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Lalit Mishra Lavi

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सनातनी 🚩

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पानी.. पानी.. पानी ले आओ.... लेकिन इतना भी वक्त नहीं था.. जब तक पानी आता, तब तक उनके प्राण पखेरू उड़ चुके थे.. सब कुछ पलक झपकते ही हो गया. ये बहुत तगड़ा वाला प्यार था.. शायद भगवान को भी अच्छा नहीं लगा, कोई किसी से इतना प्यार करे!! वाकई ये पति-पत्नी का बहुत ही पवित्र प्यार था.. इसमें पति का त्याग और समर्पण ज्यादा दिख रहा.. लेकिन मंजूरे खुदा जो हो, वही होता है न.. पत्नी की तबियत खराब रहती थी.. पति ने उसकी देखभाल के लिए वीआरएस लिया था.. सोचा होगा, घर में रहूंगा तो उसकी सेवा करूंगा जिसने जीवन भर मेरी सेवा की. आज उन्हीं की वीआरएस की पार्टी थी.. पार्टी में पत्नी की तबीयत बिगड़ गई.. शायद कार्डियक अरेस्ट हो गया.. सबके सामने उनकी पत्नी की मौत हो गई.. हिंदुस्तान में पत्नियों का धर्म होता है जब तक वो जिंदा रहेंगे तब तक पति की सेवा करेंगी. उनके लिए पति से अपनी सेवा कराना पाप होता है.. खैर, मैं इसे दकियानूसी सोच मानता हूं.. अब आप सोचिए, कितना कष्टकारी होगा उस आदमी के लिए वो पल.. जिसने अपनी बीमार पत्नी की सेवा के लिए नौकरी के तमाम दिन छोड़ दिए.. वो शख्स जो पत्नी के साथ बाकी बचे पल जीना चाहता था, उसने उसी पत्नी को अपनी आंखों के सामने मरते हुए देखा.. हे ईश्वर.. ऐसा क्यूं करते हो आप??

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107,368 次观看 • 1 年前

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“इलाज के लिए हाथ जोड़ता रहा मरीज़, तड़पते-तड़पते मौत: वेंटिलेटर नहीं मिला” “VIDEO: लखनऊ के KGMU में इलाज के लिए हाथ जोड़ता रहा मरीज़, फिर भी नहीं मिला वेंटिलेटर, मौत” “लखनऊ के केजीएमयू के कार्डियोलॉजी विभाग में संवेदनहीनता की हदें पार करती एक वीडियो वायरल हो रहा है। मरीज़ हाथ जोड़कर इलाज की गुहार लगा रहा था, लेकिन डॉक्टर नहीं पसीजे और उसकी मौत हो गई।” ये पढ़कर आपके मन में क्या आता है? सनसनीख़ेज़ लग रही होगी ख़बर। पत्रकार महोदय भी खुश होंगे कि क्या बढ़िया हेडलाइन्स लिखी है, खूब वायरल हो गई। खुश ही होंगे वो। मरीज़ के मरने का कोई दुख नहीं होगा इन पत्रकारों को। क्योंकि ये गिद्ध हैं। वायरल ख़बर पर अपनी दुकान चलाने वाले गिद्ध, जिनके लिए वो मरीज़ मात्र एक सनसनीख़ेज़ ख़बर था। गिद्ध ना होते तो सवाल करते सरकार से और छापते कि वेंटिलेटर की कमी क्यों है अस्पतालों में। क्योंकि इसी हेडलाइन्स के नीचे की ख़बर में लिखा है कि मरीज़ को वेंटिलेटर की ज़रूरत थी, पर खाली न होने से रेफर कर दिया गया। मतलब डॉक्टर को क्या करना चाहिए था? जो मरीज़ वेंटिलेटर पर थे, उनका वेंटिलेटर हटाकर मरने के लिए छोड़ देते? मुझे नहीं पता कि मीडिया संस्थानों में क्या hierarchy होता है, लेकिन कुछ तो होता होगा ना?? चलिए, जिस पत्रकार ने ये छापा, वो थोड़े नासमझ होंगे, या मूर्ख होंगे, या धूर्त होंगे। हर पेशे में कुछ ना कुछ ऐसे लोग होते हैं। लेकिन उनके ऊपर एडिटर टाइप कुछ होते होंगे ना? या ऊपर से नीचे तक ऐसे गिद्धों की फ़ौज है मीडिया संस्थानों में? हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, नवभारत टाइम्स, सबने एक जैसा हेडलाइन्स दिया है। क्या किसी ने ज़रूरी नहीं समझा ख़बर को सही तरीक़े से लिखना? और आप इनसे पूछेंगे कि वेंटिलेटर है क्या, तो ये कहेंगे कि वेंटिलेटर तो कुछ है ही नहीं साहब। पैसा बनाने की मशीन है जी बस। वेंटिलेटर एक जीवन रक्षक प्रणाली है। जो मरीज़ वेंटिलेटर पर हैं, वो बिना वेंटिलेटर के जीवित नहीं रह सकते। एक मरीज़ के वेंटिलेटर को हटाकर दूसरे मरीज़ को वेंटिलेटर नहीं दिया जा सकता। पूछिए जाकर सरकार से कि वेंटिलेटर की कमी क्यों है। पत्रकार बनिए। गिद्ध भरे पड़े हैं।

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97,020 次观看 • 1 年前

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उत्तर प्रदेश पुलिस में अधिकांश एक तरह के पुलिस अफसरों के बीच एक उम्मीद वाले भी बाकी हैं। 2015 बैच के आईपीएस नीरज कुमार जादौन। हरदोई जिले के SP हैं। कल हादसे का शिकार एक महिला पुलिस ऑफिस में असुविधा और परेशानी का शिकार हुई। वीडियो वायरल हुआ। जादौन ने सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए सार्वजनिक क्षमा याचना की। माफी मांगी। और जनता को भरोसा दिया कि आगे से ऐसा नहीं होगा। जादौन जैसे अफसर अभी भी हैं जो उम्मीद की रोशनी जगाए हुए हैं। सामान्य रूप से ऐसे मामलों में यूपी पुलिस के अधिकारी पीड़ित पर FIR दर्ज करके जेल भेज देते हैं या ठेलकर किनारे करवा देते हैं। गलती हो जाए तो कभी मानते नहीं। ज्यादा बोला तो मुकदमा जेल उत्पीड़न अलग से। लेकिन जादौन ने जो पहल की है, उसकी प्रशंसा होनी चाहिए। IPS जादौन ने खुद के सोशल मीडिया पर लिखा भी है "I am sorry" #UttarPradesh #Hardoi Hardoi Police UP POLICE DGP UP #BharatSamachar @NeerajKumarJad1

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