
Shama Parveen
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Social Worker | Empowering communities, changing lives | Helping people find hope, dignity, and opportunity | Dedicated to making a difference one life,
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इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता, उसका सिर्फ़ एक नाम होता है मोहब्बत। सहारनपुर की सुनीता अरोड़ा 180 किलोमीटर का सफर तय करके जंतर-मंतर सिर्फ़ इसलिए पहुँचीं क्योंकि उन्होंने रोज़ एक नौजवान, मोहम्मद जुनैद, को बिना किसी भेदभाव के लोगों की मदद करते देखा था। मुलाकात होते ही सुनीता जी की आँखें भर आईं। उन्होंने कहा "बेटा, तेरी माँ तुझसे मिलने सहारनपुर से आई है ऐसे ही हिंदू-मुस्लिम एकता और इंसानियत की मिसाल बनकर लोगों की सेवा करते रहना" यह दृश्य बता गया कि नफ़रत की दीवारें चाहे जितनी ऊँची हों, इंसानियत और मोहब्बत उन्हें हमेशा पार कर जाती है। यही है भारत की असली पहचान प्यार, भाईचारा और इंसानियत।
Shama Parveen796,735 Aufrufe • vor 2 Monaten

जिसे नारायण समझकर देश की बागडोर सौंपी, आज वही जनता कह रही है हमें ही चूना लग गया।
Shama Parveen347,761 Aufrufe • vor 1 Monat

वाह तालियाँ तो बनती हैं... क्योंकि छात्रों पर लाठी चलाने में कोई कसर जो नहीं छोड़ी।
Shama Parveen277,887 Aufrufe • vor 1 Monat

जंतर-मंतर पर अभिनेत्री स्वरा भास्कर की एंट्री आंदोलन में पहुंचकर उन्होंने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
Shama Parveen224,175 Aufrufe • vor 1 Monat

15 दिन से सोनम वांगचुक इंतज़ार कर रहे हैं लेकिन सत्ता के दरवाज़े बंद हैं। क्या अहंकार इतना बड़ा हो गया कि देश के एक वैज्ञानिक और शिक्षाविद से दो मिनट बात करना भी मंज़ूर नहीं। अंग्रेज़ों पर इतिहास में कई मौकों पर आंदोलनकारियों से बातचीत करने का उल्लेख मिलता है, लेकिन आज सवाल यह है कि लोकतांत्रिक सरकार संवाद से क्यों बच रही है। जनता ने सरकार चुनी थी, ख़ामोशी नहीं।
Shama Parveen194,635 Aufrufe • vor 1 Monat

डबल इंजन सरकार के विकास की असलियत देखिए। सागर जिले के बेरखेरी कला की बेटियां हर रोज़ अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं यही है वो "विकास" जिसके बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। जब शिक्षा तक पहुंचने के लिए बच्चों को अपनी जान दांव पर लगानी पड़े, तो समझ लीजिए कि पोस्टरों का विकास और ज़मीनी हकीकत में कितना फर्क है। गरीब और गांव के बच्चों का भी उतना ही अधिकार है सुरक्षित शिक्षा पर, जितना सत्ता में बैठे नेताओं के बच्चों का। 22 साल के दावों से ज़्यादा, ये तस्वीरें सच बोल रही हैं।
Shama Parveen91,828 Aufrufe • vor 26 Tagen

"कॉकरोच जनता पार्टी" को समर्थन देना है या नहीं, ये आपकी मर्ज़ी है। लेकिन अगर आज भी सोनम वांगचुक जैसे इंसान के संघर्ष पर चुप हो, तो कल अपने हक़ के लिए किसी और से लड़ने की उम्मीद मत रखना। जो सत्ता के डर से खामोश हैं, इतिहास उन्हें नहीं, संघर्ष करने वालों को याद रखता है।
Shama Parveen117,189 Aufrufe • vor 1 Monat

जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र-युवा आंदोलन में एक मुस्लिम युवती बुर्क़ा पहनकर पहुंची वह अभिजीत दिपके को ढूंढ रही थी, क्योंकि वह उनके लिए अपने हाथों से बनाया हुआ खाना लेकर आई थी। यह सिर्फ एक टिफिन नहीं था, बल्कि उस भरोसे का प्रतीक था जो देश के युवा इस आंदोलन से जोड़ रहे हैं कोई फल लेकर आ रहा है, कोई खाना, कोई पानी क्योंकि लोगों को लगता है कि ये लड़ाई किसी धर्म या जाति की नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य की है। जब सरकारें युवाओं की आवाज़ सुनने से इंकार करती हैं, तब आम लोग आगे आकर अपना समर्थन देते हैं। यह तस्वीर बताती है कि देश का युवा नफ़रत नहीं, अपने बेहतर भविष्य के लिए एकजुट होकर खड़ा है।
Shama Parveen157,615 Aufrufe • vor 2 Monaten

“मोदी के बाप का देश नहीं है, हमारा देश है यह किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं है हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी ने मिलकर इस देश को बनाया है और सबने अपनी कुर्बानियाँ दी हैं। अगर इनका बस चले तो मुसलमानों को गायब कर दें, दलितों को गायब कर दें और सिर्फ अपने भक्तों को रखें इनके लिए सिर्फ वही सही है जो बीजेपी के साथ है जो इनके खिलाफ बोले, उसे दबाने, डराने या खरीदने की कोशिश होती है अगर पैसों से नहीं बिकोगे तो छापे पड़वा देंगे यही इनकी राजनीति का तरीका बन गया है।”
Shama Parveen140,084 Aufrufe • vor 2 Monaten

"बच्चों को शिक्षा नहीं, मौत का रास्ता दिया जा रहा है!" मध्य प्रदेश के विदिशा में स्कूली बच्चों को उफनते स्टॉप डैम पर छलांग लगाकर स्कूल जाना पड़ रहा है। ज़रा सोचिए, अगर एक भी बच्चा फिसल जाए तो उसकी मौत का जिम्मेदार कौन होगा। सरकार शिक्षा के नाम पर करोड़ों के दावे और विज्ञापन करती है, लेकिन बच्चों के लिए एक सुरक्षित पुल तक नहीं बना सकी यह सिर्फ़ लापरवाही नहीं, बल्कि मासूमों की ज़िंदगी के साथ खुला खिलवाड़ है। किताबों से पहले बच्चों को सुरक्षित रास्ता चाहिए सरकार जवाब दे आख़िर बच्चों की जान की कीमत कब समझेगी।
Shama Parveen50,648 Aufrufe • vor 26 Tagen