
छोटी कविता
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जितनी छोटी हो कविता उतना ही ज्यादा बसेगी मन में। साहित्य। सिनेमा। संगीत। जीवन।
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1989 में दूरदर्शन पर ‘इसी बहाने’ नामक एक सस्पेंस सीरियल प्रसारित होता था। इसमें प्रमुख भूमिकाओं में किरण खेर, सईद जाफ़री, सुष्मिता मुखर्जी और लिलिपुट जैसे कलाकार थे। यह सीरियल काफ़ी लोकप्रिय रहा था। आइए, इसी सीरियल की एक ख़ूबसूरत ग़ज़ल, ‘हम हैं कुछ अपने लिए, कुछ हैं ज़माने के लिए’ सुनते हैं। इसे चित्रा सिंह ने अपनी आवाज़ दी है जबकि बोल निदा फ़ाज़ली के हैं।
छोटी कविता65,262 次观看 • 1 个月前

ये बेंजामिन सिस्टर्स हैं, जो अपने गीतों के कारण 1970 के दशक के उत्तरार्ध और 1980 के शुरुआती वर्षों में पाकिस्तान में बेहद मशहूर हुईं। उत्तर भारत में भी उनकी लोकप्रियता कम नहीं थी। तीन बहनों का यह समूह 1987 के बाद मंच पर गाना लगभग बंद कर दिया, जब उनमें से एक की शादी हो गई। दिलचस्प बात यह है कि उस समय यह ग्रुप अपनी लोकप्रियता के शिखर पर था।
छोटी कविता71,054 次观看 • 4 个月前

'रूप तेरा मस्ताना' आज जिस धुन में हमारे दिलों में बसा हुआ है वह शुरुआत में कुछ और ही थी। रिकॉर्डिंग से ठीक पहले किशोर कुमार ने एस. डी. बर्मन की अनुमति से उसमें एक बदलाव किया, और वही बदलाव आगे चलकर इस गीत की पहचान बन गया। आइए, यह दिलचस्प क़िस्सा अमित कुमार की ज़ुबानी सुनते हैं।
छोटी कविता21,131 次观看 • 1 个月前