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Ruby Arun रूबी अरुण

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Geopolitical War Monitoring Journalist Euro_News, BBC WorldWide.Voice Of America.Channel7. Zee News. NewsNation Hindustan.Indian constitutionalist 🇮🇳 ॐ

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#Train के पायलट से ये बहस करना कि तुम "Wrong Side" में चल रहे हो–– पूरी दुनिया में यह सिर्फ और सिर्फ हमारे देश में ही मुमकिन है... #Darjeeling Himalayan Railway की #Toy_Train अपनी दशकों पुरानी फिक्स्ड लेन पर जा रही थी. रेलवे ट्रैक से बिल्कुल सटा कर संकरे रास्ते पर अतिक्रमण करके पार्क की गई महिंद्रा एसयूवी की वजह से से ट्रेन फंस गई. बजाय अपनी गलती मान कर कार हटा लेने के, एसयूवी का ड्राइवर लोको पायलट से ही भिड़ गया कि तुम ही रॉन्ग साइड चल रहे हो... फिक्स्ड स्टील ट्रैक पर चलने वाली ट्रेन के ड्राइवर से यह बहस करना कि वह "गलत साइड" पर है 🫪🤔 इसके लिए एक अलग ही स्तर के आत्मविश्वास की ज़रूरत होती है...

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एनसीआर अब अपराधियों और मवालियों की जागीर बन चुका है और गुरुग्राम केवल कागजों पर ही 'मिलेनियम सिटी' है.. गुरूग्राम से राजीव चौक की तरफ आ रहे एक कार सवार ने ज़िग-ज़ैग तरीके से आ रही एक महिंद्रा स्कॉर्पियो को साइड नहीं दिया,तो स्कॉर्पियो सवार ने पीड़ित की कार MG Windsor EV पर लाठी से हमला कर पीछे और साइड का कांच तोड़ डाला. कांच के टुकड़ों से पीड़ित व्यक्ति का चेहरा घायल हो गया. स्कॉर्पियो के गुंडे की बेशर्म मुस्कान और हेकड़ी देखिए! जो साफ दर्शाता है कि इसे Gurugram Police और अपनी राजनीतिक पहुंच पर कितना 'अंधा भरोसा' है. जब एक आम, टैक्स भरने वाला नागरिक अपनी जान बचाने के लिए गुहार लगा रहा होता है, तब ये रसूखदार और बिना नंबर प्लेट या फर्जी नंबर प्लेट वाली गाड़ियों में घूमने वाले हुड़दंगी सड़कों पर मौत का तांडव रचते हैं. Nayab Saini , क्या यही आपका सुशासन है जहां हरियाणा की सड़कों पर आम आदमी खुद को 'सेकंड क्लास सिटीजन' महसूस करने पर मजबूर है? क्या वोट बैंक और राजनीतिक रसूख के आगे गुरुग्राम पुलिस इतनी पंगु हो चुकी है कि सरेआम खून बहाने वाले खुलेआम घूम रहे हैं? खिड़कियों पर काली फिल्में, गायब या बदलती नंबर प्लेटें और हाथों में लठ—DGP Haryana Police क्या यही आपके कानून व्यवस्था की परिभाषा है?
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एनसीआर अब अपराधियों और मवालियों की जागीर बन चुका है और गुरुग्राम केवल कागजों पर ही 'मिलेनियम सिटी' है.. गुरूग्राम से राजीव चौक की तरफ आ रहे एक कार सवार ने ज़िग-ज़ैग तरीके से आ रही एक महिंद्रा स्कॉर्पियो को साइड नहीं दिया,तो स्कॉर्पियो सवार ने पीड़ित की कार MG Windsor EV पर लाठी से हमला कर पीछे और साइड का कांच तोड़ डाला. कांच के टुकड़ों से पीड़ित व्यक्ति का चेहरा घायल हो गया. स्कॉर्पियो के गुंडे की बेशर्म मुस्कान और हेकड़ी देखिए! जो साफ दर्शाता है कि इसे Gurugram Police और अपनी राजनीतिक पहुंच पर कितना 'अंधा भरोसा' है. जब एक आम, टैक्स भरने वाला नागरिक अपनी जान बचाने के लिए गुहार लगा रहा होता है, तब ये रसूखदार और बिना नंबर प्लेट या फर्जी नंबर प्लेट वाली गाड़ियों में घूमने वाले हुड़दंगी सड़कों पर मौत का तांडव रचते हैं. Nayab Saini , क्या यही आपका सुशासन है जहां हरियाणा की सड़कों पर आम आदमी खुद को 'सेकंड क्लास सिटीजन' महसूस करने पर मजबूर है? क्या वोट बैंक और राजनीतिक रसूख के आगे गुरुग्राम पुलिस इतनी पंगु हो चुकी है कि सरेआम खून बहाने वाले खुलेआम घूम रहे हैं? खिड़कियों पर काली फिल्में, गायब या बदलती नंबर प्लेटें और हाथों में लठ—DGP Haryana Police क्या यही आपके कानून व्यवस्था की परिभाषा है?

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कांग्रेस नेता #PawanKheda ने प्रधानमंत्री मोदी के मुख्य मीडिया सलाहकार #Hiren_Joshi पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. असल खबर ये है कि दो दिनों पहले ही हिरेन जोशी को #PMO से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. पीएमओ के आंतरिक ज्ञापन में दो दिनों पहले ही हीरेन जोशी के सारे काम अश्विनी वैष्णव और नीरव नाम के पीएमओ अधिकारी को सौंप दिए गए थे. पवन खेड़ा जिस बेटिंग ऐप के बारे में ज़िक्र कर रहे हैं, उस ऐप का मालिक रवि तिहारवाला है जो दुबई में रहता है. एक कथित आरोप यह भी है कि इन्होंने सतनाम सिंह संधू से राज्यसभा सीट के लिए 30 करोड़ रुपये लिए हैं. इनके बेटे ने रिलायंस इंडस्ट्रीज से सालाना 3 करोड़ रुपये कमाए हैं. एक महिला हैं हिमानी सूद. जो चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की प्रो वाइस चांसलर भी हैं और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की भी करीबी हैं. फिर ये हिरेन जोशी की खास बनीं. हिरेन ने इनके लिए एक #India_Minorities_Fedration बनाया. इस फेडरेशन में सभी इस्लामिक देशों के राजदूतों को जोड़ा गया. कुछ पावरफुल क्रिश्चियन सिख, बौद्धिस्ट,पारसी,मुस्लिम धर्म गुरुओं को इसका सदस्य बनाया गया. हिमानी सूद ने उनका प्रतिनिधित्व किया और 5 फरवरी 2024 को इन सभी को मोदी जी से मिलवाने ले गईं. इसके बाद हिमानी सूद को वेटिकन सिटी के पोप Lui XIV से भी मिलवाया गया. जहां हिमानी मोदी जी की तस्वीर के कर गई थीं ताकि तस्वीर के जरिए पोप मोदी जी को 2024 के लोकसभा चुनावों में जीत का आशीर्वाद दे सकें. प्रधानमंत्री की कई विदेश यात्राओं में हिमानी सूद को ले जाया गया. बहुत बड़े बड़े लोगों से मिलवाया गया. 25 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री की 75 वीं सालगिरह पर हिमानी सूद ने मोदी जी की लीडरशिप के नाम "मैं हूं भारत" नाम से एक अभियान की घोषणा भी की है. एक इफ्तार पार्टी का आयोजन हुआ जिसमें भारत में स्थित सभी इस्लामिक देशों के राजदूतों ने शिरकत की और उसे होस्ट भारत के विदेश मंत्रालय और हिमानी सूद ने किया. हिमानी सूद को हिमाचल प्रदेश से ना सिर्फ टिकट दिलाने बल्कि मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने के लिए जोशी जी, JP Nadda से मिलने के गए और बात यहीं से बिगड़ गई. JP Nadda ने जोशी की कारस्तानी अमित शाह को बता दी. शाह जी ने मोदी जी से बात की और फिर जोशी जी प्रधानमंत्री कार्यालय से बाहर हो गए. हिरेन जोशी वही हैं जो पिछले 11 सालों से देश की मीडिया के तानाशाह रहे हैं. न्यूज चैनलों का बड़े से बड़ा संपादक, मालिक और न्यूज ऐंकर इनके सामने नतमस्तक रहे हैं. हर चैनल पर इनके ही निर्देश के मुताबिक शब्दशः गोदी खबरें चलती रही हैं. प्रधानमंत्री मोदी की आँख और कान माने जाने वाले जोशी 2008 से मोदी के साथ काम करते रहे हैं .

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चूंकि "मामा" संघ के बड़े पदाधिकारी हैं इसलिए "भांजे" की एलोपैथिक दवाओं का कारोबार करने वाली स्काईमैप फार्मा कंपनी को बिना किसी पूर्व आयुर्वेदिक अनुभव के देश की एकमात्र प्रॉफिटेबल सरकारी आयुष मिनी-रत्न 145 करोड़ रुपए नेटवर्थ वाली #IMPCL कंपनी, महज 121 करोड़ रुपए में स्काईमैप फार्मा के मालिक संजय गुप्ता को सौंप दी गई. IMPCL कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जयपाल सिंह रावत के मुताबिक औपचारिक तौर पर कम्पनी की परिसंपत्तियां करीब 200 करोड़ होने का अनुमान है जिसकी वास्तविक कीमत कई गुना ज्यादा है. IMPCL कम्पनी द्वारा भरा जा चुका करीब 40 करोड़ का जीएसटी रिटर्न, 50 करोड़ की एफडी और 40 एकड़ जमीन–सब कुछ इस मनमानी सौदेबाज़ी के तहत स्काईमैप फार्मा के हिस्से में चला गया है. जबकि स्काईमैप फार्मा को आयुर्वेदिक और यूनानी दवाएं बनाने का कोई तजुर्बा ही नहीं है. #Disinvestment की प्रक्रिया में सरकार आमतौर पर #Enterprise_Value के आधार पर बोलियां मंगाती है. यदि कंपनी की कुल लिक्विड एसेट,एफडी और कैश ही ₹90 करोड़ के आसपास थी,तो महज ₹121 करोड़ में पूरी कंपनी बेच देना नीतिगत स्तर पर एक बड़ा 'अंडर-वैल्यूएशन' का मामला बनता है. IMPCL में इस वक्त तकरीबन 62 स्थायी कर्मचारी और साढे तीन सौ ठेके के तहत नियोजित मज़दूर कार्यरत हैं. इस कंपनी को के पास 1200 से भी अधिक दवाएं बनाने का लाइसेंस है. यह कम्पनी फारेस्ट की लीज पर करीब 35 एकड़ जमीन पर बनी हुई है. अल्मोड़ा जिले के मोहान और आसपास के सैकड़ों लोगों की आजीविका इस कंपनी को जड़ी बूटी उपलब्ध करने के माध्यम से जुड़ी हुई है. कर्मचारी संघ का यह भी आरोप है कि चूंकि कंपनी की जमीन 'फॉरेस्ट लैंड' है इसलिए इसके ट्रांसफर के लिए केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय #MoEFCC या स्थानीय वन विभाग की मंजूरी अनिवार्य है. जिसकी इस डील में पूरी तरह से अनदेखी की गई है. इस डील में जो समझौते दर्ज हुए हैं उनमें मुख्य रूप से यह लिखा गया है कि स्काईमैप फार्मा अगले एक साल तक कोई चारणी नहीं करेगी और अगले 3 साल तक कारोबार का स्वरूप नहीं बदल सकती. कर्मचारी संघ को संशय है कि एक साल के बाद कर्मचारियों की छंटनी करके 3 साल बाद कंपनी आयुर्वेद की जगह एलोपैथिक दवाएं भी बना सकती है या कंपनी को बंद करके यहां होटल/रिजॉर्ट्स भी खोल सकती है. इसीलिए इस शेयर पर्चेजिंग एग्रीमेंट का विरोध करने के लिए आज IMPCL कर्मचारियों का एक डेलिगेशन आयुष मंत्रालय दिल्ली पहुंचा है.

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