
Abhishek Singh
@Abhishek_asitis • 46,254 subscribers
Former IAS | Actor | Social Entrepreneur | Times 40 under 40 | Founder United by Blood | Advisor BRICS CCI | Advisor to Hon’ble Governor West Bengal |
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Comfort Zone में जितना ज़्यादा समय बिताओगे, उससे बाहर निकलना उतना ही मुश्किल होता जाएगा।
Abhishek Singh17,999 просмотров • 2 дней назад

मैं आभारी हूँ कि मेरी फ़िल्म 1946: डायरेक्ट एक्शन डे को प्रतिष्ठित कांस फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित होने का अवसर मिला। एक ऐसी कहानी को रेड कार्पेट तक ले जाना, जिसने भारत के विभाजन की चिंगारी को दुनिया के सामने उजागर किया — यह सिर्फ़ मेरी उपलब्धि नहीं, बल्कि उन अनसुनी पीड़ाओं को सम्मान देने का प्रयास था, जो इतिहास के पन्नों में कहीं दब गई थीं। पाकिस्तान और बांग्लादेश से पलायन करने को मजबूर हुए हिंदू अल्पसंख्यकों की पीड़ा… भारत लौटने के बाद वर्षों तक उन्हें “शरणार्थी” कहलाना पड़ा, क्योंकि नागरिकता देने का कोई प्रावधान नहीं था… और फिर, दशकों बाद नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 के ज़रिए उन्हें भारतीय नागरिक के रूप में सम्मान मिला। इतिहास को याद रखना ज़रूरी है — ताकि हम बंटें नहीं, बल्कि समझ सकें कि चुप्पी की क़ीमत क्या होती है। #1946DirectActionDay #Cannes2025 #CAA2019 #विभाजनकीकहानी #भारतकाअतीत #IndiaAtCannes
Abhishek Singh598,398 просмотров • 1 год назад

रिज़र्वेशन का एक पिछड़ा और दलित की आर्थिक स्थिति से कोई लेना देना नहीं है क्योंकि वो अमीर भी हो जायेगा तब भी समाज उसको एक पिछड़ा और दलित के रूप में ही पहचानेगा। जिस दिन समाज एक दलित और पिछड़े को हीन दृष्टि से देखना बंद कर दे उस दिन रिज़र्वेशन ख़त्म कर देना । जिस दिन एक सवर्ण परिवार ख़ुशी ख़ुशी गर्व से अपनी बेटी बेटों की शादी एक दलित परिवार में करना शुरू कर देगा उस दिन रिज़र्वेशन बंद कर देना ।
Abhishek Singh782,590 просмотров • 2 лет назад

दोस्तों, मुझे जौनपुर निवासियों के लिए “श्रवण कुमार महाकुंभ रथ” के उद्घाटन की घोषणा करते हुए बहुत खुशी हो रही है। हमारी यह निःशुल्क सेवा 13 जनवरी से प्रतिदिन सुबह 6 बजे जौनपुर बस स्टैंड से प्रयागराज तक चलेगी और अगले दिन दोपहर 2 बजे प्रयागराज से जौनपुर के लिए वापिस चलेगी । यह मेरा प्रयास है ताकि जो कोई भी पवित्र महाकुंभ में भाग लेना चाहता है, वह साधनों की कमी के कारण इससे वंचित न रहे। यदि आप भी इस पवित्र कार्य में मेरा सहयोग करना चाहते हैं, तो आप मुझे [email protected] पर लिख सकते हैं।
Abhishek Singh570,246 просмотров • 1 год назад

One man. Two worlds. From dust-laden lanes to designer shoes on red carpets. But still the same boy from Jaunpur — just better dressed. पल बदले हैं, पहचान नहीं। मिट्टी वही… मंज़िल नई। #JaunpurToCannes #SmallTownBigDreams #Cannes2025 #JaunpurDiaries #DreamWithDiscipline
Abhishek Singh400,357 просмотров • 1 год назад

मैंने खुद प्रयागराज में पढ़ाई की है और सैयद सालार गाज़ी दरगाह पर भी कई बार गया हूँ। भारत में किसी भी धर्म का स्थल सिर्फ एक मज़हब का प्रतीक नहीं होता—वो उस साझा भावना का प्रतीक होता है जिसमें सबको जगह मिलती है। यही तो असली हिंदू संस्कृति है—विविधता में एकता, सबको साथ लेकर चलना। राम नवमी के पावन दिन पर इस तरह की ओछी हरकतें करके कुछ लोग हमारी गंगा-जमुनी तहज़ीब को चोट पहुँचा रहे हैं। न ये धर्म है, न ये कोई शौर्य। ये सिर्फ नफरत फैलाने की कोशिश है, जिसका हमें खुलकर विरोध करना चाहिए। ऐसे लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। आज चुप रहना, कल की नफरत को न्योता देना होगा। हमें मिलकर कहना होगा— ये न सनातन धर्म है, न भारत की परंपरा। #प्रयागराज #रामनवमी #साझी_संस्कृति #भारत_हमारा_है
Abhishek Singh296,809 просмотров • 1 год назад

From Cannes to Kolkata. 1946: Direct Action Day received a warm reception in Bengal after global appreciation at Cannes. Special screening hosted by BJYM , attended by Hon’ble LoP Shri Suvendu Adhikari ji A forgotten chapter of history finding its voice again. #1946TheFilm #CannesToKolkata
Abhishek Singh197,105 просмотров • 1 год назад

ये सिर्फ बंगाल की आग नहीं है — ये भारत के भविष्य की चेतावनी है। 1946: डायरेक्ट एक्शन डे ने हमें बाँटा था। 2025: क्या हम फिर वही गलती दोहराने जा रहे हैं? वक़्फ़ एक्ट की आड़ में जो हो रहा है, वो अधिकार नहीं, भारत की आत्मा पर हमला है। सड़कों पर पत्थर, दिलों में जहर — पर ये भारत की पहचान नहीं है। हम एक राष्ट्र हैं। एक जन। एक तिरंगा। ना कोई कानून, ना कोई एजेंडा — भारत से बड़ा कुछ नहीं। इस बार हम बंटेंगे नहीं, इस बार भारत एकजुट खड़ा होगा। #भारत_पहले #एक_भारत #विभाजन_नहीं_विकास
Abhishek Singh165,998 просмотров • 1 год назад

3 किताबें जो हर student को पढ़नी चाहिए। Sapiens – इंसान कैसे यहां तक पहुंचा और दुनिया कैसे बनी। How to Win Friends and Influence People – लोगों से जुड़ना और प्रभाव बनाना। Body Language – बिना बोले भी लोग आपको कैसे पढ़ते हैं। कई बार एक अच्छी किताब, कई सालों का अनुभव दे देती है।
Abhishek Singh23,147 просмотров • 1 месяц назад

चलिए एक संकल्प लेते हैं, संकल्प है सेवा का । जौनपुर को उसका खोया हुआ गौरव वापिस दिलाने का । आइए 15th April तक जौनपुर के सभी श्रद्धेय वृद्ध जनों का आयुष्मान भारत वय वन्दना कार्ड बनाकर जौनपुर को भारत वर्ष का प्रथम ऐसा जनपद बनाते हैं। #risingjaunpur #AyushmanBharat
Abhishek Singh101,921 просмотров • 1 год назад

Promoting inter-caste marriages is one of the strongest ways to end the caste and reservation divide in the next 50 years. When people marry beyond caste, the barriers slowly dissolve and what remains is just one identity, being Indian. The reservation system today isn’t truly helping those in need; it’s often misused and politicized. Real change will come when we rise above caste and start building families and a nation without these divides.
Abhishek Singh53,276 просмотров • 8 месяцев назад

सरकारी नौकरी यदि आपको कठिन लग रही है तो आप छोड़ सकते हैं और उन प्रतिभावान बेरोज़गार युवा को अवसर मिलेगा जिनमें जज़्बा है कुछ करने का।जो बारिश, ठंडी, गर्मी की परवाह किए बिना विद्यालय पहुँचेंगे और उन बच्चों को पढ़ाएँगे।आख़िर ये ग़रीब बच्चों के भविष्य का सवाल है जिनका सहारा सरकार के सिवाय और कोई नहीं। हमारे भारतीय संस्कार में गुरु का कद भगवान से भी बड़ा है। ऐसा माना गया है कि गुरू अपने शिष्य के लिए अपनी जान की बाज़ी लगा सकता है । मिडल क्लास व अमीर लोग अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजते हैं। अगर किसी दिन टीचर समय पर नहीं आया या फिर टीचर ने ठीक से नहीं पढ़ाया तो स्कूल का मैनेजमेंट व बच्चों के अभिभावक टीचर की ऐसी क्लास लेते हैं कि वह या तो डिस्सिप्लिंड हो जाता है या फिर उसे निकाल दिया जाता है। ग़रीब परिवार के बच्चों को भी गुरू मिले और वह शिक्षा से वंचित ना रहें इसके लिए सरकार ने व्यवस्था की है कि वह सरकारी स्कूल खोलेगी व शिक्षकों को तनख़्वाह देगी । इस वेतन के बदले उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वह पूरी ईमानदारी और निष्ठा से ग़रीब बच्चों को पढ़ाएँगे । अब अगर वह ठीक से नहीं पढ़ाते तो उनको अनुशासित करने के लिए आपको लगता है वो ग़रीब बच्चे, या उनके अभिभावक किसी टीचर पर दबाव बनाने की हैसियत रखते हैं? जब सरकार के सिर्फ़ ऑनलाइन कंपलसरी अटेंडेंस के फ़ैसले का इतना विरोध है तो आपको क्या उम्मीद है?
Abhishek Singh78,672 просмотров • 2 лет назад

एक छोटी बच्ची को उसकी माँ के सामने उठा कर इस तरह से फेंक देना ये कहाँ की सभ्यता है? ये लोग कहाँ से आते हैं? इनका कोई धर्म नहीं है। एसे अधर्मी लोगों के खिलाफ सख़्त से सख़्त कार्यवाही होनी चाहिए। मुझे ऐसा बताया गया है कि बागेश्वर धाम मठ इस परिवार के ऊपर दबाव बना रहा है कि ये कोई कानूनी कार्यवाही की प्रक्रिया ना आरंभ करे । मैं लोगो से अपील करता हूं कि अगर किसी को भी इस परिवार के बारे में जानकारी हो तो मुझे बताएं, मैं इनकी पूरी मदद करूंगा और खुद वहाँ जाके यह सुनिश्चित करूंगा कि इस दोषी व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज हो और कानूनी कार्रवाई की जाए।
Abhishek Singh95,601 просмотров • 3 лет назад