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Official account of Swami Avdheshanand Giri Acharya Mahamandleshwar Juna Akhara. A Great Motivator Renowned Scholar, Excellent Orator.Managed by dedicated team.

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भारत की कालजयी मृत्युंजयी सनातन वैदिक संस्कृति की जीवन्त अभिव्यक्ति महाकुम्भ प्रयागराज 2025 के अंतर्गत "मौनी अमावस्या" के पावन पर्व पर आयोजित "द्वितीय अमृत-स्नान" में श्रीमत्परमहँस परिव्राजकाचार्य श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर अनन्तश्री विभूषित पूज्यपाद श्री स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज "पूज्य प्रभुश्री" जी के नेतृत्व में लाखों नागा-साधुओं संन्यासियों व साधकों ने अमृतोद्भवा माँ गंगा, भव-तापहारिणि माँ यमुना और अंतःसलिला माँ सरस्वती के समागम स्थल "त्रिवेणी संगम" के पावन जल में अमृत स्नान किया। "पूज्य प्रभुश्री जी" का यह अमृत स्नान भारत और सम्पूर्ण विश्व के सर्वविध अभ्युदय को समर्पित है। झलकियाँ ..।। #MahaKumbh2025 #मौनीअमावस्या #अमृतस्नान #MahaKumbhCalling #एकता_का_महाकुम्भ #सनातन_गर्व_महाकुम्भ_पर्व #AvdheshanandG #कुम्भ2025 #प्रयागराजकुम्भ #PrabhuPremiSangh #AvdheshanandG_Quotes #सनातन_संस्कृति #प्रभुप्रेमीसंघशिविर

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बांग्लादेश में हिंदुओं पर बर्बरतापूर्ण अत्याचार हो रहे हैं। वहां की अंतरिम सरकार मूक बनकर बैठी है।हिंदुओं पर किए जा रहे भयानक हिंसक आक्रमणों से संपूर्ण विश्व के हिंदू समुदाय में भारी रोष है । हम इन राक्षसी आक्रमणों की घोर निंदा करते हैं । इन दानवी घटनाओं से हम सभी विचलित हैं । बांग्लादेश की अंतरिम सरकार हिंदुओं पर किए जा रहे हिंसक आक्रमणों को रोकने के लिये तथा हिन्दू समुदाय को सुरक्षा प्रदान करने के लिए अविलंब कठोर कार्यवाही करे | हम संयुक्त राष्ट्र संघ UNO एवं मानवाधिकारों के लिये कार्य करने वाले समस्त वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से अपील करते हैं कि इस वीभत्स हिंसक घटनाओं पर तत्काल संज्ञान लें और बंगलादेश के हिन्दुओं की सुरक्षा तथा उनके हितों की रक्षा के लिए अपना प्रभावी स्वर पैदा कर आगे आएँ । इन घटनाओं पर भारत सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास गंभीर हैं । Hindus are being brutally persecuted in Bangladesh. The interim government there is sitting mute. There is huge anger among the Hindu community all over the world due to the horrific violent attacks on Hindus. We strongly condemn these demonic attacks. We are all disturbed by these demonic incidents. The interim government of Bangladesh should take immediate and strict action to stop the violent attacks on Hindus and to provide security to the Hindu community. We appeal to the United Nations UNO and all the global human rights organizations working for human rights to take immediate cognizance of these gruesome violent incidents and come forward to raise their effective voice for the safety and protection of the interests of Hindus of Bangladesh. The efforts being made by the Government of India on these incidents are serious. PMO India गृहमंत्री कार्यालय, HMO India Rajnath Singh RSS Vishva Hindu Parishad -VHP इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र (IVSK Delhi) United Nations United NationsHumanRights United Nations_HRC

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राजनैतिक विद्वेष रखकर भारतीय संस्कृति के उच्चतम आध्यात्मिक प्रतिमानों की जीवन्त अभिव्यक्ति कुम्भ के आध्यात्मिक वैशिष्ट्य को अनुभूत नहीं किया जा सकता। राजनैतिक लाभ के लिए कुछ लोग महाकुम्भ 2025 प्रयागराज में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गई व्यवस्थाओं की निन्दा कर रहे हैं, जो सर्वथा राजनैतिक स्वार्थ से प्रेरित है। "मौनी अमावस्या" पर प्रयागराज में एकत्रित भारी भीड़ के कारण अखाड़ा परिषद और सभी प्रमुख सन्तों ने सांकेतिक स्नान का निर्णय लिया था, किन्तु उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री गोरक्षपीठाधीश्वर पूज्य श्री योगी आदित्यनाथ जी की भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन मूल्यों के प्रति निष्ठा और प्रशासन के श्रेष्ठ प्रबन्धन के कारण सभी अखाड़े और पूज्य सन्त अमृत-स्नान कर सके। भारतीय संस्कृति, संस्कार और उसके उच्चतम आध्यात्मिक प्रतिमानों की अभिरक्षा हेतु भारतीय संस्कृति के ज्योतिर्धर हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी, उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री गोरक्षपीठाधीश्वर पूज्य श्री योगी जी एवं शासन-प्रशासन के प्रति हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित है। मौनी अमावस्या के बाद "बसंत पंचमी" के अवसर पर आयोजित "अमृत-स्नान" में सभी अखाड़े पूर्व निर्धारित क्रमानुसार सम्मिलित होंगे। महाकुम्भ के अद्भुत अलौकिक व्यवस्था से हम सभी अत्यन्त हर्षित एवं गौरवान्वित हैं। pmo Narendra Modi Amit Shah Amit ShahOffice Yogi Adityanath Yogi Adityanath Office e panchajanya Khuntaphon PTI ANI_HindiNews Acharya Sabha HariharAshram

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महाकुम्भ प्रयागराज 2025 के अंतर्गत आज तीर्थराज प्रयाग में "मौनी अमावस्या" के पावन पर्व पर आयोजित "द्वितीय अमृत-स्नान" में श्रीमत्परमहँस परिव्राजकाचार्य श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर अनन्तश्री विभूषित पूज्यपाद श्री स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज "पूज्य प्रभुश्री" जी के नेतृत्व में लाखों नागा-साधुओं संन्यासियों व साधकों ने अमृतोद्भवा माँ गंगा, भव-तापहारिणि माँ यमुना और अंतःसलिला माँ सरस्वती के समागम स्थल "त्रिवेणी संगम" के पावन जल में अमृत स्नान किया। झलकियाँ ..।। #MahaKumbh2025 #मौनीअमावस्या #अमृतस्नान #MahaKumbhCalling #एकता_का_महाकुम्भ #सनातन_गर्व_महाकुम्भ_पर्व #AvdheshanandG #कुम्भ2025 #प्रयागराजकुम्भ #PrabhuPremiSangh #AvdheshanandG_Quotes #सनातन_संस्कृति #प्रभुप्रेमीसंघशिविर

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भारतभूमि का इतिहास केवल तिथियों और घटनाओं का क्रम नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के अमर स्पंदनों का प्रवाह है। इस प्रवाह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उदय उस दिव्य धारा का प्रतीक है, जिसने पिछले सौ वर्षों में भारत की आत्मा को जाग्रत किया, समाज को संस्कारित किया और राष्ट्र की चेतना को एकात्मता की ओर अग्रसर किया। यह शताब्दी वर्ष केवल किसी संगठन की यात्रा ही नहीं बल्कि राष्ट्रधर्म की अखंड गाथा है। यह यात्रा दिव्य संस्कारों की अविच्छिन्न अनुपम उदात्त एक अलौकिक सांस्कृतिक आध्यात्मिक अखंड धारा है,जिसने व्यक्ति-निर्माण को राष्ट्र-निर्माण का मूल मंत्र बनाया। संगठन की अजेय शक्ति; जिसने विविधताओं और विभिन्नताओं को एकात्मता में परिवर्तित कर सशक्त समर्थ भारत के स्वप्न को साकार किया। कल्याणकारी सेवा का संकल्प; जिसने विपत्ति, आपदा और महामारी की हर घड़ी में करुणा और सर्वतोभावेन समर्पण से समाज को अपना सर्वस्व न्योछावर किया। संघ की स्थापना के समय भारत दिग्भ्रमित और परतंत्रता के अंधकार में डूबा था। ऐसे समय में परम पूज्य डॉ. हेडगेवार जी ने यह दिखाया कि यदि प्रत्येक हृदय में राष्ट्रभक्ति की ज्योति प्रज्वलित हो, तो स्वराज्य का सूर्य उदित होना निश्चित है। वही ज्योति आज भी शाखाओं में, स्वयंसेवकों के जीवन में और राष्ट्र की चेतना में प्रकाशित है। आज जब मानवता भौतिकता की अंधी दौड़ में दिशाहीन हो रही है, तब संघ का “एकात्म मानव दर्शन” संपूर्ण विश्व के लिए पथप्रदर्शक है। यह दर्शन हमें स्मरण कराता है कि धर्म केवल पूजा-पद्धति तक ही सीमित नहीं, बल्कि समाज-कल्याण, चरित्र-निर्माण और राष्ट्रसेवा का महान यज्ञ है। वेद का यह अमर मंत्र “संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्” संघ की प्रत्यक्ष साधना का स्वर है। यह शताब्दी पर्व हमें पुनः स्मरण कराता है कि जब हम सब एक साथ चलें, एक साथ सोचें और एक साथ संकल्प लें, तो भारतभूमि का स्वर्णिम भविष्य निश्चित रूप से साकार होगा। यह शताब्दी पर्व हम सबके लिए केवल मात्र उत्सव ही नहीं, बल्कि दैवीय आह्वान है कि हम सनातन संस्कृति के संवाहक बनें। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को जगत के समक्ष जीवित प्रमाण बनाकर प्रस्तुत करें।अपने आचरण से यह सिद्ध करें कि “सेवा ही परमो धर्मः” है। सनातन संस्कृति के संरक्षण संवर्धन, राष्ट्रधर्म निर्वहन और सेवा-परोपकार-पारमार्थिक प्रवृत्तियों के प्रसार में अहिर्निश संलग्न संघ शक्ति की दिव्य ज्योति से आलोकित शताब्दी पर्व पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सथापना के शताब्दी वर्ष पर अनंत शुभकामनाएँ। #राष्ट्रीयस्वयंसेवक #RSS100Years #RSSNewHorizons RSS Mohan Bhagwat Narendra Modi BJP Vishva Hindu Parishad -VHP ABVP

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महाकुम्भ 2025 प्रयागराज के अंतर्गत परम पूज्य जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर अनन्तश्री विभूषित पूज्यपाद श्री स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज "पूज्य प्रभु श्री" ने सनातन हिन्दू वैदिक धर्म संस्कृति के रक्षण-संवर्धन एवं श्रीमद् आद्यजगद्गुरु शंकराचार्य जी के अद्वैत मत के प्रसार व विस्तार हेतु श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े में हजारों की संख्या में नागा-साधुओं को दीक्षा प्रदान की। झलकियाँ ..।। #MahaKumbh2025 #नागा #साधु #MahaKumbhCalling #एकता_का_महाकुम्भ #संन्यासदीक्षा #सनातन_गर्व_महाकुम्भ_पर्व #AvdheshanandG #कुम्भ2025 #प्रयागराजकुम्भ #PrabhuPremiSangh #AvdheshanandG_Quotes #सनातन_संस्कृति #प्रभुप्रेमीसंघशिविर

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20,021 görüntüleme • 1 yıl önce

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सदाशिवसमारम्भां शंकराचार्यमध्यमाम् | अस्मदाचार्यपर्यन्ताम् वन्दे गुरुपरम्पराम् || भारतीय दार्शनिक परम्परा में अद्वैत वेदान्त वह सर्वोच्च चिंतन धारा है जो आत्मा और ब्रह्म की अभिन्नता की उद्घोषणा करती है। इस महान दर्शन के सर्वश्रेष्ठ भाष्यकार एवं प्रवर्तक भगवान् आद्य शंकराचार्य जी हैं, जिन्होंने न केवल उपनिषदों, ब्रह्मसूत्रों और भगवद्गीता पर भाष्य रचकर शास्त्रार्थ को पुनः जीवंत किया, अपितु व्यावहारिक धरातल पर एक समन्वयकारी, लोकहितैषी, और समष्टिगत चेतना का पुनरुद्धार भी किया। उनका प्रादुर्भाव ऐसे काल में हुआ जब भारतीय समाज आंतरिक विघटन, रूढ़ियों और आक्रांताओं की काली छाया से ग्रसित था। अद्वैत वेदान्त की मूल घोषणा है “ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या, जीवो ब्रह्मैव नापरः” इसका तात्पर्य है कि केवल ब्रह्म ही परमसत्य है, यह संसार अज्ञानवश मिथ्या प्रतीत होता है, और जीव वस्तुतः उसी ब्रह्म का अभिन्न अंश है। यह दर्शन आत्म-ज्ञान के माध्यम से मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। इसमें न तो भेदभाव की कोई भावना है, न संप्रदायिक संकीर्णता का स्थान। यही सार्वभौमिकता अद्वैत को संपूर्ण मानवता के लिए कल्याणकारी बनाती है। भगवत्पाद शंकराचार्य ने मात्र 32 वर्ष की आयु में संपूर्ण भारत की यात्रा कर चार धामों की स्थापना की — शृंगेरी (दक्षिण), द्वारका (पश्चिम), ज्योतिर्मठ (उत्तर), और पुरी (पूर्व)। ये मठ न केवल धार्मिक केन्द्र बने, अपितु ज्ञान, तर्क, साधना, और लोकसेवा के केन्द्र भी बने। उन्होंने अनेक प्रचालित मतों जैसे मीमांसा, सांख्य, बौद्ध, जैन आदि के साथ शास्त्रार्थ कर अद्वैत वेदान्त की श्रेष्ठता सिद्ध की। उनके भाष्य आज भी वेदान्त के मूल आधार माने जाते हैं। विशेष रूप से उनके गद्य और पद्य दोनों में रचित ग्रंथ- जैसे विवेकचूडामणि, उपदेशसाहस्री, अत्मबोध, वाक्यवृत्ति आदि आत्मबोध एवं मोक्षमार्ग के अमूल्य साधन हैं। शंकराचार्य जी का कार्य केवल तात्त्विक स्तर तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने लोक में भक्ति, सेवा और साधना की त्रिवेणी बहायी। भज गोविन्दं, सौन्दर्यलहरी, शिवानंद लहरी जैसे स्तोत्रों के माध्यम से उन्होंने साधारण जन को भी श्रीविद्या “ब्रह्मविद्या” की ओर उन्मुख किया। उनका यह समन्वयी दृष्टिकोण जिसमें ज्ञान, भक्ति, कर्म और उपासना का संतुलन था; हिन्दू धर्म के युगानुकूल उत्थान का मूलमंत्र बना। भगवत्पाद शंकराचार्य जी का अद्वैत दर्शन केवल व्यक्तिगत मोक्ष तक सीमित नहीं है, वह समष्टि चेतना का भी पोषण करता है। जब एक साधक अपने भीतर ब्रह्म का साक्षात्कार करता है, तो वह अपने और समस्त जीवों के मध्य भेद का नाश कर देता है। इस प्रकार अद्वैत न केवल आध्यात्मिक मुक्ति का मार्ग है, अपितु सामाजिक एकता और वैश्विक शांति का मूल आधार भी है। भगवत्पाद आद्य शंकराचार्य जी ने जिस अद्वैत वेदान्त की स्थापना की, वह केवल दार्शनिक मत नहीं, अपितु जीवन जीने की एक उत्कृष्ट प्रणाली है- जिसमें आत्मा की स्वतंत्रता, समाज की समरसता और धर्म की सार्वभौमिकता निहित है। उनके प्रादुर्भाव दिवस-वैशाख शुक्ल पंचमी, “शंकराचार्य जयंती” पर हमें न केवल भगवत्पाद शंकराचार्य जी के पादपद्मों में श्रद्धा अर्पित करनी चाहिए, अपितु उनके विचारों को अपने जीवन में आत्मसात कर पुनः भारत को ज्ञान, करुणा और अध्यात्म का प्रकाशस्तंभ बनाना चाहिए। In the grand tradition of Indian philosophy, Advaita Vedanta stands as the highest stream of thought, proclaiming the essential oneness of the soul (Atman) and the Absolute (Brahman). Its foremost exponent was Bhagavatpada Adi Shankaracharya, who revived this non-dualistic wisdom through profound commentaries on the Upanishads, Brahmasutras, and Bhagavad Gita, and through the establishment of a unified spiritual consciousness across India. Adi Shankaracharya’s vision transcended personal liberation. By realizing the unity of all beings in Brahman, Advaita fosters not only spiritual freedom but also social harmony and universal peace. On his birth anniversary, Shankaracharya Jayanti let us honor him not only with reverence but by imbibing his ideals — reviving India as a beacon of wisdom, compassion, and spiritual light. Dr Mohan Yadav Narendra Modi गृहमंत्री कार्यालय, HMO India #EkatmaDham #शंकराचार्य_जयंती #upnishad #श्रीमद्भगवद्गीता #ब्रह्मसूत्र #उपनिषद #प्रस्थानत्रयी #वेदांत #shankaracharyjayanti #AvdheshanandG_Quotes

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“हिमालय की गोद में शिक्षा का दिव्य प्रकाश” ! श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य, श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ, अनन्तश्रीविभूषित, आचार्यमहामण्डलेश्वर, पूज्यपाद स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज “पूज्य प्रभुश्री” की करुणा, दूरदृष्टि और दिव्य संकल्प से प्रेरित “स्वामी अवधेशानंद पब्लिक स्कूल”, उत्तराखंड के चंपावत ज़िले “चोरा ख्याली” बिरगुल में, 6,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित, उन सुदूर पर्वतीय गाँवों के बच्चों के लिए ज्ञान, आशा और आत्मनिर्भरता का स्तंभ बन चुका है। जहाँ कभी स्कूल एक कल्पना थी, वहाँ अब यह विद्यालय जीवन की नई भोर का केंद्र बन गया है। यह केवल पाठ्यक्रम ही नहीं पढ़ाता, यह बच्चों को संस्कार, आत्मबल, और राष्ट्रनिर्माण की भावना से भी सिंचित करता है। यह एक शिक्षा-यज्ञ है, जहाँ हर बालक एक जीवनदीप बन रहा है। आचार्यमहामण्डलेश्वर, पूज्यपाद स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज “पूज्य प्रभुश्री” के अनेकों पारमार्थिक प्रकल्पों में यह विद्यालय उन ग्राम्य बच्चों के लिए वरदान है, जिनकी पहुँच कभी न ज्ञान तक थी, न अवसर तक। आइए, हम सब इस पुण्य अनुष्ठान में सहभागी बनें।आपका छोटा-सा सहयोग किसी जीवन में आशा की किरण और किसी भविष्य की दिशा बन सकता है। “शिक्षा ही श्रेष्ठ दान है।” “A Beacon of Education in the Lap of the Himalayas” Inspired by the compassion and vision of Acharya Mahamandaleshwar, Srimat Paramhans Swami Avdheshanand Giri Ji Maharaj — “Pujya Prabhushri”, Swami Avdheshanand Public School stands tall at 6,000 feet in Chora Khyalī, Birgul, Champawat (Uttarakhand), bringing light, hope, and self-reliance to children of remote Himalayan villages. Where once education was a distant dream, this school is now a cradle of knowledge and values- nurturing not only minds but also hearts and futures. Each child here is being shaped into a torchbearer of tomorrow. Let us be part of this noble mission. Your small support can ignite a lifetime of change. “Education is the highest form of service.” #AvdheshanandG_Quotes #SwamiAvdheshanandPublicSchool #freeeducation Pushkar Singh Dhami LT GEN GURMIT SINGH, PVSM, UYSM, AVSM, VSM (Retd) PMO India

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रामो विग्रहवान् धर्मः ! भगवान श्री राम भारतीय संस्कृति की प्राण सत्ता हैं। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर पूर्ण परात्पर ब्रह्म भगवान श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा का यह महनीय क्षण भारत के भाग्य के कपाट खोलने में सहायक सिद्ध होगा। हम सनातनी इस श्रेष्ठ कालखंड के लिए शताब्दियों से प्रतीक्षारत थे ।लोकाभिराम भगवान श्री रामलला के दिव्य और नयनाभिराम श्रीविग्रह की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में राष्ट्र की शीर्षस्थ आध्यात्मिक विभूतियों और संत सत्पुरुषों के साथ सम्मिलित होकर धन्यता का अनुभव कर रहा हूँ ! #RamMandirPranPratishtha #ShriRamJanmbhoomi #RamMandirAyodhya Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra Mohan Bhagwat Narendra Modi Amit Shah Yogi Adityanath

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हनुमान स्वयं महादेव तथा सर्वसमर्थ सत्ता हैं, जो पथ प्रदर्शक, गुरु, सख्य आदि अनेक रूपों में उपास्य हैं और सर्व सुलभ भी हैं । परम कृपालु श्री हनुमान जी की दिव्य सामर्थ्य एवं सद्गुणों,अतुल्य तेज और अनंत सामर्थ्य की चर्चा वेदादि सहित श्रीमद्बाल्मिकीरामायण आदि अनेक पौराणिक ग्रंथों में वर्णित है। जो कार्य अन्य देवताओं के लिए परम दुस्तर प्रतीत होते हैं, ऐसे अति कठिन कार्य हनुमत कृपा से सहज ही सिद्ध हो जाते हैं। हनुमान परम पुरुषार्थी ज्ञानावतार हैं। "हनु शब्दो ज्ञानवाचि हनुमान् मतिशब्दितः ।" जिनके अनुग्रह से साधक लौकिक पारलौकिक समस्त ऐश्वर्य और परमानन्द प्राप्त कर लेता है,ऐसे संकटमोचक मोक्ष प्रदाता श्री बाला जी हनुमान के प्राकट्य दिवस श्री हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ। Heartfelt greetings on the auspicious occasion of Shri Hanuman Jayanti. The all-capable, ever-accessible Rudra-avatar, Shri Hanuman Ji, is revered as guide, guru, companion, and liberator. Praised in the Vedas and Itihasas as the embodiment of strength, wisdom, and divine virtues, his grace makes even the most difficult tasks effortless. He is the radiant symbol of supreme effort and divine knowledge. May his blessings grant you worldly success and spiritual bliss. #AvdheshanandG_Quotes #हनुमान_जयन्ती #Hanumaan_jayanti Shree Salasar Balaji Mandir #सालासर_हमुमान #जयश्री_बालाजी Arvind Pujari Yashodanandan pujari Shri Kishan Pujari Ravi Shankar Pujari ANUP PUJARI SALASAR कुलदीप पुजारी KULDEEP PUJARI🇮🇳 Prachyam Bhajanlal Sharma Vasundhara Raje MANGILAL PUJARI 🇮🇳

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अथ सर्वगुणोपेतः कालः परमशोभनः । यर्हि एव अजनजन्मर्क्षं शान्तर्क्ष-ग्रहतारकम् ॥ निशीथे तमउद्भूते जायमाने जनार्दने। देवक्यां देवरूपिण्यां विष्णुः सर्वगुहाशयः।। विदितोऽसि भवान् साक्षात् पुरुषः प्रकृतेः परः। केवलानुभवानन्द स्वरूपः सर्वबुद्धिदृक्॥ समस्त प्राणियों के उद्धार के निमित्त कोटि कोटि ब्रह्मांडों के सृजनहार सर्वसमर्थ सर्वव्यापी परात्पर परम्-ब्रह्म भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य अवतरण की परम् शुभ वेला श्रीकृष्णजन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। Best wishes for Shri Krishna Janmashtami, the most auspicious time of the divine incarnation of Lord Shri Krishna, the omnipotent omnipresent Supreme Being, the creator of millions of universes, for the salvation of all living beings. #AvdheshanandG_Quotes #श्रीकृष्णजन्माष्टमी #janmashtmi President of India

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श्रुतिस्मृतिपुराणानामालयं करुणालयम् । नमामि भगवत्पादं शङ्करं लोकशङ्करम् ॥ ईश्वरो गुरुरात्मेति मूर्तिभेदविभागिने । व्योमवद्व्याप्तदेहाय दक्षिणामूर्तये नमः ॥ सदाशिवसमारम्भां शङ्कराचार्यमध्यमाम्। अस्मदाचार्य पर्यन्तां वन्दे गुरु परम्पराम्॥ शंकरं शंकराचार्यं केशवं बादरायणम् । सूत्रभाष्यकृतौ वन्दे भगवन्तौ पुनः पुनः ॥ गुरु व्यक्ति ही नही अपितु परम् तत्त्व, विद्या, महनीय परम्परा और मोक्षप्रदाता सत्ता है। अविद्या अज्ञान के कारण जीवन में आने वाली अनेक विषमताओं, प्रतिकूलताओं और भ्रम-भय के समय दिव्य ज्ञान, अनन्त ऊर्जा और अपरिमित सामर्थ्य बनकर जो हमें अपने शाश्वत अविनाशी स्वरूप बोध के लिये प्रेरित करती है, वह है कल्याणकारी गुरुसत्ता । जिनके आशीष अनुग्रह से मानवीय चेतना में समाहित शुभता-पवित्रता ,दिव्यता-उत्कृष्टता व परमानन्द का जागरण होता है। जिनकी असीम और अकारण कृपा से दुर्बोध सुबोध, अलभ्य सुलभ व असम्भव सम्भव हो जाता है ।जो जीव को ब्रह्म अर्थात् नर को नारायण बनाने की योग युक्ति प्रदान करते हैं, ऐसे करुणानिधान परमेश्वर गुरुवर को कोटिशः नमन । Guru is not only a person but the ultimate principle, knowledge, great tradition and the power that gives salvation. In times of many difficulties, adversities and confusion-fear in life due to ignorance, the one who inspires us to understand our eternal and indestructible form by becoming divine knowledge, infinite energy and infinite power is the benevolent Guru. By whose blessings and grace, goodness-purity, divinity-excellence and bliss that are present in human consciousness awakens. By whose infinite and causeless grace, the difficult to understand becomes easy, the unobtainable becomes easy and the impossible becomes possible. Who provides the method of yoga to make the living being Brahman, that is, to make man Narayana, I bow down to such compassionate Parameshwar Guruvar. #AvdheshanandG_Quotes #गुरु_पूर्णिमा #व्यास_पूर्णिमा #GuruPurnima #दक्षिणामूर्ति

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