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Vatsala Singh

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हिन्दू मेरा परिचय || Nationalist || Views are Personal || Rt not Endorsement || Tweets in Media || जय श्री राम ||

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अर्जुन रामपाल - 53 साल गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स - 39 साल वे 2018 से रिलेशनशिप में हैं। शादी से पहले उनके दो बेटे हुए। 2019 में पहला बेटा हुआ। 2023 में दूसरा बेटा हुआ। 2026 में अर्जुन और गैब्रिएला ने शादी कर ली। अगर ऐसा किसी भारतीय गाँव में हुआ होता, तो पूरा गाँव उनके बारे में बातें करने लगता और उन्हें शर्मिंदा करता। हो सकता है कि उनके माता-पिता उनसे बात करना बंद कर देते, और लड़की को ही सबसे ज़्यादा दोष और अपमान सहना पड़ता।

अर्जुन रामपाल - 53 साल गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स - 39 साल वे 2018 से रिलेशनशिप में हैं। शादी से पहले उनके दो बेटे हुए। 2019 में पहला बेटा हुआ। 2023 में दूसरा बेटा हुआ। 2026 में अर्जुन और गैब्रिएला ने शादी कर ली। अगर ऐसा किसी भारतीय गाँव में हुआ होता, तो पूरा गाँव उनके बारे में बातें करने लगता और उन्हें शर्मिंदा करता। हो सकता है कि उनके माता-पिता उनसे बात करना बंद कर देते, और लड़की को ही सबसे ज़्यादा दोष और अपमान सहना पड़ता।

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मिलिए मुरलीधर और संगीता चांदवडे से। मुरलीधर 24 साल के थे और संगीता 19 की, जब दोनों की शादी हुई। कई साल तक संतान का इंतजार किया। बच्चे के लिए तीर्थ यात्राएं भी कीं। आखिरकार बेटा हुआ - कुणाल। मुरलीधर बेहद साधारण परिवार से आए थे। ट्रक चलाकर परिवार की जरूरतें पूरी कीं और बेटे को अच्छे स्कूल में पढ़ाया। कुणाल ने 10वीं में 92% अंक हासिल किए। उसका सपना डॉक्टर बनना था। बड़े स्कूल और बेहतर माहौल में पढ़ते हुए उसकी इच्छाएं भी बढ़ीं। रिपोर्टों में महंगे iPhone की EMI को लेकर पिता-पुत्र के बीच आर्थिक तनाव की बात सामने आई। मुरलीधर लंबे समय तक ड्राइविंग के काम से घर से दूर रहते थे और अपना वाहन खरीदकर उसे किराए पर लगाने की योजना बना रहे थे। 21 अगस्त को कुणाल खवड्या डोंगर पहुंच गया। मां-बाप उसे मनाने वहां पहुंचे। करीब तीन घंटे तक उसे वापस आने के लिए समझाया गया। पिता उसे बचाने की कोशिश में आगे बढ़े और हादसे में उनकी भी जान चली गई। संगीता भी इस त्रासदी में नहीं बच सकीं। एक परिवार खत्म हो गया। जिस पिता ने पूरी जिंदगी बेटे की इच्छाएं पूरी करने के लिए स्टीयरिंग पकड़ी, जिस मां ने सालों इंतजार के बाद बेटे को पाया - आखिर में दोनों उसी बेटे को बचाने की कोशिश में चले गए। और आज पूरी कहानी को सिर्फ iPhone की जिद कहना शायद बहुत आसान है। पुलिस ने भी कहा है कि iPhone को अकेला कारण नहीं माना जा सकता। आर्थिक और पारिवारिक तनाव समेत दूसरे पहलुओं की जांच हो रही है। सोशल मीडिया पर मां-बेटे के पुराने वीडियो भी सामने आए हैं- कल तक एक परिवार था, सपने थे, भविष्य था। इसे सिर्फ iPhone की कहानी मत बनाइए। यह कहानी है- प्यार, आर्थिक दबाव, उम्मीदों और उस संवाद की, जो शायद बहुत पहले होना चाहिए था।

मिलिए मुरलीधर और संगीता चांदवडे से। मुरलीधर 24 साल के थे और संगीता 19 की, जब दोनों की शादी हुई। कई साल तक संतान का इंतजार किया। बच्चे के लिए तीर्थ यात्राएं भी कीं। आखिरकार बेटा हुआ - कुणाल। मुरलीधर बेहद साधारण परिवार से आए थे। ट्रक चलाकर परिवार की जरूरतें पूरी कीं और बेटे को अच्छे स्कूल में पढ़ाया। कुणाल ने 10वीं में 92% अंक हासिल किए। उसका सपना डॉक्टर बनना था। बड़े स्कूल और बेहतर माहौल में पढ़ते हुए उसकी इच्छाएं भी बढ़ीं। रिपोर्टों में महंगे iPhone की EMI को लेकर पिता-पुत्र के बीच आर्थिक तनाव की बात सामने आई। मुरलीधर लंबे समय तक ड्राइविंग के काम से घर से दूर रहते थे और अपना वाहन खरीदकर उसे किराए पर लगाने की योजना बना रहे थे। 21 अगस्त को कुणाल खवड्या डोंगर पहुंच गया। मां-बाप उसे मनाने वहां पहुंचे। करीब तीन घंटे तक उसे वापस आने के लिए समझाया गया। पिता उसे बचाने की कोशिश में आगे बढ़े और हादसे में उनकी भी जान चली गई। संगीता भी इस त्रासदी में नहीं बच सकीं। एक परिवार खत्म हो गया। जिस पिता ने पूरी जिंदगी बेटे की इच्छाएं पूरी करने के लिए स्टीयरिंग पकड़ी, जिस मां ने सालों इंतजार के बाद बेटे को पाया - आखिर में दोनों उसी बेटे को बचाने की कोशिश में चले गए। और आज पूरी कहानी को सिर्फ iPhone की जिद कहना शायद बहुत आसान है। पुलिस ने भी कहा है कि iPhone को अकेला कारण नहीं माना जा सकता। आर्थिक और पारिवारिक तनाव समेत दूसरे पहलुओं की जांच हो रही है। सोशल मीडिया पर मां-बेटे के पुराने वीडियो भी सामने आए हैं- कल तक एक परिवार था, सपने थे, भविष्य था। इसे सिर्फ iPhone की कहानी मत बनाइए। यह कहानी है- प्यार, आर्थिक दबाव, उम्मीदों और उस संवाद की, जो शायद बहुत पहले होना चाहिए था।

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जैसे ही बेटी ने बताया माँ उधर है आमिर भाग कर अपनी पहली पत्नी को जाकर गले से लगाया ❤️

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दीपिका और रोनाल्ड, दोनों ही भारतीय वायु सेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट थे और उनकी मुलाकात ट्रेनिंग के दौरान हुई थी। उनकी दोस्ती जल्द ही एक गहरे रिश्ते में बदल गई और दोनों ने शादी कर ली। सेना में होने के कारण, उन्हें अक्सर अलग-अलग बेस पर तैनात रहना पड़ता था, लेकिन उनका प्यार और एक-दूसरे के प्रति समर्थन अटूट रहा। रोनाल्ड दीपिका के "विंगमैन" थे—हर मायने में उनके दोस्त, मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत। 10 जनवरी 2007 को, रोनाल्ड के 26वें जन्मदिन से कुछ दिन पहले, दीपिका ने रोनाल्ड और उनकी स्क्वाड्रन को एक विमान से नाल एयरबेस तक उड़ाया था ताकि वे साथ में जल्दी जन्मदिन मना सकें। यह उनके लिए एक बहुत ही खुशी का दिन था। मगर, कुछ ही दिनों बाद, 18 जनवरी 2007 को, रोनाल्ड जिस जगुआर लड़ाकू विमान को उड़ा रहे थे, वह राजस्थान के जैसलमेर जिले में एक हवाई दुर्घटना का शिकार हो गया। यह खबर दीपिका के लिए एक गहरा सदमा थी। अपने पति की अंतिम यात्रा पर, दीपिका ने वायु सेना की वर्दी में, अटूट साहस दिखाते हुए, अंतिम संस्कार जुलूस के आगे मार्च किया। यह दृश्य उनकी वीरता और प्रेम की गवाही देता था। रोनाल्ड के जाने के बाद, दीपिका ने ड्यूटी पर वापस आने की कोशिश की, लेकिन उनके लिए विमान के कॉकपिट में बैठना असहनीय हो गया। उनके अनुसार, उनके साथ उनका "पंखों का साथी" (विंगमैन) चला गया था, और उड़ान का जुनून खत्म हो चुका था। उन्होंने एक साल तक कोशिश की, पर अंत में, उन्होंने वायु सेना छोड़ दी। दीपिका की कहानी न केवल एक वीर सैनिक के बलिदान को दर्शाती है, बल्कि उन सैन्य परिवारों की असीम सहनशक्ति और भावनात्मक चुनौतियों को भी उजागर करती है जो अपने प्रियजनों को देश सेवा में खो देते हैं। उनकी कहानी प्रेम, हानि और अंततः जीवन में फिर से आगे बढ़ने के लचीलेपन का एक मार्मिक उदाहरण है।

दीपिका और रोनाल्ड, दोनों ही भारतीय वायु सेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट थे और उनकी मुलाकात ट्रेनिंग के दौरान हुई थी। उनकी दोस्ती जल्द ही एक गहरे रिश्ते में बदल गई और दोनों ने शादी कर ली। सेना में होने के कारण, उन्हें अक्सर अलग-अलग बेस पर तैनात रहना पड़ता था, लेकिन उनका प्यार और एक-दूसरे के प्रति समर्थन अटूट रहा। रोनाल्ड दीपिका के "विंगमैन" थे—हर मायने में उनके दोस्त, मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत। 10 जनवरी 2007 को, रोनाल्ड के 26वें जन्मदिन से कुछ दिन पहले, दीपिका ने रोनाल्ड और उनकी स्क्वाड्रन को एक विमान से नाल एयरबेस तक उड़ाया था ताकि वे साथ में जल्दी जन्मदिन मना सकें। यह उनके लिए एक बहुत ही खुशी का दिन था। मगर, कुछ ही दिनों बाद, 18 जनवरी 2007 को, रोनाल्ड जिस जगुआर लड़ाकू विमान को उड़ा रहे थे, वह राजस्थान के जैसलमेर जिले में एक हवाई दुर्घटना का शिकार हो गया। यह खबर दीपिका के लिए एक गहरा सदमा थी। अपने पति की अंतिम यात्रा पर, दीपिका ने वायु सेना की वर्दी में, अटूट साहस दिखाते हुए, अंतिम संस्कार जुलूस के आगे मार्च किया। यह दृश्य उनकी वीरता और प्रेम की गवाही देता था। रोनाल्ड के जाने के बाद, दीपिका ने ड्यूटी पर वापस आने की कोशिश की, लेकिन उनके लिए विमान के कॉकपिट में बैठना असहनीय हो गया। उनके अनुसार, उनके साथ उनका "पंखों का साथी" (विंगमैन) चला गया था, और उड़ान का जुनून खत्म हो चुका था। उन्होंने एक साल तक कोशिश की, पर अंत में, उन्होंने वायु सेना छोड़ दी। दीपिका की कहानी न केवल एक वीर सैनिक के बलिदान को दर्शाती है, बल्कि उन सैन्य परिवारों की असीम सहनशक्ति और भावनात्मक चुनौतियों को भी उजागर करती है जो अपने प्रियजनों को देश सेवा में खो देते हैं। उनकी कहानी प्रेम, हानि और अंततः जीवन में फिर से आगे बढ़ने के लचीलेपन का एक मार्मिक उदाहरण है।

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बिहार की राजधानी में पटना मेडिकल अस्पताल है जिसमें एक वार्ड है जिसे लावारिस (परित्यक्त) वार्ड कहा जाता है। यहां आपके पास ऐसे मरीज हैं जिनके पास वापस जाने के लिए कोई नहीं है क्योंकि उन्हें उनके परिवार ने छोड़ दिया है। उनकी भलाई के लिए देखने और प्रार्थना करने वाला कोई नहीं है। कम से कम कहने के लिए वार्ड की स्थिति अमानवीय है। वे शारीरिक और भावनात्मक दोनों तरह से अत्यधिक पीड़ा में हैं। हर रोज रात 9 बजे एक आदमी इस वार्ड में पिछले 22 सालों से इन लोगों के लिए खाना और दवा लेकर आता है और सबसे पहला सवाल यही पूछता है- क्या आपको दर्द हो रहा है? भोजन और दवा गौण है, गुरमीत सिंह जो प्रदान करता है वह कुछ प्यार और सम्मान है। कपड़े की दुकान में पाँचों भाई जो कुछ भी कमाते हैं, वे प्रतिदिन 10% भोजन और दवा लाने में लगाते हैं। उन्होंने पिछले 22 वर्षों में एक भी छुट्टी नहीं ली है और कारण सरल है - मैं परित्यक्त को नहीं छोड़ सकता। मरीज उन्हें भगवान के रूप में मानते हैं लेकिन उनका कहना है कि वह एक साधारण नश्वर हैं और सिर्फ उन लोगों के असहनीय दर्द को कम करने की कोशिश कर रहे हैं जिनके पास कोई नहीं है। गुरमीत सिंह, आप हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। गरीबों के लिए आपका बेहिचक प्यार और 'सेवा' ही आपको असाधारण बनाती है। ईश्वर आपको और अधिक शक्ति दे और हम सभी आपसे सीखें कि - दूसरों के लिए समर्पित जीवन वास्तविक खुशी का अनुभव करता है।

बिहार की राजधानी में पटना मेडिकल अस्पताल है जिसमें एक वार्ड है जिसे लावारिस (परित्यक्त) वार्ड कहा जाता है। यहां आपके पास ऐसे मरीज हैं जिनके पास वापस जाने के लिए कोई नहीं है क्योंकि उन्हें उनके परिवार ने छोड़ दिया है। उनकी भलाई के लिए देखने और प्रार्थना करने वाला कोई नहीं है। कम से कम कहने के लिए वार्ड की स्थिति अमानवीय है। वे शारीरिक और भावनात्मक दोनों तरह से अत्यधिक पीड़ा में हैं। हर रोज रात 9 बजे एक आदमी इस वार्ड में पिछले 22 सालों से इन लोगों के लिए खाना और दवा लेकर आता है और सबसे पहला सवाल यही पूछता है- क्या आपको दर्द हो रहा है? भोजन और दवा गौण है, गुरमीत सिंह जो प्रदान करता है वह कुछ प्यार और सम्मान है। कपड़े की दुकान में पाँचों भाई जो कुछ भी कमाते हैं, वे प्रतिदिन 10% भोजन और दवा लाने में लगाते हैं। उन्होंने पिछले 22 वर्षों में एक भी छुट्टी नहीं ली है और कारण सरल है - मैं परित्यक्त को नहीं छोड़ सकता। मरीज उन्हें भगवान के रूप में मानते हैं लेकिन उनका कहना है कि वह एक साधारण नश्वर हैं और सिर्फ उन लोगों के असहनीय दर्द को कम करने की कोशिश कर रहे हैं जिनके पास कोई नहीं है। गुरमीत सिंह, आप हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। गरीबों के लिए आपका बेहिचक प्यार और 'सेवा' ही आपको असाधारण बनाती है। ईश्वर आपको और अधिक शक्ति दे और हम सभी आपसे सीखें कि - दूसरों के लिए समर्पित जीवन वास्तविक खुशी का अनुभव करता है।

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प्रिंट आउट निकालने के लिए दुकानों पर जाना पड़ता है, तो घर में ही ले आओ ये मिनी पोर्टेबल प्रिंटर...

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कृति सैनन जैसी से क्युलर सेलिब्रिटीज़ के दौर में, कंगना रनौत की तरह बेझिझक हिंदू बनें।

कृति सैनन जैसी से क्युलर सेलिब्रिटीज़ के दौर में, कंगना रनौत की तरह बेझिझक हिंदू बनें।

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कितनी शर्मनाक बात है! 🤦🏻‍♀️

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शाहरुख़ ने फ़राह खान की शादी के किया था कन्यादान....

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एक अकेली लड़की ने पूरे कांग्रेस की नाक में दम कर रखा है🔥🔥

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उसे नाम अनाउंस करना था..लेकिन प्रियंका ने उसे माइक छूने तक नहीं दिया...फिर ईशा ने बड़ी चतुराई से ये चाल चली....

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उसे नाम अनाउंस करना था..लेकिन प्रियंका ने उसे माइक छूने तक नहीं दिया...फिर ईशा ने बड़ी चतुराई से ये चाल चली....

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नीता अंबानी 49 लाख रुपये प्रति लीटर वाला पानी पीती हैं, जबकि राधिका मर्चेंट सिर्फ़ 29 रुपये प्रति लीटर वाला पानी पीती हैं; वह अंबानी परिवार की सबसे ज़मीन से जुड़ी महिला हैं।

नीता अंबानी 49 लाख रुपये प्रति लीटर वाला पानी पीती हैं, जबकि राधिका मर्चेंट सिर्फ़ 29 रुपये प्रति लीटर वाला पानी पीती हैं; वह अंबानी परिवार की सबसे ज़मीन से जुड़ी महिला हैं।

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नीता अंबानी 49 लाख रुपये प्रति लीटर वाला पानी पीती हैं, जबकि राधिका मर्चेंट सिर्फ़ 29 रुपये प्रति लीटर वाला पानी पीती हैं; वह अंबानी परिवार की सबसे ज़मीन से जुड़ी महिला हैं।

नीता अंबानी 49 लाख रुपये प्रति लीटर वाला पानी पीती हैं, जबकि राधिका मर्चेंट सिर्फ़ 29 रुपये प्रति लीटर वाला पानी पीती हैं; वह अंबानी परिवार की सबसे ज़मीन से जुड़ी महिला हैं।

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राम मंदिर आने वाले सालाना विज़िटर्स: 13 - 15 करोड़ ताजमहल आने वाले सालाना विज़िटर्स: 60 - 80 लाख भारत की पहचान राम मंदिर से है, न कि ताजमहल से। बस बात खत्म!!

राम मंदिर आने वाले सालाना विज़िटर्स: 13 - 15 करोड़ ताजमहल आने वाले सालाना विज़िटर्स: 60 - 80 लाख भारत की पहचान राम मंदिर से है, न कि ताजमहल से। बस बात खत्म!!

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माधुरी दीक्षित अनिल कपूर से मिलीं, आँखें सब कह देती हैं। दोनों ने 19 फ़िल्मों में साथ काम किया। उस इंसान से मिलना अजीब लगता है जिसके साथ आपने बेटा, तेज़ाब, जमाई राजा, खेल, राजकुमार वगैरह में अच्छे पल बिताए हों। इन दो बेहतरीन एक्टर्स के बीच ज़रूर कुछ गड़बड़ हुई होगी।

माधुरी दीक्षित अनिल कपूर से मिलीं, आँखें सब कह देती हैं। दोनों ने 19 फ़िल्मों में साथ काम किया। उस इंसान से मिलना अजीब लगता है जिसके साथ आपने बेटा, तेज़ाब, जमाई राजा, खेल, राजकुमार वगैरह में अच्छे पल बिताए हों। इन दो बेहतरीन एक्टर्स के बीच ज़रूर कुछ गड़बड़ हुई होगी।

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कर्म हमेशा ब्याज सहित लौटता है....

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पिता आमिर खान की तीसरी गर्लफ्रेंड को देख मुंह बनाती दिखी इरा खान, तिरछी नजर से देखती आयी नजर...

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अगर आपको भी सफर करते वक्त ट्रेन में या कार में उल्टी आए तो यह हैक जरूर ट्राई करें...

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कांतारा ने वो कर दिखाया जो कोई प्रवचन, कोई किताब नहीं कर पाई… अपनी मिट्टी, अपने कुलदेवता और अपनी परंपरा का गर्व सब एक साथ महसूस हुआ…ये सिर्फ़ मूवी नहीं एक अनुभव है और जब देवता आते हैं तो आँखों से आँसू खुद आ जाते हैं … ये सनातन की वो पुकार है, जिसे हर भारतीय को सुनना चाहिए 🙏

कांतारा ने वो कर दिखाया जो कोई प्रवचन, कोई किताब नहीं कर पाई… अपनी मिट्टी, अपने कुलदेवता और अपनी परंपरा का गर्व सब एक साथ महसूस हुआ…ये सिर्फ़ मूवी नहीं एक अनुभव है और जब देवता आते हैं तो आँखों से आँसू खुद आ जाते हैं … ये सनातन की वो पुकार है, जिसे हर भारतीय को सुनना चाहिए 🙏

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी ने मेडल पहनाया फिर इस लड़के ने निकाल दिया आखिर इस लड़के ने ऐसा क्यों किया आप बता सकते हैं...

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तुकाराम मुंढे‌ सर का एक और बड़ा एक्शन! 👏 काम करने का यह तरीका वाकई ज़बरदस्त है। कोई फालतू बात नहीं या तो नियमों का पालन करो या सीधा लाइसेंस सस्पेंड! यह कोई छोटे-मोटे ढाबे नहीं हैं। ये वो जगहें हैं जो लोगों से मोटा पैसा वसूलती हैं और फ़ूड सेफ़्टी के नाम पर धोखा देती हैं: 1) मैक्डोनाल्ड्स (कोलाबा) - लाइसेंस सस्पेंड - 20 में से 18 सेफ्टी मानकों में फेल - बिना जानकारी दिए नकली 'चीज़ एनालॉग्स' का इस्तेमाल - किचन में ज़िंदा कॉकरोच पाए गए - गंदे जूते-कपड़े उठाने के बाद बिना हाथ धोए खाना छूना 2) द बॉम्बे प्रेसिडेंसी रेडियो क्लब - लाइसेंस सस्पेंड - साफ़-सफ़ाई की भारी अनदेखी - किचन में मक्खियों का जमावड़ा - बर्तन धोने की जगह मरा हुआ कॉकरोच मिला - खाना बनाने वाली जगह के ठीक ऊपर से पपड़ी छोड़ती छत 3) खार जिमखाना - फ़ूड रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सस्पेंड - स्टोरेज का घटिया इंतज़ाम - भारी गंदगी और फ़ूड सेफ़्टी की अनदेखी - फ्रोजन फ़ूड को सही तरीके से डी-फ़्रॉस्ट न करना 4) नोवारा रेस्टोरेंट - लाइसेंस सस्पेंड - 13 अगस्त को सुधार का नोटिस दिया गया था - 25 में से 14 गंभीर कमियों पर फिर भी कोई काम नहीं किया - ड्रेनेज लाइन में कॉकरोच रोकने वाले ट्रैप गायब 5) स्टेटस रेस्टोरेंट - लाइसेंस सस्पेंड - कर्मचारी साफ बर्तनों के ठीक ऊपर मुंह धोता पकड़ा गया और बिना सेफ्टी गियर के काम कर रहा था इतने बड़े-बड़े ब्रांड्स पर हाथ डालने के लिए जिगरा चाहिए, जो हर किसी के बस की बात नहीं। अकेले एक अधिकारी ने पूरे महाराष्ट्र के सिस्टम को हिला दिया है। ज़रा सोचिए, अगर इन्हें FSSAI का CEO बना दिया जाए, तो पूरा भारत safe हो जाएगा! 🇮🇳❤️

Vatsala Singh

315,990 görüntüleme • 11 gün önce