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विजय बैंसला | Vijay Bainsla 🇮🇳

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Nation First | National President - Gurjar Aarakshan Sangharsh Samiti | BJP MLA Candidate | Corporate CXO | Driving 'SocioPolitical' Change | [email protected]

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कुछ दिन पहले मैं Johnny LLB फ़िल्म देख रहा था (यह फिल्म गुर्जर समुदाय के तीर्थ श्री देवमाली के गाँव में फिल्मायी गयी थी), फिल्म में जज का किरदार निभा रहे श्री सौरभ शुल्का ने एक बहुत ही मार्मिक बात कही जो मेरे मन में घर कर गयी - “हमारे constitution में दो चीज़ बहुत important हैं, एक #Letter और एक #Spirit, एक जो कानून में लिखा है और दूसरा उसके पीछे की भावना, यहां सब लेटर पर ही लगे रहते हैं - जो लिखा है follow करो, फाइलें बंद करो घर जाओ, इस चक्कर में Spirit यानी पीछे की भावना कहीं बहुत पीछे रह जाती है” अब सौरभ शुल्का की बात पर गौर करें तो एक बुनियादी प्रश्न मस्तिष्क की धमनियों में रक्तचाप सा कौंधने लगता है - अगर OBC MBC EWS का आरक्षण पिछड़े लोगों को आगे बढ़ाने के लिए है, और जब सरकार यह मानती है की TSP इलाका राजस्थान के सबसे पिछड़े इलाकों में से है तो मूल प्रश्न यह है की जो पिछड़ों में सबसे पिछड़े हैं यानी कि TSP के OBC MBC और EWS, उन्हें #अनारक्षित में आरक्षण से #वंचित क्यों रखा है ? क्या TSP में रहने वाले OBC MBC EWS बाकी राजस्थान के OBC MBC EWS से #अधिक_सक्षम हैं ? - मुझे तो लगता नहीं ! यहां सौरभ शुल्का की बात सही लगती है - letter के पीछे दौड़ते दौड़ते सरकारी महकमे spirit को बहुत पीछे छोड़ गये। मांग जब जायज़ होगी तो उठेगी ज़रूर, आखिर TSP की MBC बाकी राजस्थान की MBC से अलग कैसे हो सकती है, यही OBC और EWS का भी सत्य है। भारत के इतिहास में सबसे बड़ा सामाजिक हकों के लिए 20+ वर्षों से चला आ रहा गुर्जर आरक्षण आंदलोन MBC के हकों के लिए हुआ था, स्वाधीन भारत का यह एकलौता सिविल मूवमेंट रहा है जिस में सामाजिक हकों के लिए 74 आम भारतीय नागरिक शहीद हुए हैं, समस्त MBC समाज अपने हकों के लिए एकजुट होकर लड़ा, इसलिये नहीं की सबसे पिछड़े TSP क्षेत्र में इन हकों से MBC समाज को वंचित रखा जाये - जो राजस्थान के सबसे पिछड़े वर्ग MBC का सबसे पिछड़ा व्यक्ति है (TSP में रहने वाला) सरकार ने उस से ही आरक्षण का हक़ छीन लिया - यह कैसा न्याय है ? यह प्रश्न न्याय और नीति तय करने की क्षमता रखने वाले माननीयों से है 🙏। C. P. Joshi Rajkumar Roat Dr M L Rawat PP Chaudhary Mahima Kumari Mewar Government of Rajasthan CMO Rajasthan Bhajanlal Sharma PMO India

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आज 12 सितंबर को मेरे पिताश्री कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला जी की जयंती के अवसर पर उन्हें कोटि कोटि नमन। आज शाम कर्नल बैंसलजी की याद में हम सब अपने अपने घरों व स्थानों पर 5 दिये लगायें :- पहला दिया - अच्छी #शिक्षा के लिये दूसरा दिया - अच्छे #स्वास्थ्य के लिये तीसरा दिया - पढ़ी लिखी #माँ के लिये चौथा दिया - कर्ज़ मुक्त #समाज के लिये पांचवा दिया - कर्नल बैंसला जी की #याद में आज हम पुनः प्रण करें की हम सब कर्नल बैंसला जी के विचारों का अनुसरण करते हुए व उनके सुझाये हुए मार्ग पर चलकर अपने #परिवारों और #समाजों को #प्रगति के पथ पर अग्रसर करेंगे। Happy Birthday Dad - We Miss You ! - विजय 'किरोड़ी सिंह' बैंसला #कर्नल_बैंसला_जयंती #Bainsla

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आज 31 मार्च 2025 को मेरे पिता व समाज के कर्णधार, सर्व समाज में #वैचारिक_क्रांति लाने वाले, युवाओं को #शिक्षा और #स्वास्थ्य की तरफ़ जागृत करने वाले, #महिला_उत्थान में अग्रणीय भूमिका निभाने वाले, समाज में #कुरीतियों पर अंकुश लगाने वाले #युगपुरुष_कर्नल_किरोड़ी_सिंह_बैंसला जी की तृतीय पुण्यतिथि पर उन्हें बारंबार नमन। आज हम सब मिलकर कर्नल साहब को शीश झुका कर नमन करते हैं और उनके सुझाये हुए मार्ग पर गतिशील रहने का प्रण लेते हैं "अच्छी शिक्षा, अच्छा स्वास्थ्य, पढ़ी लिखी माँ और कर्ज मुक्त समाज" - इन सरल अपितु बड़े बदलाव की ऊर्जा से परिपूर्ण विचारों का हम निरंतर अनुसरण करेंगे। लोगों के हृदय से निकली हुई वाणी सदैव सत्य होती है - सच में "कर्नल तेरी नेक कमाई, तूने सूती कौम जगाई"। कर्नल बैंसला अमर रहें।

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#बारां : देवनारायण छात्रावास का औचक निरीक्षण किया - भोजन में अनियमितता, महिला रसोइया को मार्च 2025 से अगस्त 2025 तक तनख्वाह नहीं मिली। बच्चों को दही, छाछ, सब्ज़ी मेनू के हिसाब से नहीं मिल रहा ? जब समाज कल्याण विभाग हर बच्चे पर पैसे खर्च कर रहा है तो बच्चों को लाभ से वंचित क्यों रखा जा रहा है ? देवनारायण योजना के ऐसे खस्ता हालात हमनें न कभी देखे न सुने - और पीड़ा इस बात की ज्यादा है कि कुछ महीने पहले इस छात्रावास का औपचारिक निरीक्षण भी किया गया है - उसके बावजूद स्तिथि गंभीर है। जो शक्श बच्चों से भोजन छीन ले वो दया के काबिल नहीं हो सकता, मेरा निवेदन है माननीय मंत्री श्री Avinash Gehlot जी से की वो इस मामले में संज्ञान लें, यही मुद्दे 15 जुलाई 2025 की देवनारायण योजना की बैठक में भी बताए गए थे। Bhajanlal Sharma CMO Rajasthan Government of Rajasthan Jogaram Patel

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ग्रामीण राजस्थान में लड़कियां सरकारी स्कूलों को कई सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक & बुनियादी ढांचागत कारणों से छोड़ देती हैं। ASER 2024 (Annual Status of Education Report) के अनुसार, राजस्थान में 15-16 वर्ष की लड़कियों में 12.7% ड्रॉपआउट दर है, जो national avg 8.1% से अधिक है। माध्यमिक स्तर 29% लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं। बीते 11+ वर्षों से मैं समूचे राजस्थान में गाँव ढाणी स्तर पर लोगों & बच्चियों से मिला, मेरे दृष्टिकोण से जो कारण मुझे महसूस हुए हैं - 1. गरीबी & आर्थिक दबाव ग्रामीण राजस्थान में आर्थिक तंगी के कारण कई लड़कियां स्कूल छोड़कर घरेलू आय/ घरलू कार्य में योगदान देने लगती हैं। कई परिवारों में लड़कों की शिक्षा को प्राथमिकता देते हैं, लड़कियों को दहेज के कारण आर्थिक बोझ माना जाता रहा है (बदलते समय में अब बदलाव दिख रहा है)। बीते 10 सालों में मैंने स्थानीय शिक्षकों से चर्चाओं में जाना कि गरीबी, बड़े परिवार & बेरोजगारी के कारण लड़कियां बालश्रम, जैसे खेती या घरेलू काम, में लग जाती हैं। ASER सर्वे में भी वित्तीय समस्याएं ड्रॉपआउट का प्रमुख कारण बताई गई हैं। 2. बाल विवाह & सांस्कृतिक मान्यताएं ग्रामीण राजस्थान में बाल विवाह (गैरकानूनी) एक बड़ी समस्या है, जिस कारण लड़कियां माध्यमिक शिक्षा पूरी करने से पहले स्कूल छोड़ देती हैं। परिवारों से बात की तो समझा कि विवाह के बाद घरेलू जिम्मेदारियों के कारण लड़कियां पढ़ाई छोड़ देती हैं। कई समुदायों में, प्रतिबंधात्मक सामाजिक मान्यताएं और लैंगिक भेदभाव के कारण महिला साक्षरता दर केवल 36% है, मुख्य कारण - माता-पिता लड़कियों की शिक्षा को बेकार मानते हैं, जो "परिवार छोड़कर चली जाएंगी।", ASER 2024 में बाल विवाह को 15-16 वर्ष की लड़कियों में 12.7% ड्रॉपआउट दर का कारण बताया गया है। 3. सुरक्षा & परिवहन की समस्याएं 8वीं कक्षा के बाद स्कूलों की दूरी और सुरक्षा संबंधी चिंताएं ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी बाधाएं हैं। कई गांवों में वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल नहीं हैं, जिसके कारण लड़कियों को पड़ोसी क्षेत्रों में जाना पड़ता है, लेकिन खराब सड़कें & परिवहन की कमी रोड़ा बनती हैं। माता-पिता सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं, जिसके कारण 20% से ज़्यादा माता-पिता अपनी बेटियों को गांव से बाहर उच्च शिक्षा के लिए नहीं भेजते। शिक्षकों का कहना है कि दूरस्थ स्कूल और परिवहन की कमी अनियमित उपस्थिति व ड्रॉपआउट का हैं। ASER डेटा में 15-16 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए नजदीकी उच्च शिक्षा सुविधाओं की कमी को ड्रॉपआउट का कारण बताया गया है। 4. अपर्याप्त स्कूल सुविधाएं & स्वच्छता ग्रामीण राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अक्सर बुनियादी सुविधाओं, जैसे शौचालय, साफ पानी और सैनिटरी पैड की कमी रहती है, जिसके कारण अनुपस्थिति बढ़ती है। बीते सालों में मैंने महसूस किया है की उचित स्वच्छता की कमी के कारण लड़कियों का स्कूल आना मुश्किल हो जाता है, खासकर किशोरावस्था में। खराब बुनियादी ढांचा, जैसे अपर्याप्त कक्षाएं और संसाधन, प्रेरणा को कम करता है। गांव #छितरपुरा, छबड़ा के ग्रामीण आँचल में लड़कियों ने जोरदार तरीके से मेरे समक्ष अपनी बात रखी थी। 5. माता-पिता की सोच और स्कूल की गुणवत्ता माता-पिता की निरक्षरता और लड़कियों की शिक्षा के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण भी एक कारण रहा है (अपितु थोड़ा बहुत ही सही पर इसमें बदलाव हो रहा है)। अनपढ़ माता-पिता शैक्षणिक सहायता नहीं दे पाते और लड़कियों से घरेलू भूमिकाएं निभाने की अपेक्षा करते हैं। बीते वर्षो के साक्षरों में मैंने महसूस किया है की रूढ़िवादी सोच, सामाजिक दबाव और स्कूलों में उदासीन रवैया बाधक बना हुआ है। शिक्षकों में लुप्त प्रेरणा, खराब छात्र-शिक्षक अनुपात और बार-बार असफलता के कारण रुचि की कमी भी ड्रॉपआउट का कारण है। UDISE+ डेटा (2023-24) के अनुसार, राज्य में प्रारंभिक स्तर पर 9 लाख ड्रॉपआउट हैं। कुल ड्रॉपआउट दर में कमी आई है (माध्यमिक स्तर पर 7.7% की कमी), उच्च प्राथमिक & माध्यमिक स्तर पर कोविड के बाद वृद्धि दिखी है। साइकिल/ स्कूटी वितरण & छात्रावास जैसे पहल मदद कर रहे हैं, पर सांस्कृतिक और बुनियादी ढांचागत समस्याओं को संबोधित करने के लिए व्यापक हस्तक्षेप की आवश्यकता है। मेरे पिता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला जी ने बालिका शिक्षा पर सालों साल काम किया, उनका एक ग्रामीण संग यह किस्सा दिलचसब भी है और हक़ीक़त भी :- ग्रामीण :- बेटी को पढ़ाया तो मतलब दूरसे के खेत मे पानी दिया। कर्नल बैंसला का जवाब : तेरी बेटी इसकी बहु, इसकी बेटी उसकी बहु ,जैसी बेटी दोगे वैसी ही बहु पाओगे। बेटी नही पढ़ाओगे तो पढ़ी लिखी बहु कहाँ से लाओगे बदलाव इसी सोच से शुरू होता है। CMO Rajasthan Government of Rajasthan PMO India

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