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Sudhanshu Yadav

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Proud Indian 🇮🇳 | Ambedkarwadi | Socialist | Advocate for equality, justice, and progress | Allahabadi | Lucknow | Bihar

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अब समझ आया कि ई ससुरा अपराध कम काहे नहीं हो रहा है।।।🤣🤣🤣 ​अपराधियों को पकड़ने की जगह, साहब यहाँ पापा की परी बनने की ट्रेनिंग ले रहे हैं।।। ठुमके देख रहे हो? 🤣🤣🤣

अब समझ आया कि ई ससुरा अपराध कम काहे नहीं हो रहा है।।।🤣🤣🤣 ​अपराधियों को पकड़ने की जगह, साहब यहाँ पापा की परी बनने की ट्रेनिंग ले रहे हैं।।। ठुमके देख रहे हो? 🤣🤣🤣

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बीजेपी वाली दीदी जल्दी पकड़ा गई बंगाल में 🤣🤣 लगता है training ठीक से नहीं हुआ था इनका।।।

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बीजेपी वाली दीदी जल्दी पकड़ा गई बंगाल में 🤣🤣 लगता है training ठीक से नहीं हुआ था इनका।।।

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ये बच्चा वोट नहीं डाल रहा, चुनाव आयोग के मुंह पे तमाचा मार रहा है ।। #BiharElections

ये बच्चा वोट नहीं डाल रहा, चुनाव आयोग के मुंह पे तमाचा मार रहा है ।। #BiharElections

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बराबरी ज़रूर कीजिए, पर काबिलियत में... कानून तोड़ने और जान जोखिम में डालने में नहीं।।। पुरुषों की बराबरी करनी थी, तो अंतरिक्ष में जातीं, खेल में मेडल लातीं... लेकिन नहीं।।।दीदी को तो चलती ट्रेन के गेट पर लटक कर रील बनानी है और यमराज को सीधे टक्कर देनी है।।। सशक्तिकरण के नाम पर ये कौन सा नया स्टंट है? बराबरी अधिकारों में चाहिए या बेवकूफी में?

बराबरी ज़रूर कीजिए, पर काबिलियत में... कानून तोड़ने और जान जोखिम में डालने में नहीं।।। पुरुषों की बराबरी करनी थी, तो अंतरिक्ष में जातीं, खेल में मेडल लातीं... लेकिन नहीं।।।दीदी को तो चलती ट्रेन के गेट पर लटक कर रील बनानी है और यमराज को सीधे टक्कर देनी है।।। सशक्तिकरण के नाम पर ये कौन सा नया स्टंट है? बराबरी अधिकारों में चाहिए या बेवकूफी में?

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आज एक बेटी का बाप होने के नाते मेरा दिल कांप उठा है।।। बाद में मोमबत्तियाँ जलाने से बेहतर है, आज इस मासूम के लिए आवाज़ उठाइए।।। ​कानपुर से आया यह वीडियो रोंगटे खड़े कर देने वाला है। एक 9-10 साल की मासूम बच्ची अपने घर के सामने रहने वाले 18 साल के लड़के (नैतिक कुमार) की अश्लील हरकतों, गंदे इशारों और प्रताड़ना से इस कदर खौफ में है कि उसे सोशल मीडिया पर आकर रोते हुए न्याय की भीख मांगनी पड़ रही है।।। ​घर में केवल माँ-बेटी अकेले रहते हैं और आरोपी परिवार पैसे और रसूख के दम पर हर जगह मामला दबा रहा है। जब माँ शिकायत करने जाती है, तो उन्हें गालियाँ और धमकियाँ मिलती हैं।।। ​आखिर कब तक हमारी बेटियां अपने ही घर के बाहर निकलने, साइकिल चलाने या सांस लेने से भी डरती रहेंगी? क्या प्रशासन किसी बड़ी वारदात के होने का इंतज़ार कर रहा है??? ​मुख्यमंत्री जी और कानपुर पुलिस से हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि इस रसूखदार परिवार की गर्मी शांत की जाए और इस बेटी को तुरंत सुरक्षा और न्याय दिया जाए।।।

Sudhanshu Yadav

388,872 просмотров • 1 месяц назад

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RSS।।।क्या अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के नाम पर दूसरों की शांति भंग करना जायज है??? आज सुबह किसी ने ये वीडियो मुझे मध्यप्रदेश से शेयर किया और इसको देखकर इसपे कुछ लिखने को बोला।।। इस वीडियो में एक छात्र सुबह के समय अपने घर के पास लगने वाली RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) की शाखा में होने वाली नारेबाजी और शोर का विरोध करता दिख रहा है। छात्र का कहना है कि देर रात तक पढ़ाई करने के कारण सुबह इस तेज शोर से उसकी नींद और मानसिक शांति प्रभावित होती है। जब उसने इस संबंध में बात की, तो समस्या का समाधान करने के बजाय उस पर सवाल खड़े किए गए।।। यह घटना कई गंभीर संवैधानिक, कानूनी और नैतिक प्रश्न खड़े करती है।।। क्या सार्वजनिक या खाली मैदानों में अधिकारपूर्वक गतिविधियों का संचालन किया जा सकता है??? भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्वक और बिना हथियारों के एकत्र होने की स्वतंत्रता देता है। हालांकि, यह अधिकार असीमित नहीं है (Article 19(2))।।। किसी भी सार्वजनिक स्थल, पार्क या सरकारी जमीन पर नियमित गतिविधियां चलाने के लिए स्थानीय प्रशासन या पुलिस से अनुमति लेना आवश्यक होता है। यदि कोई गतिविधि आवासीय क्षेत्र में आम नागरिकों या विद्यार्थियों की शांति में खलल डालती है, तो स्थानीय प्रशासन के पास उसे विनियमित करने का अधिकार है।।। माननीय सुप्रीम कोर्ट और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के अनुसार, आवासीय क्षेत्रों में ध्वनि का एक निश्चित स्तर तय है। विशेषकर सुबह और रात के समय शांति बनाए रखना नागरिकों का मौलिक अधिकार है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत आता है।।। किसी छात्र की पढ़ाई और नींद का अधिकार किसी भी संगठन की गतिविधियों से कम महत्वपूर्ण नहीं है। यदि किसी संगठन या शाखा का मूल उद्देश्य खेल, शारीरिक विकास, अनुशासन या भाईचारा सिखाना है, तो इसके लिए सुबह आवासीय क्षेत्रों में तेज नारेबाजी की क्या आवश्यकता है??? क्या सच्चा अनुशासन और समाज निर्माण दूसरों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील होने से शुरू नहीं होता? जब एक छात्र अपनी पढ़ाई और स्वास्थ्य का हवाला देकर शांति की अपील करता है, तो उसकी समस्या को सुलझाने के बजाय उसे विरोधी की दृष्टि से देखना कितना उचित है??? पक्या आवासीय क्षेत्रों में संचालित होने वाली सार्वजनिक गतिविधियों के लिए समय और ध्वनि सीमा तय नहीं होनी चाहिए??? क्या नागरिकों और विद्यार्थियों की दैनिक समस्याओं और अधिकारों का सम्मान करना ही राष्ट्र निर्माण का पहला कदम नहीं है??? समाज में अनुशासन, राष्ट्रभक्ति या सांस्कृतिक गतिविधियों का स्वागत है, लेकिन ये मूल्य किसी नागरिक या छात्र की मौलिक शांति और अधिकारों की कीमत पर थोपे नहीं जा सकते। आपसी संवाद, संवेदनशीलता और नियमों के पालन से ही एक स्वस्थ और सभ्य समाज का निर्माण संभव है।।।

Sudhanshu Yadav

190,898 просмотров • 29 дней назад

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मगरमच्छ के आंसू 🐊 ​सोचिए, एक महिला कैमरे के सामने छाती पीट-पीटकर रो रही हो, जिसने मेरे पति को मारा, उसे मेरे सामने लाओ... जान के बदले जान लेंगे।।। उसकी इस बेबसी और एक्टिंग को देखकर पुलिस से लेकर पूरा समाज भावुक हो गया, सब उसके साथ खड़े हो गए।।। ​...लेकिन जब सच सामने आया, तो सबके पैरों तले जमीन खिसक गई।।। ​बिहार के किशनगंज में पुलिस की तफ्तीश में जो सच सामने आया, उसने सबको स्तब्ध कर दिया है। जिस पति की मौत पर यह महिला इंसाफ की भीख मांग रही थी, असल में उसने खुद अपने ही पति की बेरहमी से हत्या की थी।।। समाज की हमदर्दी बटोरने के लिए इस महिला ने ऐसा नाटक रचा कि एक पल के लिए कानून भी चक्रव्यूह में फंस गया।।। ​किशनगंज पुलिस ने इस खौफनाक हत्याकांड का खुलासा करते हुए आरोपी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है।।। ​अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के हाथों से बच नहीं सकता।।। कानून अंधा हो सकता है मूर्ख नहीं।।। ​रिश्तों को शर्मसार करने वाली और कानून की आंखों में धूल झोंकने वाली इस कातिल पत्नी की खतरनाक एक्टिंग पर आप क्या कहना चाहेंगे? ऐसे अपराधियों को क्या सजा मिलनी चाहिए? ​अपनी राय खुलकर साझा करें।।।

Sudhanshu Yadav

237,455 просмотров • 1 месяц назад

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पत्रकारिता या चाटुकारिता पहले मुझे भी लगा गलत हुआ, लेकिन जब पूरा सच देखा तो मेरे होश उड़ गए होश उड़ गए।।। ​शुरुआत में जब उस पत्रकार के पिटने, चश्मा टूटने और कपड़े फटने का वीडियो वायरल हुआ, तो मुझे भी बहुत बुरा लगा। मुझे लगा कि यार यह तो बिल्कुल गलत है! स्टूडियो में बैठकर नफरत कोई और फैला रहा है, और सड़क पर रिपोर्टिंग कर रहे रिपोर्टर के साथ लोग गलत कर रहे हैं। हिंसा का समर्थन तो कोई भी नहीं कर सकता।।। ​यहाँ तक कि जब हमारे स्पेस भाईचारा 2.0 में Mohit Pandey और पूछने लगे कि छात्रों की इस अराजकता पर कुछ बोलिए, तो मुझे भी लगा कि इस पर लिखना चाहिए।।। ​ लेकिन फिर मैंने स्क्रॉल करते हुए यह वीडियो देखा... ​वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि पुलिस द्वारा डिटेन किए जा रहे छात्रों में से जब एक बच्चा अपनी जान बचाकर भागने की कोशिश करता है, तो यह गोदी मीडिया वाला पत्रकार रिपोर्टिंग छोड़कर खुद पुलिसकर्मी बन जाता है! वह उस बच्चे को घसीटकर वापस पुलिस के हवाले करने की कोशिश करता है।।। ​अब सवाल यह उठता है ​क्या वह छात्र कोई चोर, डाकू या आतंकी था??? ​पत्रकार का काम रिपोर्टिंग करना है या पुलिस की मुखबरी/दलाली करना??? ​क्या यह साफ़ नहीं दिखाता कि यह मीडिया पूर्वाग्रह (Bias) से पीड़ित था और घर से ही मन बनाकर आया था कि छात्रों को गलत ही साबित करना है??? ​मेरा सीधा सवाल ​जब पत्रकार निष्पक्षता का मुखौटा उतारकर खुद एक पक्ष की तरफ से गुंडागर्दी या पुलिसगिरी करने लगेगा, तो सड़कों पर उतरे गुस्साए युवाओं से आप किस मर्यादा की उम्मीद करते हैं??? ​हिंसा का समर्थन कोई नहीं करता, लेकिन जब मीडिया खुद पुलिस की लाठी और सत्ता का औजार बन जाए, तो जनता का भरोसा और सब्र दोनों टूट जाता है।।। ​मीडिया को पीड़ित बनने से पहले अपने अंदर झांककर आत्ममंथन करने की सख्त जरूरत है।।। कौन गलत कौन सही फैसला आपका???हिट

Sudhanshu Yadav

156,243 просмотров • 1 месяц назад

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क्या यही है शिक्षा का स्तर? ​सोशल मीडिया पर लखनऊ के इंदिरा नगर स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) की ऑनलाइन क्लास का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने शिक्षा जगत और समाज को झकझोर कर रख दिया है।।। ​वीडियो में मुख्य आरोपी शिक्षक धीरेंद्र पत्र ऑनलाइन क्लास के दौरान मर्यादा की सारी हदें पार करते नजर आ रहे हैं। किसी बात पर आपा खोकर उन्होंने न केवल छात्र के साथ अभद्र व्यवहार किया, बल्कि उसके माता-पिता और पूरे खानदान के लिए बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया।।। ​इस घटना के बाद से समाज और अभिभावकों में गहरा रोष है।।। ​एक शिक्षक का काम बच्चों को सही राह दिखाना और संस्कार देना होता है, न कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना।।। ​बच्चों के सामने ऐसी घटिया भाषा का प्रयोग उनके कोमल मन और मानसिक विकास पर बेहद नकारात्मक असर डालता है।।। ​सोशल मीडिया पर लोग इसे शिक्षक के निजी जीवन की फ्रस्ट्रेशन को मासूम बच्चों पर निकालने का एक घटिया उदाहरण बता रहे हैं।।। ​आक्रोशित अभिभावकों और नागरिकों ने प्रशासन और स्कूल प्रबंधन से आरोपी शिक्षक धीरेंद्र पत्र के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी और विभागीय कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई भी शिक्षक ऐसी हरकत करने की हिम्मत न कर सके।।। ​यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ी करती है कि क्या अब ऑनलाइन क्लासेस की मॉनिटरिंग के लिए स्कूलों में कोई कड़ा और पारदर्शी सिस्टम होना चाहिए?​आप इस पूरे मामले और ऑनलाइन कक्षाओं की सुरक्षा को लेकर क्या सोचते हैं? अपने विचार जरूर साझा करें।।।

Sudhanshu Yadav

162,594 просмотров • 1 месяц назад

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बच्चों ने खोली स्कूल प्रशासन की पोल।।।कबाड़ में बेची जा रही थीं सरकारी किताबें ।।। गया जी (बिहार) से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ कोच प्रखंड के छतीहर जमालपुर विद्यालय के बच्चों ने हिम्मत दिखाकर स्कूल प्रशासन की पोल खोल दी है।।। छात्रों का आरोप है कि जहाँ एक तरफ वे किताबों के बिना पढ़ाई करने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ स्कूल की प्रभारी द्वारा बच्चों को बांटी जाने वाली सरकारी किताबों को कबाड़ में बेचा जा रहा था।।। बच्चों ने जब किताबों से भरी बोरियां कबाड़ी वाले के टेंपो में लादे जाते देखा, तो चुप बैठने के बजाय तुरंत अपने फोन से इसका लाइव सबूत (वीडियो) बना लिया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह नई नवेली सरकारी किताबें बोरियों में भरकर बेची जा रही हैं।।। छात्रों द्वारा बनाया गया यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बच्चों के इस साहसिक कदम की हर तरफ तारीफ हो रही है और लोग स्कूल प्रशासन व दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।।। क्या ऐसे बढ़ेगा देश, जब बच्चों के हक की किताबें कबाड़ में बिकेंगी??? आपकी इस पर क्या राय है???

Sudhanshu Yadav

23,143 просмотров • 23 дней назад

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वाह दीदी वाह 🤣 RIP Indian Godi Media 🙏

Sudhanshu Yadav

71,754 просмотров • 3 месяцев назад