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Dashrath Dhangar

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क्या इतनी मजबूत कार बन गई है? इतना भारी वजन पड़ने के बाद भी कुछ नहीं बिगड़ा! क्या कहना चाहेंगे इस टेक्नोलॉजी के लिए?

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मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना जलगांव से नज़दीक यावल शहर में देवरे–सोनार फ़ैमिली के यहाँ क़य्यूम ख़ान उर्फ़ ख़ान बाबा (उम्र लगभग 100 साल) पिछले 60 वर्षों से सोने-चाँदी की कारीगरी का काम कर रहे थे. वे शहर के क़ाज़ीपुरा इलाक़े में रहते थे. कम उम्र से ही ख़ान बाबा इसी सोनार फ़ैमिली के यहाँ काम करते आए थे. बढ़ती उम्र और बीमारियों ने जब उन्हें घेर लिया और वे काम करने में असमर्थ हो गए, तब भी देवरे–सोनार फ़ैमिली ने उन्हें कभी अलग नहीं किया, बल्कि अपने परिवार के सदस्य की तरह उनका ख़याल रखा. उम्र के चलते हुई बिमारी से ख़ान बाबा का इंतक़ाल हो गया. उनके इंतक़ाल के बाद भी इस सोनार फ़ैमिली ने इंसानियत की एक शानदार मिसाल पेश की. खान बाबा के इंतेक़ाल की खबर मिलते ही, सोनार फॅमिली के सभी रिश्तेदार पुणे मुंबई व दीगर शहरो से यावल में जमा होगये. ख़ान बाबा की फ़ैमिली की ख़्वाहिश के मुताबिक़, मुस्लिम तरीक़े से इसी हिंदू परिवार के घर से उनका जनाज़ा उठाया गया. मुंबई और पुणे से आए सोनार फ़ैमिली के नौजवानों ने ख़ान बाबा को कंधा दिया और शहर के क़ब्रिस्तान में तद्फ़ीन होने तक उनके साथ रहे. नम आँखों से उन्होंने अपने ख़ान बाबा को आख़िरी बार दीदार किया. यह वाक़या साबित करता है कि नफ़रत के इस दौर में भी इंसानियत मोहब्बत और भाईचारे की रिवायतें आज भी ज़िंदा हैं

मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना जलगांव से नज़दीक यावल शहर में देवरे–सोनार फ़ैमिली के यहाँ क़य्यूम ख़ान उर्फ़ ख़ान बाबा (उम्र लगभग 100 साल) पिछले 60 वर्षों से सोने-चाँदी की कारीगरी का काम कर रहे थे. वे शहर के क़ाज़ीपुरा इलाक़े में रहते थे. कम उम्र से ही ख़ान बाबा इसी सोनार फ़ैमिली के यहाँ काम करते आए थे. बढ़ती उम्र और बीमारियों ने जब उन्हें घेर लिया और वे काम करने में असमर्थ हो गए, तब भी देवरे–सोनार फ़ैमिली ने उन्हें कभी अलग नहीं किया, बल्कि अपने परिवार के सदस्य की तरह उनका ख़याल रखा. उम्र के चलते हुई बिमारी से ख़ान बाबा का इंतक़ाल हो गया. उनके इंतक़ाल के बाद भी इस सोनार फ़ैमिली ने इंसानियत की एक शानदार मिसाल पेश की. खान बाबा के इंतेक़ाल की खबर मिलते ही, सोनार फॅमिली के सभी रिश्तेदार पुणे मुंबई व दीगर शहरो से यावल में जमा होगये. ख़ान बाबा की फ़ैमिली की ख़्वाहिश के मुताबिक़, मुस्लिम तरीक़े से इसी हिंदू परिवार के घर से उनका जनाज़ा उठाया गया. मुंबई और पुणे से आए सोनार फ़ैमिली के नौजवानों ने ख़ान बाबा को कंधा दिया और शहर के क़ब्रिस्तान में तद्फ़ीन होने तक उनके साथ रहे. नम आँखों से उन्होंने अपने ख़ान बाबा को आख़िरी बार दीदार किया. यह वाक़या साबित करता है कि नफ़रत के इस दौर में भी इंसानियत मोहब्बत और भाईचारे की रिवायतें आज भी ज़िंदा हैं

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नया मिसाइल लांच किया हु जो पल भर में दुश्मनों का खत्मा कर देगी 😃 क्या अमेरिका कर पाएगा मेरी बराबरी 😃

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