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Tribal Army Provides a platform to challenge the generational neglect of Indigenous people of India.

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ये वीडियो किसी फिल्म की शूटिंग का दृश्य है तो हमें कोई आपत्ति नहीं लेकिन अगर यह वास्तविक हकीकत घटना है तो बेहद ही शर्मनाक है।

ये वीडियो किसी फिल्म की शूटिंग का दृश्य है तो हमें कोई आपत्ति नहीं लेकिन अगर यह वास्तविक हकीकत घटना है तो बेहद ही शर्मनाक है।

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बस्तर में भर्ती अभियान के दौरान एक अर्धसैनिक अधिकारी द्वारा आदिवासी युवक को लात मारने की घटना निंदनीय और शर्मनाक है। जो बल देश की रक्षा के लिए बने हैं, अगर वही देश के आदिवासी युवाओं का अपमान करें तो यह न्याय और संविधान दोनों का अपमान है।

बस्तर में भर्ती अभियान के दौरान एक अर्धसैनिक अधिकारी द्वारा आदिवासी युवक को लात मारने की घटना निंदनीय और शर्मनाक है। जो बल देश की रक्षा के लिए बने हैं, अगर वही देश के आदिवासी युवाओं का अपमान करें तो यह न्याय और संविधान दोनों का अपमान है।

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असम में सालों से बीजेपी द्वारा अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा और छठी अनुसूची के संरक्षण की मांगों को नजरअंदाज किया गया है। अब आवाज़ें और तेज़, और पहले से ज़्यादा एकजुट होकर उठ रही हैं। यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि सम्मान, अधिकार और पहचान की लड़ाई है।

असम में सालों से बीजेपी द्वारा अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा और छठी अनुसूची के संरक्षण की मांगों को नजरअंदाज किया गया है। अब आवाज़ें और तेज़, और पहले से ज़्यादा एकजुट होकर उठ रही हैं। यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि सम्मान, अधिकार और पहचान की लड़ाई है।

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मध्यप्रदेश की यह घटना याद है? नीमच में कन्हैया भील नामक एक आदिवासी युवक को जानवरों की तरह ट्रक के पीछे बांधकर कई किलोमीटर खींचा था और बाद में उसकी मौत हो गई थी। लेकिन हम एक ऐसे दौर में जी रहे है जहां आदिवासियों के जीवन का मूल्य एक जानवर के बराबर भी नहीं है।

मध्यप्रदेश की यह घटना याद है? नीमच में कन्हैया भील नामक एक आदिवासी युवक को जानवरों की तरह ट्रक के पीछे बांधकर कई किलोमीटर खींचा था और बाद में उसकी मौत हो गई थी। लेकिन हम एक ऐसे दौर में जी रहे है जहां आदिवासियों के जीवन का मूल्य एक जानवर के बराबर भी नहीं है।

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सागर, मप्र की दलित लड़की के साथ बीजेपी के दबंग ठाकुरों ने बदसलुखी की। जब इसका भाई ने विरोध किया तो उसे मौत के घाट उतार दिया। मां ने विरोध किया तो उसे निर्वस्त्र किया। घर तोड़ दिया। चाचा ने विरोध किया तो उसे मार दिया। स्वयं के और परिवार के न्याय के लिए जंग लड़ती हुई आज यह लड़की खुद जिंदगी से जंग हार गई। दुखद। #DalitLivesMatter

सागर, मप्र की दलित लड़की के साथ बीजेपी के दबंग ठाकुरों ने बदसलुखी की। जब इसका भाई ने विरोध किया तो उसे मौत के घाट उतार दिया। मां ने विरोध किया तो उसे निर्वस्त्र किया। घर तोड़ दिया। चाचा ने विरोध किया तो उसे मार दिया। स्वयं के और परिवार के न्याय के लिए जंग लड़ती हुई आज यह लड़की खुद जिंदगी से जंग हार गई। दुखद। #DalitLivesMatter

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राजस्थान के जिस टोंक जिले में प्रधानमंत्री मोदी आज जहां भाषण दे रहे थे वहीं आज दलितों की बारात निकलने के रास्ते को रोका जा रहा था। रास्ते में खंबे–पत्थर लगाएं जा रहे थे। बीजेपी सरकार को चुल्लू भर पानी में शर्म से डूब जाना चाहिए।

राजस्थान के जिस टोंक जिले में प्रधानमंत्री मोदी आज जहां भाषण दे रहे थे वहीं आज दलितों की बारात निकलने के रास्ते को रोका जा रहा था। रास्ते में खंबे–पत्थर लगाएं जा रहे थे। बीजेपी सरकार को चुल्लू भर पानी में शर्म से डूब जाना चाहिए।

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ईवीएम के खिलाफ़ जनता का सड़कों पर आंदोलन शुरु हो चुका है। #BanEVM

ईवीएम के खिलाफ़ जनता का सड़कों पर आंदोलन शुरु हो चुका है। #BanEVM

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छत्तीसगढ में जब सत्ता में बघेल सरकार थी तो Smriti Z Irani हसदेव जंगल बचाओ के पक्ष में लोकसभा में चिल्ला चिल्ला के बोल रही थी। लेकिन आज जब वर्तमान में राज्य में बीजेपी सरकार है तो हसदेव जंगल के पक्ष में एक शब्द नहीं बोल पा रही है। हम तब भी बोल रहे थे, आज भी बोल रहे है। #SaveHasdeo

छत्तीसगढ में जब सत्ता में बघेल सरकार थी तो Smriti Z Irani हसदेव जंगल बचाओ के पक्ष में लोकसभा में चिल्ला चिल्ला के बोल रही थी। लेकिन आज जब वर्तमान में राज्य में बीजेपी सरकार है तो हसदेव जंगल के पक्ष में एक शब्द नहीं बोल पा रही है। हम तब भी बोल रहे थे, आज भी बोल रहे है। #SaveHasdeo

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A tragic and horrifying incident has come to light in Madhya Pradesh, where a Dalit youth was brutally killed by a caste Hindu Sarpanch merely for drinking water from a borewell. This heinous act underscores the deeply entrenched caste-based discrimination and violence that continue to afflict Indian society, even in the 21st century. Such inhuman actions against marginalized communities highlight the urgent need for stricter enforcement of laws protecting Dalits and for greater efforts to promote social equality. This incident stands as a grim reminder of the systemic oppression faced by Dalits and the persistent failure of society to uphold basic human dignity and justice. NHRC India Human Rights Watch PMO India

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A tragic and horrifying incident has come to light in Madhya Pradesh, where a Dalit youth was brutally killed by a caste Hindu Sarpanch merely for drinking water from a borewell. This heinous act underscores the deeply entrenched caste-based discrimination and violence that continue to afflict Indian society, even in the 21st century. Such inhuman actions against marginalized communities highlight the urgent need for stricter enforcement of laws protecting Dalits and for greater efforts to promote social equality. This incident stands as a grim reminder of the systemic oppression faced by Dalits and the persistent failure of society to uphold basic human dignity and justice. NHRC India Human Rights Watch PMO India

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जंगल धरती के फेफड़े हैं। ये हर साल इंसानों द्वारा छोड़ी गई लगभग 30% CO₂ को अपने अंदर समा लेते हैं और धरती को बचाते हैं। फिर भी दुनिया में जंगल तेजी से काटे जा रहे हैं। जंगल बचाना मतलब धरती और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बचाना।

जंगल धरती के फेफड़े हैं। ये हर साल इंसानों द्वारा छोड़ी गई लगभग 30% CO₂ को अपने अंदर समा लेते हैं और धरती को बचाते हैं। फिर भी दुनिया में जंगल तेजी से काटे जा रहे हैं। जंगल बचाना मतलब धरती और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बचाना।

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Cutting down a 100-year-old banyan tree in Nashik for Kumbh preparations is not development, it is environmental destruction. The felling of heritage trees like banyan and peepal along the Godavari River is deeply concerning. Faith should not come at the cost of nature. 🌳

Cutting down a 100-year-old banyan tree in Nashik for Kumbh preparations is not development, it is environmental destruction. The felling of heritage trees like banyan and peepal along the Godavari River is deeply concerning. Faith should not come at the cost of nature. 🌳

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हसदेव जंगल बचाने को लेकर छत्तीसगढ़िया आदिवासी युवती का संदेश। सभी जाति, धर्म के लोगों से आगे आने की अपील। #SaveHasdeo

हसदेव जंगल बचाने को लेकर छत्तीसगढ़िया आदिवासी युवती का संदेश। सभी जाति, धर्म के लोगों से आगे आने की अपील। #SaveHasdeo

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ऐसे नहीं होता है जी, बहुत पहले से EC,EVM को सेट करना पड़ता है !

ऐसे नहीं होता है जी, बहुत पहले से EC,EVM को सेट करना पड़ता है !

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जंगल की एक लकड़ी काटने पर सरकार आम नागरिकों का पूरा जीवन कोर्ट कचहरी में कटवाती है, वही अदानी द्वारा पूरा जंगल काटने पर उसको क्या सजा मिलनी चाहिए? #SaveHasdeo

जंगल की एक लकड़ी काटने पर सरकार आम नागरिकों का पूरा जीवन कोर्ट कचहरी में कटवाती है, वही अदानी द्वारा पूरा जंगल काटने पर उसको क्या सजा मिलनी चाहिए? #SaveHasdeo

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ईवीएम के खिलाफ़ देश की जनता ने आरपार की लड़ाई शुरू कर दी है। #BanEVM

ईवीएम के खिलाफ़ देश की जनता ने आरपार की लड़ाई शुरू कर दी है। #BanEVM

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कौशांबी में निर्दलीय दलित प्रत्याशी छेद्दु चमार जब नामांकन करने पहुंचा तो पहले उन्हें अपमानित करके धक्का देकर बाहर निकाल दिया गया और अब उनके पर्चा को तानाशाही पूर्ण रवैये से रद्द कर दिया गया। आख़िर छेद्दु चमार से इतना डर क्यों? #JusticeForChhedduChamar

कौशांबी में निर्दलीय दलित प्रत्याशी छेद्दु चमार जब नामांकन करने पहुंचा तो पहले उन्हें अपमानित करके धक्का देकर बाहर निकाल दिया गया और अब उनके पर्चा को तानाशाही पूर्ण रवैये से रद्द कर दिया गया। आख़िर छेद्दु चमार से इतना डर क्यों? #JusticeForChhedduChamar

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झारखंड के जमशेदपुर से महज 15 किलोमीटर दूर स्थित बोटा गांव के आदिवासी और संथाल समुदाय के लोग आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीण जंगल के बीच बने गड्ढों से जान जोखिम में डालकर पानी लाने को मजबूर हैं, जहां आए दिन हाथियों का खतरा बना रहता है। यह बेहद शर्मनाक है कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी आदिवासी गांवों तक शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा नहीं पहुंच पाई। माननीय Hemant Soren जी और संबंधित प्रशासन से आग्रह है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेकर बोटा गांव के ग्रामीणों को सुरक्षित एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए।

झारखंड के जमशेदपुर से महज 15 किलोमीटर दूर स्थित बोटा गांव के आदिवासी और संथाल समुदाय के लोग आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीण जंगल के बीच बने गड्ढों से जान जोखिम में डालकर पानी लाने को मजबूर हैं, जहां आए दिन हाथियों का खतरा बना रहता है। यह बेहद शर्मनाक है कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी आदिवासी गांवों तक शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा नहीं पहुंच पाई। माननीय Hemant Soren जी और संबंधित प्रशासन से आग्रह है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेकर बोटा गांव के ग्रामीणों को सुरक्षित एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए।

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राजस्थान के अलवर में कैंटीन चलाने वाला मीणा आदिवासी परिवार और महिला के ऊपर जातिवादी गुंडों ने जिस प्रकार से हमला करके तोड़फोड व दुर्व्यवहार किया है यह कायराना हरकत है। एससी एसटी एक्ट में FIR दर्ज होने के बाबजूद गुंडों पर कार्यवाही नहीं हुई है। Alwar Police

राजस्थान के अलवर में कैंटीन चलाने वाला मीणा आदिवासी परिवार और महिला के ऊपर जातिवादी गुंडों ने जिस प्रकार से हमला करके तोड़फोड व दुर्व्यवहार किया है यह कायराना हरकत है। एससी एसटी एक्ट में FIR दर्ज होने के बाबजूद गुंडों पर कार्यवाही नहीं हुई है। Alwar Police

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मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के पांढुर्ना में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां 14 साल के बच्चे को घड़ी चोरी के आरोप में अमानवीयता की हदें पार कर उल्टा लटकाकर डंडों से पीटा गया और मिर्च की धुनी दी गई। इस निर्मम प्रताड़ना के दौरान बच्चा लगातार छोड़ देने की गुहार लगाता रहा, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि हमारी संवेदनाओं को भी झकझोर देती है। ऐसे बर्बर कृत्यों पर रोक लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई और बच्चा इस प्रकार की यातना का शिकार न बने। मध्य प्रदेश में वंचित तबकों के लोगों के प्रति अत्याचार की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। आए दिन दलितों, आदिवासियों और कमजोर वर्गों के लोगों के साथ बर्बरता की खबरें सामने आ रही हैं, जो न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि समाज की संवेदनहीनता को भी उजागर करता है। ऐसी घटनाएं हमारे तंत्र की कमजोरियों को दिखाती हैं और यह स्पष्ट करती हैं कि कमजोर तबकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। सरकार और प्रशासन को इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि समाज में समानता और न्याय की भावना मजबूत हो सके। Dr Mohan Yadav Madhya Pradesh Police DGP MP Kamal Nath

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309,780 次观看 • 1 年前

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महाराष्ट्र के पुणे शहर से 20 किमी दूर खड़कवासला डैम के पास एक वृद्ध आदिवासी महिला को तीन पत्थरों की चूल्हा जलाकर भोजन बनाते देखना दिल दहला देने वाला है। यह दृश्य न केवल सरकार की आदिवासी विरोधी नीतियों का परिणाम है, बल्कि उज्ज्वला योजना और पीएम आवास योजना जैसी योजनाओं की असफलता को भी उजागर करता है। बीजेपी सरकार द्वारा हर घर में गैस सिलेंडर और हर परिवार को घर देने का दावा किया गया था, लेकिन यह दावा उन लाखों आदिवासी परिवारों तक नहीं पहुंच सका, जिनकी आज भी हालत बदतर है। आदिवासी कातकरी समाज के उत्थान के लिए बनाई गई योजनाएं केवल कागजों पर सजी हैं। यह घटना बताती है कि सरकार के दावे और जमीनी हकीकत के बीच गहरी खाई है। हम इस गंभीर लापरवाही की कड़ी निंदा करते हैं और सरकार से मांग करते हैं कि उज्ज्वला योजना और पीएम आवास योजना के तहत वंचित आदिवासी परिवारों को तुरंत लाभान्वित किया जाए। उनके जीवन स्तर को सुधारने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं। Devendra Fadnavis Eknath Shinde - एकनाथ शिंदे Ajit Pawar CMO Maharashtra Jual Oram President of India Narendra Modi BJP

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275,415 次观看 • 1 年前