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Lokendra Singh Kilanaut

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काम और पीआर में बस यही महीन फर्क होता है... राजेन्द्र राठौड़ को खुद शुभेंदु अधिकारी ने एप्रीशिएट किया है। सुबह से कुछ दूसरे ऐसे ट्वीट देखने को मिल रहे थे कि राजस्थान का फलां नेता बंगाल झंडे गाड़ आया, फलां से ये पहाड़ पलट दिया। उसी दौरान मेरे दिमाग में एक बार के लिए ये बात आई कि राजस्थान के सीनियर लीडर राजेन्द्र राठौड़ भी तो बंगाल में ठीक काम करके आए हैं उनके समर्थक और कार्यकर्ता राठौड़ साब की पीठ क्यों नहीं थपथपा रहे ? लेकिन फिर हुआ यूं कि सम्भवतः बंगाल के होने वाले अगले मुख्यमंत्री ने खुद मीडिया में आकर बता दिया कि राजेन्द्र राठौड़ ने उनके लिए बहुत काम किया। और असल में शुभेंदु अधिकारी का ये स्टेटमेंट सब पीआर पर भारी है। Rajendra Rathore बधाई आपको

काम और पीआर में बस यही महीन फर्क होता है... राजेन्द्र राठौड़ को खुद शुभेंदु अधिकारी ने एप्रीशिएट किया है। सुबह से कुछ दूसरे ऐसे ट्वीट देखने को मिल रहे थे कि राजस्थान का फलां नेता बंगाल झंडे गाड़ आया, फलां से ये पहाड़ पलट दिया। उसी दौरान मेरे दिमाग में एक बार के लिए ये बात आई कि राजस्थान के सीनियर लीडर राजेन्द्र राठौड़ भी तो बंगाल में ठीक काम करके आए हैं उनके समर्थक और कार्यकर्ता राठौड़ साब की पीठ क्यों नहीं थपथपा रहे ? लेकिन फिर हुआ यूं कि सम्भवतः बंगाल के होने वाले अगले मुख्यमंत्री ने खुद मीडिया में आकर बता दिया कि राजेन्द्र राठौड़ ने उनके लिए बहुत काम किया। और असल में शुभेंदु अधिकारी का ये स्टेटमेंट सब पीआर पर भारी है। Rajendra Rathore बधाई आपको

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मैं सौ प्रतिशत दावा कर सकता हूँ कि स्पीकर साहब जिस खेल मंत्री की बात कर रहे हैं वे कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ही हैं। क्योंकि सर ने पॉलिटिक्स में बाकी कुछ किया हो या ना किया हो लेकिन डेकोरम से अब तक कभी Compromise नहीं किया। और सर जब केन्द्र में खेल मंत्री थे तब डेकोरम या तो सर का था या फिर ब्रिटिश क्राउन का हुआ करता था। सर की चवन्नी जब दिल्ली में चलती थी तब हमने तो आंखों से सर का टाइट भौकाल देखा था और देखा नहीं था बल्कि फील किया था। हम तो तब स्टूडेंट थे और सर वाली मिनिस्ट्री के एक नेशनल इवेंट में राजस्थान को रिप्रेजेंट करने गए थे। उस वक्त विज्ञान भवन में सर का करेंट देखा था। हमने भी गिड़गिड़ाकर सर के पास मेसेज कन्वे करवाया कि सर, सर राजस्थान के बच्चे मिलना चाहते हैं। लेकिन सर का एक ही उसूल लाइफ में रहा है कि सर देने के नाम पर आश्वासन देते हैं भाव आजतक सर ने किसी को नहीं दिया। फिर हम तो चीज ही क्या थे। स्पीकर साहब ने तो खुले मन से बात कह दी कि सर का वक्त गया और मेरा आ गया लेकिन सर के साथ ऐसे एक्सपीरियंस आज के तुर्रम खान बनने वाले बहुत से नेताओं के मिल जाएंगे। क्योंकि सर ने आजतक जो भी समझा है सिर्फ खुद को समझा है, बाकी किसी को कुछ नहीं समझा। हो सकता है एक दिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी स्पीकर साहब की जैसी ही कोई कहानी सुना दे जो सर से रिलेटेड हो क्योंकि सर को जिस वक्त दिल्ली में 21 तोपों की सलामी मिलती थी उस वक्त मुख्यमंत्री जी ठीक से नंबरदार भी नहीं थे।

Lokendra Singh Kilanaut

102,300 просмотров • 3 месяцев назад

वायसराय लॉर्ड हरिभाऊ बागडे जी Haribhau Bagade सुनिए प्लीज
11:32

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प्रिय अध्यक्ष जी, Arvind Singh Bhati इन दिनों आप बहुत कमाल और सेक्सी बोल रहे हो। लोग तारीफ कर रहे हैं। लेकिन भगवान के लिए "6 इंच की मोबाइल स्क्रीन" वाला डायलॉग अब अपनी स्पीच स्क्रिप्ट से हटा दो। बीते दो साल से आप इस लाइन के ऐसे पीछे पड़े हो कि अब ये घिस गई है। हर जगह एक ही बात और बार - बार उसी सेंस में कहकर बात के मर्म को क्यों मार रहे हो। मान लिया आपको लड़कों ने ट्रॉल किया है। मैं भी उसमें शामिल रहा हूँ लेकिन प्लीज अध्यक्ष जी अब जाने दीजिए। हम रुक गए और आपको भी रुक जाना चाहिए। आप जब भी ये डायलॉग देते हो तो हमको बेइज्जती फील होती है। इसलिए आपसे गुजारिश है कि स्पीच का कंटेंट बदलो। कंटेंट नहीं बदल सकते तो स्क्रीन की साइज ही बदल दो। 6 इंच से 6.5 इंच करो, 6.8 इंच बोल दो 7 इंच तक बात को डीप सेंस में भी ले जाया जा सकता है क्योंकि मोबाइल की स्क्रीन 7 इंच की भी आती है। लेकिन कुछ नया लाओ सर प्लीज। मैं जब भी आपका स्पीच सुनता हूँ तो एक तो खुद पर गुस्सा है कि मैंने उस दिन ये पाप क्यों किया जिस दिन आपको ट्रॉल किया था। फिर मुझे स्टैंडअप कॉमेडियन हर्ष गुजराल याद आता है। हर्ष गुजराल ने अपने शो में एक डायलॉग दिया था " पांच हजार में रशियन आ जाती है" और उसके बाद हर जगह वही डायलॉग देने लगा। ऑडियंस कहने लग गई कि भाई एक डायलॉग से कितने शो करेगा ? इसलिए मैं आपसे पूछना चाहता हूँ कि एक डायलॉग से कितनी रैलियां करोगे ? और सच कहूं तो अब मैं आपके स्पीच से ही डरने लग गया हूँ। क्योंकि मुझे पहले से मालूम होता है कि आप अपने स्पीच में हमारी धज्जियां उड़ाकर ही रहोगे। इसलिए प्लीज हमको डराना बंद करिए अध्यक्ष जी। किसी वक्त कर दिया आपको ट्रॉल, गलती हो गई, बहुत भारी ब्लेंडर हो गया था हम लड़कों से लेकिन अध्यक्ष जी आप बताइए नौजवान ट्रोलिंग ना करे तो क्या करे ? रोजगार है नहीं, प्यार करने की आजादी समाज देता नहीं है, क्रांति सरकार होने नहीं दे रही। रॉकेट साइंस हमने पढ़ा नहीं है जो AI का कोई रोबोट बनाकर तीर मार लें। तो फिर बताइए क्या करें ? कोई सोल्यूशन दीजिए सर हमको क्योंकि सब लड़के उकताए हुए हैं। आपके जितने हैंडसम नहीं है इसलिए लड़कियां भाव नहीं देती। इसलिए ट्रोलिंग के अलावा कुछ है ही नहीं जो कर सकते हैं। आप तो पढ़े - लिखे जहीन और समझदार आदमी हैं। रामायण, महाभारत की कहानियों में ट्रोलिंग है। साहित्य के उपन्यासों में ट्रोलिंग है। युद्ध के मैदानों में ट्रोलिंग है। फिर लड़के वही तो करेंगे जो हिस्ट्री से सीखा है। हमको नहीं मालूम था आप इतने खतरनाक किस्म के आदमी हो कि ट्रोलिंग को सीरियस लेकर इतनी बड़ी जंग छेड़ दोगे। आपके ट्रोलिंग मुक्त ट्विटर के मंसूबों को हम सफल नहीं होने की कामना करते हैं। और गुजारिश भी करते हैं कि अब आपसे राम - दुहाई है, लड़कों को माफ कर दो। और प्लीज प्रोमिस करो, अगली बार नया डायलॉग बोलोगे वरना मैं डर के मारे आपका स्पीच नहीं सुन पाऊंगा। ~ लोकेन्द्रसिंह किलाणौत (महासचिव, अखिल राजस्थान युवा ट्रोलिंग व 6 इंच स्क्रीन यूनियन) प्रतिलिपि सूचनार्थ श्री अरविंद सिंह भाटी (राष्ट्रीय संयोजक ट्रोलिंग मुक्त ट्विटर अभियान)

Lokendra Singh Kilanaut

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