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Rajat Mourya 🇮🇳

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Author of "The Gold Standards of Ambedkarism" | Passionate about heritage, history & politics | Building an inclusive, equitable society.

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जो भारतीय संविधान को नहीं मानता और उसे अस्वीकार करता है, वह देश के साथ गद्दारी कर रहा है। इस शंकराचार्य को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

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जो भारतीय संविधान को नहीं मानता और उसे अस्वीकार करता है, वह देश के साथ गद्दारी कर रहा है। इस शंकराचार्य को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

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महाकाल या बुद्ध आप खुद बताएं। किसी अंबेडकरवादी या बुद्धिस्ट संस्थान का ध्यान क्यों नहीं जाता इस तरफ?

महाकाल या बुद्ध आप खुद बताएं। किसी अंबेडकरवादी या बुद्धिस्ट संस्थान का ध्यान क्यों नहीं जाता इस तरफ?

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J Sai Deepak

Rajat Mourya 🇮🇳

132,552 Aufrufe • vor 2 Jahren

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गौतम बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ तब 8 राजाओं ने उनकी अस्थि अवशेष को अपने राज्यों के लिए मांगा और उन पर स्तूपों का निर्माण कराया। ये तीन जोकर बैठे हैं, चाहे तो एक खुली बहस कर लें और साबित करें कि बुद्ध के समय जातियाँ या वर्ण थे। अगर इन्होंने ज़रा भी पढ़ाई की है, तो यही साबित कर दें कि उनके समय संस्कृत भाषा और वेद थे। बाबा साहेब ने कभी नहीं कहा कि उन्होंने नवयान यानी नियो बुद्धिज़्म शुरू किया है। एक पत्रकार ने उनसे कहा कि क्या ये कहा जा सकता है कि आपका मार्ग नियो बुद्धिज़्म का है? तब बाबा साहेब ने कहा, हाँ, कहा जा सकता है। ये प्रोपेगेंडा इन तीन नालायकों के सजातीय लोगों ने शुरू किया। इन दो कौड़ी के नालायकों को ये भी नहीं पता कि बुद्धिज़्म के अष्टांगिक मार्ग की 8 शिक्षाएँ बाबा साहेब की 22 प्रतिज्ञाओं का हिस्सा हैं। एक अनपढ़ गँवार आदमी इन दो टके के दलालों से ज्यादा आईक्यू रखता होगा। दलाई लामा पूरे दुनिया के बुद्धिज़्म की एक शाखा लामा बुद्धिज़्म के परमुख व्यक्ति को कहा जाता है, जो तिब्बत में शुरू हुआ 6-7 सदी के आसपास। तिब्बत में तुम्हारे जातिवादी और वर्णवादी धर्म की तरह समाज को नहीं बाँटा जाता था। अरे नालायक, जब तिब्बत में शूद्र होते ही नहीं हैं तो वहाँ कोई शूद्र दलाई लामा कैसे बनेगा? तथागत ने यह कहीं नहीं कहा कि वो नया धर्म चला रहे हैं, उन्होंने पुराने धम्म को ही गतिमान किया, इसलिए उसे धम्म चक्क पवत्तन कहा गया। गँवार, बाबा साहेब को बुद्ध नहीं, बोधिसत्व माना गया, और भारत के लोगों ने उन्हें बोधिसत्व नहीं कहा। श्रीलंका, म्यांमार, नेपाल आदि देशों के बौद्ध भिक्षुओं ने बाबा साहेब को बोधिसत्व की उपाधि दी थी। तथागत ने कब ऐसा कहा कि मेरी मूर्तियाँ नहीं बनाना या बनाना? कौनसे पिटक में यह बात आती है? तुम्हारे धर्म में कब से मूर्ति पूजा होने लगी? 8वीं सदी से पहले की एक भी मूर्ति दिखा दो अपने धर्म की। उल्टा तुम्हारी मनुस्मृति में मूर्ति बनाने वालों का विरोध किया गया है, कारीगरों का विरोध किया गया है, शर्म करो। पूरी दुनिया में बुद्ध की मूर्तियाँ बनीं, क्योंकि पूरी दुनिया ने बुद्ध को स्वीकार किया। तुम्हारी तरह बैठकर मज़ाक थोड़ी बनाया। तुम्हारे पुरखों की तरह उनकी मूर्तियाँ तोड़ी नहीं दुनिया वालों ने।

Rajat Mourya 🇮🇳

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देखिए, ऐसे फैलाया जाता है बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के बारे में झूठा प्रचार — शब्दों को तोड़-मरोड़ कर, संदर्भ काटकर, और सच्चाई को दबाकर। और जब हम सच बताते हैं, तो यही लोग पूछते हैं — “तुम्हें ब्राह्मणों से नफ़रत क्यों है?” हम किसी से नफ़रत नहीं करते, लेकिन बताइए — हम ब्राह्मणवाद के खिलाफ क्यों न हों? वो व्यवस्था जिसने सदियों तक इंसान को इंसान नहीं माना। 📚 सच पढ़िए, 💙 सोचिए, ✊ और फिर बोलिए जय भीम। #JaiBhim #Ambedkarite #Brahmanwad #ExposeTheLies #DrAmbedkar #BahujanVoice #VasantMoon #ArunShourie #AmbedkarTruth #EducateOrganizeAgitate #जयभीम ANUPAM MISHRA शर्म आनी चाहिए तुम्हें! खुद को पत्रकार कहते हो — लेकिन असल में तुम जातिवादी गुंडों से ज़्यादा कुछ नहीं हो।

Rajat Mourya 🇮🇳

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