
Anuraag Muskaan
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Journalist | Previously Consulting Editor ZeeNews , ABP News, India News, India TV, RSTV, Star News, Sahara Samay & Jain TV | Satirist | Posts are Personal |
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बहुत बड़ा ख़ुलासा- यह सिर्फ़ एक केस नहीं है। यह उस सिस्टम की कहानी है जहाँ बार-बार जीतने के बाद भी इंसाफ़ नहीं मिलता। 13,000 से ज़्यादा Group A अधिकारी, जो देश की सीमाओं पर खड़े हैं, आतंकवाद से लड़ते हैं, हमारी सुरक्षा की ढाल हैं, वो पिछले एक दशक से अपने ही अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। 2011 से शुरू हुई यह लड़ाई, Delhi High Court से लेकर Supreme Court of India तक पहुँची और हर बार फैसला उनके पक्ष में आया। लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है, जब सरकार फैसले लागू ही न करे तो जीत का मतलब क्या रह जाता है? रिव्यू पिटीशन खारिज… अवमानना की स्थिति… और अब, एक नया कानून लाकर उसी फैसले को पलटने की कोशिश। क्या यह न्याय है या व्यवस्था की शक्ति का दुरुपयोग? क्या देश की रक्षा करने वाले अधिकारी अपने ही सिस्टम में ‘दूसरे दर्जे’ के हैं? इस वीडियो में हम सिर्फ़ तथ्य नहीं रखेंगे… हम पूछेंगे वो सवाल, जो हर नागरिक को पूछने चाहिए। अगर आप सच जानना चाहते हैं… अगर आपको लगता है कि न्याय सिर्फ़ किताबों में नहीं, ज़मीन पर भी होना चाहिए… तो लिंक पर क्लिक करके पूरा वीडियो देखिए-
Anuraag Muskaan11,271 views • 3 months ago
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