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||socialist|| क्यों डरें जिंदगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजुर्बा होगा|| Let go..

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संभल, उत्तर प्रदेश में अचानक उठे विवाद को लेकर राज्य सरकार का रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इतने संवेदनशील मामले में बिना दूसरा पक्ष सुने, बिना दोनों पक्षों को विश्वास में लिए प्रशासन ने जिस तरह हड़बड़ी के साथ कार्रवाई की, वह दिखाता है कि सरकार ने खुद माहौल खराब किया। प्रशासन ने जरूरी प्रक्रिया और कर्तव्य का पालन भी जरूरी नहीं समझा। सत्ता में बैठकर भेदभाव, अत्याचार और फूट फैलाने का प्रयास करना न जनता के हित में है, न देश के हित में। माननीय सुप्रीम कोर्ट को इस मामले का संज्ञान लेकर न्याय करना चाहिए। प्रदेश की जनता से मेरी अपील है कि हर हाल में शांति बनाएं रखें।

संभल, उत्तर प्रदेश में अचानक उठे विवाद को लेकर राज्य सरकार का रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इतने संवेदनशील मामले में बिना दूसरा पक्ष सुने, बिना दोनों पक्षों को विश्वास में लिए प्रशासन ने जिस तरह हड़बड़ी के साथ कार्रवाई की, वह दिखाता है कि सरकार ने खुद माहौल खराब किया। प्रशासन ने जरूरी प्रक्रिया और कर्तव्य का पालन भी जरूरी नहीं समझा। सत्ता में बैठकर भेदभाव, अत्याचार और फूट फैलाने का प्रयास करना न जनता के हित में है, न देश के हित में। माननीय सुप्रीम कोर्ट को इस मामले का संज्ञान लेकर न्याय करना चाहिए। प्रदेश की जनता से मेरी अपील है कि हर हाल में शांति बनाएं रखें।

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Kranti Kumar जय जवान जय किसान

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Pooja88852503's profile picture

संभल, उत्तर प्रदेश में अचानक उठे विवाद को लेकर राज्य सरकार का रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इतने संवेदनशील मामले में बिना दूसरा पक्ष सुने, बिना दोनों पक्षों को विश्वास में लिए प्रशासन ने जिस तरह हड़बड़ी के साथ कार्रवाई की, वह दिखाता है कि सरकार ने खुद माहौल खराब किया। प्रशासन ने जरूरी प्रक्रिया और कर्तव्य का पालन भी जरूरी नहीं समझा। सत्ता में बैठकर भेदभाव, अत्याचार और फूट फैलाने का प्रयास करना न जनता के हित में है, न देश के हित में। माननीय सुप्रीम कोर्ट को इस मामले का संज्ञान लेकर न्याय करना चाहिए। प्रदेश की जनता से मेरी अपील है कि हर हाल में शांति बनाएं रखें।

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Pooja88852503's profile picture

▪️सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त चुनने वाली समिति में प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष और चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया होने चाहिए ▪️सरकार ने नया कानून लाकर इसमें से चीफ जस्टिस को निकाल दिया और उनकी जगह प्रधानमंत्री के एक पसंदीदा मंत्री को रखा गया ▪️सरकार के इस कानून को चुनौती देने के लिए एक याचिका दायर की गई है ▪️SC में इस याचिका पर 19 तारीख को सुनवाई होनी है ▪️लेकिन सरकार ने आनन फ़ानन में मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनने के लिए जल्दबाजी में समिति की बैठक बुलाई ▪️नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने समिति की बैठक को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई तक के लिए स्थगित करने का सुझाव दिया और dissent note भी दिया ▪️लेकिन समिति बैठक में मोदी और शाह ने इस सुझाव को खारिज कर दिया ▪️आधी रात को उन्होंने ज्ञानेश कुमार को अगला मुख्य चुनाव आयुक्त घोषित कर दिया ▪️ज्ञानेश कुमार अमित शाह के दाहिने हाथ माने जाते हैं. वैसे सवाल तो यह पूछे जाएँगे👇 • वैसे ऐसी कौन सी जल्दी थी कि कोर्ट की सुनवाई के लिए रुक नहीं सकते थे? • ऐसा क्या करना चाह रहे थे कि समिति से चीफ जस्टिस को निकाल कर अपना मंत्री डाला? • CBI डायरेक्टर की नियुक्ति की समिति में चीफ जस्टिस हैं, तो चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में क्यों नहीं?

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Pooja88852503's profile picture

अब किसी का ख़ून नहीं खौल रहा? अब किसी का राष्ट्रवाद नहीं जाग रहा है? अब किसी को दिक़्क़त नहीं हो रही? भारतीयों को चेनों में बाँध कर हथकड़ियाँ पहनाकर अमेरिका भेज रहा है, हमारे देश की महिलाओं तक को चेन में बांधा गया एक नाकारी सरकार के साथ साथ वो सब लोग जो इसपर या तो चुप हैं, या आँखें मूँद ली हैं, या इसको सही ठहरा रहे हैं - आपका पाखंड और फ़र्ज़ी राष्ट्रप्रेम देखकर दुख नहीं होता गुस्सा आता है देश प्रेम की बात करने वालों - अगर अपने साथी भारतीयों के साथ यह होता देखकर तुम ख़ुश हो रहे हो या सही ठहरा रहे हो तो ख़ाक प्यार करते हो तुम इस देश से भारत माता की जय बोलने वालों - वो जय नदी नालों पेड़ पहाड़ों गाँव शहर से कहीं ज़्यादा हर एक भारतीय की है. क्रिकेट मैच में इंडिया इंडिया चीखने से, या जर्सी पहनना भर ही राष्ट्रप्रेम नहीं है - अपने मुल्क के लोगों के साथ अगर ग़लत हो तो उसके ख़िलाफ़ बोलना देशभक्ति है किसी देश में अवैध रूप से जाना बिल्कुल ग़लत है, और हर देश उससे निपटने के लिए भी स्वतंत्र है लेकिन पूरी दुनिया में डंका बजने का दावा करने वाले - अपने लोगों के साथ थोड़ी सी मानवता सुनिश्चित नहीं कर पाये? हमसे छोटे देशों ने अपने नागरिकों को बेड़ियां पहनाने का विरोध किया और हमारी सरकार से एक चूँ तक ना निकला यह इज़्ज़त है 140 करोड़ भारतीयों की? यह तूती बोल रही है हमारी की हमारे लोगों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार हो? यह इसलिए लिख रही हूँ क्योंकि एक बार सोचिएगा - अगर अपना बच्चा गलती करे तो आप उसको डाँटेंगे, शायद थप्पड़ भी जड़ दें लेकिन अगर कोई बाहरी व्यक्ति ऐसा करेगा तो आप कमर कस के लड़ने के लिए तैयार हो जाएँगे तो हमारे लोगों के साथ अमेरिका ने इस बदसलूकी की सोची भी कैसे? अमेरिका ने हमारे देश के 104 लोगों को भेड़–बकरी की तरह जंजीरों से बांधकर खदेड़ दिया. भेजने से पहले डिटेंशन सेंटर में रखा, फिर 40 घंटे प्रताड़ित किया आप जुमलों की बारिश करते रहे और हमारा देश बेइज़्ज़ती होता रहा. और नाकामी को सही कहने वालों की आत्मा तो कबकी मर चुकी है - अब दिखावा भी ख़त्म हो गया क्योंकि जो भी हो, यह हैं तो अपने लोग ही. और मेरा राष्ट्रवाद इनके साथ हुई अमानवीयता को किसी क़ीमत पर ठीक नहीं ठहरा सकता - अगर आपका ठहरा रहा है तो लानत है आप पर!

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किसान सरकार के समक्ष अपनी मांगों को रखने और अपनी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए दिल्ली आना चाहते हैं‌। उनपर आंसू गैस के गोले दागना और उन्हें तरह-तरह से रोकने का प्रयास करना निंदनीय है। सरकार को उनकी मांगों और समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए। अन्नदाताओं की तकलीफ़ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आज देश में हर घंटे एक किसान आत्महत्या करने को मजबूर होते हैं। मोदी सरकार की घोर असंवेदनशीलता के कारण पहले किसान आंदोलन में 700 से अधिक किसानों की शहादत को भी देश नहीं भूला है। हम किसानों की पीड़ा को समझते हैं और उनकी मांगों का समर्थन करते हैं। MSP की लीगल गारंटी, स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिशों के अनुसार खेती की व्यापक लागत का 1.5 गुना MSP, क़र्ज़ माफ़ी समेत तमाम मांगों पर सरकार को तुरंत अमल करना चाहिए। जब अन्नदाता खुशहाल होंगे तभी देश खुशहाल होगा!

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Pooja88852503's profile picture

मध्य प्रदेश में BJP का जंगलराज 👇 सुशील कुमार शुक्ला ने अपनी बेटी के जन्मदिन पर एक कार्यक्रम रखा। अपने एक परिचित को जन्मदिन का न्योता देकर वो पैदल ही घर लौट रहे थे। तभी पुलिस वाले आए और सुशील जी को पकड़कर थाने ले गए। सुशील जी ने जब थाने पर लाने की वजह पूछी तो पुलिस वाले ने कहा:- चुप होकर बैठ जा! इसके बाद, एक बाइक का नंबर लिखा और 300 रुपए का चालान काट दिया। चालान में लिखा कि सुशील जी बिना हेलमेट के बाइक चला रहे थे। सुशील जी ने जब विरोध किया तो पुलिसकर्मी ने कहा- हमें अपना टार्गेट पूरा करना है, इसलिए ये कर रहे हैं। साफ है - BJP सरकार ने पुलिस को जनता से वसूली की खुली छूट दे रखी है। BJP का एजेंडा बिलकुल क्लियर है: जनता को लूटो और अपनी तिजोरी भरो।

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