
Karishma Aziz Qureshi
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Journalist | I will do journalism some other time, for now fighting against Islamophobia | Believer in the power of truth, justice & empathy |
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गद्दाफी को NATO नें क्यों मारा? क्यों की वो इस अफ्रीकन देश को दुनियाँ का सबसे बेहतर देश बनाना चाहते थे! तुमने सद्दाम हुसैन को क्यों मारा? किसने अधिकार दिया था तुम्हें दूसरों के देश में हस्तछेप करने की? तेल के लिये तुमने दूसरों को तबाह कर दिया और उनके विरोध को आतंकवाद कहते हो?
K24 Nation91,214 Aufrufe • vor 1 Jahr

नफरत की आग अक्सर जलाने वाले को ही लील लेती है। लखनऊ में मौलाना का पुतला फूंकने निकले करणी सेना के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष खुद आग की भेंट चढ़ गए। इनके साथी समेत कई लोग झुलस गाएं।नफरत की आग अक्सर जलाने वाले को ही लील लेती है। लखनऊ में मौलाना का पुतला फूंकने निकले करणी सेना के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष खुद आग की भेंट चढ़ गए। इनके साथी समेत कई लोग झुलस गाएं।
Karishma Aziz Qureshi22,257 Aufrufe • vor 3 Monaten

बिहार के मोहनिया में रहने वाले नूर आलम बने IPS ऑफिसर! नूर आलम ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 625 वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने यह उपलब्धि अपने दूसरे प्रयास में हासिल की। नूर आलम एक कपड़ा व्यवसायी के बेटे हैं और वर्तमान में BPSC उत्तीर्ण कर मार्केटिंग ऑफिसर के रूप में कार्यरत थे, अब यह IPS ऑफिसर बन गाएं हैं इनकी मेहनत और जज्बा की सलाम!
Karishma Aziz Qureshi15,709 Aufrufe • vor 3 Monaten

नाचना से अहमदाबाद जा रही AC बस सांचोर-नेनावा बॉर्डर पर धूं-धूं कर जल गई। गहरी नींद में सो रहे यात्रियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। चौंकाने वाली सच्चाई: > घटना स्थल से पुलिस थाना मात्र 500 मीटर दूर था, लेकिन 1 घंटे तक न पुलिस आई न एम्बुलेंस। लोग जलती बस से जान बचाने के लिए कूदते रहे। 1 की मौत, 9 जिंदगी और मौत के बीच झुलस रहे हैं। मुख्यमंत्री महोदय, क्या 500 मीटर का फासला तय करने में प्रशासन को एक घंटा लगता है?
K24 Nation12,243 Aufrufe • vor 3 Monaten

ईरान कभी नहीं डरेगा अली वाले कभी नहीं डरते, ट्रंप-नेतन्याहू पर टूट पड़ी हिजाबी लड़की!
K24 Nation10,996 Aufrufe • vor 3 Monaten

यूरोप जो आज दुनियाँ में विज्ञान का जननी बना हुआ है सच तो ये है की उनकी कोई सभ्यता ही नहीं थी! इतिहास को मानें तो दुनियाँ में सिर्फ तीन ही सभ्यतायें थी, भारत, मिश्र और मेसोपोटामिया (इराक़), जिस वक़्त ये सभ्यतायें दुनियाँ में फल फूल रही थी यूरोप के लोग समुद्री डाकू होते थे, एक ऐसी बर्बर नस्ल थी जिसकी छवि विश्वयुद्ध के नरसंघार में दिखती है! महाभारत से लेके क्रिस्चियन क्रूशेड और इस्लामिक युद्ध में सब जगह युद्ध के नियम थे जहाँ युद्ध मैदाने जंग में लड़े जाते थे, विश्वयुद्ध में हेरोशिमा पर बम गिरा कर पहली बार युद्ध का ये नियम तोड़ा गया जहाँ से युद्ध में सिविलियन की हत्या का प्रचालन शुरू हुआ! 18वि शताब्दी के बाद विज्ञान के भरोसे और अपने छल कपट से इस बर्बर नस्ल नें भारत सहित पूरे विश्व पर कब्ज़ा कर लिया! पर ये विज्ञान उनके पास आया कहाँ से? ये इस्लामी खलीफाओं नें अपने मेहनत से पूरी दुनियाँ से ज्ञान इकठ्ठा करके अपने अगली नस्ल के लिये सजोया था! यहूदियों के नक़्शे क़दम पर चलने वाले भले ही आज अपने शक्ति के बल पर इस्लाम और मुसलमानों कों झूठा बदनाम करें, पर सच वही है जिसका इतिहास आज भी साक्षी है!
Karishma Aziz Qureshi18,659 Aufrufe • vor 1 Jahr
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