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Namami Gange

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National Mission for Clean Ganga under the Ministry of Jal Shakti, Government of India

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गंगा इन दिनों, ऋषिकेश..

गंगा इन दिनों, ऋषिकेश..

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गंगा की सेहत का पैमाना है डॉल्फिन, और आज इंसानियत ने उसका कर्ज चुकाया। तीन दिन से महाराजगंज, गोरखपुर के परतावल के एक नहर में लगभग 7.2 फुट लंबी और 147 किलो वजनी एक गर्भवती गांगेय डॉल्फिन फंसी थी। भारत की राष्ट्रीय जलीय जीव, जिसे सदियों से गंगा की आत्मा कहा जाता रहा है, तेज बारिश से उफनती नहर में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी। पहला रेस्क्यू प्रयास नाकाम भी हुआ। डॉल्फिन सिर्फ एक जलीय जीव नहीं, नदी तंत्र की सेहत की जिंदा निशानी है। जहाँ डॉल्फिन बचती है, वहाँ नदी, उसकी मछलियां, और पूरा जल-चक्र बचता है। और उस दिन गर्भ में पल रही एक नई जिंदगी भी इसी उम्मीद पर टिकी थी। सोमवार को वन विभाग, गोरखपुर चिड़ियाघर, टीएसए फाउंडेशन, सिंचाई विभाग और पुलिस एक साथ खड़े हुए। नमामि गंगे द्वारा संचालित गंगा डॉल्फिन रेस्क्यू एंबुलेंस के लिए भटहट से राजघाट तक 20 किमी का ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, ताकि रास्ते का हर पल बचाया जा सके। एक घंटे पांच मिनट। 52 किलोमीटर। और फिर राप्ती नदी की सुरक्षित गोद जहाँ डॉल्फिन ने एक बार फिर आज़ादी की सांस ली। एक डॉल्फिन बची, एक नन्ही जान बची, और गंगा की एक धड़कन फिर लौट आई। #GangeticDolphin #Gorakhpur #SaveGanga #NamamiGange #WildlifeRescue #राप्तीनदी The Better India MoEF&CC

गंगा की सेहत का पैमाना है डॉल्फिन, और आज इंसानियत ने उसका कर्ज चुकाया। तीन दिन से महाराजगंज, गोरखपुर के परतावल के एक नहर में लगभग 7.2 फुट लंबी और 147 किलो वजनी एक गर्भवती गांगेय डॉल्फिन फंसी थी। भारत की राष्ट्रीय जलीय जीव, जिसे सदियों से गंगा की आत्मा कहा जाता रहा है, तेज बारिश से उफनती नहर में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी। पहला रेस्क्यू प्रयास नाकाम भी हुआ। डॉल्फिन सिर्फ एक जलीय जीव नहीं, नदी तंत्र की सेहत की जिंदा निशानी है। जहाँ डॉल्फिन बचती है, वहाँ नदी, उसकी मछलियां, और पूरा जल-चक्र बचता है। और उस दिन गर्भ में पल रही एक नई जिंदगी भी इसी उम्मीद पर टिकी थी। सोमवार को वन विभाग, गोरखपुर चिड़ियाघर, टीएसए फाउंडेशन, सिंचाई विभाग और पुलिस एक साथ खड़े हुए। नमामि गंगे द्वारा संचालित गंगा डॉल्फिन रेस्क्यू एंबुलेंस के लिए भटहट से राजघाट तक 20 किमी का ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, ताकि रास्ते का हर पल बचाया जा सके। एक घंटे पांच मिनट। 52 किलोमीटर। और फिर राप्ती नदी की सुरक्षित गोद जहाँ डॉल्फिन ने एक बार फिर आज़ादी की सांस ली। एक डॉल्फिन बची, एक नन्ही जान बची, और गंगा की एक धड़कन फिर लौट आई। #GangeticDolphin #Gorakhpur #SaveGanga #NamamiGange #WildlifeRescue #राप्तीनदी The Better India MoEF&CC

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The Timeless Beauty and Devotion of Ganga Aarti- A Spiritual Experience that Captivates the Senses. VC: MαverΐcҜ 🇮🇳 #ganga #GangaAarti #haridwar #SpiritualJourney #IncredibleIndia #DekhoApnaDesh #NamamiGange

The Timeless Beauty and Devotion of Ganga Aarti- A Spiritual Experience that Captivates the Senses. VC: MαverΐcҜ 🇮🇳 #ganga #GangaAarti #haridwar #SpiritualJourney #IncredibleIndia #DekhoApnaDesh #NamamiGange

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If sukoon had a name...it would be #Devprayag. #Ganga #NamamiGange #dekhoapnadesh #IncredibleIndia #peace #divinity

If sukoon had a name...it would be #Devprayag. #Ganga #NamamiGange #dekhoapnadesh #IncredibleIndia #peace #divinity

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ये वो दृश्य है जो बहुत कम आँखों ने देखा है। गौमुख, जहाँ माँ गंगा पृथ्वी पर अपना पहला कदम रखती हैं। 8-9 जून को गंगा प्रहरी प्रखर सिंह बिष्ट ने गंगोत्री से तपोवन तक की कठिन ट्रैकिंग कर ये दुर्लभ वीडियो भेजा है। जो आप देख रहे हैं वो है हिमालय की सबसे विशाल हिमानियों में से एक, गंगोत्री ग्लेशियर। और इसके मुहाने गौमुख से अवतरित होती निर्मल, अविरल माँ गंगा। शिवलिंग, मेरु और चौखम्बा जैसे शिखरों के बीच, समुद्र तल से हज़ारों मीटर ऊपर, यहीं से शुरू होती है वो यात्रा जो करोड़ों जीवन को सींचती है। ये स्रोत जितना पवित्र है, उतना ही नाज़ुक भी। इसे बचाना हम सबका धर्म है। #GangotriGlacier #Gaumukh #NamamiGange #Himalaya

Namami Gange

155,021 görüntüleme • 3 ay önce

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13 घंटे। एक डॉल्फ़िन। और एक टीम जो हार मानने को तैयार नहीं थी। उत्तर प्रदेश के गोंडा ज़िले में आज एक वयस्क नर गंगा डॉल्फ़िन एक नहर में फँसी मिली। नदी से कटी, उथले पानी में, समय बीतने के साथ हर पल कमज़ोर होती। ऐसे में उसकी एक ही उम्मीद थी, NMCG की डॉल्फ़िन एम्बुलेंस। उत्तर प्रदेश वन विभाग Environment, Forest and Climate Change Department और Turtle Survival Alliance INDIA की टीम मौके पर पहुँची। 13 घंटे की लगातार मेहनत के बाद डॉल्फ़िन को सुरक्षित बाहर निकाला गया, चिकित्सकीय जाँच की गई, और राप्ती नदी में फिर से छोड़ दिया गया। एक जीवन, फिर से अपने घर पहुँचा। यह डॉल्फ़िन एम्बुलेंस सिर्फ़ एक वाहन नहीं है। यह भारत की पहली ऐसी सुविधा है, जिसे जनवरी 2026 में लॉन्च किया गया था, और तब से अब तक 8 गंगा डॉल्फ़िनों को बचाकर वापस नदी में छोड़ा जा चुका है। अंदर से यह एक चलता-फिरता ICU है, जहाँ हर ज़रूरी उपकरण मौजूद है, ताकि संकट के समय एक भी पल बर्बाद न हो। गंगा डॉल्फ़िन भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव है, और उनकी कुल अनुमानित संख्या लगभग 6,324 है। हर एक डॉल्फ़िन कीमती है। हर एक बचाव, उनकी पूरी प्रजाति के भविष्य की दिशा में एक कदम है। #Dolphin #Gonda #NamamiGange

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15,392 görüntüleme • 4 ay önce

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