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An initiative of Government of #Bihar to facilitate interaction between the State and the #Diaspora. Core objectives - Bonding, Branding, Business.

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The ASI starts excavations at the historic Balirajgarh site in Madhubani today. Locally known as Raja Bali ka Garh, this fortified site in Babubarhi block is a key archaeological landmark within Bihar’s Mithila region.

The ASI starts excavations at the historic Balirajgarh site in Madhubani today. Locally known as Raja Bali ka Garh, this fortified site in Babubarhi block is a key archaeological landmark within Bihar’s Mithila region.

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#Bihar is the future.

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290,023 次观看 • 3 年前

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'बटोहिया' एक भोजपुरी कविता है जो सारण में जन्मे कवि और स्वतंत्रता सेनानी रघुवीर नारायण द्वारा 1911 में लिखी गई थी। पूर्वी शैली में गाई यह गीत मॉरीशस, सूरीनाम और फिजी जैसे देशों में काफी लोकप्रिय हुई। भोजपुरी शब्द 'बटोहिया' का हिंदी अर्थ 'यात्री' होता है। इस गीत में ब्रिटिश शासन के दौरान एक गिरमिटिया मजदूर एक यात्री को भारत को धरती पर स्वर्ग के रूप में समझा रहा है और वह अपनी मातृभूमि की यात्रा करना चाहता है। देशभक्ति से ओत प्रोत इस गीत का अंग्रेजी अनुवाद इस प्रकार है - Beautiful good land brother India its country is, My life soul lives snowy cave O traveller. One door (gate) encircling Rama Himalaya sentinel like, Three door (gate) sea roars O traveller. Want to go O traveller to see Hindustan, Where Cuckoo sings coos O traveller. Scented air breeze slowly from the sky, Wife sings a song of separation O traveller स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! भारत माता की जय।

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32,175 次观看 • 1 年前

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'ओका बोका तीन तड़ोका लौवा लाठी, चंदन काठी बाग में बगडोला डोले, सावन में कौला इजवा, बीजा पुरेई पचक।' बिहार के ग्रामीण खेलों की अपनी विशेषता है। यहां के गांवों में प्रचलित अधिकांश खेल या तो बिना किसी वाह्य संसाधन के या फिर स्थानीय उपलब्ध संसाधनों के साथ खेले जाते हैं। आइस-पाइस, सूर, डेंगा-पानी, कबड्डी, ओका-बोका, चकवा-चकइया, जैसे खेल में तो सिर्फ मानसिक और शारीरिक कौशल की जरूरत पड़ती है, जबकि गिल्ली डंडा, पिट्ठू, लट्ट, रूमाल चोर, दोलहापाती, गानगोटी, कितकित जैसे खेल अपने आस-पास तत्काल उपलब्ध साधन लकड़ी के टुकड़े, पत्थर के टुकड़े, पेड़-पौधे इत्यादि के सहारे खेले जाते हैं। इन खेलों का वास्तविक महत्व इनसे जुड़े गीतों के साथ है। अधिकांश खेलों के लिए निश्चित गीत हैं, जो खेलों की रोचकता को और भी बढ़ा देते हैं। इन गीतों की विशेषता इसकी गेयता होती है, आमतौर पर इनमें निरर्थक शब्दों की प्रमुखता देखी जाती है, लेकिन यह ग्रामीण रचनात्मकता का प्रतीक ही है कि ये निरर्थक शब्द मिलकर एक सार्थक स्वरूप ग्रहण करते हैं। वास्तव में इन गीतों से एक वातावरण निर्मित होता है जो प्रकृति के साथ जुड़कर खेलने के लिए उत्साहित करता है। चकवा चकइया के गीत में इसकी झलक देखी जा सकती है। "आन्ही-बूनी आवेले, चिरइया ढोल बजावेले बूढ़ी मइया हाली-हाली गोंइठा उठावेले एक मुठी लाइ, दामाद फुसलाई बूनी ओनही बिलाई, बुनी ओनही बिलाई आन्ही आइल, बूनी आइल, फूट गइल लबनिया तड़वा धर के रोवे ले पसनिया।"

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12,003 次观看 • 1 年前

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