशन ओरिएण्टेड नहीं है। ब्राह्मण सहित अन्य सवर्ण जातियों को इन तर्क से दूरी बनानी चाहिए... क्योंकि इससे कुछ हासिल होने वाला नहीं। दलितों को आरक्षण 1950 में मिला। किसी सवर्ण ने कभी विरोध नहीं किया। जातिगत आरक्षण का विरोध 1990 में शुरू हुआ। ज़ब दलितों पर होने वाले अत्याचारों में लिप्त जमींदार समूहों को भी दलितों के समान जातिगत आरक्षण का लाभ दिया जाने लगा। हमें भी 1990 के षड्यंत्र पर ही फोकस रखना है। 🙏

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CET हत्यारन है। इसे तत्काल बंद करो... आलोक राज। अनगिनत प्रतिभाओं को तुमने रोंद डाला है। रैंक-1 को सुनिए... इनके 200 में से 184 अंक हैं। तबियत खराब होने के कारण CET-2024 नहीं दे पाए। तुमने इन्हें पटवार, VDO आदि सभी परीक्षा से वंचित कर दिया। और अब LDC का अधिकार भी छीन रहे हो।

CET हत्यारन है। इसे तत्काल बंद करो... आलोक राज। अनगिनत प्रतिभाओं को तुमने रोंद डाला है। रैंक-1 को सुनिए... इनके 200 में से 184 अंक हैं। तबियत खराब होने के कारण CET-2024 नहीं दे पाए। तुमने इन्हें पटवार, VDO आदि सभी परीक्षा से वंचित कर दिया। और अब LDC का अधिकार भी छीन रहे हो।

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गुर्जर-मीणा समुदाय एक बार पुनः टकराव की ओर 👇 सुनिए...पूर्व DGP व वर्तमान MP श्री हरीश मीणा को। 🔺UP से : सचिन पायलट गुर्जर 🔺 हरियाणा से : सुखबीर जौनपुरिया गुर्जर 🔺 कश्मीर से : कमर रब्बानी चेची गुर्जर वर्तमान के पांचना विवाद पर इनका यह बयान अब तक का सबसे गैर-जिम्मेदाराना बयान बताया जा रहा है। पानी के लिए चल रहे आंदोलन के मंच से इस तरह की भड़काऊ व जातिगत बातें करने से बचना चाहिए। आप स्वयं संवैधानिक पद पर सुशोभित हो... 🙏 दोनों समुदायों को शांति से इस मसले का हल निकालना चाहिए। 🙏🙏🙏

गुर्जर-मीणा समुदाय एक बार पुनः टकराव की ओर 👇 सुनिए...पूर्व DGP व वर्तमान MP श्री हरीश मीणा को। 🔺UP से : सचिन पायलट गुर्जर 🔺 हरियाणा से : सुखबीर जौनपुरिया गुर्जर 🔺 कश्मीर से : कमर रब्बानी चेची गुर्जर वर्तमान के पांचना विवाद पर इनका यह बयान अब तक का सबसे गैर-जिम्मेदाराना बयान बताया जा रहा है। पानी के लिए चल रहे आंदोलन के मंच से इस तरह की भड़काऊ व जातिगत बातें करने से बचना चाहिए। आप स्वयं संवैधानिक पद पर सुशोभित हो... 🙏 दोनों समुदायों को शांति से इस मसले का हल निकालना चाहिए। 🙏🙏🙏

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ब्राह्मण को 'अगड़ा' कहा जाता है। ब्राह्मणों के बच्चे तो 'मरियल' से भी मिल जाएंगे। लेकिन यादव तो पशुपालक समाज है। सम्पन्न समाज है। समृद्ध समाज है। जमींदार समाज है। उसको OBC कहा जा रहा है। लेकिन क्यों? ~ हर्ष वर्धन त्रिपाठी 🇮🇳Harsh Vardhan Tripathi जी। जातिगत जनगणना से हिस्सेदारी पता चलेगी। फिर OBC से बाहर निकलना तय। 🙏

ब्राह्मण को 'अगड़ा' कहा जाता है। ब्राह्मणों के बच्चे तो 'मरियल' से भी मिल जाएंगे। लेकिन यादव तो पशुपालक समाज है। सम्पन्न समाज है। समृद्ध समाज है। जमींदार समाज है। उसको OBC कहा जा रहा है। लेकिन क्यों? ~ हर्ष वर्धन त्रिपाठी 🇮🇳Harsh Vardhan Tripathi जी। जातिगत जनगणना से हिस्सेदारी पता चलेगी। फिर OBC से बाहर निकलना तय। 🙏

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🔰 यादव 🔰 कुर्मी 🔰 जाट OBC से बाहर किए जा सकते हैं? रोहिणी कमीशन ने बताया है कि ये जातियाँ खूब हक ले चुकी हैं। अब दूसरों का नम्बर भी आना चाहिए। आपकी क्या राय है इस पर ? #रोहिणी_कमीशन_लागू_करो

🔰 यादव 🔰 कुर्मी 🔰 जाट OBC से बाहर किए जा सकते हैं? रोहिणी कमीशन ने बताया है कि ये जातियाँ खूब हक ले चुकी हैं। अब दूसरों का नम्बर भी आना चाहिए। आपकी क्या राय है इस पर ? #रोहिणी_कमीशन_लागू_करो

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सुनो नरेश भाईसाहब.... चप्पल पहन लो... जिद्द मत करो। सारे जमींदार होकर भी प्रमोद भाया को नहीं हरा पाए। जीवन भर नंगे पैर रहना पड़ जाएगा.... तुम्हें.... 🙏

सुनो नरेश भाईसाहब.... चप्पल पहन लो... जिद्द मत करो। सारे जमींदार होकर भी प्रमोद भाया को नहीं हरा पाए। जीवन भर नंगे पैर रहना पड़ जाएगा.... तुम्हें.... 🙏

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अपर-कास्ट लोगों ने कभी भी SC, ST व OBC के लोगों को आगे नही आने दिया। ~ श्री अखिलेश यादव, पूर्व मुख्यमंत्री, UP 𝗔𝗻 𝗢𝗽𝗲𝗻 𝗥𝗲𝗽𝗹𝘆 𝘁𝗼 𝗔𝗸𝗵𝗶𝗹𝗲𝘀𝗵 𝗬𝗮𝗱𝗮𝘃 👇 1) दलित नेता को जान से मरवाने के लिए 'गेस्ट हाउस कांड' किसने करवाया ? 2) दलितों के प्रमोशन आरक्षण बिल को संसद में किसने फड़वाया ? 3) बाबासाहेब अंबेडकर ने तो यादव समाज को कभी आरक्षण दिया ही नही। 4) जमींदार बीपी यादव ने खुद की जाति को जबरन OBC में शामिल किया। 5) जिसके विरोध में मण्डल कमीशन के एकमात्र सदस्य श्री LR नायक जी ने रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने तक से मना कर दिया। 6) फिरोजाबाद के साधुपुर में दलितों का नरसंहार करने वाले कौन थे? 7) दूध के व्यापार में आजतक दलितों को 16% हिस्सेदारी क्यों नही मिल पाई ? 8) दलितों की बारात रोकने व जमीन कब्जाने में संलिप्त कौन है? 9) बाबासाहेब ने दलितों को 1950 में आरक्षण दिया। किसी 'कथित' ऊंची जाति वाले ने विरोध नही किया। 10) आरक्षण का विरोध 1990 में यादव, कुर्मी जैसे सक्षम, समर्थ व सम्पन्न जमींदार समूहों को OBC आरक्षण देने पर शुरू हुआ। 11) बहन मायावती की और राबड़ी देवी जी दोनों हमउम्र हैं। मायावती जी ने MA तक पढ़ाई की। राबड़ी देवी जी अनपढ़ रह गईं। क्या ऊँची-जाति वालों ने रोका ? 12) तेजस्वी यादव को पढ़ने से ऊँची-जाति वालों ने रोका ? 13) OBC का सारा आरक्षण कौन से समूह डकार रहे हैं? 14) सेंट्रल यूनिवर्सिटी में ज्यादातर OBC सीटें कौन जाति-समूह के लोग ले रहे हैं? 15) क्या UP और बिहार में यादव समाज जनसंख्या अनुपात से ज्यादा हिस्सेदारी नही ले चुका ? 16) समाजवादी पार्टी के सांसद ने संविधान से अनुच्छेद 16(4) को हटाने की मांग क्यों की ? 17) आपमें रोहिणी कमीशन रिपोर्ट का समर्थन करने की हिम्मत क्यों नही हो रही ? 18) अगर आपको यादव समाज का प्रतिनिधित्व और अधिक बढ़वाना है तो सरकार से कहो। 19) 'कथित' ऊँची-जाति के लोगों पर पब्लिकली आरोप लगाकर क्या साबित करना चाहते हो? 20) बाबासाहेब के पास 1950 के जातीय आकंडें मौजूद थे। तब उन्होंने यादवों को आरक्षण क्यों नही दिया ? 21) यादव समाज किस मापदंड पर पिछड़ा हुआ है? आर्थिक ? सामाजिक ? राजनीतिक ? इनमें अखिलेश यादव जी के जातिवादी बयान के हर प्रश्न का जवाब है। और साथ ही उनके हर जातिवादी समर्थकों से सवाल है। इस ट्वीट को इतना RT करो कि अखिलेश यादव तक यह पहुंच जाए।

अपर-कास्ट लोगों ने कभी भी SC, ST व OBC के लोगों को आगे नही आने दिया। ~ श्री अखिलेश यादव, पूर्व मुख्यमंत्री, UP 𝗔𝗻 𝗢𝗽𝗲𝗻 𝗥𝗲𝗽𝗹𝘆 𝘁𝗼 𝗔𝗸𝗵𝗶𝗹𝗲𝘀𝗵 𝗬𝗮𝗱𝗮𝘃 👇 1) दलित नेता को जान से मरवाने के लिए 'गेस्ट हाउस कांड' किसने करवाया ? 2) दलितों के प्रमोशन आरक्षण बिल को संसद में किसने फड़वाया ? 3) बाबासाहेब अंबेडकर ने तो यादव समाज को कभी आरक्षण दिया ही नही। 4) जमींदार बीपी यादव ने खुद की जाति को जबरन OBC में शामिल किया। 5) जिसके विरोध में मण्डल कमीशन के एकमात्र सदस्य श्री LR नायक जी ने रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने तक से मना कर दिया। 6) फिरोजाबाद के साधुपुर में दलितों का नरसंहार करने वाले कौन थे? 7) दूध के व्यापार में आजतक दलितों को 16% हिस्सेदारी क्यों नही मिल पाई ? 8) दलितों की बारात रोकने व जमीन कब्जाने में संलिप्त कौन है? 9) बाबासाहेब ने दलितों को 1950 में आरक्षण दिया। किसी 'कथित' ऊंची जाति वाले ने विरोध नही किया। 10) आरक्षण का विरोध 1990 में यादव, कुर्मी जैसे सक्षम, समर्थ व सम्पन्न जमींदार समूहों को OBC आरक्षण देने पर शुरू हुआ। 11) बहन मायावती की और राबड़ी देवी जी दोनों हमउम्र हैं। मायावती जी ने MA तक पढ़ाई की। राबड़ी देवी जी अनपढ़ रह गईं। क्या ऊँची-जाति वालों ने रोका ? 12) तेजस्वी यादव को पढ़ने से ऊँची-जाति वालों ने रोका ? 13) OBC का सारा आरक्षण कौन से समूह डकार रहे हैं? 14) सेंट्रल यूनिवर्सिटी में ज्यादातर OBC सीटें कौन जाति-समूह के लोग ले रहे हैं? 15) क्या UP और बिहार में यादव समाज जनसंख्या अनुपात से ज्यादा हिस्सेदारी नही ले चुका ? 16) समाजवादी पार्टी के सांसद ने संविधान से अनुच्छेद 16(4) को हटाने की मांग क्यों की ? 17) आपमें रोहिणी कमीशन रिपोर्ट का समर्थन करने की हिम्मत क्यों नही हो रही ? 18) अगर आपको यादव समाज का प्रतिनिधित्व और अधिक बढ़वाना है तो सरकार से कहो। 19) 'कथित' ऊँची-जाति के लोगों पर पब्लिकली आरोप लगाकर क्या साबित करना चाहते हो? 20) बाबासाहेब के पास 1950 के जातीय आकंडें मौजूद थे। तब उन्होंने यादवों को आरक्षण क्यों नही दिया ? 21) यादव समाज किस मापदंड पर पिछड़ा हुआ है? आर्थिक ? सामाजिक ? राजनीतिक ? इनमें अखिलेश यादव जी के जातिवादी बयान के हर प्रश्न का जवाब है। और साथ ही उनके हर जातिवादी समर्थकों से सवाल है। इस ट्वीट को इतना RT करो कि अखिलेश यादव तक यह पहुंच जाए।

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🔰 हरियाणा का जाट - GEN 🔰 राजस्थान का जाट - OBC 🔰 मध्यप्रदेश के मीणा ज़ी - OBC 🔰 राजस्थान के मीणा ज़ी - ST 🔰 राजस्थान में कुम्हार - OBC 🔰 मध्यप्रदेश में कुम्हार - SC 🔰 उत्तरप्रदेश में गुर्जर - OBC 🔰 हिमाचल में गुर्जर - ST लेकिन... ज़ब तक ब्राह्मण मंदिर नहीं छोड़ेगा इन विसंगतियों पर चर्चा नहीं होगी? 😂 कॉलेजियम नहीं हटने तक इस अंतर पर चर्चा नह होगी?🥹 2016 में ज़ब जाट समाज ने OBC में शामिल होने के लिए आंदोलन किया तो गुर्जर, सैनी, यादव आदि समुदायों के स्थापित नेताओं ने प्रखर विरोध दर्ज करवाया। गुर्जर MLA रोशन लाल आर्य का यह वीडियो देखिए। क्या अब भी आप कहेंगे कि जातिगत आरक्षण की समीक्षा नहीं होनी चाहिए? 🤔

Mohit Bharat

143,445 次观看 • 24 天前

1) हनी डागर जाट 2) संजीव लाम्बा जाट 3) नवीन राठी जाट 4) who? पुलिस की निंदा ही करोगे या व्यवहार का विश्लेषण भी? 🤔 क्या ये किसान आंदोलन में ऐसी बर्बरता कर सकते हैं? अब दिल्ली पुलिस में किसानों (जमींदारों) के ओवर रीप्रिजेटेंशन पर खुलकर बात करने का समय आ चुका है। भूमिहीन वर्ग की आबादी दिल्ली शहर में लगभग 80% है। लेकिन इनकी दिल्ली पुलिस में हिस्सेदारी 25% ही बतलाई जाती है... ऐसा क्यों? 🤔 क्या ये 4 पुलिसकर्मी दिल्ली के स्थानीय वोटर हैं? 🤔 क्या आंदोलन में इनके पड़ोसी, संबंधी, परिवारजन भी शामिल थे...? शामिल होते तो ऐसा करते? 🤔 Note : यह मत सोचो कि ये कानून के रखवाले हैं। प्रदर्शनकारी अगर उत्पात मचाए तो पुलिस को कार्रवाई करनी ही चाहिए। लेकिन इन 4 केस में बच्चों की क्या गलती थी? 🤔 गलत किया... गलत किया... गलत किया... कहने से काम नहीं चलेगा। दिल्ली समेत देशभर की पुलिस को प्रोफेशनल बनाने की जरूरत है। "पारिवारिक माहौल" को समाप्त करना चाहिए। शहरी, स्थानीय व भूमिहीन समूहों का उनकी आबादी अनुपात में हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए। डायवर्सिटी जरूरी है। 🙏 ज्यादातर बच्चे भूमिहीन समुदायों से थे... कानून मानने वाले सभ्य लोग थे... परिवार के साथ आंदोलन में थे... इसीलिए ये हरकत की? 🤔 मीणा, गुर्जर, जाट, अहीर, राजपूत, ब्राह्मण, बनिया, भील, सुथार, लुहार, कुम्हार, खत्री, अरोड़ा, जाटव, वाल्मीकि, बैरवा आदि तमाम समुदायों को उनकी हिस्सेदारी देने पर सरकार को विचार करना चाहिए। 🙏
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1) हनी डागर जाट 2) संजीव लाम्बा जाट 3) नवीन राठी जाट 4) who? पुलिस की निंदा ही करोगे या व्यवहार का विश्लेषण भी? 🤔 क्या ये किसान आंदोलन में ऐसी बर्बरता कर सकते हैं? अब दिल्ली पुलिस में किसानों (जमींदारों) के ओवर रीप्रिजेटेंशन पर खुलकर बात करने का समय आ चुका है। भूमिहीन वर्ग की आबादी दिल्ली शहर में लगभग 80% है। लेकिन इनकी दिल्ली पुलिस में हिस्सेदारी 25% ही बतलाई जाती है... ऐसा क्यों? 🤔 क्या ये 4 पुलिसकर्मी दिल्ली के स्थानीय वोटर हैं? 🤔 क्या आंदोलन में इनके पड़ोसी, संबंधी, परिवारजन भी शामिल थे...? शामिल होते तो ऐसा करते? 🤔 Note : यह मत सोचो कि ये कानून के रखवाले हैं। प्रदर्शनकारी अगर उत्पात मचाए तो पुलिस को कार्रवाई करनी ही चाहिए। लेकिन इन 4 केस में बच्चों की क्या गलती थी? 🤔 गलत किया... गलत किया... गलत किया... कहने से काम नहीं चलेगा। दिल्ली समेत देशभर की पुलिस को प्रोफेशनल बनाने की जरूरत है। "पारिवारिक माहौल" को समाप्त करना चाहिए। शहरी, स्थानीय व भूमिहीन समूहों का उनकी आबादी अनुपात में हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए। डायवर्सिटी जरूरी है। 🙏 ज्यादातर बच्चे भूमिहीन समुदायों से थे... कानून मानने वाले सभ्य लोग थे... परिवार के साथ आंदोलन में थे... इसीलिए ये हरकत की? 🤔 मीणा, गुर्जर, जाट, अहीर, राजपूत, ब्राह्मण, बनिया, भील, सुथार, लुहार, कुम्हार, खत्री, अरोड़ा, जाटव, वाल्मीकि, बैरवा आदि तमाम समुदायों को उनकी हिस्सेदारी देने पर सरकार को विचार करना चाहिए। 🙏

Mohit Bharat

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अरविन्द भील और हंसराज संवाद : 🔰 अरविन्द भील : हंसराज भाई... हम ST में आते है। अम्बेडकर ज़ी ने हमें 6% ST आरक्षण दिया। लेकिन ज़ब से आप ST में शामिल हुए हैं... हम नौकरियों में सलेक्ट क्यों नहीं हो रहे? 🔰 हंसराज : इसका जिम्मेदार ब्राह्मण है। वो हम सबकी सीट ले रहा है। 🔰 अरविन्द भील : राजस्थान NTSP में ST को 12% आरक्षण है। जिसमें 6% हमारा हिस्सा बनता है। लेकिन हमें तो 0% सीट मिल पा रहीं है। 🔰 हंसराज : तुम ब्राह्मणों के षड्यंत्र में मत आओ। हम दोनों एक समान हैं। क्या फर्क पड़ता है, तुम बनो या हम? 🔰 अरविंद भील : हम IAS नहीं बन पा रहे। तुम हर साल 50 UPSC में सलेक्ट होते हो। 🔰 हंसराज : IAS? IAS बनकर क्या करोगे? असली मलाई तो राम मंदिर के पुजारी में है। तुम उसकी मांग करो। हम तुम्हारे साथ हैं। 🔰 अरविन्द भील : हमारे लोग रेलवे में DRM जैसे बड़े पद तो दूर ड्राइवर, स्टेशन मास्टर, गार्ड आदि भी आज तक नहीं बन पा रहे। जिसमें करोड़ो वेकेंसी होती है। 🔰 हंसराज : तुम रेलवे जाकर क्या करोगे? असली देश तो सुप्रीम कोर्ट से चलता है। तुम सुप्रीम कोर्ट में जज बनने की मांग करो। हम तुम्हारे साथ है। 🔰 अरविन्द भील : आजादी के 80 साल बाद भी हमारा जयपुर या दिल्ली में कोई प्रतिनिधित्व क्यों नहीं है? हमारा आरक्षण कहाँ गया? हिस्सा कहाँ है? 🔰 हंसराज : दिल्ली प्रदूषण से भरा शहर है। वहाँ जाकर क्या करोगे। हिस्सेदारी लेनी है तो यूनिवर्सिटी के VC पद पर लो न। देश में आजतक कोई भील VC क्यों नहीं बना... ये सवाल करो। 🔰 अरविन्द भील : आप VC की बात करते हो... हमारा तो सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी या राजस्थान यूनिवर्सिटी में कोई प्रोफेसर ही नहीं बन पाया है। 🔰 हंसराज : ऐसा मत कहो। हम तुमसे अलग नहीं हैं। हम बने या तुम बने... बात तो एक ही है। 🔰अरविन्द भील : हमें प्रोफेसर/डॉक्टर/इंजिनियर में हिस्सा चाहिए। 🔰हंसराज : मंदिर, सुप्रीम कोर्ट और यूनिवर्सिटी वाइस चांसलर में हिस्सा मांगो। 🔰 अरविन्द भील : हमारा कोई बच्चा JNU, DU या IIT में क्यों प्रवेश नहीं ले पा रहा। 🔰 हंसराज : आज तक कोई शंकराचार्य नहीं बन पाया है। तुम वहाँ हिस्सा मांगो। हम साथ हैं। 🔰 अरविन्द भील : हमें रेलवे, बैंक, पुलिस, शिक्षक में हिस्सेदारी चाहिए। 🔰 हंसराज : इनमें क्या रखा है? असली कमाई तो पुजारी बनने में है। देखो... मंदिर के उस पुलिस के पास कितना पैसा है। 🔰 अरविन्द भील : सुप्रीम कोर्ट ने ST वर्गीकरण का फैसला दिया है। शायद अब हमें हिस्सा मिल पाएगा। 🔰 हंसराज : सुप्रीम कोर्ट में तो मनुवादी ब्राह्मण बैठे हैं। जो हम आदिवासियों की एकता को तोड़ना चाहते हैं। 🔰 अरविन्द भील : वर्गीकरण होगा तो हमें भी सीट मिल पाएगी। ST का लाभ मिलेगा। 🔰 हंसराज : ब्राह्मण बहुत चालाक है। वर्गीकरण हो गया तो वो सारी सीट ले जाएगा। 🔰 अरविन्द भील : लेकिन हमें नौकरियों / शिक्षा में हिस्सेदारी चाहिए। वर्गीकरण जरूरी है। 🔰 हंसराज : वर्गीकरण की बात में मत आओ। ऐसा करो तुम भील प्रदेश की मांग कर लो। हम पूरी तरह साथ है। 🔰 अरविन्द भील : वो तो ठीक है... आपका धन्यवाद। हमें शासन-प्रशासन में हिस्सेदारी तो मिलने दो। 🔰 हंसराज : गवर्नमेंट जॉब मात्र 2% है। ब्राह्मणों के बहकावे में आकर क्यों भाईचारा खराब कर रहे हो? हिस्सा लेना है तो प्राइवेट सेक्टर में लो। 🔰 अरविन्द भील : लेकिन भाई... 🔰 हंसराज : लेकिन कुछ नहीं भाई। ये समय आपस में लड़ने का नहीं है। साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट जज, राम मंदिर, शंकराचार्य, यूनिवर्सिटी VC आदि में हिस्सा मांगने का है। जोर से बोलो... जय जोहार... 🔰 अरविन्द भील : लेकिन... हमें सरकारी नौकरियों में आबादी अनुपात में हिस्सा चाहिए। मुख्यधारा में शामिल होना है। 🔰 हंसराज : आदिवासी एकता जिंदाबाद। 🔰 अरविन्द भील : ठीक है... लेकिन हिस्सा? 🔰 हंसराज : अपना तीर, अपना कमान... सारे आदिवासी एकसमान। 🔰 अरविन्द भील : लेकिन हमारा हिस्सा? 🔰 हंसराज : जय जोहार, ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद 🔰 अरविन्द भील : लेकिन हमारा हिस्सा? 🔰 हंसराज : जय बिरसा, जय आदिवासी, जय जोहार 🔰 अरविन्द भील : लेकिन भाई हमारे हिस्से पर बात? 🔰 हंसराज : 100 में 90 शोषित है....90 भाग हमारा है, धन-धरती-राजपाठ में 90 भाग हमारा है। 🔰 अरविन्द भील : सही है... लेकिन उस 90 में हमारा हिस्सा? 🔰 हंसराज : आदिवासी एकता जिंदाबाद, मनुवाद मुर्दाबाद चलो अरविन्द भाई...अब मैं निकलता हूँ...छोटे चाचा के बड़े लड़के का IPS में सलेक्शन हो गया है...उसके सम्मान में पार्टी रखी है... कई मंत्री आए हैं...रास्ते से हमारे जीजाजी जो SDM हैं, उनको लेकर मुझे भी कार्यक्रम के लिए निकलना है। 🔰 अरविन्द भील : ओके...बाय। 🔰 हंसराज : बाय नहीं...जय जोहार। आदिवासी संस्कृति मत भूलो।

Mohit Bharat

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राजस्थान में लगभग 80 लाख जाट रहते हैं। उनमें से किसी 1 ने भी डांगावास हत्याकांड के सभी आरोपियों को बाइज्जत बरी करने वाले फैसले पर अपनी चिंता व्यक्त की है क्या...? यहाँ तक की गोविन्द डोटासरा ज़ी के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर मैं गया तो मुझे ट्विट नहीं मिला। NFU गैंग भी मौन। कौम सर्वोपरि? 🤔 इस सोच का व्यक्ति राजस्थान का CM बनने का सपना देख रहा है तो... 😐 इस ट्विट को इतना वायरल करो कि डोटासरा ज़ी ट्विट करने पर मजबूर हो जाएं। वो राजस्थान कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष हैं। उनकी जिम्मेदारी बनती है आवाज उठाने की। जातिवाद से ऊपर नहीं उठ सकते तो राजनीति छोड़कर जाट महासभा के अध्यक्ष बन जाना चाहिए। 🙏 मैं समस्त जाट भाइयों से अपील करता हूँ कि डांगावास प्रकरण में न्याय दिलाने के लिए वंचित दलित समाज के साथ खड़ा होइए। 🙏

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🔰 जैकी यादव : 252 अंक - Qualified 😎 🔰 अंकित अग्रवाल : 257 अंक : disQualified 😭 99% यादव OBC नॉन-क्रीमीलेयर में आते हैं। 17% सवर्ण ही EWS बनवा पाते हैं... मकान-जमीन की शर्त के कारण। 🙏 फिर इस भर्ती में खुद को मार्शल कौम बताने वाले यादव भाइयों को 3 वर्ष की अतिरिक्त छूट भी मिली है। उम्रसीमा में छूट लेकर भी कम नंबर पर सलेक्शन लेना अच्छी बात है क्या...? 🤔 Note : दलित या भूमिहीन OBC जातियाँ ऐसा करें तो समझ भी आता है... लेकिन सक्षम, समर्थ, सम्पन्न व ताकतवर जमींदार OBC जातियाँ ऐसा क्यों कर रहीं हैं? 🙏 बाकि EWS की कटऑफ़ बढ़ाने का एक आइडिया है मेरे पास... 🙏🙏🙏 यादव, कुर्मी आदि जमींदार जातियों को OBC से बाहर करके GEN में रख दिया जाए। तो फिर इनके गरीब वर्ग को स्वतः ही EWS मिलने लगेगा। इससे 2 लाभ होंगे.... 1) वंचित भूमिहीन OBC जातियों की हिस्सेदारी बढ़ेगी। कटऑफ़ बढ़ाने वाले समूह OBC से बाहर होने पर। 2) EWS में अब ज्यादा लोग अप्लाई करेंगे तो EWS की कट ऑफ़ स्वतः प्रभाव से बढ़ जाएगी। ठीक न...? 🙏 कर दो शेयर... 🙏🙏🙏

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