
Alok Shukla
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Social Activist, Member of Convenor Collective of Chhattisgarh Bachao Andolan सदस्य, हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति
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आदिवासी समाज जिस जंगल - जमीन की कई पीढ़ियों से रक्षा करते आए हैं उसे अब इतनी आसानी से कैसे छोड़ देगा । संविधान कानून जरूर अनुसूचित क्षेत्रों के हितों में है लेकिन उसे लागू करने वाली सत्ता पूंजीपतियों की ग़ुलाम है । आज ये हालात छत्तीसगढ़ के सरगुजा में स्थित अमेरा कोयला खदान के विस्तार परियोजना के लिए जारी जमीन अधिग्रहण के कारण बने हैं जहाँ बिना ग्रामसभा सहमति के ही जमीन छीनी जा रही है। कोयला खदान एसईसीएल की है लेकिन इसका संचालन गुजरात की एक निजी कंपनी करती है।
Alok Shukla34,554 次观看 • 8 个月前

प्रधानमंत्री Narendra Modi जी आपके कार्पोरेट मित्र गौतम अदानी छत्तीसगढ़ में आदिवासियों पर कहर बरपा रहे हैं । संविधान, कानून की धज्जियां उड़ाकर सत्ता के दम पर आदिवासियों से उनके जंगल जमीन को जबरन छीन रहे हैं । हसदेव अरण्य में आदिवासी किसानों की जमीन को पहले जबरन कब्जा करके फेंसिंग कर दी गई और कल रात में धान बोई हुई खेती पर बुलडोजर चला दिया गया। परसा कोल ब्लॉक के प्रभावित गांव जो संविधान की पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र हैं, उन्होंने कभी भी ग्रामसभा में खनन की सहमति नहीं दी । वर्ष 2018 में अदानी कंपनी ने ग्रामसभा के फर्जी और कूट रचित दस्तावेज बनाकर विभिन्न स्वीकृतियां हासिल कर ली । जांच में छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति ने ग्रामसभाओं के प्रस्ताव को फर्जी पाया और नवंबर 2024 को शासन को पत्र लिखकर वन स्वीकृति निरस्त करने की अनुशंसा की लेकिन Vishnu Deo Sai सरकार ने कोई कार्यवाही तो नहीं की उल्टा फोर्स भेजकर जबरन हजारों पेड़ो को कटवा दिया । आंदोलनरत आदिवासी किसानों ने जबरन भूमि अधिग्रहण का विरोध कर मुआवजा तक नहीं लिया लेकिन पुलिस और स्थानीय प्रशासन के दम पर उनकी जमीनों को जबरन कब्जा कर लिया गया। ये उसी छत्तीसगढ़ में हो रहा है जहां आदिवासियों ने भाजपा को सर्वाधिक सीटें विधानसभा और लोकसभा में दी है बदले में उनसे उनके जंगल जमीन को छीन का विस्थापित किया जा रहा है क्या यही न्याय है?
Alok Shukla12,912 次观看 • 1 年前

छत्तीसगढ में पूरा तंत्र अदानी के हाथों बिक चुका है। परसा कोल ब्लॉक जिसकी ग्रामसभाओं की कोई भी सहमति नहीं थी वहां भारी पुलिस के दमन से पेड़ो की कटाई कर दी गई। छत्तीसगढ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग ने जांच कर यह आदेश लिखा है कि परसा कोल ब्लॉक के लिए जो वन स्वीकृति दी गई है वह कूट रचित और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दी गई थी। आयोग ने राज्य सरकार के वन स्वीकृति के अंतिम आदेश को निरस्त करने की अनुशंसा लिखी है। इस रिपोर्ट के जारी होने से पहले पेड़ो को काट दिया गया और अब आयोग का सचिव जो प्रशासनिक व्यक्ति है वह इस रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने के बजाए कार्यालय से ही गायब है । प्रदेश के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai जी आदिवासियों का दमन करके एक पूंजीपति की सेवा में लगे हुए हैं। जो अपने ही समाज के हितों की रक्षा नहीं कर पाए तो प्रदेश की क्या करेंगे। उत्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ की लगभग सभी सीटों को भाजपा की झोली में डालने वाले आदिवासी समाज को भी स्वयं में गहरा चिंतन करना चाहिए । #SaveHasdeo
Alok Shukla12,794 次观看 • 1 年前
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