
Amita Ambedkar
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बसपा कार्यकर्ता, Social Activist 🇪🇺🐘🇪🇺 देश की बात, अमिता अम्बेडकर के साथ, जातिवादी कीड़े आसपास भी न भटके Facebook Link https://t.co/dY6R8ULVsm
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मनुवाद और पुरुषवादी समाज का नंगा नाच केरल की एक क्रूर कुप्रथा की दर्दनाक कहानी जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जिन्होंने समाज के लिए अपना जीवन कुर्बान कर दिया वो भारत में गुमनाम है, और जिन्होंने कुछ नहीं किया जिनका कोई अस्तित्व नहीं उनकी पूजा की जाती है। 19वीं सदी एक दलित महिला को काटना पड़ा अपना स्तन। केरल की नांगेली ने स्तन-कर के बर्बर कानून के खिलाफ आवाज उठाई थी, और अपना जीवन कुर्बान कर दिया था। उसकी उम्र करीब तीस साल की थी। नांगेली खूबसूरत महिला थीं, मगर वह तब सामाजिक व्यवस्था में नीच माने जाने वाले तबके (एड़वा जाति) की थी। उस दौर में महिला दिवस की परंपरा या महिला सशक्तिकरण की आम चलन नहीं थी और नांगेली ने पूरी हिम्मत के साथ आत्मसम्मान की लड़ाई लड़ी थी। यह घटना वर्ष 1803 की केरल के तटवर्ती स्थान चेरथला की है। नांगेली के बलिदान के बाद ब्रेस्ट टैक्स का बर्बर कानून हटा लिया गया। केरल (त्रावणकोर) में सार्वजनिक तौर पर अपने स्तनों को ढककर रखने की इच्छा रखने वाली महिलाओं से मुलक्करम (स्तन-कर) वसूला जाता था। गरीब महिलाओं को अपने स्तन ढंकने के लिए राजा को कर चुकाना पड़ता था और अपने स्तन को ढंकने के अधिकार को पाने के लिए टैक्स देना होता था। जितने बड़े स्तन होते थे, टैक्स की रकम उतनी ज्यादा होती थी। स्थानीय कर अधिकारी (परवथियार) बकाया ब्रेस्ट टैक्स वसूलने के लिए बार-बार नांगेली के घर आ रहा था। नांगेली ने तय कर लिया था कि त्रावणकोर के राजा द्वारा लगाए जाना वाला यह अमानवीय टैक्स वह नहीं देगी। अंतिम बार घर पर आए परवथियार को उसने इंतजार करने को कहा। उसने केले का पत्ता सामने फर्श पर रखकर दीप जलाया और प्रार्थना पूरी करने के बाद धारदार हथियार से अपने दोनों स्तन काट डाले। ज्यादा खून बह जाने के चलते उसकी मौत हो गई। नंगेली के दाह-संस्कार के दौरान उनके पति ने भी अग्नि में कूदकर अपनी जान दे दी। ब्रेस्ट टैक्स का मक़सद जातिवाद के ढांचे को बनाए रखना था। यह एक तरह से एक औरत के निचली जाति से होने की कीमत थी। इस कर को बार-बार अदा कर पाना ग़रीब समुदाय के लिए मुमकिन नहीं था। नांगेली का केरल की स्थानीय भाषा में अर्थ है खूबसूरत। चेरथला में नांगेली ने जिस जगह पर यह बलिदान दिया था, उसे मुलाचिपा राम्बु (मलयालम में इसका अर्थ महिला के स्तन की भूमि) कहते हैं। इतिहास की किताबों में नंगेली के बारे में कम पड़ताल की गई है। चेरथला में नांगेली का घर (झोपड़ी) अभी भी वही पर है, जहां उन्होंने बलिदान दिया था। झोंपड़ी के पास एक तालाब है, जिसके एक किनारे पर दो बड़ी इमारतें बन गई हैं। नांगेली और उनके पति (चिरूकंदन) की कोई संतान नहीं थी। चेरथला में ही षष्ठम कवला के पास नेदुम्ब्रकाड में नांगेली की बहन की परपोती (लीला अम्मा) रहती हैं, जिनकी उम्र 70 साल करीब है। वहां से कुछ किलोमीटर की दूरी पर नंगेली के पड़पोते मणियन वेलू रहते हैं।
Amita Ambedkar1,177,055 Aufrufe • vor 1 Jahr
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इस निर्वस्त्र महिला के पास गाड़ी भी है और गाड़ी में एक कैन भरके पेट्रोल भी है। यह वहीं अघोरी महिला है, जो पिछले कई दिनों से चर्चा में है। यह निर्वस्त्र महिला पब्लिक वाले स्थान पर निर्वस्त्र घूम रही थी तो पुलिस कर्मियों के द्वारा इसे रोका गया। लेकिन यह निर्वस्त्र महिला तो बड़ी अकलमंद निकली इसने अपनी गाड़ी से एक पीपा निकाला जिसमें पेट्रोल था इसने खुद को एवं गाड़ी को पेट्रोल से नहला लिया और फिर क्या था खुद को जला लेने की धमकी लगी देने। किसी तरह से पुलिस कर्मियों ने इस पर काबू पाया।
Amita Ambedkar273,279 Aufrufe • vor 1 Jahr

बहुजन समाज के गुमराह लोगो को सीख लेनी चाहिए इस वीडियो से👇👇
Amita Ambedkar244,602 Aufrufe • vor 1 Jahr

भारत देश में 12 कुप्रथाएं ऐसी थी जिन्हें ब्रिटिश सरकार ने बंद करवाया था। कृपया पूरा वीडियो देखें और वीडियो में कितनी सच्चाई है अवश्य लिखें.... इस वीडियो से भक्तों की भावनाएं आहत नहीं होनी चाहिए और आहत होती है तो अपनी भावनाओं को संभाल कर रखें हमें उससे फर्क नहीं पड़ता।
Amita Ambedkar160,578 Aufrufe • vor 1 Jahr

ज्यादा पैसे कमाने की होड़ में हम सभी को जहर दे रही हैं यह बड़ी-बड़ी कंपनियां... अमूल दूध बहुत ही बड़ा ब्रांड है और इसके दूध का विक्रय भी बहुत ज्यादा मात्रा में होता है। फिलहाल हम तो इस दूध का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं करते हैं यदि आप लोग कर रहे हैं तो इस वीडियो को देख लीजिए फिर उसके बाद तय करिए कि इस दूध को लेना है या फिर इसका बहिष्कार करना है।
Amita Ambedkar99,243 Aufrufe • vor 1 Jahr

बस इसी दिन को भारत में लाना है। वियतनाम में भगवान बुद्ध के धातु अवशेष शोभा यात्रा।
Amita Ambedkar58,838 Aufrufe • vor 1 Jahr

बौद्ध रीति से हो रही समाज में ताबड़तोड़ सादियां। समाज अब तेजी से बदलाव की और चल रहा है।
Amita Ambedkar57,318 Aufrufe • vor 1 Jahr

एससी एसटी एक्ट को गलत बताने वालो आइए आपको सुनाते हैं अपने ही ऑफिस में अपने ऊपर हुए हमले की दास्तान... 9 सितंबर 2019 को हमारे ही चेंबर में घुसकर के दीपक गुप्ता नाम के लड़के ने हमें बहुत ही भद्दी भद्दी गालियां दी और कई बार हेलमेट से हमारे ऊपर वार किया, यह सब उसने अपनी गर्लफ्रेंड के सामने अपनी हीरोपंथी दिखाने के लिए किया था क्योंकि गर्लफ्रेंड को अपना बैच चेंज करना था और इसके अलावा उनकी फीस बकाया थी जो की जमा नहीं हुई थी उसके लिए हमने उनको सिर्फ टोक दिया था। दीपक गुप्ता मेडिकल कॉलेज लखनऊ में एमबीबीएस के फाइनल ईयर का छात्र था, शायद उसे मेरे बारे में सत्य पता नहीं था। आप लोगों को बता दूं कि एक कोचिंग संस्था में मैं मैनेजर के पद पर तैनात थी, हमारे ही चेंबर में घुसकर उसने हमें भद्दी भद्दी गालियां देते हुए कई बार हेलमेट उठाकर वार करने के लिए खड़ा हुआ यहां तक की हमे जान से मारने तक की धमकी दे डाली, और इस सब घटना का वीडियो वहां पर लगे सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गया। ऑफिस के बॉस ने भी काफी नाराजगी जताई, नजदीक में मोती महल पुलिस चौकी थी वहां के चौकी प्रभारी हमारे जानने वाले थे हमने उनसे बात की और तुरंत अपने ऊपर घटित घटना की सूचना दी, वह अपने दो सिपाहियों के साथ वहां पर उपस्थित हुए हमसे लिखित में एक एप्लीकेशन मांगा हमने लिखित में एप्लीकेशन तो दे दिया लेकिन FIR करने के लिए अभी रोक दिया था। पुलिस ने फोन करके उन्हें कोचिंग में बुलाया हमसे माफी भी मंगवाया यहां तक की मेडिकल कॉलेज में उनके साथ मेडिकल की पढ़ाई कर रहे उनकी बैच के सारे साथी आए और मेरे सामने गिड़गिड़ाने लगे उनके ऊपर कोई भी कार्रवाई न हो हाथ जोड़ जोड़कर निवेदन करने लगे मैंने अपनी कंप्लेंट वापस न लेने की बात कह कर सबको वहां से वापस कर दिया और इधर चौकी प्रभारी से FIR करने के लिए जल्दबाजी नहीं मचाई । वह लड़का यकीन मानिए एकदम डरा हुआ था क्योंकि उसका पूरा भविष्य मेरे हाथ में था मैंने चार दिन बीतने के बाद बहुत ही गंभीरता से चौकी प्रभारी को फोन किया और कहा कि इसे चौकी बुलाकर अच्छे से समझा दीजिए ताकि भविष्य में ऐसी गलती यह दोबारा ना करें । मैं एक समाज सेवक हूं मेरी वजह से किसी का भी भविष्य बर्बाद हो मैं ऐसा कतई नहीं चाहूंगी, इसलिए मैं इनके खिलाफ कोई भी मुकदमा नहीं लिखवाऊंगी यदि मैं चाहती तो एससी एसटी एक्ट के तहत इन पर FIR हो जाती और यह कम से कम 3 साल की सजा तो अवश्य काटते और बाकी इनकी डॉक्टरी की डिग्री धरी की धरी रह जाती । इस संदेश को आप तक पहुंचाने का मतलब यह था कि एससी एसटी का सही मायने में उपयोग हो रहा है ना कि दुरुपयोग। इसलिए आगे से एससी एसटी को बुरा भला कहने से पहले 100 बार सोचिए, आपके देश में जितने कम अपराध होंगे आपका देश उतना ही ज्यादा तरक्की करेगा, यदि आप अपराधी नहीं है तो यकीन मानिए आप पर कोई भी एससी एसटी एक्ट नहीं लग सकता यह प्रावधान है।
Amita Ambedkar64,884 Aufrufe • vor 1 Jahr

सत्य दीपावली का जिसे छुपाया गया आपके सामने फर्जी मनगढ़ंत कहानियां बनाई गईं।
Amita Ambedkar30,070 Aufrufe • vor 7 Monaten

कौन कहता है कि खाने में सिर्फ मुसलमान ही थूक मिलाते हैं, हिंदू नहीं थूकते हैं? आज से 6 साल पहले अलीगढ़ के जिला न्यायालय में महिला जिला जज जो एक दलित समाज से थीं, उनका चपरासी उन्हें गिलास में पानी थूक कर देता था चपरासी सवर्ण समाज से था नाम था विकास गुप्ता Yogi Adityanath याद आया
Amita Ambedkar65,501 Aufrufe • vor 1 Jahr

भेदभाव, छुआछूत, जातिभेद आज भी चरम सीमा पर है। पैसे कमाने के लिए क्या इस तरह के वीडियो बनाना जरूरी है? जितनी बार ऐसे वीडियो देखते हैं उतनी बार हमारे हमारे समाज का अपमान होते हुए महसूस करती हूं। इस कदर जातिवाद हावी है हमारे देश में जो कैंसर से भी भयानक रूप ले चुका है।
Amita Ambedkar56,074 Aufrufe • vor 1 Jahr