
Atul Kumar Rai
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Novelist | Screenwriter | Lyricist | B.Mus. & MPA ( Music ) BHU | Yuva Sahitya Akademi Award winner for debut Hindi Novel चाँदपुर की चंदा |
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जहां बड़े-बड़े शैक्षणिक संस्थानों से फूहड़ डांस के वीडियो आ रहे हैं, वहीं हमारे बीएचयू में पारंपरिक सोहर हो रहा है। वही युवा प्रेम से सुन रहें हैं, मगन हो रहे हैं। हुड़दंगई की चर्चा तो हो जाती है लेकिन यूनिवर्सिटी कैंपस से निकलती अच्छी चीजों की सराहना भी होनी चाहिए। ❣️😇
Atul Kumar Rai125,076 Aufrufe • vor 1 Jahr

आज दिल्ली के होटल ली मेरेडियन में दैनिक जागरण द्वारा आयोजित कार्यक्रम में माननीय गृह मंत्री अमित शाह जी और प्रिय लेखक प्रसून जोशी जी द्वारा साहित्य का नवांकुर सम्मान दिया गया। ये सम्मान मेरा नहीं बल्कि चाँदपुर की चंदा के समस्त पाठकों का सम्मान है। आप सबकी शुभकामनाएं बनीं रहें 🙏
Atul Kumar Rai55,041 Aufrufe • vor 9 Monaten

वो जानते थे कोयल और मोर किस स्वर में बात करते हैं। उन्हें बात करना आता था चकवा, चकई और चकोर से। वो जब गाते थे, तब जेठ की झुलसाती धूप में फागुन का चटक रंग समा जाता। चैत खिल जाता हमारे रोम-रोम में और पता चलता कि पेड़ पर बोल रही कोयल भी किसी विरहन की दुश्मन हो सकती है। बाबा विश्वनाथ और तुलसीदास को जीवन का केंद्रीय स्वर बनाकर प्रेम का आलाप लेने वाले पंडित जी को वो साधारण श्रोता भी सुन सकता था, जो नहीं जानता दादरा, कहरवा, बड़ा ख्याल और छोटा ख्याल का अंतर। लेकिन मेरा ख्याल ये है कि आज बनारस के तानपुरे का वो तार टूट गया, जिसके गूंजने से पूरी दुनिया के मंचो पर बनारस शान से गूंजता था। अश्रुपूरित श्रद्धांजलि पंडित जी। आपके बिना तो अब चैत भी रोएगा, फागुन में काशी का मसान भी। रोएगी आज कोयल, सेजिया पर लेटकर विरहन। दिगम्बर आपको अपने चरणों में जगह दे... सादर नमन..🙏
Atul Kumar Rai16,796 Aufrufe • vor 10 Monaten

कुछ अलौकिक और दिव्य चीजें इंसान को मरने के बाद ही प्राप्त होती हैं। अब भारत रत्न सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को ही देख लीजिये। ऐसा सांस्कृतिक वातावरण में सम्पन्न होता शिक्षक दिवस उन्होंने जीते जी कभी नही देखा होगा। मने कि पठन-पाठन का इतना उच्चस्तरीय वातावरण किसी को क्या ही नसीब होगा। बस सरकार से निवेदन है कि राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस के अवसर पर इस सुकन्या को पॉवर स्टार मेडल देकर सम्मानित करे।
Atul Kumar Rai18,924 Aufrufe • vor 1 Jahr

लोकगीतों की सुंदर कल्पनाएँ मन को मुग्ध करती हैं। छठ में कोसी भरने की परंपरा है। शिव जी और पार्वती जी दोनों कोसी भरने जा रहें हैं। छठ पूजा की तैयारी हो चुकी है। लेकिन भक्त बस यही मना रहा है कि पूजा के दौरान शंकर जी की धोती भीग रही है तो भीग जाए लेकिन पार्वती जी की सवा लाख की साड़ी नहीं भीगनी चाहिए। अब पता नहीं सवा लाख की साड़ी की कल्पना कहाँ से आई होगी.. ? किसनें देखा होगा पार्वती जी को सवा लाख की साड़ी खरीदते हुए। लेकिन वो लोकगीतों ही क्या जिसमें देवता आदमी के भाई, बहन, सखा न बन जाएं। कई बार ये भी लगता है लोकगीत देवता और मनुष्य के द्वैत को खत्म करने का एक मंत्र है। जिसे हम सैकड़ों सालों से गाए जा रहें हैं। इसलिए लोकगीत हमारी आत्मा की शाश्वत अभिव्यक्ति है। इनके साथ जब भी प्रयोग होता है तो खटकता तो है। बाकी प्रयोग आदमी एक बार बर्दाश्त भी कर लेता है। लेकिन छठ गीतों के साथ प्रयोग एकदम बर्दाश्त नही होता। छठ गीत का सारा सौंदर्य इसकी यही सादगी है। आयुषी और उनकी सहेलियों ने ये सुंदर गीत गाया है। युवा पीढ़ी को ये गीत गाते देख अच्छा लगता है। ❤️ #chhathpuja2024
Atul Kumar Rai12,847 Aufrufe • vor 1 Jahr
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