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आदित्य तिवारी / Aditya Tiwari

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लेखपाल की शिकायत करते-करते पीड़ित एसडीएम मैडम (IAS) के पैर पर गिर पड़ा.... मामला यूपी के मेरठ शहर का है....

लेखपाल की शिकायत करते-करते पीड़ित एसडीएम मैडम (IAS) के पैर पर गिर पड़ा.... मामला यूपी के मेरठ शहर का है....

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शाहजहांपुर में ट्रैक्टर-ट्रॉली नदी में गिरी, 13 की मौत: गर्रा नदी पुल पर हादसा, 30 से अधिक लोग सवार थे

शाहजहांपुर में ट्रैक्टर-ट्रॉली नदी में गिरी, 13 की मौत: गर्रा नदी पुल पर हादसा, 30 से अधिक लोग सवार थे

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लखनऊ के गोमतीनगर में नाबालिग लड़की से मारपीट, गाली गलौज जान मारने की धमकी देने वाला दबंग प्रबल प्रताप सिंह का एक कारनामा 2022 का है... जब जानकीपुरम में चेकिंग से बचने के लिए सिपाही पर कार चढ़ा दी थी, सिपाही कार में फंसकर दूर तक घिसटा रहा, पिस्टल के साथ गिरफ्तार हुआ था लेकिन एक दिन बाद ही जमानत मिल गई लेकिन पिता के गिरफ्तार होने केबाद बेटा अभी तक पकड़ा नहीं गया आखिर क्या मजबूरी है जो ऐसे मनबढ़ दबंग को गिरफ्तार नहीं कर रही राजधानी की लखनऊ पुलिस

लखनऊ के गोमतीनगर में नाबालिग लड़की से मारपीट, गाली गलौज जान मारने की धमकी देने वाला दबंग प्रबल प्रताप सिंह का एक कारनामा 2022 का है... जब जानकीपुरम में चेकिंग से बचने के लिए सिपाही पर कार चढ़ा दी थी, सिपाही कार में फंसकर दूर तक घिसटा रहा, पिस्टल के साथ गिरफ्तार हुआ था लेकिन एक दिन बाद ही जमानत मिल गई लेकिन पिता के गिरफ्तार होने केबाद बेटा अभी तक पकड़ा नहीं गया आखिर क्या मजबूरी है जो ऐसे मनबढ़ दबंग को गिरफ्तार नहीं कर रही राजधानी की लखनऊ पुलिस

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यूपी के कौशांबी में आत्महत्या करने वाले रामबाबू तिवारी के परिजनों ने जब NH-2 पर शव रखकर शांति से प्रदर्शन किया, तो पुलिस ने किया लाठीचार्ज। ASP राजेश सिंह ने हाईकोर्ट के वकील व मृतक के भतीजे आशीष तिवारी को मारा थप्पड़! मृतक ने आत्महत्या से पहले पेट पर आरोपियों के नाम तक लिखे। बेटा पहले ही POCSO में भेजा गया-परिजन बोले: पुलिस-सियासी गठजोड़ का नतीजा। क्या यही है "जनता की सुरक्षा"? क्या पीड़ित परिवार की आवाज़ दबाना ही अब पुलिस का कर्तव्य है? #JusticeForRambabu #Kausambi #UPPolice #RajeshSingh #PoliceBrutality #NH2Jammed #HumanRights #HighCourtLawyer

यूपी के कौशांबी में आत्महत्या करने वाले रामबाबू तिवारी के परिजनों ने जब NH-2 पर शव रखकर शांति से प्रदर्शन किया, तो पुलिस ने किया लाठीचार्ज। ASP राजेश सिंह ने हाईकोर्ट के वकील व मृतक के भतीजे आशीष तिवारी को मारा थप्पड़! मृतक ने आत्महत्या से पहले पेट पर आरोपियों के नाम तक लिखे। बेटा पहले ही POCSO में भेजा गया-परिजन बोले: पुलिस-सियासी गठजोड़ का नतीजा। क्या यही है "जनता की सुरक्षा"? क्या पीड़ित परिवार की आवाज़ दबाना ही अब पुलिस का कर्तव्य है? #JusticeForRambabu #Kausambi #UPPolice #RajeshSingh #PoliceBrutality #NH2Jammed #HumanRights #HighCourtLawyer

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यूपी के गाजियाबाद में एंट्री करप्शन टीम ने मुरादनगर महिला पिंक बूथ प्रभारी को रिश्वत लेते किया गिरफ्तार एक मामले में मांगी थी रिश्वत, साथ में एक सिपाही भी गिरफ्तार किया गया...

यूपी के गाजियाबाद में एंट्री करप्शन टीम ने मुरादनगर महिला पिंक बूथ प्रभारी को रिश्वत लेते किया गिरफ्तार एक मामले में मांगी थी रिश्वत, साथ में एक सिपाही भी गिरफ्तार किया गया...

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यूपी 112 के महिला संविदा कर्मी का आधी रात में भी प्रदर्शन जारी... यूपी पुलिस कार्यालय के बाहर सैलरी को लेकर इतिहास में पहली बार धरना-प्रदर्शन... यूपी के विपक्ष के नेता Akhilesh Yadav ने उठाए Government of UP पर सवाल...

यूपी 112 के महिला संविदा कर्मी का आधी रात में भी प्रदर्शन जारी... यूपी पुलिस कार्यालय के बाहर सैलरी को लेकर इतिहास में पहली बार धरना-प्रदर्शन... यूपी के विपक्ष के नेता Akhilesh Yadav ने उठाए Government of UP पर सवाल...

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लखनऊ में ₹1 लाख घूस लेते लेखपाल गिरफ्तार: प्लॉट की पैमाइश के लिए मांगी रिश्वत; एंटी करप्शन टीम ने बिछाया जाल, निलंबित

लखनऊ में ₹1 लाख घूस लेते लेखपाल गिरफ्तार: प्लॉट की पैमाइश के लिए मांगी रिश्वत; एंटी करप्शन टीम ने बिछाया जाल, निलंबित

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आज मुख्यमंत्री प्रतापगढ़ में थे, जनसभा को संबोधित कर रहे थे लेकिन इन इंस्पेक्टर साहब को आखिर नींद आ गई या फिर बहुत ही ध्यान लगाकर मुख्यमंत्री की जनसभा में ड्यूटी कर रहे थे। कंधई इंस्पेक्टर गुलाब चंद्र सोनकर का वीडियो हुआ वायरल शुक्रवार शाम 5 बजे सोशल मीडिया पर तेजी से फैला वीडियो। शहर के जीआइसी मैदान का मामला IG Range Prayagraj CM Office, GoUP

आज मुख्यमंत्री प्रतापगढ़ में थे, जनसभा को संबोधित कर रहे थे लेकिन इन इंस्पेक्टर साहब को आखिर नींद आ गई या फिर बहुत ही ध्यान लगाकर मुख्यमंत्री की जनसभा में ड्यूटी कर रहे थे। कंधई इंस्पेक्टर गुलाब चंद्र सोनकर का वीडियो हुआ वायरल शुक्रवार शाम 5 बजे सोशल मीडिया पर तेजी से फैला वीडियो। शहर के जीआइसी मैदान का मामला IG Range Prayagraj CM Office, GoUP

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वाराणसी में शुक्रवार सुबह 9 बजे जिला जज की कुर्सी पर एक महिला बैठ गई। कुर्सी पर बैठते ही हैमर पटकते हुए चिल्लाई- ऑर्डर-ऑर्डर। वकीलों से कहा- आज मैं जिला जज हूं। गवाह और सबूत पेश करिए। आज सारे मामले की सुनवाई मैं करूंगी। जो भी काम हो हमको बताया जाए। इसके बाद फाइलें उठाकर उनको पलटना शुरू कर दिया। एकाएक हुए इस घटनाक्रम से वकील चौंक गए। उन्होंने वीडियो बनाना शुरू किया तो महिला भड़क गई। वकीलों ने महिला को बाहर जाने के लिए कहा, लेकिन वह कुर्सी पर ही बैठी रही। इसके बाद महिला पुलिसकर्मियों को बुलाया गया। पुलिस महिला को हिरासत में लेकर कैंट थाने लेकर चली गई। करीब एक घंटे तक यह ड्रामा चला। बताया जा रहा है कि शुक्रवार को जिला जज अवकाश पर थे। महिला की पहचान वंदना गुप्ता के रूप में हुई है। वंदना को कोई मामला कोर्ट में नहीं है, वह कई बार कोर्ट में जज की कुर्सी पर बैठ चुकी हैं।

आदित्य तिवारी / Aditya Tiwari

346,627 görüntüleme • 22 gün önce

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ट्रेन में टिकट मांगने पर टीटीई को कहा कुत्ता, SO साहब सिंह समेत चार पुलिसकर्मी ने टीटी से की मारपीट, वीडियो हुआ वायरल, प्रयागराज जीआरपी में टीटीई ने की लिखित शिकायत एसओ के नेतृत्व में जीआरपी फतेहपुर की टीम ने बीकानेर-प्रयागराज एक्सप्रेस (20404) के ए2 कोच में तीन ऑन-बोर्ड टीटीई के साथ कथित तौर पर मारपीट की, जब टीटीई ने उन्हें टिकट नहीं होने के कारण कोच छोड़ने के लिए कहा। जीआरपी के 5 जवानों की टीम एक आरोपी को पुलिस ऑपरेशन के बाद वापस फ़तेहपुर ले जा रही थी. टीम कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ी थी. एसपी जीआरपी प्रयागराज अष्टभुजा सिंह ने आरोपी एसओ को हटा दिया है और सीओ जीआरपी प्रयागराज को मामले की जांच के लिए कानपुर सेंट्रल स्टेशन भेजा है।

आदित्य तिवारी / Aditya Tiwari

788,052 görüntüleme • 2 yıl önce

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जिम्मेदार कौन? "कैमरा बंद कर दो, मोबाइल छीन लो, किसी के पास कोई तस्वीर या वीडियो नहीं होना चाहिए...।" जब किसी घटना को छुपाने की कवायद शुरू होती है, तो समझ लीजिए कि सच को दफनाने की साजिश रची जा रही है। सवाल यह नहीं कि ऐसा क्यों किया जाता है, बल्कि सवाल यह है कि आखिर ऐसा करने की जरूरत क्यों महसूस होती है? सच को देखने, बोलने और सुनने का हक हर नागरिक का है, लेकिन जब सच्चाई को दबाने के लिए सत्ता और सिस्टम मिलकर काम करते हैं, तो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ खतरे में पड़ जाता है। रेल हादसे में जान गंवाने वाले सिर्फ आंकड़े नहीं होते, वे किसी के बेटे-बेटी, मां-बाप, भाई-बहन होते हैं। कोई घर से निकला था एक नई जिंदगी की शुरुआत करने, कोई अपने परिवार से मिलने को आतुर था, कोई रोज़ी-रोटी की तलाश में सफर पर था। लेकिन अचानक हुई एक दुर्घटना ने सबकुछ खत्म कर दिया। हादसे के बाद सत्ता के गलियारों में आंकड़े गिनने का खेल शुरू हो जाता है, मगर कोई यह नहीं पूछता कि उन चीखों की गूंज कब तक रहेगी? कोई यह नहीं बताता कि उन परिवारों का क्या जो अपनों को खो चुके हैं? हम किसी सरकार की बात नहीं करते, किसी पार्टी की निंदा नहीं करते, हम सिर्फ जिम्मेदारी की बात करते हैं। अगर एक रेल सेवा का काम जनता को सुरक्षित यात्रा देना है, तो क्या उसे अपनी जिम्मेदारी नहीं निभानी चाहिए? अगर किसी अस्पताल का काम इलाज करना है, तो क्या उसे मरीजों को बेहतर सुविधा नहीं देनी चाहिए? अगर किसी नेता का काम जनता की सेवा करना है, तो क्या उसे लोगों की परेशानियों का समाधान नहीं करना चाहिए? लेकिन जब जिम्मेदार ही अपनी आंखों पर पट्टी बांध लें, जब वे अपने पद को बस एक कुर्सी समझने लगें, तो समाज को अंधकार में जाने से कोई नहीं रोक सकता। हादसों में मरने वाले महज आंकड़े नहीं होते। हर संख्या के पीछे एक कहानी होती है। हर मृतक के पीछे एक परिवार होता है, जो उसकी वापसी की उम्मीद में दरवाजे पर आंखें गड़ाए बैठा रहता है। लेकिन जब अपनों के शव वापस आते हैं, तो वे सिर्फ रो सकते हैं, गिड़गिड़ा सकते हैं, न्याय की भीख मांग सकते हैं। कोई पूछे तो सही कि इन हादसों का जिम्मेदार कौन है? किसी को सजा क्यों नहीं मिलती? नेता, अफसर और कर्मचारी—ये सभी अपने पद की शपथ लेते हैं, लेकिन कितने हैं जो उस शपथ को निभाते हैं? कितने हैं जो अपनी आत्मा से पूछते हैं कि उनकी लापरवाही से कितने लोग बेघर हुए, कितने बच्चों के सिर से मां-बाप का साया उठ गया, कितने परिवारों की खुशियां छिन गईं? ऐसे लोग विरले ही मिलते हैं, जो अपनी जिम्मेदारी को सच्चे दिल से निभाते हैं। वरना, अधिकतर लोग सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने में लगे रहते हैं। महाकुंभ के 144 साल के बाद आने कहानी के इतिहास में भगदड़ में मरे लोगों को भूल गए, रेल हादसों में मरने वालों को आंकड़ों में बदल दिया गया, और सड़क दुर्घटनाओं की फाइलें धूल फांक रही हैं। जिम्मेदारों को अब जवाब देना होगा, नहीं तो एक दिन जनता यह पूछेगी—जब हमने तुम्हें सत्ता दी थी, जब हमने तुम्हें हमारी सेवा के लिए चुना था, तब तुमने हमारी सुरक्षा का ध्यान क्यों नहीं रखा? आज नहीं तो कल, इस सवाल का जवाब देना ही होगा। सच को कब तक दबाओगे? हादसों पर कब तक पर्दा डालोगे? जनता अब जाग रही है, और जब जनता अपने अधिकारों के लिए उठ खड़ी होगी, तब कोई भी सच्चाई को नहीं छुपा पाएगा। जिम्मेदार बनो, वरना इतिहास में तुम्हारा नाम सिर्फ एक काले धब्बे के रूप में लिखा जाएगा। वीडियो : दिल्ली हादसे का है... ANI का है...

आदित्य तिवारी / Aditya Tiwari

169,773 görüntüleme • 1 yıl önce