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जगद्गुरु निग्रहाचार्य / JagadGuru Nigrahacharya ™

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श्रीनिग्रहागमसम्मत निग्रहसम्प्रदाय के श्रीकामाख्या कामरूपपीठान्तर्गत आज्ञाधिकारीमण्डल के जगद्गुरु निग्रहाचार्य | आर्यावर्त सनातन वाहिनी 'धर्मराज' के महानिदेशक

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सन्दर्भ तो समझ ही गये होंगे ! मुख्य बात, वह सन्तों का मंच नहीं था। संघ-भाजपा की कई अवैध सन्तानें वहां धर्माचार्य का चोला ओढ़कर अपने बाप की चापलूसी में बैठी थीं। चर्चा निकली भाजपा के देशद्रोही दोगलेपन और आतंकवादी संस्था UGC के नीचतापूर्ण अत्याचारों पर। बस, उसमें कुछ ने उत्तराधिकार में अधिक मांग लिया तो बाकी भड़क गए, इससे अधिक कुछ नहीं अतः गुलामों को सन्त न कहा जाए। ऋतम्भरा, उमा भारती वैसे वर्णाश्रमविरोधियों को भगवा पहनकर साध्वी बनाने और व्यासपीठ को विकृत करने के समय मठाधीशों ने यदि विरोध किया होगा तो धर्म की यह दुर्गति नहीं होती। साढ़े तीन वर्ष पूर्व जब मैंने ऋतम्भरा को फट्कारा था तो लोग मुझे सन्तनिन्दक और वामपन्थी बोलने लगे थे ! बोलते रहो, ढोंगियों को सन्त बोलोगे तो वे सन्त नहीं हो जायेंगे। Old Video Reuploaded Original Dated - 9th November, 2022 ऋतम्भरा के वक्तव्य पर हमने जो आपत्ति की थी, उसके कारण मन्दसौर के संघ पदाधिकारी मुझसे क्रोधित हो गए। मेरे विष्णुपुराणप्रवचन में आयोजकों के बुलाने पर भी अधिकतर लोग नहीं आए। उन्हें हिन्दू मानकर बुलाया गया था, वे किस संस्था से हैं, इसके आधार पर नहीं। किन्तु प्रतीत हुआ कि उन लोगों के लिए उनकी पहली पहचान आरएसएस और दूसरी पहचान हिन्दू होना है। ऐसे लोग वस्तुतः भगवान् की दिव्य कथा के पात्र सम्भवतः नहीं होंगे, अन्यथा कथा का निमन्त्रण मिलने पर व्यक्ति धर्म देखता है, संस्था नहीं। मुझसे एक व्यक्ति ने आकर कहा कि संघ के लोग बहुत नाराज़ हैं आपसे, बात दिल्ली तक पहुंच गयी है। मैंने कहा, तुम बात को जापान तक पहुंचा दो, उससे हमें क्या ? अयोध्या के कारसेवकों ने अपने भगवान् श्रीराम के लिए प्राण त्यागे थे या इमाम-ए-हिन्द के लिए ? सौ वर्ष प्राचीन एनजीओ हमें धर्म सिखा रही है ? संस्था को धर्म के अनुसार होना है, धर्म संस्था के अनुसार नहीं होता। #निग्रहाचार्य #Nigrahacharya #शंकराचार्य #UGC_काला_कानून_वापस_लो #UGC_Exposed

जगद्गुरु निग्रहाचार्य / JagadGuru Nigrahacharya ™

23,727 görüntüleme • 4 ay önce

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जिन लोगों को लगता है कि Govardhan Math पुरी पीठ बिल्कुल शुद्ध बची है, वह देखें इस वीडियो में कि कैसे RSS ने कब्जा कर रखा है। मोहन भागवत के आने पर मठ के प्रत्येक व्यक्ति, ब्रह्मचारी, ब्राह्मण याजकादि के हाथ जुड़ रहे हैं नमस्कार करने हेतु। यहां तक कि पुरी के असली शंकराचार्य भी हाथ जोड़ रहे हैं (ध्यान से वीडियो में देखें) और स्वागत में खड़े भी हो रहे हैं। आगंतुक के आगे शंकराचार्य के द्वारा हाथ जोडकर खड़े होने पर यदि कोई धूर्त कहे कि ये तो अतिथि हेतु शिष्टाचार है तो ध्यान रखो कि ये मोहन भागवत है। वही मोहन भागवत, जिसने पुरी के नकली शंकराचार्य अधोक्षजानंद को बढ़ावा दिया। वही मोहन भागवत जिसने शास्त्रों को बदलने की बात कही, समलैंगिकता का समर्थन किया, गोमांस खाने वालों के साथ भाईचारा निभाने की बात कही, जिसके लिए हिन्दुत्व इस्लाम के बिना अधूरा था। यदि ऐसे व्यक्ति के सामने तुम्हारे सर्वोच्च धर्मगुरु साक्षात् शिवस्वरूप के हाथ जुड़ सकते हैं, तो निग्रहाचार्य के समक्ष उनकी उपस्थिति किस प्रकार होनी चाहिए, सोच लो। यही कारण है कि शंकराचार्य ने साढ़े तीन साल में हिन्दू राष्ट्र बनाने हेतु जेल में बंद मुसलमान तक का सहयोग लेने की बात को अपनी उपलब्धियों में गिना (यद्यपि फिर भी साढ़े तीन साल - हिन्दू राष्ट्र में सफल नहीं हो सके), BJP के द्वारा प्रचारित 144 साल बाद महाकुम्भ की अफवाह को प्रोत्साहित किया, कुम्भ में रहीम कलाम कोटि के मुसलमानों को बुलाने लगे, स्वयं भी मुसलमान के घर रायपुर में गये और वक़्फ़ बोर्ड में वंचित मुसलमान को उसका हक दिलाने की बात करने लगे थे। साक्षात् शिवस्वरूप सर्वोच्च धर्मगुरु की ये निन्दनीय स्थिति उनके अन्धभक्तों और मेरे अन्धद्वेषियों के अतिरिक्त पूरा समाज देख रहा है। लज्जा आ रही है चेलों ? कि भाजपा के गुलामों ने पुरी पीठ पर कब्जा कर रखा है ? यही बात हम चीख चीख कर बोल रहे थे तब हमें शांकर द्रोही घोषित कर दिया था। मेरे प्रति अपार घृणा से भरे नपुंसकों ! तुम्हारे गुरु का वह हाल बना दिया गया है कि उनके ही जन्मदिन पर नकली शंकराचार्य बनाने वालों को बुलाकर सम्मानित करके बोलने हेतु पूरा समय दिया गया और माइक टेलिकास्ट कुछ न बिगड़ा पर स्वयं शंकराचार्य के ही वक्तव्य को निर्विकल्पानन्द ने सबसे सामने ही बीच में रुकवाया, जैसे ही वे सरकार की कुनीति के विरुद्ध बोलने लगे। हा हन्त ! हे ईश्वर , ये विवशता ! मेरे विरुद्ध दुष्प्रचार करने वाले गिरोह को दिखता है ये ? दो पैसे की भी दूरदर्शिता बची है कि पीठ का भविष्य क्या है ? अतिशयोक्ति और काल्पनिक आभामण्डल में ही फंसे रहो तुमलोग ! सम्मान नहीं, दया के पात्र हो। ― निग्रहाचार्य श्रीभागवतानंद गुरु #निग्रहाचार्य #शंकराचार्य #आदित्यवाहिनी #Nigrahacharya

निग्रहाचार्य श्रीभागवतानंद गुरु / Nigrahacharya ™

11,075 görüntüleme • 1 yıl önce

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