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banwari Maheshwari

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मरने बाद भी गंगा जल बहती... हमारी पवित्र अस्थियों को कोई कान लगाकर सुनेगा तो एक ही आवाज आएगी... भारत माता की जय🚩

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शिवम त्यागी ने आरजेडी प्रवक्ता प्रियंका भारती को जमकर पेल दिया। प्रियंका भारती जी ने बार-बार ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग का नाम लेकर चुनावी हार का ठीकरा उन पर फोड़ने की कोशिश की, लेकिन शिवम त्यागी ने सवालों का जवाब सवालों और तर्कों के साथ देने की कोशिश की। उन्होंने तंज कसते हुए कहा— ये वो वाले बच्चे हैं जो अपने पिताजी के पास जाकर कहते हैं— “पापा, मुझे बारहवीं में फलाना टीचर, ज्ञानेश कुमार ने फेल कर दिया।” पापा कहते हैं— “बेटा, तू तो पहली से ही फेल होता हुआ आ रहा है, ये टीचर तो अभी आया है।” शिवम त्यागी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग का नाम बार-बार लेने से पहले अपनी पार्टी के राजनीतिक इतिहास और संगठन पर भी नजर डालनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर चुनावी हार की जिम्मेदारी सिर्फ चुनाव आयोग या किसी एक व्यक्ति की है, तो फिर इतने वर्षों से लगातार चुनावी प्रदर्शन कमजोर क्यों रहा? उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव अपने आप नहीं जीते जाते। अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग कारण होते हैं और विपक्ष को यह भी समझना चाहिए कि जनता उससे जुड़ क्यों नहीं रही है। आरजेडी के स्थापना दिवस और तेजस्वी यादव के यूरोप दौरे का जिक्र करते हुए शिवम त्यागी ने तंज कसा कि जब बिहार की जनता से वोट मांगना हो तो प्राथमिकताएं भी जनता के बीच दिखाई देनी चाहिए। इसके बाद उन्होंने चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर सीधा सवाल किया— “तथ्यात्मक चीजें तो दोगे ना? लॉजिक तो बताओगे ना?” उन्होंने कहा कि अगर किसी संस्था पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं तो उसके समर्थन में तथ्य भी सामने रखे जाने चाहिए। सिर्फ बार-बार यह कह देने से कि “ये चोर है, ये चोर है, ये चोर है” कोई व्यक्ति चोर साबित नहीं हो जाता। इसके लिए तथ्य चाहिए, प्रमाण चाहिए और तर्क चाहिए। “संविधान खतरे में है”, “आरक्षण खत्म हो जाएगा” जैसे राजनीतिक नैरेटिव पर भी शिवम त्यागी ने सवाल उठाए और कहा कि चुनावी राजनीति में सिर्फ भाषणबाजी और आरोपों से काम नहीं चलता। उन्होंने यह भी तंज कसा कि अगर चुनाव जीतने की वजह सिर्फ ज्ञानेश कुमार हैं, तो फिर 2014 के बाद से लगातार अलग-अलग चुनावों में जीत-हार के आंकड़ों को कैसे समझाया जाएगा? “ज्ञानेश कुमार 2025 में आए हैं, तो 2014 से पहले और बाद के चुनावों का हिसाब किसके सिर जाएगा?” शिवम त्यागी ने “CM चोरी, MLA चोरी, MP चोरी, चंदा चोरी” जैसे आरोपों पर भी तीखा जवाब दिया— “भाई, चोरी तो तब होगी जब आपके पास कुछ हो।” उनका कहना था कि लंबे समय से सत्ता से बाहर रहने के बावजूद हर राजनीतिक असफलता के लिए किसी दूसरे को जिम्मेदार ठहराना समाधान नहीं है। उन्होंने आरजेडी के राजनीतिक संगठन और जनता से जुड़ाव पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केवल भाषणबाजी से चुनाव नहीं जीते जाते। जनता से जुड़ना पड़ता है, संगठन मजबूत करना पड़ता है और अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं पर भी ध्यान देना पड़ता है। सबसे बड़ा तंज करते हुए शिवम त्यागी ने कहा— “आप जैसे प्रवक्ता रहे तो 25 साल और नहीं आएगी, क्योंकि जनता आपसे कनेक्ट नहीं करती।” और आखिर में यूरोप दौरे को लेकर कटाक्ष— “बर्थडे यूरोप में मनाओगे और बिहार से वोट मांगोगे तो कैसे चलेगा?” अब सवाल सीधा है— क्या हर चुनावी हार के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराने के बजाय राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति, संगठन और जनता से जुड़ाव पर भी आत्ममंथन नहीं करना चाहिए? #ShivamTyagi #RJD #PriyankaBharti #GyaneshKumar #BiharPolitics Shivam Tyagi (Modi Ka Parivar)

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डॉ. सुधांशु त्रिवेदी का राहुल गांधी पर जोरदार हमला देखिए, डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी और कांग्रेस से जुड़े कई मुद्दों पर अभय दुबे के तर्कों का बिंदुवार जवाब दिया। उन्होंने शुरुआत बिहार के 2010 के विधानसभा चुनाव से करते हुए कांग्रेस के पुराने चुनावी प्रदर्शन का संदर्भ दिया और 27 लाख अतिरिक्त वोट मिलने पर सरकार बनने के दावे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि 2010 में बिहार में कांग्रेस की स्थिति क्या थी, यह चुनावी आंकड़ों से समझी जा सकती है। इसी संदर्भ में उन्होंने कांग्रेस के वोट प्रतिशत, सीटों और जमानत जब्त होने वाले उम्मीदवारों का उल्लेख करते हुए पूछा कि जिस पार्टी का उस समय प्रदर्शन इतना कमजोर था, वह केवल अतिरिक्त वोटों के आधार पर सरकार बनने का दावा कैसे कर सकती है? इसके बाद उन्होंने कथित “वोट चोरी” के मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाया जा रहा है, तो उसके समर्थन में ठोस प्रमाण और संबंधित बूथ लेवल एजेंटों की आपत्तियां भी सामने रखी जानी चाहिए। उन्होंने बंगाल की राजनीति का उदाहरण देते हुए अधीर रंजन चौधरी के पुराने बयान का उल्लेख किया और ममता बनर्जी सरकार को लेकर कांग्रेस के पूर्व आरोपों की चर्चा की। उनका सवाल था कि यदि कांग्रेस के नेता पहले बंगाल में लोकतंत्र और राजनीतिक हिंसा को लेकर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं, तो बाद में राजनीतिक गठबंधन के दौरान वही दल एक साथ कैसे आए? डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने आगे चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी बात की। उन्होंने राज्य चुनाव आयोगों का उदाहरण देते हुए पूछा कि जिन राज्यों में पंचायत और नगर निकाय चुनाव राज्य निर्वाचन आयोगों के माध्यम से होते हैं, वहां मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर समान प्रश्न क्यों नहीं उठाए जाते? उन्होंने केरल के स्थानीय निकाय चुनावों का संदर्भ देते हुए भी सवाल रखा कि यदि अलग-अलग चुनावों में मतदाता सूची को लेकर आपत्ति है, तो संबंधित प्रक्रियाओं और आपत्तियों के दस्तावेज सार्वजनिक रूप से सामने आने चाहिए। इसके बाद चर्चा कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन पर पहुंची। डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच हुए मतभेदों का उल्लेख किया और कमलनाथ तथा अखिलेश यादव से जुड़े बयानों को याद दिलाया। उन्होंने कहा कि जब दोनों दलों के बीच राजनीतिक मतभेद खुले तौर पर सामने आ चुके हैं, तो चुनावी परिस्थितियों के अनुसार बाद में गठबंधन की राजनीति कैसे बदलती है, इसे भी जनता के सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने रायबरेली और अमेठी का उल्लेख करते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच चुनावी सहयोग की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उनका तर्क था कि उत्तर प्रदेश में गठबंधन की राजनीति में सीटों का बंटवारा और उम्मीदवारों का चयन दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण विषय हैं। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस द्वारा अधिक सीटों की मांग किए जाने के संदर्भ में सवाल उठाया कि जब किसी पार्टी का किसी क्षेत्र में लगातार कमजोर चुनावी प्रदर्शन रहा हो, तो सीटों की संख्या को लेकर उसका दावा किन आधारों पर निर्धारित किया जाता है? पूरे वक्तव्य में डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के चुनावी दावों, “वोट चोरी” के आरोपों, बंगाल की राजनीति, चुनाव आयोग की भूमिका और समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन जैसे मुद्दों को एक साथ जोड़ते हुए सवाल खड़े किए। अंत में उन्होंने गालिब के प्रसिद्ध शेर का संदर्भ देते हुए कहा कि वास्तविक राजनीतिक स्थिति और राजनीतिक कल्पना के बीच अंतर समझना जरूरी है। वीडियो में डॉ. सुधांशु त्रिवेदी के इस पूरे वक्तव्य में बिहार के चुनावी आंकड़ों से लेकर वोटर लिस्ट, बंगाल की राजनीति, चुनाव आयोग और सपा-कांग्रेस गठबंधन तक कई मुद्दों पर सवाल उठाए गए हैं। #SudhanshuTrivedi #RahulGandhi #Congress #AbhayDubey #IndianPolitics Dr. Sudhanshu Trivedi

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