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Bhupendra Singh Rathore

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𝗠𝗲𝗱𝗶𝗰𝗼 | 𝗟𝗲𝗮𝗿𝗻𝗲𝗿 | 𝗧𝗵𝗶𝗻𝗸𝗲𝗿 | 𝗙𝗼𝘂𝗻𝗱𝗲𝗿 @marwar_times

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IPS अंशिका वर्मा एवं संभल SP कृष्ण कुमार विश्नोई का भव्य रिसेप्शन 🧿❤️ 📍 प्रयागराज (UP)

IPS अंशिका वर्मा एवं संभल SP कृष्ण कुमार विश्नोई का भव्य रिसेप्शन 🧿❤️ 📍 प्रयागराज (UP)

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कलेजा फट जाता है जब देश की #सरहद से ऐसी खबर आती है। हरियाणा (#झज्जर) के सुदकाना गांव का लाडला मोहित चौहान अब हमारे बीच नहीं रहा। 🫡🇮🇳 नियति का खेल देखिए... 2 महीने की गर्भवती पत्नी को छोड़कर देश के लिए शहीद हुआ जवान, और अब पूरे गांव में पसरा मातम। देश आपके इस सर्वोच्च बलिदान को कभी नहीं भूलेगा। 🥹🙏 शत-शत नमन! वीर शहीद मोहित चौहान #अमर रहें। 🪖🇮🇳

कलेजा फट जाता है जब देश की #सरहद से ऐसी खबर आती है। हरियाणा (#झज्जर) के सुदकाना गांव का लाडला मोहित चौहान अब हमारे बीच नहीं रहा। 🫡🇮🇳 नियति का खेल देखिए... 2 महीने की गर्भवती पत्नी को छोड़कर देश के लिए शहीद हुआ जवान, और अब पूरे गांव में पसरा मातम। देश आपके इस सर्वोच्च बलिदान को कभी नहीं भूलेगा। 🥹🙏 शत-शत नमन! वीर शहीद मोहित चौहान #अमर रहें। 🪖🇮🇳

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वसुंधरा राजे सिंधिया..!! प्रदेश की पूर्व CM वसुंधरा राजे को लोग याद कर रहे हैं। उनके राज में प्रशासन की पकड़ मजबूत थी, अधिकारी कार्यकर्ताओं की सुनते थे। भजनलाल govt अच्छा काम कर रही, लेकिन अफसरशाही हावी होने की शिकायतें हैं। तुलना करें तो बेहतर कार्यकाल किसका? #VasundharaRaje #BhajanLalSharma

वसुंधरा राजे सिंधिया..!! प्रदेश की पूर्व CM वसुंधरा राजे को लोग याद कर रहे हैं। उनके राज में प्रशासन की पकड़ मजबूत थी, अधिकारी कार्यकर्ताओं की सुनते थे। भजनलाल govt अच्छा काम कर रही, लेकिन अफसरशाही हावी होने की शिकायतें हैं। तुलना करें तो बेहतर कार्यकाल किसका? #VasundharaRaje #BhajanLalSharma

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बेटे के दिल्ली विश्वविद्यालय #छात्रसंघ अध्यक्ष बनने के बाद क्या बोले #आर्यन मान के पिता

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कोई बताएगा राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष का वेतन कितना होता है..? #Rajasthan #Jaipur

कोई बताएगा राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष का वेतन कितना होता है..? #Rajasthan #Jaipur

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मेवाड़ राजघराने की बहुराणीजी, डॉ. लक्ष्यराज सिंह जी मेवाड़ की धर्मपत्नी महारानी निवृत्ति कुमारी जी मेवाड़, राजकुमार देवायुष सिंह जी (#शाहपुरा) के मांगलिक विवाह समारोह में।

मेवाड़ राजघराने की बहुराणीजी, डॉ. लक्ष्यराज सिंह जी मेवाड़ की धर्मपत्नी महारानी निवृत्ति कुमारी जी मेवाड़, राजकुमार देवायुष सिंह जी (#शाहपुरा) के मांगलिक विवाह समारोह में।

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जितनी भाषाएँ सीखनी हों सीखिए, लेकिन घर में बच्चों से #मारवाड़ी-हिंदी में बात करें” - केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह #Make_Rajasthani_official

जितनी भाषाएँ सीखनी हों सीखिए, लेकिन घर में बच्चों से #मारवाड़ी-हिंदी में बात करें” - केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह #Make_Rajasthani_official

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बाड़मेर-बालोतरा सीमा विवाद! राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद अब 'बाड़मेर बनाम बालोतरा' की बहस तेज हो गई है। हाल ही में बांड गाँव (नोखड़ा तहसील) के संदर्भ में उठा विवाद यह दर्शाता है कि दूरी और जनसुविधा के दावों के पीछे राजनीतिक इतिहास की परतें कितनी गहरी हैं। प्रशासनिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि जो लोग आज चंद किलोमीटर की दूरी पर सवाल उठा रहे हैं, वे बांड गाँव के उस दौर को भूल गए जब राजनीतिक हितों के लिए जनता को प्रशासनिक चक्रव्यूह में उलझाया गया था। एक समय में बांड गाँव की पंचायत समिति 'आडेल', पुलिस थाना 'नगर', और उपखंड 'गुड़ामालानी' हुआ करता था। उस दौर में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण के बजाय राजनीतिक स्वार्थों को प्राथमिकता दी गई थी। वर्तमान स्थिति: वर्तमान प्रशासनिक ढांचे के तहत गुड़ामालानी क्षेत्र को लेकर स्थिति अब स्पष्ट होती दिख रही है। अब तहसील, पंचायत समिति और उपखंड तीनों ही 'गुड़ामालानी' के अधीन हैं और जिला 'बालोतरा' के साथ तालमेल बिठाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान फैसले किसी विशेष दल के राजनीतिक लाभ के बजाय जनहित और दूरी को कम करने के उद्देश्य से लिए जा रहे हैं। #केके_विश्नोई

बाड़मेर-बालोतरा सीमा विवाद! राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद अब 'बाड़मेर बनाम बालोतरा' की बहस तेज हो गई है। हाल ही में बांड गाँव (नोखड़ा तहसील) के संदर्भ में उठा विवाद यह दर्शाता है कि दूरी और जनसुविधा के दावों के पीछे राजनीतिक इतिहास की परतें कितनी गहरी हैं। प्रशासनिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि जो लोग आज चंद किलोमीटर की दूरी पर सवाल उठा रहे हैं, वे बांड गाँव के उस दौर को भूल गए जब राजनीतिक हितों के लिए जनता को प्रशासनिक चक्रव्यूह में उलझाया गया था। एक समय में बांड गाँव की पंचायत समिति 'आडेल', पुलिस थाना 'नगर', और उपखंड 'गुड़ामालानी' हुआ करता था। उस दौर में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण के बजाय राजनीतिक स्वार्थों को प्राथमिकता दी गई थी। वर्तमान स्थिति: वर्तमान प्रशासनिक ढांचे के तहत गुड़ामालानी क्षेत्र को लेकर स्थिति अब स्पष्ट होती दिख रही है। अब तहसील, पंचायत समिति और उपखंड तीनों ही 'गुड़ामालानी' के अधीन हैं और जिला 'बालोतरा' के साथ तालमेल बिठाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान फैसले किसी विशेष दल के राजनीतिक लाभ के बजाय जनहित और दूरी को कम करने के उद्देश्य से लिए जा रहे हैं। #केके_विश्नोई

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कितनी सच्चाई?

कितनी सच्चाई?

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जिस नेता को #व्यापारी तैयार करते हैं, वो व्यापारियों के लिए काम करता है...!! लेकिन... जिस नेता को 'समाज' तैयार करता है, वो #समाज के लिए काम करता है। — विनोद जाखड़ (प्रदेश अध्यक्ष, #NSUI राजस्थान)

जिस नेता को #व्यापारी तैयार करते हैं, वो व्यापारियों के लिए काम करता है...!! लेकिन... जिस नेता को 'समाज' तैयार करता है, वो #समाज के लिए काम करता है। — विनोद जाखड़ (प्रदेश अध्यक्ष, #NSUI राजस्थान)

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जब अंत समय आता है, तब सबको सिर्फ यही #राजपूत कौम याद आती है राजा मानसिंह ने मुगलों से हिंदुओं को बचाया और आज जब बंगाल में स्थिति फिर संकटमय है तब भी राजा मान सिंह के वंशज शेखावत साहब को आगे किया गया है! #क्षत्रिय_धर्म

जब अंत समय आता है, तब सबको सिर्फ यही #राजपूत कौम याद आती है राजा मानसिंह ने मुगलों से हिंदुओं को बचाया और आज जब बंगाल में स्थिति फिर संकटमय है तब भी राजा मान सिंह के वंशज शेखावत साहब को आगे किया गया है! #क्षत्रिय_धर्म

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करणी माता मंदिर..! इतिहास गवाह है, इस मंदिर में जाने वाला कभी खाली हाथ नहीं लौटता। बीकानेर के देशनोक में स्थित विश्व प्रसिद्ध करणी माता मंदिर आस्था, चमत्कार और रहस्य का अनोखा संगम है। मान्यता है कि करणी माता शक्ति की अवतार थे और उनके वरदान से मंदिर के चूहे कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते। यहां अगर किसी भक्त के चरणों में चूहा दौड़ जाए या सफेद चूहे के दर्शन हो जाएं तो उसे अत्यंत शुभ माना जाता है। मंदिर का निर्माण 20वीं शताब्दी की शुरुआत में महाराजा गंगा सिंह द्वारा कराया गया था, जिसमें सफेद संगमरमर और चांदी के भव्य द्वार इसकी शोभा बढ़ाते हैं। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और नंगे पांव माता के दरबार में शीश नवाते हैं। जय मां करणी 🦅🚩 देशनोक | बीकानेर | राजस्थान

करणी माता मंदिर..! इतिहास गवाह है, इस मंदिर में जाने वाला कभी खाली हाथ नहीं लौटता। बीकानेर के देशनोक में स्थित विश्व प्रसिद्ध करणी माता मंदिर आस्था, चमत्कार और रहस्य का अनोखा संगम है। मान्यता है कि करणी माता शक्ति की अवतार थे और उनके वरदान से मंदिर के चूहे कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते। यहां अगर किसी भक्त के चरणों में चूहा दौड़ जाए या सफेद चूहे के दर्शन हो जाएं तो उसे अत्यंत शुभ माना जाता है। मंदिर का निर्माण 20वीं शताब्दी की शुरुआत में महाराजा गंगा सिंह द्वारा कराया गया था, जिसमें सफेद संगमरमर और चांदी के भव्य द्वार इसकी शोभा बढ़ाते हैं। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और नंगे पांव माता के दरबार में शीश नवाते हैं। जय मां करणी 🦅🚩 देशनोक | बीकानेर | राजस्थान

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#लोकप्रियता के मामले में #हनुमान_बेनीवाल को पीछे छोड़ रहे हैं #खींवसर विधायक रेवंत राम डांगा.. Rewant Ram Danga

#लोकप्रियता के मामले में #हनुमान_बेनीवाल को पीछे छोड़ रहे हैं #खींवसर विधायक रेवंत राम डांगा.. Rewant Ram Danga

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शाहपुरा ठिकाना के एक राजकुमार की शाही शादी पिछले हफ्ते जयपुर के पास हुई। इस वीडियो में जो लोग दिख रहे हैं, उनके पास पूरे राजस्थान और बाहर लगभग 150 से अधिक किले हैं। भारत और विदेश में कई होटल और रिसॉर्ट्स हैं। हज़ारों एकड़ ज़मीन है। घोड़े, प्राचीन वस्तुएं (antiques), और न जाने क्या-क्या है। इन सबसे ऊपर, उनके पास पूर्व-शाही परिवार की एक बड़ी पहचान है। लेकिन, जरा अंतर देखिए कि वे अपने इस भव्य दिन को कैसे मना रहे हैं और कैसे दिखावटी आम लोगों ने अपनी शादियों को क्या से क्या बना दिया है। हम जिन शादियों में जाते हैं, वहां परिवार वाली वह भावना ही गायब मिलती है। इस वीडियो में मौजूदा मंत्री, उपमुख्यमंत्री, कई शाही घराने, उद्योगपति, अधिकांश राजपूत अभिजात वर्ग (elites) और अन्य महत्वपूर्ण हस्तियां मौजूद हैं। दूल्हे ने व्यक्तिगत रूप से सभी से मुलाकात की, आशीर्वाद लिया और सम्मान व्यक्त किया। वरमाला जैसी चीजों में कोई फिजूल का दिखावा नहीं है, समारोह भव्य होते हुए भी एक निजी आयोजन जैसा लग रहा है। यह किसी के लिए कोई सबक या उपदेश नहीं है। यह सिर्फ एक observation है कि अंततः परिवारों की जीत होनी चाहिए। पीढ़ियों का यह बंधन आपके इन इवेंट वालों और 20 कैमरामैनों पर भारी पड़ना चाहिए। अपने रीति-रिवाजों की कद्र करें। ❤️🙌

Bhupendra Singh Rathore

44,698 görüntüleme • 2 ay önce

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जब इतिहास खुद को दोहराता है, तो विरोध के तरीके भी ऐतिहासिक हो जाते हैं। कभी अलवर के महाराजा जयसिंह ने रॉल्स रॉयस जैसी वैश्विक कंपनी को कचरा गाड़ी बनाकर उसकी औकात याद दिलाई थी, और आज बीकानेर की धरती पर महिंद्रा कंपनी के साथ भी कुछ ऐसा ही अनोखा नजारा देखने को मिला है। #राजस्थान के बीकानेर में ग्राहकों का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने महिंद्रा कंपनी की लाखों रुपये की लग्जरी गाड़ियों को कचरे से भर दिया और शोरूम के सामने खड़े होकर एक अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। तकनीकी खराबी, खराब सर्विस और महीनों तक समाधान न मिलने से नाराज ग्राहकों का यह तरीका पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। • विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजहें.. * खराब सर्विस और तकनीकी समस्याएं: ग्राहकों का आरोप है कि गाड़ियों में लगातार तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं और कंपनी महीनों तक उनकी सही सर्विस नहीं करती है। * समाधान की कमी: गाड़ी मालिकों का कहना है कि वे लगातार परेशान हो रहे हैं, लेकिन स्थानीय डीलरशिप और कंपनी की तरफ से कोई ठोस समाधान नहीं दिया जा रहा है। * एजेंसी का अड़ियल रवैया: स्थानीय लोगों का आरोप है कि बीकानेर की महिंद्रा एजेंसी के कर्मचारियों का व्यवहार बेहद खराब है और वे ग्राहकों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुनते। * यह घटना सीधे तौर पर #अलवर के महाराजा जयसिंह के उस ऐतिहासिक वाकये की याद दिलाती है, जब ब्रिटेन में रॉल्स रॉयस के शोरूम में उनका अपमान किया गया था। अपमान का बदला लेने के लिए महाराजा ने एक साथ कई रॉल्स रॉयस गाड़ियां खरीदीं और उन्हें अलवर भेजकर नगरपालिका को सौंप दिया, ताकि उनसे शहर का कचरा साफ कराया जा सके। आज बीकानेर के आम नागरिकों ने भी महिंद्रा की लग्जरी गाड़ियों में कचरा भरकर कॉरपोरेट कंपनियों को यह कड़ा संदेश दिया है कि उपभोक्ता की संतुष्टि ही सबसे ऊपर है।

Bhupendra Singh Rathore

26,019 görüntüleme • 2 ay önce