
सूर्य प्रकाश मिश्र
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🚩 भूखे को भोजन, प्रकृति को जीवन, और समाज को संस्कार — यही हमारा संकल्प। 🚩
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ब्राह्मण ही एक ऐसी जाति है कि किसी से अपना दुख कह नहीं सकता। ये एक गरीब परिवार ब्राह्मण परिवार का हालत हे जो कि घुट घुट के जी रहे हे न रहने के लिए कोई जगह हे न खाने का कोई सुविधा सरकार से यह अनुरोध हे कि आप इनको सपोर्ट जरूर करे सिंगारपुर लखीसराय अमरपुर पंचायत पिन कार्ड 811310
सूर्य प्रकाश मिश्र543,605 Aufrufe • vor 2 Monaten

सुप्रीम कोर्ट के वकील अनिल मिश्रा पहुंचे जंतर मंतर आरक्षण हटाओ आंदोलन में हुए शामिल।
सूर्य प्रकाश मिश्र103,128 Aufrufe • vor 1 Monat

इतनी घृणा आखिर क्यों सिर्फ एट्रोसिटी एक्ट मिलने के कारण
सूर्य प्रकाश मिश्र46,237 Aufrufe • vor 16 Tagen

आरक्षण में कोई बैक गियर नहीं? तमिलनाडु में 93% कोटा ओबीसी में "जाति एक वर्ग है" |
सूर्य प्रकाश मिश्र34,501 Aufrufe • vor 29 Tagen

आरक्षण पर ब्राह्मण ठाकुरों मिला दलितों का साथ! दलित नेताओं के उड़े होश! अब होगी आर पार की जंग!
सूर्य प्रकाश मिश्र20,377 Aufrufe • vor 1 Monat

#प्रतापगढ़ के पंडित का पुरवा गांव की यह बिटिया गरीब ब्राह्मण परिवार की बच्ची पढ़ना चाहती हैं लेकिन पिता की बीमारी ने परिवार से सब कुछ छीन लिया माता ने अपना सिंदूर बचाने के लिए अपने जेवर तक बेच दिया आज मां के हाथ खाली हैं आप सबका छोटा सा सहयोग बिटिया का भविष्य संवार सकता है ..
सूर्य प्रकाश मिश्र21,324 Aufrufe • vor 1 Monat

अजीत भारती जी ने आरक्षण पर क्या कहा? | पूरी वीडियो देखें और अपनी राय दें!!
सूर्य प्रकाश मिश्र18,454 Aufrufe • vor 1 Monat

आपकी बस 4:30 मिनट ही चाहिए मौलाना कलीम सिद्दीकी द्वारा पांच निकाह, तीन हलाला और धर्म परिवर्तन: इंदौर की इस भयावह घटना को पढ़ें 2012 में, एक ब्राह्मण महिला सोशल मीडिया पर नवीन राणा नाम के एक व्यक्ति से मिलीं। 2013 में, उसने उन्हें इंदौर से दिल्ली बुलाया। वहां से उन्हें फलात स्थित एक मदरसे में ले जाया गया, जहां उन्हें पता चला कि नवीन का असली नाम नावेद है। उन्हें मदरसे में बंधक बनाकर रखा गया, जहां उन्हें जबरन इस्लामी शिक्षाएं दी गईं। उन्हें कलमा पढ़ने और बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया गया। वहां से उन्हें छह महीने के लिए मेरठ के एक मदरसे में भेज दिया गया और फिर मुजफ्फरनगर स्थित उसी मदरसे में स्थानांतरित कर दिया गया। फलात मदरसे में मौलाना अब्दुर रहमान ने उनके साथ बलात्कार किया। जब उन्होंने विरोध किया, तो वह उनके कपड़े उतारकर उन्हें पीटता था। फिर उसने उन्हें तीन तलाक देकर छोड़ दिया। इसके बाद उन्हें खालत मदरसे में ले जाया गया, जहां उन्हें तीन महीने की इद्दत की अवधि बितानी पड़ी। फिर जयपुर के एक मदरसे में पांच दिनों तक उनका हलाला संपन्न हुआ। 2015 में उन्हें उत्तर प्रदेश के शामली ले जाया गया, जहां उनका दूसरा निकाह मुदसिर नाम के एक व्यक्ति से हुआ। निकाह के बाद उन्हें गुजरात ले जाया गया, लेकिन मुदसिर की 2019 में मृत्यु हो गई। फिर मौलाना कारी आसमान नाम के एक मौलवी ने उन्हें फंसा लिया और दिल्ली के शाहीन बाग स्थित एक मदरसे में ले गए। वहां उनका हलाला संपन्न हुआ और उसके बाद उनकी शादी खालिद हुसैन से करा दी गई। लेकिन खालिद का परिवार उन्हें स्वीकार करने को तैयार नहीं था क्योंकि वह पहले से ही विवाहित था। 2022 में उसने उन्हें तीन तलाक दे दिया और खालिद के दोबारा शादी करने की इच्छा के चलते उन्हें बागपत में एक और हलाला संपन्न कराना पड़ा। बाद में, खालिद के भाई साकिब ने महिला का बलात्कार किया। तब खालिद के बहनोई फखरुद्दीन ने हलाला संपन्न कराया और कहा, "अब तुम खालिद से दोबारा शादी कर सकती हो क्योंकि अब तुम पाक हो गई हो।" फिर अंततः उसकी शादी खालिद से दोबारा हो गई। आखिरकार, वह उनके चंगुल से निकल गई और उसने 2 मई को गाजियाबाद के अंकुर विहार पुलिस स्टेशन में 16 आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
सूर्य प्रकाश मिश्र24,954 Aufrufe • vor 3 Monaten

गलती तो हुई है सवर्णों से............ अगर एससी-एसटी एक्ट का विरोध किया होता तो आज यूजीसी न आता ... 2018 में फर्जी केसों की बढ़ती संख्या देखकर उच्चतम न्यायालय ने एससी-एसटी एक्ट में बिना जांच गिरफ्तारी पर रोक लगाकर एंटीसिपेटरी बेल की इजाजत दे दी, लेकिन कोर्ट के फैसले को मोदी सरकार ने संसद पटल में पलट दिया ..... अगर उसी समय सवर्ण समाज सड़कों पर उतरा होता तो आज यूजीसी रेगुलेशंस देखने की नौबत न आती। लेकिन नहीं हमने उन्हें लोकसभा में तीन सौ से अधिक सीटें जिता दी । जाहिर है उन्हें लगा कि इन गुलामो पर तो कोई असर पड़ना नहीं है तो एससी-एसटी एक्ट मजबूत करने से भी पक्ष में न आए दलितों को यूजीसी के नाम पर पक्ष में कर लिया जाए और यूजीसी रेगुलेशंस ले आए लेकिन उस पर कोर्ट ने रोक लगा दी अब क्या करें तो दलित एक्ट लगाने वालों की ईनामी राशि 40% बढ़ाने जा रहे हैं । कहावत है बच्चा न रोये तो मां भी दूध नहीं पिलाती है अगर विरोध किया होता तो बजट में भी कुछ हासिल हो जाता, दमन को बर्दाश्त करने पर दमनकारी के हौंसले बुलंद हो जाते हैं। "मोदी है तो मुमकिन है" highlight
सूर्य प्रकाश मिश्र11,634 Aufrufe • vor 1 Monat