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Abhishek Singh

@Abhishek_asitis46,199 subscribers

Former IAS | Actor | Social Entrepreneur | Times 40 under 40 | Founder United by Blood | Advisor BRICS CCI | Advisor to Hon’ble Governor West Bengal |

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श्रवण कुमार महाकुंभ रथ नि:शुल्क जौनपुर से प्रयागराज प्रतिदिन श्रद्धालुओं को महाकुंभ में स्नान एवं पावन दर्शन कराने ले जा रहा है । यदि आप भी निःशुल्क महाकुंभ जाना चाहते हैं तो 7800011101 पर व्हाट्सएप करें । #mahakumbh #mahakumbh2025 #jaunpur #shravankumarmahakumbhrath

श्रवण कुमार महाकुंभ रथ नि:शुल्क जौनपुर से प्रयागराज प्रतिदिन श्रद्धालुओं को महाकुंभ में स्नान एवं पावन दर्शन कराने ले जा रहा है । यदि आप भी निःशुल्क महाकुंभ जाना चाहते हैं तो 7800011101 पर व्हाट्सएप करें । #mahakumbh #mahakumbh2025 #jaunpur #shravankumarmahakumbhrath

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Live fearless, love limitless ✨

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Skipped the car, took a walk… and found joy on the streets of Cannes. Wearing a Manish Malhotra tux, straight from the red carpet — met strangers from around the world who made me feel like family. Cinema unites. Style speaks. Moments like these live forever. #Cannes2025 #ManishMalhotra #AbhishekSingh #RedCarpetToRealLife #FromIndiaToTheWorld #CannesDiaries

Skipped the car, took a walk… and found joy on the streets of Cannes. Wearing a Manish Malhotra tux, straight from the red carpet — met strangers from around the world who made me feel like family. Cinema unites. Style speaks. Moments like these live forever. #Cannes2025 #ManishMalhotra #AbhishekSingh #RedCarpetToRealLife #FromIndiaToTheWorld #CannesDiaries

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मैं आभारी हूँ कि मेरी फ़िल्म 1946: डायरेक्ट एक्शन डे को प्रतिष्ठित कांस फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित होने का अवसर मिला। एक ऐसी कहानी को रेड कार्पेट तक ले जाना, जिसने भारत के विभाजन की चिंगारी को दुनिया के सामने उजागर किया — यह सिर्फ़ मेरी उपलब्धि नहीं, बल्कि उन अनसुनी पीड़ाओं को सम्मान देने का प्रयास था, जो इतिहास के पन्नों में कहीं दब गई थीं। पाकिस्तान और बांग्लादेश से पलायन करने को मजबूर हुए हिंदू अल्पसंख्यकों की पीड़ा… भारत लौटने के बाद वर्षों तक उन्हें “शरणार्थी” कहलाना पड़ा, क्योंकि नागरिकता देने का कोई प्रावधान नहीं था… और फिर, दशकों बाद नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 के ज़रिए उन्हें भारतीय नागरिक के रूप में सम्मान मिला। इतिहास को याद रखना ज़रूरी है — ताकि हम बंटें नहीं, बल्कि समझ सकें कि चुप्पी की क़ीमत क्या होती है। #1946DirectActionDay #Cannes2025 #CAA2019 #विभाजनकीकहानी #भारतकाअतीत #IndiaAtCannes

Abhishek Singh

598,398 görüntüleme • 1 yıl önce

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मैंने खुद प्रयागराज में पढ़ाई की है और सैयद सालार गाज़ी दरगाह पर भी कई बार गया हूँ। भारत में किसी भी धर्म का स्थल सिर्फ एक मज़हब का प्रतीक नहीं होता—वो उस साझा भावना का प्रतीक होता है जिसमें सबको जगह मिलती है। यही तो असली हिंदू संस्कृति है—विविधता में एकता, सबको साथ लेकर चलना। राम नवमी के पावन दिन पर इस तरह की ओछी हरकतें करके कुछ लोग हमारी गंगा-जमुनी तहज़ीब को चोट पहुँचा रहे हैं। न ये धर्म है, न ये कोई शौर्य। ये सिर्फ नफरत फैलाने की कोशिश है, जिसका हमें खुलकर विरोध करना चाहिए। ऐसे लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। आज चुप रहना, कल की नफरत को न्योता देना होगा। हमें मिलकर कहना होगा— ये न सनातन धर्म है, न भारत की परंपरा। #प्रयागराज #रामनवमी #साझी_संस्कृति #भारत_हमारा_है

Abhishek Singh

296,793 görüntüleme • 1 yıl önce

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सिर्फ़ एक सवाल!

Abhishek Singh

110,621 görüntüleme • 1 yıl önce

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सरकारी नौकरी यदि आपको कठिन लग रही है तो आप छोड़ सकते हैं और उन प्रतिभावान बेरोज़गार युवा को अवसर मिलेगा जिनमें जज़्बा है कुछ करने का।जो बारिश, ठंडी, गर्मी की परवाह किए बिना विद्यालय पहुँचेंगे और उन बच्चों को पढ़ाएँगे।आख़िर ये ग़रीब बच्चों के भविष्य का सवाल है जिनका सहारा सरकार के सिवाय और कोई नहीं। हमारे भारतीय संस्कार में गुरु का कद भगवान से भी बड़ा है। ऐसा माना गया है कि गुरू अपने शिष्य के लिए अपनी जान की बाज़ी लगा सकता है । मिडल क्लास व अमीर लोग अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजते हैं। अगर किसी दिन टीचर समय पर नहीं आया या फिर टीचर ने ठीक से नहीं पढ़ाया तो स्कूल का मैनेजमेंट व बच्चों के अभिभावक टीचर की ऐसी क्लास लेते हैं कि वह या तो डिस्सिप्लिंड हो जाता है या फिर उसे निकाल दिया जाता है। ग़रीब परिवार के बच्चों को भी गुरू मिले और वह शिक्षा से वंचित ना रहें इसके लिए सरकार ने व्यवस्था की है कि वह सरकारी स्कूल खोलेगी व शिक्षकों को तनख़्वाह देगी । इस वेतन के बदले उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वह पूरी ईमानदारी और निष्ठा से ग़रीब बच्चों को पढ़ाएँगे । अब अगर वह ठीक से नहीं पढ़ाते तो उनको अनुशासित करने के लिए आपको लगता है वो ग़रीब बच्चे, या उनके अभिभावक किसी टीचर पर दबाव बनाने की हैसियत रखते हैं? जब सरकार के सिर्फ़ ऑनलाइन कंपलसरी अटेंडेंस के फ़ैसले का इतना विरोध है तो आपको क्या उम्मीद है?

Abhishek Singh

78,669 görüntüleme • 1 yıl önce

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मुझे खुशी है कि जौनपुर के युवा इंफ्लुएंसर्स ने इस अभियान को समझा, अपनाया और उसे आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी ली है। अपने दादा-दादी, नाना-नानी को वय वंदना कार्ड देना — उनके लिए सबसे अनमोल तोहफ़ा है, जो आप दे सकते हैं। मैं सभी युवाओं से अपील करता हूँ — आज ही एक संकल्प लें कि आप अपने बुज़ुर्गों का वय वंदना कार्ड बनवाएँगे और उसे अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट करेंगे, ताकि और लोग भी प्रेरित हो सकें। अगर किसी भी प्रकार की सहायता चाहिए, तो टीम अभिषेक सिंह | Yuva Seva Shakti हर वक्त तैयार है आपकी मदद के लिए। संपर्क करें: 78000 11101 आइए, हम सब मिलकर जौनपुर को बनाएँ देश में नंबर 1 — सम्मान में, सेवा में, और संस्कारों में।

Abhishek Singh

48,569 görüntüleme • 1 yıl önce

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