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Ajay Maken

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MP Rajya Sabha | National Treasurer, INC | 6 Times MP/MLA | Ex-Cabinet Minister, GoI & Delhi | Ex-Speaker, Delhi Assembly | Proudly with @RahulGandhi

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Sharing a milestone that fills our hearts with immense gratitude. Today, we watched our son, Aujaswi, receive the University Gold Medal from the Chief Justice of India (Who is also Chancellor of NUJS) for securing Rank 1 at NUJS Kolkata. 🎓 To be honoured with the Dr Madhav Menon University Gold Medal, named after the father of modern legal education, is a dream come true. Beyond being the overall topper, earning Gold Medals in 7 individual subjects is a testament to his relentless dedication to the law. The road was long, but seeing his hard work recognized at the highest level makes every late night worth it. Proud is an understatement! ❤️⚖️ NUJS Kolkata

Sharing a milestone that fills our hearts with immense gratitude. Today, we watched our son, Aujaswi, receive the University Gold Medal from the Chief Justice of India (Who is also Chancellor of NUJS) for securing Rank 1 at NUJS Kolkata. 🎓 To be honoured with the Dr Madhav Menon University Gold Medal, named after the father of modern legal education, is a dream come true. Beyond being the overall topper, earning Gold Medals in 7 individual subjects is a testament to his relentless dedication to the law. The road was long, but seeing his hard work recognized at the highest level makes every late night worth it. Proud is an understatement! ❤️⚖️ NUJS Kolkata

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केरल के मुख्यमंत्री का नाम Thursday को declare होगा। हमारे General Secretary Communication जयराम रमेश जी ने announce किया है — यानी ठीक 9वें दिन फ़ैसला। और इसी 9 दिन पर BJP और उसका godi media इतना शोर मचा रहा है जैसे संविधान टूट गया हो। ज़रा आँकड़े देखिए। साल 2000 के बाद से दोनों पार्टियों का record सामने रखता हूँ — 📊 Congress (22 cases since 2000) • औसत: 5 दिन • Median: 5 दिन • Congress ने पूरे 22 साल में कभी भी 9 दिन से ज़्यादा नहीं लगाए • 22 में से 14 बार 5 दिन या उससे कम में CM बिठाया 📊 BJP (30 cases since 2000) • औसत: 7.2 दिन • Median: 7 दिन • सबसे लंबी देरी: 15 दिन (योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश, 2022) • 30 में से 13 बार 8 दिन या उससे ज़्यादा लगाए ⚡ Congress की रफ़्तार के कुछ examples • पंजाब 2002 — अमरिंदर सिंह: 2 दिन • हिमाचल प्रदेश 2022 — सुखविंदर सिंह सुक्खू: 3 दिन • तेलंगाना 2023 — रेवंत रेड्डी: 4 दिन • आंध्र प्रदेश 2004 — Y.S.R. रेड्डी: 3 दिन 🐌 BJP की देरी के record • उत्तर प्रदेश 2022 — योगी आदित्यनाथ: 15 दिन • उत्तराखंड 2022 — पुष्कर धामी: 13 दिन • राजस्थान 2023 — भजन लाल शर्मा: 12 दिन • दिल्ली 2025 — रेखा गुप्ता: 12 दिन • मणिपुर 2022 — एन. बीरेन सिंह: 11 दिन • अरुणाचल 2024 — पेमा खांडू: 11 दिन और सबसे बड़ी बात — दिसंबर 2023 में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ — तीन राज्यों के परिणाम एक ही दिन आए। BJP ने सिर्फ़ CM का नाम तय करने में 10 से 12 दिन लगाए। तब godi media चुप था। 🎯 Killer asymmetry: Congress ने पूरे 22 साल में कभी भी 9 दिन से ज़्यादा नहीं लगाए। BJP ने अकेले 8 अलग मामलों में 9 दिन से भी ज़्यादा वक़्त लिया है। Congress 40% ज़्यादा तेज़ है मुख्यमंत्री बिठाने में — हर metric पर, हर तुलना में। जो पार्टी ख़ुद 15 दिन तक मुख्यमंत्री तय नहीं कर पाई, उसे दूसरों पर सवाल उठाने का कोई हक़ नहीं बनता। Congress का record साफ़ है — तेज़, अनुशासित, संविधान-सम्मत। शोर BJP का है। और फ़ैसला जनता करेगी। #Kerala #KeralaCM #Congress #INC #BJP #UDF #PoliticalAccountability

Ajay Maken

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Sh. .Arvind Kejriwal seeks Congress's help for the ordinance, yet unabashedly ridicules our esteemed leaders, including Sh. Ashok Gehlot and Sh. Sachin Pilot in Rajasthan. His ministers place prerequisites on our alliance, while their chief spokesperson publicly disparages our party and leaders on the day of All Opposition Party meeting. To brazenly criticize and then demand support, is this how alliances are sought, Mr. Kejriwal? Arvind Kejriwal's political manoeuvres in recent weeks have left many baffled. However, let me elucidate the truth. His desperate attempts to evade imprisonment on corruption charges, wherein two of his colleagues are already jailed, are reasons for these actions. His proclamations of opposition unity are not for cohesion but a calculated move to sabotage it and curry favour with the BJP. Past actions of the AAP in Parliament, the Delhi Legislative Assembly, or elsewhere only reinforce their surreptitious alliance with the BJP. Kejriwal's betrayals are infamous - just ask Prashant Bhushan, Yogendra Yadav, and the founders of the Anna Movement. In Hindi, it's aptly said about him, 'Aisa koi saga nahin, jisko Kejriwal ne Thaga Nahin…'. However, be assured Arvind Kejriwal, your deeds have not gone unnoticed. Your massive corruption and utilization of these ill-gotten funds to sabotage Congress in Goa, Gujarat, Punjab, Himachal, Uttarakhand, and Assam, just to help the BJP, won't be forgotten. Under the guise of 'Aam Admi' or 'Ordinary Man', you've manipulated Delhi's citizens, using Rs 171 crores of public money to build a palace for yourself. ... Your actions have unmasked the grim truth, Mr. Kejriwal. You're no longer a champion of the 'Aam Aadmi' or a crusader against corruption. Instead, you stand knee-deep in corruption, living a lavish lifestyle like a king in your 'Sheesh Mahal'.

Ajay Maken

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"कांग्रेस को कमजोर करके भाजपा से नहीं लड़ा जा सकता," : अजय माकन माकन ने कहा, "मुझे यह भी लगता है कि 2013 में कांग्रेस द्वारा आप (AAP) को समर्थन नहीं देना चाहिए था और न ही 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए कोई गठबंधन होना चाहिए। लेकिन यह मेरी व्यक्तिगत राय है," अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के कोषाध्यक्ष ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा। नए कांग्रेस मुख्यालय, कोटला रोड पर आयोजित पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में माकन, जो दिल्ली के निवासी हैं और यहीं राजनीति में सक्रिय रहे हैं (तीन बार के विधायक और दो बार के लोक सभा संसद भी रहे हैं), ने स्पष्ट किया कि वे अपनी पहले की टिप्पणी पर अब भी कायम हैं। उन्होंने पहले कहा था कि केजरीवाल "राष्ट्र-विरोधी" हैं और राजधानी में आप (AAP) का मजबूत होना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को ही फायदा पहुंचाता है। जब उनसे केजरीवाल के खिलाफ "राष्ट्र-विरोधी" टिप्पणी पर सवाल किया गया, तो माकन ने कहा, "मैंने अपनी व्यक्तिगत राय दी थी और मैं अब भी उस पर कायम हूं।" माकन ने कहा कि 2013 में आम आदमी पार्टी (AAP) को कांग्रेस के समर्थन और 2024 में केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी के साथ गठबंधन के कारण दिल्ली की जनता को नुकसान उठाना पड़ा। "जब दिल्ली की जनता को नुकसान हुआ, तो भाजपा को फायदा हुआ।" उन्होंने कहा। यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस भविष्य में आप (AAP) के साथ गठबंधन करेगी, माकन ने कहा, "मुझे लगता है कि दिल्ली में केजरीवाल को बढ़ावा देना भाजपा को मदद करता है। भाजपा से लड़ने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का मजबूत होना बेहद जरूरी है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत नहीं है, तो भाजपा के खिलाफ लड़ाई कठिन हो जाएगी। "कांग्रेस को कमजोर करके भाजपा से नहीं लड़ा जा सकता," उन्होंने स्पष्ट किया। दिल्ली को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य करार देते हुए माकन ने कहा कि यह सर्वविदित है कि जो भी पार्टी राजधानी की लोकसभा सीटें जीतती है, वही केंद्र में सरकार बनाने में सफल होती है। "आप (AAP) दिल्ली में भाजपा के खिलाफ लड़ने में पूरी तरह विफल रही है," उन्होंने दावा किया। माकन ने बताया कि हरियाणा और दिल्ली दोनों में कांग्रेस आप (AAP) के साथ गठबंधन करना चाहती थी। लेकिन जेल से बाहर आने के तुरंत बाद केजरीवाल ने खुद घोषणा की कि उनकी पार्टी हरियाणा की सभी 90 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि "हम गठबंधन पर चर्चा के उन्नत चरण में थे।" उन्होंने कहा, "जहाँ तक दिल्ली का सवाल है, केजरीवाल ने खुद लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद घोषणा की कि वे दिल्ली का चुनाव अकेले लड़ेंगे।" माकन ने कहा कि जब दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी, जिसे मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने नेतृत्व दिया, तब पार्टी ने राजधानी की सभी सात लोकसभा सीटें जीतीं और भाजपा को यहाँ पराजित किया। उन्होंने कहा, "दिल्ली में उन्हें रोककर, हमने उन्हें केंद्र में सत्ता में आने से भी रोका क्योंकि जो भी दिल्ली की लोकसभा सीटें जीतता है, वही राष्ट्रीय स्तर पर सरकार बनाता है।" "लेकिन जब से आप (AAP) दिल्ली में सत्ता में आई है, स्थिति उलट गई है। भाजपा केंद्र में सरकार बना रही है क्योंकि उसने सभी सात लोकसभा सीटें जीती हैं- तो फिर भाजपा के साथ कौन है?" माकन ने सवाल उठाया।

Ajay Maken

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Respected Jairam Ramesh ji, On World Environment Day, 5th June, I set out to answer one question with data — not rhetoric: is Delhi's air actually improving, or does the weather just keep taking both the blame and the credit? Since then, I have run one of the most rigorous independent air-quality exercises ever attempted for Delhi: ▪️ 5 years 5 months of data — 1 January 2021 to 31 May 2026 ▪️ 46 CPCB/DPCC monitoring stations, 7 pollutants, 8.6 million station-hours — every station-day quality-gated (minimum 16 of 24 valid hours) ▪️ Machine-learning "de-weathering" — 7 Boosted Regression Tree models, 35,000 decision trees, trained on wind, temperature, boundary-layer height and rainfall (with 6-hour and 24-hour lags) ▪️ Every station-hour re-predicted under 5 climatological weather scenarios — nearly 38 MILLION model predictions ▪️ Models validated on held-out data, cross-checked against CPCB's published CCR AQI, and confirmed by TWO independent de-weathering methods ▪️ AQI re-derived strictly through CPCB's own 2014 National AQI formula, and every season compared with the SAME season, year on year — apples to apples, weather removed The findings are alarming. Remember: the CPCB AQI is CAPPED at 500 — the scale itself cannot express how bad it truly gets. Yet even on this capped scale, with the weather's mercy stripped away, Delhi's pollution levels are NOT decreasing: ❗ Not ONE of Delhi's four seasons is on a sustained path of real improvement, 2021→2026. ❗ At least one widely celebrated "improvement" turns out to be pure weather — not policy. ❗ And there is one winter-2026 number the government will have to answer for. The complete findings — season by season, year by year, including a direct comparison with 31 Chinese provincial capitals — are in my animated report releasing on 13th June. The teaser is attached. Sir, as Chairperson of the Parliamentary Standing Committee on Environment, Forests & Climate Change, I request you to take up Delhi's deteriorating air quality with the Union Home Minister — Delhi being a Union Territory comes directly under him, both the state government's machinery and the garbage-collecting MCD; with the Union Minister of Housing & Urban Affairs — under whom the DDA and the Delhi Metro function; and with the Union Environment Minister — under whom the CPCB and the national clean-air mission sit. This emergency cuts across all three ministries, and accountability keeps falling in the gaps between them. Delhi is not asking for favourable winds. It is asking for governance. साँस लेना मौलिक अधिकार है — सुविधा नहीं।

Ajay Maken

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🙏 यह पाँच-भाग की शृंखला मेरी मार्गदर्शक, श्रीमती शीला दीक्षित जी को समर्पित — मेरी नज़र में, आज के आधुनिक दिल्ली की निर्माता। पिछले कुछ दिनों में दिल्ली सरकार ने ईंधन संकट को लेकर कई सलाहें जारी की हैं — मेट्रो लीजिए, साथ में सवारी कीजिए, ग़ैर-ज़रूरी सफ़र कम कीजिए। ये सलाहें अपने-आप में ग़लत नहीं हैं। पर ये "हमें", यानी आम लोगों को, बताती हैं कि हमें क्या करना है। पहले सवाल का जवाब इनमें नहीं है — क्या वह "विकल्प" है भी? क्या दिल्ली का सार्वजनिक परिवहन इतना तैयार है कि परिवार जब अपनी गाड़ियाँ घर पर छोड़कर निकलें, तो उन्हें ढो सके? एक बात पहले ही साफ़ कर दूँ। आगे जो भी मैं रखूँगा, उसका मक़सद आलोचना नहीं है। ये सुझाव हैं, सद्भावना के साथ, दिल्ली सरकार के लिए — ताकि वह काम आगे बढ़ाया जा सके जो 2013 में शीला जी के कार्यकाल के समाप्त होने तक चल रहा था। यहाँ जो भी आँकड़े आप देखेंगे, वे सिर्फ़ सरकारी दस्तावेज़ों से हैं : भारतीय रिज़र्व बैंक, दिल्ली सरकार के अपने ऑडिटेड खाते, दिल्ली मेट्रो की वार्षिक रिपोर्टें, और दिल्ली का आर्थिक सर्वेक्षण। आँकड़ों से पहले एक छोटी सी बात समझ लेते हैं। CAPEX — यानी पूँजीगत व्यय — सरकार के बजट का वह हिस्सा है जो "बनाता" है। मेट्रो लाइनें, डिपो, फ़्लाईओवर, सड़कें। ऐसी संपत्तियाँ जो दशकों तक चलती हैं। दूसरा हिस्सा, राजस्व व्यय, ख़र्च होता है वेतन, सब्सिडी और बिजली के बिल पर। दोनों ज़रूरी हैं — शहर चलाने के लिए दोनों चाहिए। पर शहर "बनाता" सिर्फ़ CAPEX है। अब देखिए — तीस सालों में दिल्ली की चार चुनी हुई सरकारें रहीं। हर सरकार ने परिवहन पर जो रुपया ख़र्च किया, उसमें से वास्तव में "बनाने" पर कितने पैसे लगे : 🔸 बीजेपी, 1993–98 : 54 पैसे। 🔸 शीला दीक्षित / INC, 1998–2013 : 73 पैसे। दिल्ली की किसी भी सरकार से सबसे ज़्यादा, और बहुत बड़े अंतर से। 🔸 आम आदमी पार्टी, 2014–25 : सिर्फ़ 33 पैसे। सबसे कम, बहुत बड़े अंतर से। 🔸 बीजेपी, 2025–26 (बजट अनुमान) : 51 पैसे अनुमानित। पर यह सिर्फ़ एक बजट-अनुमान वर्ष है, आँकने के लिए बहुत जल्दी। दिन 2 में हम इसकी ईमानदारी से जाँच करेंगे। यही, एक आँकड़े में, फ़र्क़ है — एक बने हुए शहर में, और एक उस शहर में जो ज़्यादातर सिर्फ़ "घोषित" हुआ हो। 2013 के अंत में शीला जी ने पद छोड़ा। और उसके बाद से, दिल्ली में बुनियादी ढाँचे के विकास की रफ़्तार बस ठहर सी गई है। मेट्रो का फ़ेज़ चार — जिसकी योजना-स्तर की मंज़ूरी उनकी सरकार ने 2011 में दे दी थी — केंद्र की मंज़ूरी के लिए 2019 तक इंतज़ार करता रहा। डीटीसी का बेड़ा आज 2010–11 के अपने शिखर से, चौदह साल बाद, अब भी छोटा है। और बजट का जो हिस्सा कभी निर्माण पर ख़र्च होता था, वह अब लगभग ग़ायब है। अगले चार दिन, एक दिन एक सवाल : 📊 दिन 2 · CAPEX, पैसा-पैसा। दिल्ली ने वास्तव में क्या बनाया, क्या बनाना बंद किया, और क्या सिर्फ़ "घोषित" किया। रसीदों और ऑडिट के साथ। 🚇 दिन 3 · दिल्ली मेट्रो। मंज़ूरी किसने दी, बनाया किसने, और फ़ेज़ चार को सिर्फ़ एक मंज़ूरी के लिए छह साल इंतज़ार क्यों करना पड़ा। 🚌 दिन 4 · डीटीसी। सर्वकालिक शिखर, उसके बाद की गिरावट, और जो ऑडिट रिपोर्टें अब चुपचाप प्रकाशित नहीं हो रहीं। 🧍 दिन 5 · बसें और लोग। दिल्ली को कितनी बसें चाहिए, कितनी हैं, और क्यों ज़्यादातर दिन आपको एक भी बस नहीं मिलती। हर आँकड़ा सरकारी रुपये में होगा। कुछ वर्षों में अंतराल हैं — हर एक को मैं वहीं ईमानदारी से बताऊँगा। पाँच सवाल, पाँच दिन। आँकड़े बोलेंगे। उसके बाद फ़ैसला आप कीजिए। दिल्ली परिवहन — तीस साल, तीन दौर — मामला अब खुला है। #DelhiTransport #दिल्लीपरिवहन #CAPEX #DelhiMetro #DTC #SheilaDikshit

Ajay Maken

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कल प्रेस वार्ता में मैं विस्तार से बताऊँगा कि अरविंद केजरीवाल देशविरोधी क्यों हैं। #पंजाब_में_दिया_धोखा #दिल्ली_नहीं_देगी_मौका पिछली बार मैंने दो मुख्य बातें कही थीं। पहली, मैंने कहा था कि इसे केजरीवाल नहीं, फर्जीवाल कहना चाहिए। दूसरी, मैंने इसे एंटी नेशनल, यानी देश विरोधी, कहा था। आज प्रताप बाजवा जी और राजा वड़िंग जी ने यह बखूबी स्पष्ट कर दिया है कि इसे फर्जीवाल क्यों कहा जाना चाहिए। यह नाम इसके ऊपर पूरी तरह से फिट बैठता है। जहां तक इसे एंटी नेशनल कहने का सवाल है, इसके पीछे के कारणों को मैं कल सुबह 11:30 बजे डीपीसीसी में एक प्रेस वार्ता में विस्तार से बताऊंगा। मैं आपको यह समझाऊंगा कि क्यों मैं इसे एंटी नेशनल, राष्ट्र विरोधी और देश विरोधी कहता हूं। इस प्रेस वार्ता में मेरे साथ देवेंद्र यादव जी भी मौजूद रहेंगे।

Ajay Maken

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अजय माकन ने राज्यसभा में 'केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) विधेयक, 2026' का कड़ा विरोध करते हुए इसे जवानों के अधिकारों पर हमला बताया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं: जो जवान देश की रक्षा करते हैं, ये सरकार उनके भविष्य और पदोन्नति का गला घोंटना चाहती है। जब सुप्रीम कोर्ट ने बार बार यह कह दिया कि पैरामिलिट्री फोर्स के साथ अन्याय हो रहा है, तो सरकार कानून बनाकर उनका प्रमोशन क्यों रोक रही है? पदोन्नति में देरी और भेदभाव (Career Stagnation) पदोन्नति का संकट: CAPF अधिकारियों को एक पदोन्नति के लिए 15 से 30 साल का लंबा इंतजार करना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर, CISF में सीनियर कमांडेंट बनने में 15 साल लगते हैं, जबकि IPS अधिकारी यही स्तर केवल 7 साल में प्राप्त कर लेते हैं। CRPF एवं BSF में तो और बुरा हाल है। CRPF में पहली प्रमोशन 18 वर्षों में और BSF में पहली प्रमोशन 20 वर्षों में होती है! इस बिल में आने वाले CAPF में vacancy होने के बावजूद, entitlement होने के बावजूद, न तो प्रमोशन मिलता है और न ही NFFU (Non-Functional Financial Upgradation) या अन्य वित्तीय लाभ मिलता है! देश की आंतरिक और बाहरी ताकतों से रक्षा करने वाले इन जवानों के साथ यह कैसा न्याय है? अजय मलिक का उदाहरण: झारखंड में कर्तव्य निभाते हुए अपना पैर गंवाने वाले असिस्टेंट कमांडेंट को 15 साल बाद भी पदोन्नति न मिलना तंत्र की विफलता को दर्शाता है। जवानों की बदहाल स्थिति और आंकड़े (Grim Statistics 2021-25) शहादत: पिछले 5 वर्षों में 529 जवानों ने देश के लिए बलिदान दिया। स्थापना से अभी तक कुल 150 से ज्यादा अधिकारियों ने अपनी शहादत दी है! मानसिक तनाव: पिछले पाँच वर्षों की इसी अवधि में 749 जवानों ने आत्महत्या की और 46,000 जवानों ने समय से पहले सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली। रिक्तियां: लगभग 1 लाख पद खाली पड़े हैं, जिससे मौजूदा जवानों पर काम का बोझ बढ़ रहा है। न्यायिक और संवैधानिक आपत्तियां: अदालती आदेशों की अवहेलना: सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने 2015 से 2026 के बीच कुल 6 बार इन अधिकारियों के पक्ष में फैसला सुनाया है। माकन के अनुसार, यह विधेयक संविधान के Article 14 और 16 का उल्लंघन कर न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करता है। क्लॉज 3 की आलोचना: विधेयक में प्रयुक्त 'Not-withstanding' क्लॉज का उद्देश्य पुराने सभी न्यायोचित फैसलों को शून्य करना है, जिसे उन्होंने "वैधानिक छल" करार दिया। प्रक्रियात्मक खामियां: स्थायी समिति (Standing Committee): उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक को स्टैंडिंग कमेटी के पास नहीं भेजा गया, जहाँ जवानों और अधिकारियों की समस्याओं को सीधे सुना जा सकता था। वित्तीय विसंगतियां: सरकार के इस दावे को उन्होंने गलत बताया कि इस विधेयक से कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा, जबकि क्लॉज 5 में वित्तीय लाभों का स्पष्ट उल्लेख है। OGAS, NFFU के benefits जब मिलेंगे तो कैसे अतिरिक्त वित्त भार नहीं पड़ेगा? निष्कर्ष: अजय माकन ने कहा कि यह मुद्दा केवल 13,000 अधिकारियों का नहीं, बल्कि उनसे जुड़े 10 लाख जवानों का है। 1 प्रमोशन होती है तो chain में 11 और कर्मी नीचे तक लाभान्वित होते हैं। अजय माकन नें सरकार से आग्रह किया कि नौकरशाही के हितों के बजाय सरहद की रक्षा करने वाले जवानों के मनोबल को प्राथमिकता दी जाए और इस विधेयक को तत्काल वापस लिया जाए। 🇮🇳CRPF🇮🇳 CISF ITBP SK Chakraborty MBT UPSC Maj Digvijay Singh Rawat, Kirti Chakra (Retd) PRO, Hyderabad, Ministry of Defence CAPF Soldiers APS - CISF Maneesh Aggarwal GC CRPF PUNE HWWA - Himveer Wives Welfare Association Pooja Rakesh vijayakumar kadam(V.S.KADAM)

Ajay Maken

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आज दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उपराज्यपाल (LG) से मुलाकात कर भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के खिलाफ हो रही पुलिसिया बर्बरता पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। यह बेहद निंदनीय है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हमारे युवा साथियों और उनके अध्यक्ष को अपराधियों की तरह पेश किया जा रहा है। उन पर 'दंगे' के झूठे मुकदमे दर्ज करना लोकतंत्र की आवाज को दबाने की एक साजिश है। हमने स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस का यह तानाशाही रवैया कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरी कांग्रेस पार्टी अपने युवा कार्यकर्ताओं के जज्बे, उनकी सोच और उनके संघर्ष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। हम न्याय की इस लड़ाई को पीछे नहीं हटने देंगे!

Ajay Maken

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"न्याय यात्रा अरविंद केजरीवाल के कुशासन और दिल्ली में बीजेपी और केजरीवाल की मिलीभगत के खिलाफ है। दोनों एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं ताकि दिल्ली के लोगों का ध्यान उनकी नाकामियों से हटा सकें। दिल्ली के विकास के मामले में केजरीवाल पूरी तरह से असफल हो चुके हैं। पिछले दस सालों में पूंजीगत खर्च सबसे नीचे गया है जबकि वायु प्रदूषण सबसे ऊपर पहुंच गया है... अरविंद केजरीवाल ने अपने आवास पर 175 करोड़ रुपये खर्च किए जब दिल्ली ऑक्सीजन के लिए तरस रही थी और ऑक्सीजन बेड्स की कमी थी... दिल्ली के लोग अब अरविंद केजरीवाल को समझ चुके हैं... वो सिर्फ नौटंकी करते हैं, वो बस एक ड्रामा हैं। उन्हें शासन करना नहीं आता। वो बस एक महत्वाकांक्षी व्यक्ति हैं जो अपनी महत्वाकांक्षा में अंधे हो गए हैं, ना तो उन्हें दिल्ली से मोहब्बत है और ना ही देश से।"

Ajay Maken

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कल शिमला में शिमला समझौते के बारे में विस्तार से चर्चा करी- कैसे 1971 युद्ध के दौरान सैनिकों की कुर्बानियों को भाजपा सरकार में व्यर्थ में बर्बाद किया? ज़रूर देखें 👇 शिमला समझौते में तीन मुख्य बातें तय हुईं थीं । पहला, भारत और पाकिस्तान हमेशा द्विपक्षीय बातचीत करेंगे । कश्मीर का मसला भी द्विपक्षीय रहेगा । कोई तीसरा पक्ष मध्यस्थता नहीं करेगा, ये भारत की बड़ी जीत थी । 1971 के युद्ध में शहीद हुए हमारे सैनिकों की शहादत एवं सेना की बहादुरी का यह नतीजा था । दूसरा, 'लाइन ऑफ सीजफायर' को 'लाइन ऑफ कंट्रोल' में बदला गया । यह सिर्फ नाम का फर्क नहीं था । इसका सबसे बड़ा फायदा भारत को हुआ । यूएनओएमआईपी (UNMOGIP) नामक संस्था 1947 में बनी थी । ये दुनिया भर के Military Observer 'लाइन ऑफ सीजफायर' पर निगरानी करते थे । 2 जुलाई 1972 को इंदिरा जी ने एक झटके में इसे खत्म कर दिया । UNMOGIP का मैंडेट समाप्त हो गया । यूनाइटेड नेशंस की मिलिट्री को भारत-पाकिस्तान की सीमा पर आने की कोई जरूरत नहीं रही । तीसरी सबसे बड़ी उपलब्धि यह थी कि 90,000 पाकिस्तानी सैनिकों को बंदी बनाया गया था । भारत ने उन्हें छोड़ दिया । भारत ने अपनी मानवता और ताकत का सबूत पूरी दुनिया को दिया । यह सब इसी शिमला समझौते के तहत हुआ । भारत ने 2 जुलाई 1972 को यह सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की । लेकिन आज, पाकिस्तान कह रहा है कि वह शिमला समझौते को नहीं मानता । ठीक है, पाकिस्तान कह रहा है, समझ मे आता है। लेकिन भारत ने क्यों मान लिया? भारत ने क्यों मान लिया कि ट्रंप मध्यस्थता करेंगे? भारत ने क्यों मान लिया कि अमेरिका मध्यस्थता करेगा? 10 मई को शाम 5:25 बजे सबसे पहले ट्रंप ने घोषणा की कि सीजफायर हो गया । उसके बाद 5:38 बजे पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने घोषणा की । फिर 5:58 बजे भारत के विदेश सचिव ने घोषणा की कि सीजफायर हुआ है । 75 साल के इतिहास में यह पहली बार हुआ है । हमारे सैनिकों की कुर्बानी को एक तरीके से खत्म कर दिया गया । जब भारत पर सीजफायर थोपने की घोषणा अमेरिका कर रहा है । जब भारत पर सीजफायर थोपने की घोषणा पाकिस्तान कर रहा है । तो हम लोगों ने खुद एक तरीके से अपने आप शिमला समझौते को रद्द कर दिया । इससे ज्यादा दुख की बात आज नहीं हो सकती है । यह हम लोग कहना चाहते हैं । आज अगर भारत और पाकिस्तान के बीच अमेरिका को हम मध्यस्थता करने देंगे, तो क्या श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने उस वक्त अमेरिकी सातवें बेड़े को आंखें दिखाकर यह नहीं कहा था कि आपको यहां आने की कोई जरूरत नहीं है? अमेरिका को डरा दिया था । किसी की भी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया था । यहां शिमला में बैठकर 90,000 सैनिकों को बंधक बनाकर कहा कि हम इन्हें छोड़ेंगे । पूरी दुनिया में मानवता एवं शक्ति की एक मिसाल दी । क्या आज उन सैनिकों की शहादत व्यर्थ नहीं गई? जब अमेरिका बैठकर यह कहता है कि हमने व्यापार की धमकी दी, तो हम इंडिया और पाकिस्तान का युद्धविराम कर पाए । ट्रंप ने यह एक बार नहीं, दो बार नहीं, आठ बार बार-बार कहा । उन्होंने कहा कि जब मैंने धमकी दी कि व्यापार बंद कर दूंगा, तो इंडिया और पाकिस्तान ने आपस में युद्धविराम कर लिया । यही नहीं, ट्रंप और उनके प्रशासन ने 23 मई को न्यूयॉर्क के कोर्ट में लिखित हलफनामा दिया है कि जब ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान को धमकी दी कि मैं व्यापार बंद कर दूंगा, तब जाकर सीजफायर हुआ । यह लिखित हलफनामा न्यूयॉर्क में 23 मई को डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने दिया । तो क्या आज भारत की अस्मिता व्यापार से हल्की हो गई है? क्या आज भारत की संप्रभुता भारत के व्यापार से कम आंकी जा रही है? क्या भारत की अस्मिता, भारत की संप्रभुता को खत्म कर दिया गया है- वो भी व्यापार से? और व्यापार में किसको फायदा होगा? कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है । आज सरकार से यह सवाल तो पूछना पड़ेगा । साथियों, यह सब चीजें मैंने इसलिए बोलीं । क्योंकि आज तक हमें यह समझ में नहीं आया है । कि सीजफायर की शर्तें क्या हैं? सीजफायर किया है तो किन शर्तों पर किया गया है? सीजफायर किया है तो उससे वापस भारत को क्या मिल रहा है? जब सीजफायर किया, तो क्या हमारे सैनिकों, क्या हमारे सैन्य बल, क्या हमारे सेनापतियों से पूछा गया है? जब कुर्बानी देनी है तो सेना कुर्बानी दे । शहादत देनी है तो हमारी सेना दे । और जब सीजफायर करना है तो व्यापार की शर्तों पर किसको फायदा पहुंचाने के लिए सीजफायर किया जा रहा है? यह आने वाला इतिहास इस बात को जरूर पूछेगा।

Ajay Maken

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