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Ruby Arun रूबी अरुण

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सुरक्षित रखने के लिए किसान मांगीलाल मेघवाल ने 5 लाख रुपए खेत में गाड़ दिए. कुछ समय बाद उसे पैसों की ज़रूरत पड़ी लेकिन तब तक वो जगह भूल गया था कि उसने पैसे कहां छुपाये. तब उसने अपने बेटों को ये बात बताई. उसके परिवार ने 10 बीघे के उस खेत की जगह जगह खुदाई की. लेकिन पैसे नहीं मिले. इस बार जब बारिश हुई तो बुवाई के दौरान खेत से पैसों का पॉलीथिन बाहर निकल आया.थैली खोली गई तो नोटों को दीमक खा गए थे. नोट ऐसे टुकड़ों में बदल गए थे कि बैंक ने भी बदलने से इनकार कर दिया... मामला बालोतरा, पचपदरा के नेवाई गांव का है.

सुरक्षित रखने के लिए किसान मांगीलाल मेघवाल ने 5 लाख रुपए खेत में गाड़ दिए. कुछ समय बाद उसे पैसों की ज़रूरत पड़ी लेकिन तब तक वो जगह भूल गया था कि उसने पैसे कहां छुपाये. तब उसने अपने बेटों को ये बात बताई. उसके परिवार ने 10 बीघे के उस खेत की जगह जगह खुदाई की. लेकिन पैसे नहीं मिले. इस बार जब बारिश हुई तो बुवाई के दौरान खेत से पैसों का पॉलीथिन बाहर निकल आया.थैली खोली गई तो नोटों को दीमक खा गए थे. नोट ऐसे टुकड़ों में बदल गए थे कि बैंक ने भी बदलने से इनकार कर दिया... मामला बालोतरा, पचपदरा के नेवाई गांव का है.

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ई रिक्शा चलने वाला अंकित, बीच चौराहे पर सड़क पर लेट कर जोर जोर से रोने लगा. चारों तरफ ट्रैफिक जाम हो गया. तब स्थानीय पुलिस वहां पहुंची. दरोगा ने उससे ऐसा करने की वजह पूछी तो पता चला कि वह अपनी पत्नी का इलाज कराने अस्पताल जा रहा था, बीच रस्ते में ही उसका 14 हजार रुपए का चलान काट दिया गया... रोजाना दो चार सौ रुपए कमाने वाले अंकित पर जैसे पहाड़ टूट गया. दारोगा के हस्तक्षेप के बाद अंकित की परेशानी दूर हुई... यह वाकया औरैया जिले के दिबियापुर थाना क्षेत्र का है.

ई रिक्शा चलने वाला अंकित, बीच चौराहे पर सड़क पर लेट कर जोर जोर से रोने लगा. चारों तरफ ट्रैफिक जाम हो गया. तब स्थानीय पुलिस वहां पहुंची. दरोगा ने उससे ऐसा करने की वजह पूछी तो पता चला कि वह अपनी पत्नी का इलाज कराने अस्पताल जा रहा था, बीच रस्ते में ही उसका 14 हजार रुपए का चलान काट दिया गया... रोजाना दो चार सौ रुपए कमाने वाले अंकित पर जैसे पहाड़ टूट गया. दारोगा के हस्तक्षेप के बाद अंकित की परेशानी दूर हुई... यह वाकया औरैया जिले के दिबियापुर थाना क्षेत्र का है.

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यह एक बेहद दुर्लभ और डरावना वीडियो है.तिब्बत के इसी जिझांग ग्लेशियल लेक के फटने से नेपाल में भीषण बाढ़ आई... Nyalam काउंटी में स्थित जिझांग ग्लेशियल लेक के मोराइन डैम के अचानक टूटने और भीषण जलप्रलय की यह घटना कैमरे में कैद हो गई. चीन ने भारत और नेपाल से सटे तिब्बत बॉर्डर और ऊंचे पर्वतीय इलाकों में रिमोट सेंसिंग स्टेशन,ऑटोमेटेड ड्रोन आदि तक इक के साथ काफी हाई-टेक निगरानी नेटवर्क बनाया हुआ है. झील के पास लगे सेंसर जो जलस्तर बढ़ते ही कंट्रोल रूम और ड्रोन सिस्टम को अलर्ट भेज देते हैं. चीन का Tibet Autonomous Region Authorities और स्थानीय वैज्ञानिक टीम इन झीलों पर लगातार नजर रखती है. वे समय-समय पर ऑटोमेटेड ड्रोन उड़ाकर या झीलों के पास स्थापित कैमरोंऔर ड्रोन स्टेशन से झील का जलस्तर, दरारें और ग्लेशियर पिघलने की स्थिति रिकॉर्ड करते हैं. चीन की एजेंसियों और वैज्ञानिक शोधकर्ताओं को इस बात की खबर पहले से थी कि यह झील High Risk और खतरनाक स्थिति में है. लेकिन चीन की तरफ से नेपाल को Real-time warning बहुत देरी से मिली जिसकी वजह से निचले इलाकों में भारी तबाही हुई. हालांकि दोनों देशों के बीच आपदा डेटा साझा करने के समझौते हैं,लेकिन नेपाली अधिकारियों का कहना है कि झील टूटने के दौरान तुरंत सटीक जानकारी या वॉटर-लेवल अलर्ट नहीं भेजा गया. हालांकि International Centre for Integrated Mountain Development ने पहले से चेतावनी दी गई थी कि यह झील कभी भी फट सकती है. लेकिन इस तरह की "सामान्य चेतावनी" और बाढ़ आने के 1-2 घंटे पहले मिलने वाले "लाइव अर्ली वार्निंग" में फर्क होता है, जो नेपाल को समय पर नहीं मिल सका. पूर्व सूचना के अभाव में नेपाल के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का मौका नहीं मिला.

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1,247,891 просмотров • 15 дней назад

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Brazil के पम्पुलहा हवाई अड्डे से उड़ान भरने के लगभग 15 मिनट बाद एक हवाई जहाज के भीतर धमाका हुआ और आग लग गई. विमान को एक 29 वर्षीय पायलट उड़ा रहा था. एक मेंटेनेंस यात्रा के लिए पायलट ने अकेले ही उड़ान भरी थी. प्लेन क्रैश होने की स्थिति में था लेकिन पायलट ने घबराने की बजाय विमान में मौजूद आपातकालीन CAPS सिस्टम की डोरी खींच दी. इस सिस्टम ने एक छोटे रॉकेट की मदद से विमान की छत से सीधे पूरा पैराशूट बाहर की तरफ खोल दिया. पैराशूट की वजह से विमान तेज रफ्तार से नीचे गिरने के बजाय धीमी और नियंत्रित गति से ज़मीन की तरफ आने लगा. ज़मीन से टकराने के बाद विमान पूरी तरह जल गया, लेकिन धीमी स्पीड से लैंड होने के कारण केबिन सुरक्षित रहा और पायलट मामूली चोटों के साथ ज़िंदा बच गया. CAPS तकनीक की खासियत ये होती है कि यह सिस्टम सैनिटरी या मिलिट्री इजेक्शन सीट की तरह काम नहीं करता, जहाँ पायलट प्लेन से बाहर कूदता है. बल्कि इसमें एक रॉकेट की मदद से पूरे हवाई जहाज़ का ही बड़ा पैराशूट खुल जाता है. इससे यात्री केबिन के भीतर ही पूरी तरह सुरक्षित रहते हुए विमान के साथ धीरे-धीरे ज़मीन पर आ जाते हैं.

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333,881 просмотров • 16 дней назад

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#Train के पायलट से ये बहस करना कि तुम "Wrong Side" में चल रहे हो–– पूरी दुनिया में यह सिर्फ और सिर्फ हमारे देश में ही मुमकिन है... #Darjeeling Himalayan Railway की #Toy_Train अपनी दशकों पुरानी फिक्स्ड लेन पर जा रही थी. रेलवे ट्रैक से बिल्कुल सटा कर संकरे रास्ते पर अतिक्रमण करके पार्क की गई महिंद्रा एसयूवी की वजह से से ट्रेन फंस गई. बजाय अपनी गलती मान कर कार हटा लेने के, एसयूवी का ड्राइवर लोको पायलट से ही भिड़ गया कि तुम ही रॉन्ग साइड चल रहे हो... फिक्स्ड स्टील ट्रैक पर चलने वाली ट्रेन के ड्राइवर से यह बहस करना कि वह "गलत साइड" पर है 🫪🤔 इसके लिए एक अलग ही स्तर के आत्मविश्वास की ज़रूरत होती है...

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93,932 просмотров • 2 месяцев назад

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कांग्रेस नेता #PawanKheda ने प्रधानमंत्री मोदी के मुख्य मीडिया सलाहकार #Hiren_Joshi पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. असल खबर ये है कि दो दिनों पहले ही हिरेन जोशी को #PMO से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. पीएमओ के आंतरिक ज्ञापन में दो दिनों पहले ही हीरेन जोशी के सारे काम अश्विनी वैष्णव और नीरव नाम के पीएमओ अधिकारी को सौंप दिए गए थे. पवन खेड़ा जिस बेटिंग ऐप के बारे में ज़िक्र कर रहे हैं, उस ऐप का मालिक रवि तिहारवाला है जो दुबई में रहता है. एक कथित आरोप यह भी है कि इन्होंने सतनाम सिंह संधू से राज्यसभा सीट के लिए 30 करोड़ रुपये लिए हैं. इनके बेटे ने रिलायंस इंडस्ट्रीज से सालाना 3 करोड़ रुपये कमाए हैं. एक महिला हैं हिमानी सूद. जो चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की प्रो वाइस चांसलर भी हैं और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की भी करीबी हैं. फिर ये हिरेन जोशी की खास बनीं. हिरेन ने इनके लिए एक #India_Minorities_Fedration बनाया. इस फेडरेशन में सभी इस्लामिक देशों के राजदूतों को जोड़ा गया. कुछ पावरफुल क्रिश्चियन सिख, बौद्धिस्ट,पारसी,मुस्लिम धर्म गुरुओं को इसका सदस्य बनाया गया. हिमानी सूद ने उनका प्रतिनिधित्व किया और 5 फरवरी 2024 को इन सभी को मोदी जी से मिलवाने ले गईं. इसके बाद हिमानी सूद को वेटिकन सिटी के पोप Lui XIV से भी मिलवाया गया. जहां हिमानी मोदी जी की तस्वीर के कर गई थीं ताकि तस्वीर के जरिए पोप मोदी जी को 2024 के लोकसभा चुनावों में जीत का आशीर्वाद दे सकें. प्रधानमंत्री की कई विदेश यात्राओं में हिमानी सूद को ले जाया गया. बहुत बड़े बड़े लोगों से मिलवाया गया. 25 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री की 75 वीं सालगिरह पर हिमानी सूद ने मोदी जी की लीडरशिप के नाम "मैं हूं भारत" नाम से एक अभियान की घोषणा भी की है. एक इफ्तार पार्टी का आयोजन हुआ जिसमें भारत में स्थित सभी इस्लामिक देशों के राजदूतों ने शिरकत की और उसे होस्ट भारत के विदेश मंत्रालय और हिमानी सूद ने किया. हिमानी सूद को हिमाचल प्रदेश से ना सिर्फ टिकट दिलाने बल्कि मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने के लिए जोशी जी, JP Nadda से मिलने के गए और बात यहीं से बिगड़ गई. JP Nadda ने जोशी की कारस्तानी अमित शाह को बता दी. शाह जी ने मोदी जी से बात की और फिर जोशी जी प्रधानमंत्री कार्यालय से बाहर हो गए. हिरेन जोशी वही हैं जो पिछले 11 सालों से देश की मीडिया के तानाशाह रहे हैं. न्यूज चैनलों का बड़े से बड़ा संपादक, मालिक और न्यूज ऐंकर इनके सामने नतमस्तक रहे हैं. हर चैनल पर इनके ही निर्देश के मुताबिक शब्दशः गोदी खबरें चलती रही हैं. प्रधानमंत्री मोदी की आँख और कान माने जाने वाले जोशी 2008 से मोदी के साथ काम करते रहे हैं .

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118,909 просмотров • 9 месяцев назад

एनसीआर अब अपराधियों और मवालियों की जागीर बन चुका है और गुरुग्राम केवल कागजों पर ही 'मिलेनियम सिटी' है.. गुरूग्राम से राजीव चौक की तरफ आ रहे एक कार सवार ने ज़िग-ज़ैग तरीके से आ रही एक महिंद्रा स्कॉर्पियो को साइड नहीं दिया,तो स्कॉर्पियो सवार ने पीड़ित की कार MG Windsor EV पर लाठी से हमला कर पीछे और साइड का कांच तोड़ डाला. कांच के टुकड़ों से पीड़ित व्यक्ति का चेहरा घायल हो गया. स्कॉर्पियो के गुंडे की बेशर्म मुस्कान और हेकड़ी देखिए! जो साफ दर्शाता है कि इसे Gurugram Police और अपनी राजनीतिक पहुंच पर कितना 'अंधा भरोसा' है. जब एक आम, टैक्स भरने वाला नागरिक अपनी जान बचाने के लिए गुहार लगा रहा होता है, तब ये रसूखदार और बिना नंबर प्लेट या फर्जी नंबर प्लेट वाली गाड़ियों में घूमने वाले हुड़दंगी सड़कों पर मौत का तांडव रचते हैं. Nayab Saini , क्या यही आपका सुशासन है जहां हरियाणा की सड़कों पर आम आदमी खुद को 'सेकंड क्लास सिटीजन' महसूस करने पर मजबूर है? क्या वोट बैंक और राजनीतिक रसूख के आगे गुरुग्राम पुलिस इतनी पंगु हो चुकी है कि सरेआम खून बहाने वाले खुलेआम घूम रहे हैं? खिड़कियों पर काली फिल्में, गायब या बदलती नंबर प्लेटें और हाथों में लठ—DGP Haryana Police क्या यही आपके कानून व्यवस्था की परिभाषा है?
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एनसीआर अब अपराधियों और मवालियों की जागीर बन चुका है और गुरुग्राम केवल कागजों पर ही 'मिलेनियम सिटी' है.. गुरूग्राम से राजीव चौक की तरफ आ रहे एक कार सवार ने ज़िग-ज़ैग तरीके से आ रही एक महिंद्रा स्कॉर्पियो को साइड नहीं दिया,तो स्कॉर्पियो सवार ने पीड़ित की कार MG Windsor EV पर लाठी से हमला कर पीछे और साइड का कांच तोड़ डाला. कांच के टुकड़ों से पीड़ित व्यक्ति का चेहरा घायल हो गया. स्कॉर्पियो के गुंडे की बेशर्म मुस्कान और हेकड़ी देखिए! जो साफ दर्शाता है कि इसे Gurugram Police और अपनी राजनीतिक पहुंच पर कितना 'अंधा भरोसा' है. जब एक आम, टैक्स भरने वाला नागरिक अपनी जान बचाने के लिए गुहार लगा रहा होता है, तब ये रसूखदार और बिना नंबर प्लेट या फर्जी नंबर प्लेट वाली गाड़ियों में घूमने वाले हुड़दंगी सड़कों पर मौत का तांडव रचते हैं. Nayab Saini , क्या यही आपका सुशासन है जहां हरियाणा की सड़कों पर आम आदमी खुद को 'सेकंड क्लास सिटीजन' महसूस करने पर मजबूर है? क्या वोट बैंक और राजनीतिक रसूख के आगे गुरुग्राम पुलिस इतनी पंगु हो चुकी है कि सरेआम खून बहाने वाले खुलेआम घूम रहे हैं? खिड़कियों पर काली फिल्में, गायब या बदलती नंबर प्लेटें और हाथों में लठ—DGP Haryana Police क्या यही आपके कानून व्यवस्था की परिभाषा है?

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27,045 просмотров • 2 месяцев назад

arunruby08's profile picture

मतलब ये कि मोहन भागवत की कोशिश बेकार हो गई. GenZ किसी भी झांसे में कतई नहीं आने वाली–यह बात तय हो गई.. Gen Z और मोहन भागवत के संवाद के बाद लोकमत के पत्रकार ने युवाओं से केवल एक सवाल पूछा: ** आपको कैसा लगा? पहली छात्रा–I feel like it's just a cover-up for the RSS. I feel like it's just a hidden... a hidden something for the flaws because everything that they've made is just blank promises. सिर्फ खाली-खाली रखे वादे हैं, कुछ नहीं करेंगे ये लोग... is what I think... दूसरी छात्रा– I disagreed with most of the takes that Mohan Bhagwat ji made. और वो जो Takes भी दे दिया हमको, वो Mostly they weren't substantial. Like कुछ उसके पीछे factual evidence नहीं है, कुछ substantial action भी नहीं है.. देश की अधिकांश जेन ज़ी अब केवल किसी का पद या छवि देखकर उसके विचारों को स्वीकार नहीं करती. यह जेनरेशन सवाल पूछती है, तर्क करती है और अपनी राय खुद बनाती है.

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11,807 просмотров • 1 месяц назад

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चूंकि "मामा" संघ के बड़े पदाधिकारी हैं इसलिए "भांजे" की एलोपैथिक दवाओं का कारोबार करने वाली स्काईमैप फार्मा कंपनी को बिना किसी पूर्व आयुर्वेदिक अनुभव के देश की एकमात्र प्रॉफिटेबल सरकारी आयुष मिनी-रत्न 145 करोड़ रुपए नेटवर्थ वाली #IMPCL कंपनी, महज 121 करोड़ रुपए में स्काईमैप फार्मा के मालिक संजय गुप्ता को सौंप दी गई. IMPCL कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जयपाल सिंह रावत के मुताबिक औपचारिक तौर पर कम्पनी की परिसंपत्तियां करीब 200 करोड़ होने का अनुमान है जिसकी वास्तविक कीमत कई गुना ज्यादा है. IMPCL कम्पनी द्वारा भरा जा चुका करीब 40 करोड़ का जीएसटी रिटर्न, 50 करोड़ की एफडी और 40 एकड़ जमीन–सब कुछ इस मनमानी सौदेबाज़ी के तहत स्काईमैप फार्मा के हिस्से में चला गया है. जबकि स्काईमैप फार्मा को आयुर्वेदिक और यूनानी दवाएं बनाने का कोई तजुर्बा ही नहीं है. #Disinvestment की प्रक्रिया में सरकार आमतौर पर #Enterprise_Value के आधार पर बोलियां मंगाती है. यदि कंपनी की कुल लिक्विड एसेट,एफडी और कैश ही ₹90 करोड़ के आसपास थी,तो महज ₹121 करोड़ में पूरी कंपनी बेच देना नीतिगत स्तर पर एक बड़ा 'अंडर-वैल्यूएशन' का मामला बनता है. IMPCL में इस वक्त तकरीबन 62 स्थायी कर्मचारी और साढे तीन सौ ठेके के तहत नियोजित मज़दूर कार्यरत हैं. इस कंपनी को के पास 1200 से भी अधिक दवाएं बनाने का लाइसेंस है. यह कम्पनी फारेस्ट की लीज पर करीब 35 एकड़ जमीन पर बनी हुई है. अल्मोड़ा जिले के मोहान और आसपास के सैकड़ों लोगों की आजीविका इस कंपनी को जड़ी बूटी उपलब्ध करने के माध्यम से जुड़ी हुई है. कर्मचारी संघ का यह भी आरोप है कि चूंकि कंपनी की जमीन 'फॉरेस्ट लैंड' है इसलिए इसके ट्रांसफर के लिए केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय #MoEFCC या स्थानीय वन विभाग की मंजूरी अनिवार्य है. जिसकी इस डील में पूरी तरह से अनदेखी की गई है. इस डील में जो समझौते दर्ज हुए हैं उनमें मुख्य रूप से यह लिखा गया है कि स्काईमैप फार्मा अगले एक साल तक कोई चारणी नहीं करेगी और अगले 3 साल तक कारोबार का स्वरूप नहीं बदल सकती. कर्मचारी संघ को संशय है कि एक साल के बाद कर्मचारियों की छंटनी करके 3 साल बाद कंपनी आयुर्वेद की जगह एलोपैथिक दवाएं भी बना सकती है या कंपनी को बंद करके यहां होटल/रिजॉर्ट्स भी खोल सकती है. इसीलिए इस शेयर पर्चेजिंग एग्रीमेंट का विरोध करने के लिए आज IMPCL कर्मचारियों का एक डेलिगेशन आयुष मंत्रालय दिल्ली पहुंचा है.

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