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Abhishek Singh

@Abhishek_asitis46,281 subscribers

Former IAS | Actor | Social Entrepreneur | Times 40 under 40 | Founder United by Blood | Advisor BRICS CCI | Advisor to Hon’ble Governor West Bengal |

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मैंने खुद प्रयागराज में पढ़ाई की है और सैयद सालार गाज़ी दरगाह पर भी कई बार गया हूँ। भारत में किसी भी धर्म का स्थल सिर्फ एक मज़हब का प्रतीक नहीं होता—वो उस साझा भावना का प्रतीक होता है जिसमें सबको जगह मिलती है। यही तो असली हिंदू संस्कृति है—विविधता में एकता, सबको साथ लेकर चलना। राम नवमी के पावन दिन पर इस तरह की ओछी हरकतें करके कुछ लोग हमारी गंगा-जमुनी तहज़ीब को चोट पहुँचा रहे हैं। न ये धर्म है, न ये कोई शौर्य। ये सिर्फ नफरत फैलाने की कोशिश है, जिसका हमें खुलकर विरोध करना चाहिए। ऐसे लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। आज चुप रहना, कल की नफरत को न्योता देना होगा। हमें मिलकर कहना होगा— ये न सनातन धर्म है, न भारत की परंपरा। #प्रयागराज #रामनवमी #साझी_संस्कृति #भारत_हमारा_है

Abhishek Singh

296,809 görüntüleme • 1 yıl önce

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6 Rules of Consistency

Abhishek Singh

21,202 görüntüleme • 1 ay önce

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सिर्फ़ एक सवाल!

Abhishek Singh

110,621 görüntüleme • 1 yıl önce

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सरकारी नौकरी यदि आपको कठिन लग रही है तो आप छोड़ सकते हैं और उन प्रतिभावान बेरोज़गार युवा को अवसर मिलेगा जिनमें जज़्बा है कुछ करने का।जो बारिश, ठंडी, गर्मी की परवाह किए बिना विद्यालय पहुँचेंगे और उन बच्चों को पढ़ाएँगे।आख़िर ये ग़रीब बच्चों के भविष्य का सवाल है जिनका सहारा सरकार के सिवाय और कोई नहीं। हमारे भारतीय संस्कार में गुरु का कद भगवान से भी बड़ा है। ऐसा माना गया है कि गुरू अपने शिष्य के लिए अपनी जान की बाज़ी लगा सकता है । मिडल क्लास व अमीर लोग अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजते हैं। अगर किसी दिन टीचर समय पर नहीं आया या फिर टीचर ने ठीक से नहीं पढ़ाया तो स्कूल का मैनेजमेंट व बच्चों के अभिभावक टीचर की ऐसी क्लास लेते हैं कि वह या तो डिस्सिप्लिंड हो जाता है या फिर उसे निकाल दिया जाता है। ग़रीब परिवार के बच्चों को भी गुरू मिले और वह शिक्षा से वंचित ना रहें इसके लिए सरकार ने व्यवस्था की है कि वह सरकारी स्कूल खोलेगी व शिक्षकों को तनख़्वाह देगी । इस वेतन के बदले उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वह पूरी ईमानदारी और निष्ठा से ग़रीब बच्चों को पढ़ाएँगे । अब अगर वह ठीक से नहीं पढ़ाते तो उनको अनुशासित करने के लिए आपको लगता है वो ग़रीब बच्चे, या उनके अभिभावक किसी टीचर पर दबाव बनाने की हैसियत रखते हैं? जब सरकार के सिर्फ़ ऑनलाइन कंपलसरी अटेंडेंस के फ़ैसले का इतना विरोध है तो आपको क्या उम्मीद है?

Abhishek Singh

78,680 görüntüleme • 2 yıl önce