
Arvind Mohan Singh
@ArvindSinghUp • 22,962 subscribers
Columnist | Socio-Political Analyst Public Policy & Elections | Entrepreneur | Swayamsevak मौन तपस्वी साधक बन कर हिमगिरि सा चुपचाप गलें Backup @iarvindmohan
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पवन खेड़ा पर नज़र रखिए और उनके बॉडी लैंग्वेज को देखिए, इससे पहले कि वे चुपचाप वहाँ से खिसक लें। कांग्रेस नेता जयराम रमेश को सोनिया गांधी और राहुल गांधी द्वारा वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण के गायन पर आपत्ति जताने से पैदा हुए विवाद पर पार्टी का बचाव करने के लिए उतारा गया था। लेकिन वे यह स्वीकार कर बैठे कि पूरा संस्करण इसलिए गाया गया, क्योंकि संसद ने इसकी अनुमति दी थी। हालाँकि, दिलचस्प बात यह थी कि उन्होंने सोनिया गांधी की लगातार आपत्ति को बचाने की कोशिश करते हुए कहा कि वह तो सिर्फ मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी माँग रही थीं। और जब जयराम रमेश प्रेस से बात कर रहे थे, तभी उनके बगल में खड़े पवन खेड़ा चुपचाप वहाँ से खिसक गए, क्योंकि सवाल वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण के गायन को लेकर था।
Arvind Mohan Singh165,360 Aufrufe • vor 1 Monat

अभिजीत दीपिके का कोलर माइक ऑन रह गया… वाइड वायरल है…
Arvind Mohan Singh295,295 Aufrufe • vor 2 Monaten

वीडियो काशी का है… सावन के पहले दिन यानि गुरुवार का। फूल-प्रसाद की एक छोटी-सी दुकान, और एक पिता का विश्वास कि जो आने वाले हैं, वे उसके नन्हे बच्चे को आशीर्वाद दिए बिना नहीं जाएंगे। ऐसा भरोसा पद से नहीं कमाया जाता… व्यक्तित्व से कमाया जाता है। यही योगी जी की सबसे बड़ी पूंजी है।
Arvind Mohan Singh138,004 Aufrufe • vor 1 Monat

कल डायरेक्टर Dr. Vishal Chaturvedi #विष विशाल चतुर्वेदी की फिल्म श्री #हनुमान_अंश देखी। विशाल जी को निजी तौर पर जानता हूँ, इसलिए एक क्रिटिक की तरह देखी। जानते हैं क्यों?? जब आप किसी को जानते हैं, तो उसकी कैपेबिलिटी, उसके क्राफ्ट, उसके आर्ट के बारे में आपकी समझ इतनी विकसित नहीं होती। क्योंकि जो लोग विशाल जी को जानते हैं, वो जानते हैं कि विशाल जी एक नितांत सरल, सहज, साधु किस्म के व्यक्ति हैं। जिस ज़माने में Clubhouse और Spaces बहुत टॉक्सिक हो गए थे, तब फ़िल्म श्री हनुमान अंश के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी दुनिया से अलग रोज़ सुबह 7 बजे बहुत सारे लोगों को इकट्ठा करके गिटार बजाकर श्री हनुमान चालीसा की अलख जगाते थे। एक हनुमान चालीसा को विभिन्न धुनों में, विभिन्न तरीकों से, विभिन्न लोगों से सुनकर हम लोग अभिभूत हो जाते थे। लेकिन इस सहजता में विशाल जी के क्राफ्ट के बारे में, उनके आर्ट के बारे में नहीं पता था… उनकी भक्ति पता थी उनका सामर्थ्य नहीं… लेकिन आज पता है… श्री हनुमान अंश एक बहुत ही परिपक्व फिल्म है। कोई एज, कोई कोना ढीला नहीं है। फिल्म का म्यूज़िक अद्भुत है और उसकी टाइमिंग इतनी अद्भुत कि जैसे ही आप फिल्म में किसी बहुत महत्वपूर्ण घटना होते देखते हैं, उसके पीछे से जो म्यूज़िक आता है, वो रोम-रोम आह्लादित कर देता है। इसके अलावा फिल्म का डायरेक्शन, पात्रों का चयन, बाबा नीम करौली की कृपा से उनकी कहानी का नैरेशन, कैमरे की क्वालिटी… ये लग ही नहीं रहा था कि मात्र दो करोड़ रुपये की लागत से बनी फिल्म है। इतना परफेक्ट कैमरा, लोकेशन का चयन, रिसर्च, सब कुछ इस फिल्म को अप्रतिम बनाता है। इसीलिए मैं किसी से ये नहीं कह रहा हूँ कि फ़िल्म इसलिए देखिए-उसलिये देखिए… श्री हनुमान अंश इसलिए देखिए क्योंकि एक अच्छी फिल्म क्या होती है, उसको देखने का एक स्टैण्डर्ड डेवलप हो, सिनेमैटोग्राफी क्या होती है उसकी समझ डेवलप हो… अगर अच्छी फिल्में नहीं देखेंगे, तो गुणवत्ता के मायने बदल जाएंगे। बाबा नीम करौली का पात्र निभा रहे बंधु, इतनी सौम्यता, इतनी सरलता, इतना माधुर्य, इतना प्रेम… बाबा के पात्र को आपने जिया है और ये भी बाबा की कृपा से ही संभव है। लखनऊ वालों पर बाबा का विशेष प्रताप रहा। अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण वर्ष वो यहाँ रहे, श्री हनुमान सेतु मंदिर का निर्माण कराया। हम लोगों से बाबा की बॉन्डिंग अलग ही है… हमारी तरफ़ से साधुवाद… फिल्म में कृष्णदास जी का भजन ॐ नमः शिवाय, एक विदेशी जो भारत आकर बसा और भारत को, हनुमान जी को, भगवान शिव को समर्पित हो गया। फिल्म में फेमस साउंडट्रैक मेरे संकट के खेवैया हनुमान के गीतकार का चयन, और इस फिल्म का सर्वश्रेष्ठ गाना… Dr. Vishal Chaturvedi #विष जी, आपका गाया “हृदय में जिनके सीता राम, सीताराम जय सीताराम” बिल्कुल आपके अनरिलीज़ हनुमान चालीसा जैसा है, नितांत पवित्र, जिसको आपने बहुत साल पहले मुझे शेयर किया था। हमारे घर की दिनचर्या उसी से आरम्भ होती है और हमारे घर के सभी फोन्स की कॉलर ट्यून हृदय में जिनके सीता राम हो गयी है। क्या लिखूँ और क्या-क्या लिखूँ इस फिल्म के बारे में? मैं कोई इकोसिस्टम से गुहार नहीं करने जा रहा कि जाइए, इस फिल्म को सपोर्ट कीजिए। मैं सीधे कह रहा हूँ, अपने आप को एक ट्रीट दीजिए, ये फिल्म देखिए। आनंद से सराबोर हो जाएंगे, दिव्य शब्द के मायने समझ पायेंगे… विशाल जी अपनी टीम से कहिएगा, हमारी शुभकामनाएँ आप सभी को, आप सभी को श्री राम का आशीष मिले, हनुमान जी आपके हृदय में वास करें, बाबा आपके चित्त-मन को और दिव्य बनाएं, और सुंदर बनाएं कि आप एक दूसरे और तीसरे पार्ट रूपी सुंदर रचना, ऐसी सुंदर फ़िल्म पुनः रच सकें। माँ भवानी आपको सामर्थ्य दें, शक्ति दें, विजय दें, प्रेम दें। बहुत-बहुत धन्यवाद बंधु। बहुत-बहुत धन्यवाद बंधु… इतने सारे झंझावात, संताप, कष्ट, राजनीति के बीच में कुछ ऐसा देने के लिए, जो मन को शांत करता है, हृदय के सारे संताप हर लेता है, तृप्त कर देता है, संतुष्ट कर देता है। जय-जय श्री सीता राम।
Arvind Mohan Singh50,357 Aufrufe • vor 19 Tagen

. BrijBhushan Sharan Singh जी ने स्पष्टीकरण जारी कर अखिलेश यादव के दावों की पोल खोल दी… उन्होंने स्पष्ट किया है हनुमान गढ़ी में नमाज़ पढ़ी गई थी। उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री जी व् साधु संतों की सोच और उनकी सोच में कोई अंतर नहीं है। ख्याली पुलाव बना रहे सपाइयों को लकवा मार गया है।
Arvind Mohan Singh98,768 Aufrufe • vor 2 Monaten

अब आप इसे राजनीति कहिए, मास्टरस्ट्रोक कहिए या फिर लोगों से कनेक्ट करने की कला… लेकिन सच यही है कि इसी तरह का एटिट्यूड BJP नेताओं को भीड़ से अलग दिखाता है। इछावर (सीहोर, मध्य प्रदेश) में कांग्रेस के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। उन्हें लगा कि मंत्री का काफिला आएगा, सुरक्षा घेरे में निकलेगा और उनकी आवाज़ हमेशा की तरह हवा में खो जाएगी। सुरक्षा कारणों से काफिले की स्पीड बढ़ी, लोग किनारे हुए और प्रदर्शनकारियों को लगा कि अब उनकी बात सुने बिना ही सब आगे निकल जाएगा। लेकिन यहीं कहानी ने यू-टर्न लिया। शिवराज सिंह चौहान ने न सिर्फ अपना काफिला रुकवाया, बल्कि खुद गाड़ी से उतरकर सीधे प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंच गए और कहा… “मैं भाजपा का मंत्री नहीं, सबका मंत्री हूँ। मैं सबकी बात सुनूंगा।” अगर कांग्रेस में 1% भी यही एटिट्यूड, यही way of dealing with people, यही ground connect और यही accessibility कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में दिखाई देती, तो उनकी स्थिति कुछ और होती।
Arvind Mohan Singh106,993 Aufrufe • vor 2 Monaten

यह पूर्वोत्तर भारत कांग्रेस के जमाने में मिशनरियों के हवाले था, आज बाढ़ और लैंड स्लाइड भी हुआ तो भारत सरकार के मंत्री वहाँ जा रहे हैं। शिवराज सिंह तो जायजा लेने गये ही, साथ ही किरन रिजिजू और मुख्यमंत्री को भी बुलाया। इसी आत्मीयता ने पूरे पूर्वोत्तर में भाजपा का परचम लहराया है। कांग्रेस की सरकार में जहाँ इन लोगों को चिंकी, चाइनीज जैसी नस्लीय टिप्पणियों से गुजरना पड़ता था वह अब ना के बराबर हो गई हैं। पूर्वोत्तर भारत का अभिन्न अंग है, उसको काटकर अलग करने की बात करने पर ही शरजील इमाम 6 साल से जेल में पड़ा है। भाजपा अपने देश की जमीन का सम्मान करना जानती है। आज पूर्वोत्तर में हर भाषा प्रांत का आदमी जैसे आराम से घूम सकते हैं, व्यापार कर सकता हैं वह भाजपा की ही देन है। यही राष्ट्रवाद है । यहीं संघ - भाजपा है।
Arvind Mohan Singh68,955 Aufrufe • vor 2 Monaten

सुवेंदु दा… ममता बनर्जी के उस धमकी का जवाब दे रहे हैं जिसमें वो कह रही थी, "मैं हूँ इसलिए सभी है। यदि मैं नहीं रहूँगी तो एक कम्युनिटी एक सेकंड में सबको दिखा देती।" अकबरुद्दीन ओवैसी तो पन्द्रह मिनट की बात कर रहा था। ममता बनर्जी उस पन्द्रह मिनट को एक सेकंड पर ले आयी हैं। सुवेंदु अधिकारी ममता बनर्जी से कह रहे हैं कि जरा उस कम्युनिटी को भेजिए जो आपके नहीं रहने पर हमलोगों को एक सेकंड में देख लेगा… भेजिए-भेजिए हम लड़ लेंगे… हम संगठित हैं..
Arvind Mohan Singh73,667 Aufrufe • vor 4 Monaten

इसके यादव होने पर-हिंदू होने पर पहले संदेह था… अब पूर्ण विश्वास हो गया है की ये मुल्ला है…
Arvind Mohan Singh260,794 Aufrufe • vor 1 Jahr

बड़ा बाज़ार, कोलकाता के एक अबीर-गुलाल के व्यापारी की दुकान दृश्य - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - #रिपोर्टर : चुनाव चल रहा है, नतीजे आने वाले हैं… बाज़ार क्या कह रहा है? #दुकानदार : पहले “सब हरा-हरा” था, अब मांग पूरी तरह “ऑरेंज” की है। #रिपोर्टर : मतलब #दुकानदार : हमने ग्रीन और ऑरेंज दोनों गुलाल मंगाया, पर ग्रीन माल गोदाम में पड़ा है… कोई खरीददार नहीं। #रिपोर्टर : बिक्री का अनुपात? #दुकानदार : 90% ऑरेंज, सिर्फ 10% ग्रीन। #रिपोर्टर : संकेत क्या है? #दुकानदार : परिवर्तन।
Arvind Mohan Singh59,499 Aufrufe • vor 4 Monaten

दृश्य हनुमानगढ़ी, अयोध्या के हैं… भगवत दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार में एक भक्त के कंधे पर बैठा नन्हा बालक, बगल में खड़े श्रद्धालु के प्रसाद को चुपके-चुपके चख रहा है। कभी-कभी ईश्वर मंदिर के गर्भगृह में ही नहीं, ऐसी निष्कपट मुस्कानों, बाल-सुलभ चंचलताओं और सहज भावों में भी दर्शन दे जाते हैं। तभी तो संतों ने कहा है - “ना जाने किस भेष में नारायण मिल जाए”
Arvind Mohan Singh42,600 Aufrufe • vor 3 Monaten