
भारतीय अब्दुल
@Bhartiya_Abdul • 9,952 subscribers
” إِنَّمَا الْمُؤْمِنُوْنَ إِخْوَۃٌ۔‘‘ ㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ तर्जुमा: “ मुसलमान आपस में एक दूसरे के भाई हैं ” अल हुजुरात:10 from:Bhartiya_Abdul -filter:replies
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Indian girl, only 6 years old. She speaks excellent English. 👇
भारतीय अब्दुल249,763 Aufrufe • vor 1 Monat

अल्लाह ने मक्का और मदीना की जिम्मेदारी बरेलवियों को इसीलिए नहीं दी है यह लोग वहां भी खुराफाती करते कहीं जन्नती दरवाजा बनाते तो कहीं कुछ जरा सोचिए , डुप्लीकेट मक्का मदीना का कितना एहतराम कर रहे हैं ख़ैर हमें क्या कहें ये आला वाले हजरत के सर्टिफाइड जन्नती लोग हैं Nurmagumedov
भारतीय अब्दुल46,513 Aufrufe • vor 15 Tagen

तुम्हारी ख़ूबसूरती, तुम्हारा जमाल, तुम्हारा हुस्न, जवानी का नशा, दौलत का घमंड, तुम्हारी क़ाबिलियत के चर्चे, तुम्हारे हुनर सब एक दिन ख़त्म होने वाले हैं__!!! तो ग़ुरूर किस बात का ? जो कुछ तुम ने किया है वह मौत के वक्त नजर आने वाला है मौत से पहले नेक काम में व्यस्त हो जाओ वरना क्या तुम ने सुना नहीं ? كُلُّ نَفْسٍ ذَائِقَةُ الْمَوْتِ۞ हर जानदार चीज़ को मौत का मज़ा चखना है_
भारतीय अब्दुल110,643 Aufrufe • vor 1 Monat

" क्या माडर्न ज़माना था " मेरे नबी सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम के जमाने में औरतें कारोबार भी करती थीं कारोबार करने के लिए गुलाम व नौकर रखती थीं हर क़िस्म के सवाल भी करती थीं सदक़ा भी देती थीं और मर्द को क़व्वाम (निगहबान) भी मानतीं थीं पसंद की शादी भी करती थीं यहां तक कि खुद निकाह का पैगाम भी भेजती थीं घर के काम के लिए नौकर भी रखती थीं ज़रा सा मसला होता तो फौरन नबी-ए-अकरम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम से शिकायत करने पहुंच जाती थीं वह दौर जिस में तलाक बोझ नहीं बनती थी विधवा होना जुर्म नहीं था कौन कहता है इस्लाम माडर्न दीन नहीं है ? ज़रा हमारा शानदार अतीत तो देखिए ख़ुदा की क़सम ज़ुबान दराजी भूल जाओगे
भारतीय अब्दुल39,336 Aufrufe • vor 23 Tagen

मदरसों पर ऐसे लोग उंगली न उठाएं जिनका देश की आजादी में कोई योगदान नहीं है जिन्होंने देश की आजादी के लिए एक संगठन नहीं बनाया मुसलमानों ने देश की आजादी के लिए मदरसे बनाये संगठन बनाए , मदरसों के लाखों मुसलमान, व आलिम-ए-दीन शहीद हुए हैं मदरसों से तकलीफ अंग्रेजों के गुलामों को होती है
भारतीय अब्दुल22,303 Aufrufe • vor 1 Monat

_ अल्लाह तआ़ला का इरशाद है: कितने ही जानवर हैं जो अपना रिज़्क़ उठाए नहीं फिरते, अल्लाह इनको रिज़्क़ देता है और तुम्हारा राज़िक भी वही है वह सब कुछ सुनता और जानता है! खुलासा: अल्लाह की जिम्मेदारी: दुनिया में बहुत से ऐसे छोटे-बड़े जीव-जंतु और जानवर हैं, जो हमारी तरह कल के लिए खाना जमा करके नहीं रखते।सबका पालने वाला: अल्लाह तआला उन बेजुबान जानवरों को भी हर दिन खाना (रिज़्क़) देता है और हम इंसानों को भी वही पालता है।वह सब जानता है: अल्लाह हमारी हर जरूरत को सुनता है और जानता है। हमें कभी भी अपनी रोजी-रोटी को लेकर परेशान नहीं होना चाहिए, बल्कि उस पर भरोसा रखना चाहिए। सूरह अल-अंकबूत (Surah Al-Ankabut), आयत संख्या 60 है।
भारतीय अब्दुल25,916 Aufrufe • vor 2 Monaten

कहां से आते हैं ये लोग माइक देख कर मुंह में खुजली होने लगती है क्या ? पत्रकार भी लुल्ल है 👇😜🤣
भारतीय अब्दुल29,337 Aufrufe • vor 2 Monaten

मनुस्मृति बड़ी है ? या फिर संविधान ? हिंदुओं के जगदगुरु अविमुक्तेश्वरा नंद महाराज ने सीना तान कर जवाब दिया "मनुस्मृति संविधान से बड़ी है" वजह भी बिलकुल सटीक बताया है " भारत का संविधान भारत की सीमा के बाहर लागू नहीं होता " जबकि किसी भी धर्म का भारतीय नागरिक अपने धर्म के कानून के अनुसार बाहर भी जीवन यापन करता है यानी , अमेरिका ,जापान ,ब्रिटेन , आस्ट्रेलिया ,कनाडा , में हिंदू , मुस्लिम या सिख , जैन इत्यादि बना रहता है 👇
भारतीय अब्दुल28,700 Aufrufe • vor 3 Monaten

#Assalamu_Alaikum अल्लाह तआ़ला का इरशाद है: बिला-शुबह मैं ही अल्लाह हूँ, मेरे सिवा कोई मअ़बूद नहीं, लिहाज़ा मेरी ही इबादत करो, और मेरी याद के लिए नमाज़ क़ायम करो- सूरह ताहा: 14 दूसरी जगह रसूल-अल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम से ख़िताब है: 1- आप कह दीजिए कि वह अल्लाह एक ही है 2- अल्लाह तआ़ला बे-नियाज़ है [किसी के अधीन नहीं सभी उसके अधीन हैं] 3- न उस से कोई पैदा हुआ है और न ही वह किसी से पैदा हुआ है। 4- और न कोई उसका हमसर [समकक्ष] है। सूरह इख़्लास: 1-4
भारतीय अब्दुल21,776 Aufrufe • vor 2 Monaten

👉 ये पंडित इस बच्ची से क्या कर रहा है ? कब तक मंदिरों में ये पाखंड चलता रहेगा ? 👇👇
भारतीय अब्दुल158,447 Aufrufe • vor 2 Jahren

👉 असली वाला वीडियो मिल गया है ।। " आजादी की लड़ाई में दो तरह के लोग थे " 👇👇👇
भारतीय अब्दुल145,595 Aufrufe • vor 2 Jahren

#Assalamu_Alaikum हज़रत अबू हुरैरह ؓ से रिवायत है कि एक शख़्स ने नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम से अ़र्ज़ किया कि मुझे कोई वसीयत फ़रमा दीजिए_ आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: "ग़ुस्सा न किया करो" उस शख़्स ने अपनी वही दरख्वास्त कई बार दोहराई_ आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने हर मरतबा यही इरशाद फ़रमाया: "ग़ुस्सा न किया करो" बुख़ारी:6116
भारतीय अब्दुल16,203 Aufrufe • vor 3 Monaten