
आदित्य तिवारी / Aditya Tiwari
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वाराणसी में शुक्रवार सुबह 9 बजे जिला जज की कुर्सी पर एक महिला बैठ गई। कुर्सी पर बैठते ही हैमर पटकते हुए चिल्लाई- ऑर्डर-ऑर्डर। वकीलों से कहा- आज मैं जिला जज हूं। गवाह और सबूत पेश करिए। आज सारे मामले की सुनवाई मैं करूंगी। जो भी काम हो हमको बताया जाए। इसके बाद फाइलें उठाकर उनको पलटना शुरू कर दिया। एकाएक हुए इस घटनाक्रम से वकील चौंक गए। उन्होंने वीडियो बनाना शुरू किया तो महिला भड़क गई। वकीलों ने महिला को बाहर जाने के लिए कहा, लेकिन वह कुर्सी पर ही बैठी रही। इसके बाद महिला पुलिसकर्मियों को बुलाया गया। पुलिस महिला को हिरासत में लेकर कैंट थाने लेकर चली गई। करीब एक घंटे तक यह ड्रामा चला। बताया जा रहा है कि शुक्रवार को जिला जज अवकाश पर थे। महिला की पहचान वंदना गुप्ता के रूप में हुई है। वंदना को कोई मामला कोर्ट में नहीं है, वह कई बार कोर्ट में जज की कुर्सी पर बैठ चुकी हैं।
आदित्य तिवारी / Aditya Tiwari346,627 views • 22 days ago

ट्रेन में टिकट मांगने पर टीटीई को कहा कुत्ता, SO साहब सिंह समेत चार पुलिसकर्मी ने टीटी से की मारपीट, वीडियो हुआ वायरल, प्रयागराज जीआरपी में टीटीई ने की लिखित शिकायत एसओ के नेतृत्व में जीआरपी फतेहपुर की टीम ने बीकानेर-प्रयागराज एक्सप्रेस (20404) के ए2 कोच में तीन ऑन-बोर्ड टीटीई के साथ कथित तौर पर मारपीट की, जब टीटीई ने उन्हें टिकट नहीं होने के कारण कोच छोड़ने के लिए कहा। जीआरपी के 5 जवानों की टीम एक आरोपी को पुलिस ऑपरेशन के बाद वापस फ़तेहपुर ले जा रही थी. टीम कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ी थी. एसपी जीआरपी प्रयागराज अष्टभुजा सिंह ने आरोपी एसओ को हटा दिया है और सीओ जीआरपी प्रयागराज को मामले की जांच के लिए कानपुर सेंट्रल स्टेशन भेजा है।
आदित्य तिवारी / Aditya Tiwari788,052 views • 2 years ago

वाराणसी जिला अस्पताल में सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान नर्सों के साथ CMS डॉ. दिग्विजय सिंह और कर्मचारियों ने लगाए ठुमके, VIDEO वायरल ससुराल गेंदा फूल...जैसे अन्य गानों पर लगाए ठुमके... वीडियो वायरल होते ही मामला चर्चा में आया फिलहाल CMO ने कहा इसकी जांच कराई जाएगी।
आदित्य तिवारी / Aditya Tiwari460,359 views • 1 year ago

#OperationSindoor_Cup का मैच; कानपूर में महिला IPS और विधायक जी की तीख़ी बहस कानपुर के ग्रीन पार्क में एक क्रिकेट मैच के दौरान उस समय हंगामा हो गया जब बीजेपी MLC अरुण पाठक और IPS अधिकारी अंजलि विश्वकर्मा के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। दोनों के बीच गनर की एंट्री को लेकर सवाल उठे, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लग गया। यह घटना उस समय हुई जब मैच के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि दोनों के बीच तीखी नोकझोंक होने लगी।
आदित्य तिवारी / Aditya Tiwari287,524 views • 1 year ago

आशुतोष ब्रम्हचारी खुद स्वीकार कर रहा है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के ऊपर फर्जी मुकदमा रामचंद्र दास के कहने पर किया और इसमें कई अधिकारी शामिल हैं...सुनिए पूरा वीडियो... "सनातन का चोला पहनकर किस तरीके से सनातन को बदनाम कर रहे हैं कुछ कालनेमि...."
आदित्य तिवारी / Aditya Tiwari19,108 views • 25 days ago

यूपी सरकार में अधिकारियों ने फिर उड़ाए मंत्री के तोते! 20 दिन से गांव में ट्रांसफॉर्मर खराब था। कारागार राज्य मंत्री सुरेश राही ने JE को फोन किया- JE बोला: "खुद आकर उतरवा लो ट्रांसफॉर्मर!" पावर कारपोरेशन की MD रिया केजरीवाल ने फोन तक नहीं उठाया। सीतापुर में मंत्री जी खुद धरने पर बैठ गए! ऊर्जा मंत्री AK शर्मा पहले ही बोल चुके हैं — "मैं JE का ट्रांसफर तक नहीं कर सकता!" #UttarPradesh #YogiRaj #Sitapur #BureaucracyVsNetagiri
आदित्य तिवारी / Aditya Tiwari154,143 views • 11 months ago

कैसरगंज लोकसभा से भाजपा प्रत्याशी के काफिले से हादसा...गोंडा में हुए हादसे में 2 बच्चों की मौत करण भूषण शरण सिंह के काफिले की कार ने रौंदा, फार्च्यूनर कार ने 3 बच्चों को रौंदा... 2 की कुचलकर मौत 1 घायल। कर्नलगंज हुजूरपुर मार्ग पर हादसा, मौके पर जुटी भीड़ फार्चूनर कार कब्जे में। पुलिस मौके पर शव को लिया कब्जे में.. कर्नलगंज कोतवाली क्षेत्र बैकुंठ डिग्री कालेज के पास हुई घटना
आदित्य तिवारी / Aditya Tiwari310,722 views • 2 years ago

मुंबई, महाराष्ट्र: शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने कहा, "यह कैसे संभव है?... खुद से पूछें, क्या शिंदे को महाराष्ट्र में 60 सीटें मिल सकती हैं? क्या यह संभव है? क्या अजित पवार को 40 सीटें मिल सकती हैं? क्या यह संभव है? क्या भारतीय जनता पार्टी को 125 सीटें मिल सकती हैं? क्या यह संभव है? क्या इस राज्य के लोग बेईमान हैं? इस राज्य के लोग बेईमान नहीं हैं। हमें उन पर भरोसा है।"
आदित्य तिवारी / Aditya Tiwari234,561 views • 1 year ago

यूपी के जिलों में चल रहे अवैध हॉस्पिटल में मौत का खेल खेलना जारी, जिले के सरकारी हॉस्पिटल के हालात और खराब! मैनपुरी में इलाज के दौरान अस्पताल में किशोरी की मौत: परिजनों का आरोप गलत इंजेक्शन लगाने से हुई मौत, शव को अस्पताल के बाहर फेंक फरार हुए डॉक्टर
आदित्य तिवारी / Aditya Tiwari329,387 views • 2 years ago

जिम्मेदार कौन? "कैमरा बंद कर दो, मोबाइल छीन लो, किसी के पास कोई तस्वीर या वीडियो नहीं होना चाहिए...।" जब किसी घटना को छुपाने की कवायद शुरू होती है, तो समझ लीजिए कि सच को दफनाने की साजिश रची जा रही है। सवाल यह नहीं कि ऐसा क्यों किया जाता है, बल्कि सवाल यह है कि आखिर ऐसा करने की जरूरत क्यों महसूस होती है? सच को देखने, बोलने और सुनने का हक हर नागरिक का है, लेकिन जब सच्चाई को दबाने के लिए सत्ता और सिस्टम मिलकर काम करते हैं, तो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ खतरे में पड़ जाता है। रेल हादसे में जान गंवाने वाले सिर्फ आंकड़े नहीं होते, वे किसी के बेटे-बेटी, मां-बाप, भाई-बहन होते हैं। कोई घर से निकला था एक नई जिंदगी की शुरुआत करने, कोई अपने परिवार से मिलने को आतुर था, कोई रोज़ी-रोटी की तलाश में सफर पर था। लेकिन अचानक हुई एक दुर्घटना ने सबकुछ खत्म कर दिया। हादसे के बाद सत्ता के गलियारों में आंकड़े गिनने का खेल शुरू हो जाता है, मगर कोई यह नहीं पूछता कि उन चीखों की गूंज कब तक रहेगी? कोई यह नहीं बताता कि उन परिवारों का क्या जो अपनों को खो चुके हैं? हम किसी सरकार की बात नहीं करते, किसी पार्टी की निंदा नहीं करते, हम सिर्फ जिम्मेदारी की बात करते हैं। अगर एक रेल सेवा का काम जनता को सुरक्षित यात्रा देना है, तो क्या उसे अपनी जिम्मेदारी नहीं निभानी चाहिए? अगर किसी अस्पताल का काम इलाज करना है, तो क्या उसे मरीजों को बेहतर सुविधा नहीं देनी चाहिए? अगर किसी नेता का काम जनता की सेवा करना है, तो क्या उसे लोगों की परेशानियों का समाधान नहीं करना चाहिए? लेकिन जब जिम्मेदार ही अपनी आंखों पर पट्टी बांध लें, जब वे अपने पद को बस एक कुर्सी समझने लगें, तो समाज को अंधकार में जाने से कोई नहीं रोक सकता। हादसों में मरने वाले महज आंकड़े नहीं होते। हर संख्या के पीछे एक कहानी होती है। हर मृतक के पीछे एक परिवार होता है, जो उसकी वापसी की उम्मीद में दरवाजे पर आंखें गड़ाए बैठा रहता है। लेकिन जब अपनों के शव वापस आते हैं, तो वे सिर्फ रो सकते हैं, गिड़गिड़ा सकते हैं, न्याय की भीख मांग सकते हैं। कोई पूछे तो सही कि इन हादसों का जिम्मेदार कौन है? किसी को सजा क्यों नहीं मिलती? नेता, अफसर और कर्मचारी—ये सभी अपने पद की शपथ लेते हैं, लेकिन कितने हैं जो उस शपथ को निभाते हैं? कितने हैं जो अपनी आत्मा से पूछते हैं कि उनकी लापरवाही से कितने लोग बेघर हुए, कितने बच्चों के सिर से मां-बाप का साया उठ गया, कितने परिवारों की खुशियां छिन गईं? ऐसे लोग विरले ही मिलते हैं, जो अपनी जिम्मेदारी को सच्चे दिल से निभाते हैं। वरना, अधिकतर लोग सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने में लगे रहते हैं। महाकुंभ के 144 साल के बाद आने कहानी के इतिहास में भगदड़ में मरे लोगों को भूल गए, रेल हादसों में मरने वालों को आंकड़ों में बदल दिया गया, और सड़क दुर्घटनाओं की फाइलें धूल फांक रही हैं। जिम्मेदारों को अब जवाब देना होगा, नहीं तो एक दिन जनता यह पूछेगी—जब हमने तुम्हें सत्ता दी थी, जब हमने तुम्हें हमारी सेवा के लिए चुना था, तब तुमने हमारी सुरक्षा का ध्यान क्यों नहीं रखा? आज नहीं तो कल, इस सवाल का जवाब देना ही होगा। सच को कब तक दबाओगे? हादसों पर कब तक पर्दा डालोगे? जनता अब जाग रही है, और जब जनता अपने अधिकारों के लिए उठ खड़ी होगी, तब कोई भी सच्चाई को नहीं छुपा पाएगा। जिम्मेदार बनो, वरना इतिहास में तुम्हारा नाम सिर्फ एक काले धब्बे के रूप में लिखा जाएगा। वीडियो : दिल्ली हादसे का है... ANI का है...
आदित्य तिवारी / Aditya Tiwari169,773 views • 1 year ago