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दक्षिण हरियाणा - अहीर समाज ✊🏻

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अहीर ना कभी दबे और ना कभी दबने 😂 Randomsena ले मूत दिया तेरे ऊपर राव साहब न

अहीर ना कभी दबे और ना कभी दबने 😂 Randomsena ले मूत दिया तेरे ऊपर राव साहब न

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मुझे तो हंसी आती है और ताज्जुब भी होता है जब पूर्वांचल के ग्वाले अहीरवाल से बराबरी करने की बात करते है अंग्रेज पूर्वांचल और अन्य जगह के ग्वालों की भर्ती फौज में नहीं करते थे इनकी कमजोर नस्ल और अव्यवस्थित जंगली व्यवहार के कारण अयोग्य माना जाता था , इसके विपरीत वृहद अहीरवाल जो वर्तमान दक्षिणी हरियाणा एवं राजस्थान के कुछ भागों के अलावा उत्तर प्रदेश के कानपुर तक फैला है इस क्षेत्र के यदुवंशी और नंदवंशी अहीरों को भारत के सबसे लड़ाकू और बेहतरीन फौजी माना जाता था, यूंही अहीरवाल क्षेत्र को भारत का इजरायल नहीं माना जाता, अहीर कौम की मार्शल इतिहास की बात की जाए तो हमारी कलम की स्याही सुख जाए, 5 हजार की अहीरों के साथ गुजरात के वीर देवायात अहीर ने जूनागढ़ किले पे चढ़ाई कर दि थी । भरौल रियासत के अहीर राजा पांच हजार से अधिक सेना के साथ मैनपुरी के राजा तेज सिंह चौहान को परास्त की थे । भिरावती राज के अहीर राजा छिद्दू सिंह दस हजार की सेना और तोप के साथ रोहिला नवाब से जंग छेड़ दिया था करनाल के युद्ध में 5 हजार अहीरों ने राव बालकृष्ण अहीर के नेतृत्व में शहादत दिया, नसीबपुर नारनौल के युद्ध में राजा राव तुलाराम जी के नेतृत्व में अहीरवाल के 5 हजार अहीर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए, रेजांगला की शौर्यगाथा किसी से छिपी नहीं जिसे ग्वाले अपने क्षेत्र में यादव के नाम पे अपनी शौर्यगाथा बता Feeling लेते है और कारगिल युद्ध के परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह जी भी पश्चिम यूपी चौबीसा के अहीरवाल के ही अहीर है, अब बात करते हैं ग्वाल बिरादरी पे इनका कोई इतिहास नहीं यादव कौम के नाम पर फौज में भर्ती हो जाते अब पर फौज में खास प्रदर्शन नहीं देते , पूर्वांचल में जितने अंग्रज़ों के विरुद्ध लड़ने वाले वीर सपूत थे शहीद भगवान अहीर से लेकर अन्य सभी ढढोर अहीर समाज से आते है ग्वालों ने कभी राष्ट्र के लिए हथियार नहीं उठाया, सन 1781 में काशी के जमींदार ठाकुर चैत सिंह ने जब बगावत किया तो उसे सेना का अभाव था उसे ग्वाले दिखे तो ग्वालों से मदद मांगी ग्वालों ने बड़ी रकम मांगी इसके लिए , चैत सिंह ने इन्हें रकम दे दिया जब युद्ध की घड़ी आई तो डरपोक ग्वाले अपनी भैंसिया पे गंडासे, लोहाबंद इत्यादि बांध अंग्रेजों फौज के तरफ दौरा के भाग गए ग्वालों से बहादुर तो उन भैंसे थी कम से कम अंग्रेजों फौज को घायल करते हुए खदेड़ दिया अंततः ग्वालों का एक मात्र युद्ध का श्रेय भी उनकी भैंसिया को जाता है। अब आप ही सोचिए अहीर और ग्वाल में जमीन आसमान का अंतर है।

मुझे तो हंसी आती है और ताज्जुब भी होता है जब पूर्वांचल के ग्वाले अहीरवाल से बराबरी करने की बात करते है अंग्रेज पूर्वांचल और अन्य जगह के ग्वालों की भर्ती फौज में नहीं करते थे इनकी कमजोर नस्ल और अव्यवस्थित जंगली व्यवहार के कारण अयोग्य माना जाता था , इसके विपरीत वृहद अहीरवाल जो वर्तमान दक्षिणी हरियाणा एवं राजस्थान के कुछ भागों के अलावा उत्तर प्रदेश के कानपुर तक फैला है इस क्षेत्र के यदुवंशी और नंदवंशी अहीरों को भारत के सबसे लड़ाकू और बेहतरीन फौजी माना जाता था, यूंही अहीरवाल क्षेत्र को भारत का इजरायल नहीं माना जाता, अहीर कौम की मार्शल इतिहास की बात की जाए तो हमारी कलम की स्याही सुख जाए, 5 हजार की अहीरों के साथ गुजरात के वीर देवायात अहीर ने जूनागढ़ किले पे चढ़ाई कर दि थी । भरौल रियासत के अहीर राजा पांच हजार से अधिक सेना के साथ मैनपुरी के राजा तेज सिंह चौहान को परास्त की थे । भिरावती राज के अहीर राजा छिद्दू सिंह दस हजार की सेना और तोप के साथ रोहिला नवाब से जंग छेड़ दिया था करनाल के युद्ध में 5 हजार अहीरों ने राव बालकृष्ण अहीर के नेतृत्व में शहादत दिया, नसीबपुर नारनौल के युद्ध में राजा राव तुलाराम जी के नेतृत्व में अहीरवाल के 5 हजार अहीर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए, रेजांगला की शौर्यगाथा किसी से छिपी नहीं जिसे ग्वाले अपने क्षेत्र में यादव के नाम पे अपनी शौर्यगाथा बता Feeling लेते है और कारगिल युद्ध के परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह जी भी पश्चिम यूपी चौबीसा के अहीरवाल के ही अहीर है, अब बात करते हैं ग्वाल बिरादरी पे इनका कोई इतिहास नहीं यादव कौम के नाम पर फौज में भर्ती हो जाते अब पर फौज में खास प्रदर्शन नहीं देते , पूर्वांचल में जितने अंग्रज़ों के विरुद्ध लड़ने वाले वीर सपूत थे शहीद भगवान अहीर से लेकर अन्य सभी ढढोर अहीर समाज से आते है ग्वालों ने कभी राष्ट्र के लिए हथियार नहीं उठाया, सन 1781 में काशी के जमींदार ठाकुर चैत सिंह ने जब बगावत किया तो उसे सेना का अभाव था उसे ग्वाले दिखे तो ग्वालों से मदद मांगी ग्वालों ने बड़ी रकम मांगी इसके लिए , चैत सिंह ने इन्हें रकम दे दिया जब युद्ध की घड़ी आई तो डरपोक ग्वाले अपनी भैंसिया पे गंडासे, लोहाबंद इत्यादि बांध अंग्रेजों फौज के तरफ दौरा के भाग गए ग्वालों से बहादुर तो उन भैंसे थी कम से कम अंग्रेजों फौज को घायल करते हुए खदेड़ दिया अंततः ग्वालों का एक मात्र युद्ध का श्रेय भी उनकी भैंसिया को जाता है। अब आप ही सोचिए अहीर और ग्वाल में जमीन आसमान का अंतर है।

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🤡 एल्विश भाई के कोई बोल सकता है क्या ? एल्विश भाई

🤡 एल्विश भाई के कोई बोल सकता है क्या ? एल्विश भाई

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अगर अन्य जातियों के नाम से रेजिमेंट बनी हुई हैं तो फिर अहीर रेजिमेंट क्यों नहीं...!! #अहीर_रेजीमेंट_हक_है_हमारा #Ahir_Regiment_Demand

अगर अन्य जातियों के नाम से रेजिमेंट बनी हुई हैं तो फिर अहीर रेजिमेंट क्यों नहीं...!! #अहीर_रेजीमेंट_हक_है_हमारा #Ahir_Regiment_Demand

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रेवाड़ी ज़िले से यादव समाज के लोग 200ft लम्बे अहीर रेजिमेंट के झण्डे के साथ खेड़की दौला महाँपंचायत में आये और अपना समर्थन दिया...!! ❤️

रेवाड़ी ज़िले से यादव समाज के लोग 200ft लम्बे अहीर रेजिमेंट के झण्डे के साथ खेड़की दौला महाँपंचायत में आये और अपना समर्थन दिया...!! ❤️

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देखिए ग्वालों के कांड !! गाने का नाम :- आग लाग जाता लं* में सिंगर्स :- अर्जुन लाल यादव/रीना यादव वीडियो में नाचने वाले भी ये दोनों खुद हैं !! दोनों बिहार के बिना गोत्र वाले फर्जी यादव उर्फ ग्वाले हैं, रिश्ते में दोनों मौसेरे भाई बहन हैं, जी, सही सुना !! गाना कितना अश्लील है बताने की जरूरत नहीं, ये गाना इतना प्रसिद्ध है कि बिहार पूर्वांचल में जब तक ग्वालों की शादियों ना बजे, तो ग्वाल दूल्हा घोड़ी माफ करना भैंसिया नहीं चढ़ता, समाज में कैसे गंदगी फैला रहे हैं ग्वाले? ऐसे एक नहीं हजारों भोजपुरिया गाने बनाएं है ग्वालों ने, अहीर भाइयों, यादव सरनेम बेहद असभ्य लोगों के हाथ पड गया है, इनका नाम देखकर किनकी बदनामी होगी ? पूर्वजों की तरह गोत्र का प्रयोग करें !! ग्वाल भगाओ, अहीर बचाओ बल्कि ऐसी हरकतें देखकर लगता है कि ग्वाल भगाओ, देश बचाओ !!

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218,353 görüntüleme • 1 yıl önce

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Barabri Nahi To Burai ? Prince Narula

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20,685 görüntüleme • 1 yıl önce

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पूर्वांचल और उससे सटे बिहार के कई इलाके में दिवाली के अगले दिन एक निर्दोष सूवर को रस्सी से बांधकर ग्वाले अपने भैसा को देशी पउवा पीला उस पर छोड़ देते और बेचारे बंधे हुए सुअर पर तब तब अत्याचार करते जब तक वह सुवर अपने प्राण नहीं त्याग देता !! यहां तक गोरखपुर और आजमगढ़ के कई इलाके में मरे हुए सुअर को ग्वाले उसी स्थान पर उबाल के या भुन के खाते है उसके बाद सोशल मीडिया पर पशु रक्षक एवं शुद्ध शाकाहारी होने का ढोंग करते !! इससे साबित होता है ग्वाले आदिवासियों की ही औलाद है जो जहां जाता अपनी परम्परा वहां भी बरकरार रखता !! खुद अहीर गोरखपुर में जा कर भी शासन किए वही ग्वाले बनारस गोरखपुर के जंगल में हा हुई कर सुवर का शिकार करते थे, ग्वाले भैस और सुवर दोनों पर खुलेआम अत्याचार कर रहे PETA वालो को इन ग्वालों पर करवाई करनी चाहिए और 100 100 कोरे इनके हूततरो पर देना चाहिए !!

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26,703 görüntüleme • 1 yıl önce

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ये जैकी यादव इटावा से आता हैं, ये बोल रहा हैं कि हरियाणा के यादव खुद को शासक वर्ग से बताते और यूपी के यादवों को ग्वाल बोलते एवं अपने से अलग बताते है जबकि हरियाणा के अहीरों ने पश्चिम यूपी वाले अहीरों को कभी ग्वाल नहीं बोला न अपने से अलग बताया !! हरियाणा और पश्चिम यूपी के अहीर में तो हमेशा से आपस में शादियां होती आ रही हैं रेवाड़ी नरेश राव बीरेंद्र सिंह जी की शादी शिकोहाबाद स्थित उरावर रियासत की अहीर राजकुमारी से हुई थी, भारौल रियासत की राजकुमारी धारुहेड़ा के जागीरदार को विहाहीं थीं पश्चिम यूपी व हरियाणा में और भी तमाम शादियां होती हैं, आधे अहीरवाल की रिश्तेदारी पश्चिम यूपी में है !! हरियाणा वालों ने सिर्फ पूर्वांचल व बिहार वालों को अपने से अलग बताया और उन्हें ही ग्वाल बोला इसमें कुछ गलत भी नहीं बोला, पूर्व वाले वास्तव में ग्वाल हैं वो अहीर हैं ही नहीं अहीर अलग है ग्वाल से !! रजवाड़े तो पश्चिम यूपी के अहीरों के भी रहे हैं और हरियाणा ज्यादा रजवाड़े रहे लेकिन इस जैकी को पश्चिम यूपी अहीर रजवाड़े दिखते ही नहीं, ये पश्चिम यूपी के रजवाड़ों को जड़ से खत्म करना चाहता, अहीर रजवाड़ों और अहीर इतिहास की इज्जत ये नहीं करता, इसका साफ मतलब तो ये हुआ ये अपने को अहीर से अलग मानता हैं और अहीरों की फजीहत कराने के लिए ये पश्चिम यूपी के अहीर को जबरदस्ती ग्वाल, भैंस चराने वाला, शूद्र बनाने पर तुले हैं इन चीजों से पश्चिम यूपी के अहीर का कुछ संबंध नहीं है !! जहाँ जहाँ अहीर, वहाँ वहाँ अहीरवाल 🚩

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18,883 görüntüleme • 1 yıl önce

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लो भाइयों आ गया बिहार का ग्वाल बदमोश !! इसका OPPO का Camera फिल्टर लगाते ही दम तोड़ रहा, साथ ही दांतों में इतनी बड़ी खाई कि सरकार को ब्रिज बनाने का टेंडर निकालना पड़े !! अब इस ग्वाल बदमोश और अन्य ग्वाल भाइयों के झूठे आरोप का जवाब !! 1. क्या ये यादवों को आपसी झगड़ा है ? उत्तर : नहीं, ग्वाला और यादव जब अलग जाति/समूह है तो ये आपसी झगड़ा कैसे ? 2. क्या ये हरियाणा V/S UP बिहार का मामला है ? उत्तर: नहीं, ये क्षेत्रवाद का मामला बिल्कुल नहीं है, पूर्वांचल में छोटी आबादी दढ़ौर अहीरों की भी है, West UP में अहीरों की अच्छी संख्या है तो ये हरियाणा V/S यूपी, बिहार का मामला कैसे हुआ ? दरअसल 100% ग्वालों का मूल स्थान पूर्वांचल बिहार झारखंड है, जहां से ये वायरस की तरह देशभर में दिहाड़ी मजदूरी करने जाते है, क्योंकि इनकी आबादी अहीरों से भी कई गुना ज्यादा है, इन ग्वाल बालों के उट पटांग कारनामे देखकर लोग अहीरों की छवि बना लेते हैं !! 3. क्या अहीर 36 करोड़ है भारत में ? उत्तर : 🤣 4. क्या गोत्र हानिकारक है अहीर एकता के लिए ? उत्तर: ग्वालों में गोत्र ही नहीं होता तो वो बेतुके तर्क देंगे ही, अहीर एकता की नींव ही गोत्र है, हम अहीर एकता चाहते है, ग्वाल एकता नहीं !! 5. क्या हम बिहार पूर्वांचल के ग्वालों को इसलिए अहीर नहीं मानते क्योंकि वे गरीब, भूखे नंगे, नाटे और देखने में अजीब होते हैं ? उत्तर : जवाब पेचीदा है, अहीर चाहे गरीब हो या अमीर, अहीर अहीर है, ग्वाला अरबपति भी हो, अहीर नहीं है, बाकि शकल सूरत, कद काठी नसल की पहचान जरूर है, उसके साथ व्यवहार, Culture, History भी सूचक हैं, ब्रिटिश Records में आप कई जगह पाएंगे अहीरों और ग्वालों के कद काठी और कल्चर में अंतर, पूर्वांचल में ही अन्य जाति के लोग Confirm कर देंगे, दढोर अहीर और ग्वालों की कद काठी, शकल सूरत में कितना अंतर है !! 6. बिना गोत्र वाले फर्जी अहीर उर्फ ग्वाला समाज भरपूर नाकामयाब कोशिश कर रहा कि इसे हरियाणा V/S यूपी, बिहार का मुद्दा बना सके. पर चाहे West Up का अहीर हो या पूर्वांचल का दढ़ौर अहीर उन्हें भी पता है किसकी बात हो रही, अहीर अपनी नसल की पहचान जानता है !! जिसका नहीं गोत, वो अहीर नहीं दोस्त !!

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15,441 görüntüleme • 1 yıl önce

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