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Dibang

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😊 कभी-कभी ऐसा भी होता है… Laughter Chefs Colors TV Sunday 9 pm

😊 कभी-कभी ऐसा भी होता है… Laughter Chefs Colors TV Sunday 9 pm

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👉🏾 नेतन्याहू ज़िंदा हैं या नहीं वीडियो विवाद को सिर्फ़ अफ़वाह या साज़िश कहकर खारिज करना पूरी तरह से सही नहीं होगा. ये भविष्य में होनेवाली लड़ाइयों की एक झलक है. इससे पता चलता है कि आज के दौर में AI और सोशल मीडिया मिलकर सच और झूठ के बीच की लाइन को कितना धुंधला कर सकते हैं. 👉🏾 साफ़ है अब 'नई लड़ाई' में हथियार और तौर तरीका ही नहीं, लड़ाई का मैदान भी बदल रहा है और उसमें बड़ा विस्तार हो रहा है. ये एक ऐसी लड़ाई है जहाँ मकसद सिर्फ़ इलाका जीतना नहीं है, बल्कि सोच को काबू करना है और सूचना की आवाजाही पर हावी होना है. ये है information warfare. साफ है अगली लड़ाई सिर्फ़ ज़मीन पर नहीं, बल्कि दुनियाभर के लोगों के दिमाग में लड़ी जाएगी. 👉🏾 अब जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी आगे बढ़ेगी, समाज को मज़बूत वेरिफिकेशन सिस्टम की ज़रूरत होगी. 👉🏾 इनके इतने वीडियो आ रहे हैं, इतने फेक दिख रहे हैं और इतनी आसानी से पकड़े जा रहे हैं, तो लगता है खेल खेला जा रहा है. शायद नेतन्याहू ख़ुद इनको आगे बढ़ा रहे हैं. - पूरी कहानीः इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर चल रही अफवाहों का तूफ़ान थामे नहीं थम रहा. दोनों तरफ से दागी जा रही मिसाइलों के साथ, दागे जा रहे हैं वीडियो. जंग के बीचोंबीच, इनफार्मेशन सुपरहाईवे पर ऐसे तेज़ हमले और जवाबी हमलों की बौछार पहले कभी नहीं देखे गई. पहला वार, Iranian Revolutionary Guard की तरफ से हुआ. वीडियो आया. दावा था नेतन्याहू के घर पर हुए हमले में वो मारे गए. AFP ने जांच में पाया कि वीडियो इजराइल का नहीं बल्कि New Jersey, US का है. बात यहीं ख़त्म नहीं हुई, Irani channels पर कहा गया, वो defence briefings में दिखते नहीं हैं. वो हैं, तो आखिर हैं कहाँ? वो हैं ही नहीं, वो नहीं हैं. अटकलें तेज हुईं, तो एक वीडियो सामने आया, जिसमें नेतन्याहू ईरान के खिलाफ लड़ाई के बारे में बताते दिखे. लाखों लोगों ने इसको देखा. तभी हल्ला उठा कि video में नेतन्याहू के एक हाथ में छह उंगलियां दिख रही हैं. बॉडी डबल की अफवाहें चलीं. पहले इजरायली सेना, फिर नेतन्याहू के कार्यालय ने स्पष्टीकरण दिया, मगर अफवाहों पर रोक नहीं लगी. कहा गया ये IA से बना वीडियो है और असल में अब वो जिन्दा नहीं हैं. तभी आया दूसरा वीडियो, इसमें एक कैफ़े में नेतन्याहू कॉफी ऑर्डर करते हुए दिखे. वीडियो में, उन्होंने अपनी मौत की अफवाहों का मज़ाक उड़ाते हुए कहा: "मैं मर गया... कॉफ़ी के लिए," फिर बोले: आप उंगलियां गिनना चाहते हैं? और उन्होंने कैमरे के सामने दोनों हाथों की पाँच-पाँच उंगलियाँ दिखाईं. फ़ौरन इसमें भी कई-कई गड़बड़ियां पाई गई. ग्रोक ने कैफे के वीडियो को 'AI-generated' बताया. इससे विवाद खत्म नहीं हुआ, बल्कि और बढ़ गया. अफवाहें फिर शुरू हो गईं और जैसे ही उन्होंने जोर पकड़ी पकड़ा , एक और नया वीडियो आया. इसमें वो नागरिकों से बातचीत करते दिखे, बोले: चलो थोड़ी धूप सेंकते हैं. वीडियो के आते ही सोशल मीडिया चिल्लाया उनकी अंगूठी उंगली में कभी दिखती और कभी नहीं. कहा गया ये वीडियो AI की कारिस्तानी है.

👉🏾 नेतन्याहू ज़िंदा हैं या नहीं वीडियो विवाद को सिर्फ़ अफ़वाह या साज़िश कहकर खारिज करना पूरी तरह से सही नहीं होगा. ये भविष्य में होनेवाली लड़ाइयों की एक झलक है. इससे पता चलता है कि आज के दौर में AI और सोशल मीडिया मिलकर सच और झूठ के बीच की लाइन को कितना धुंधला कर सकते हैं. 👉🏾 साफ़ है अब 'नई लड़ाई' में हथियार और तौर तरीका ही नहीं, लड़ाई का मैदान भी बदल रहा है और उसमें बड़ा विस्तार हो रहा है. ये एक ऐसी लड़ाई है जहाँ मकसद सिर्फ़ इलाका जीतना नहीं है, बल्कि सोच को काबू करना है और सूचना की आवाजाही पर हावी होना है. ये है information warfare. साफ है अगली लड़ाई सिर्फ़ ज़मीन पर नहीं, बल्कि दुनियाभर के लोगों के दिमाग में लड़ी जाएगी. 👉🏾 अब जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी आगे बढ़ेगी, समाज को मज़बूत वेरिफिकेशन सिस्टम की ज़रूरत होगी. 👉🏾 इनके इतने वीडियो आ रहे हैं, इतने फेक दिख रहे हैं और इतनी आसानी से पकड़े जा रहे हैं, तो लगता है खेल खेला जा रहा है. शायद नेतन्याहू ख़ुद इनको आगे बढ़ा रहे हैं. - पूरी कहानीः इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर चल रही अफवाहों का तूफ़ान थामे नहीं थम रहा. दोनों तरफ से दागी जा रही मिसाइलों के साथ, दागे जा रहे हैं वीडियो. जंग के बीचोंबीच, इनफार्मेशन सुपरहाईवे पर ऐसे तेज़ हमले और जवाबी हमलों की बौछार पहले कभी नहीं देखे गई. पहला वार, Iranian Revolutionary Guard की तरफ से हुआ. वीडियो आया. दावा था नेतन्याहू के घर पर हुए हमले में वो मारे गए. AFP ने जांच में पाया कि वीडियो इजराइल का नहीं बल्कि New Jersey, US का है. बात यहीं ख़त्म नहीं हुई, Irani channels पर कहा गया, वो defence briefings में दिखते नहीं हैं. वो हैं, तो आखिर हैं कहाँ? वो हैं ही नहीं, वो नहीं हैं. अटकलें तेज हुईं, तो एक वीडियो सामने आया, जिसमें नेतन्याहू ईरान के खिलाफ लड़ाई के बारे में बताते दिखे. लाखों लोगों ने इसको देखा. तभी हल्ला उठा कि video में नेतन्याहू के एक हाथ में छह उंगलियां दिख रही हैं. बॉडी डबल की अफवाहें चलीं. पहले इजरायली सेना, फिर नेतन्याहू के कार्यालय ने स्पष्टीकरण दिया, मगर अफवाहों पर रोक नहीं लगी. कहा गया ये IA से बना वीडियो है और असल में अब वो जिन्दा नहीं हैं. तभी आया दूसरा वीडियो, इसमें एक कैफ़े में नेतन्याहू कॉफी ऑर्डर करते हुए दिखे. वीडियो में, उन्होंने अपनी मौत की अफवाहों का मज़ाक उड़ाते हुए कहा: "मैं मर गया... कॉफ़ी के लिए," फिर बोले: आप उंगलियां गिनना चाहते हैं? और उन्होंने कैमरे के सामने दोनों हाथों की पाँच-पाँच उंगलियाँ दिखाईं. फ़ौरन इसमें भी कई-कई गड़बड़ियां पाई गई. ग्रोक ने कैफे के वीडियो को 'AI-generated' बताया. इससे विवाद खत्म नहीं हुआ, बल्कि और बढ़ गया. अफवाहें फिर शुरू हो गईं और जैसे ही उन्होंने जोर पकड़ी पकड़ा , एक और नया वीडियो आया. इसमें वो नागरिकों से बातचीत करते दिखे, बोले: चलो थोड़ी धूप सेंकते हैं. वीडियो के आते ही सोशल मीडिया चिल्लाया उनकी अंगूठी उंगली में कभी दिखती और कभी नहीं. कहा गया ये वीडियो AI की कारिस्तानी है.

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#BREAKING नेपाल बोला हमने भारतीय जमीन पर कब्ज़ा किया है. लिपुलेख पर ब्रिटेन मध्यस्थ बने: बोले नेपाल के प्रधानमंत्री #Nepal के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने भारत की जमीन पर कब्जा करने का दावा किया है. लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद पर संसद में उन्होंने ये बयान दिया. अब भारतीय जमीन पर कब्जा करने वाले बयान पर विवाद खड़ा हो गया है. नेपाल के कई पूर्व राजनयिकों और वरिष्ठ अधिकारियों ने बालेन शाह के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है. बालेन शाह ने प्रधानमंत्री बनने के दो महीने बाद पहली बार नेपाली संसद में सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए कहा: “प्रधानमंत्री बनने के बाद, मुझे पता चला कि सिर्फ़ भारत ने ही नेपाल की ज़मीन पर कब्ज़ा नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की ज़मीन पर कब्ज़ा किया हुआ है. दोनों पक्षों को बैठकर इस मामले को देखने की ज़रूरत है.” भारत-चीन के बीच लिपुलेख और लिम्पियाधुरा मार्ग से होने वाले व्यापार पर शाह ने कहा कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी पर विवाद diplomatic बातचीत से सुलझाया जाएगा. नेपाल इस मुद्दे पर भारत को एक ऑफिशियल डिप्लोमैटिक नोट भेज चुका है और भारत का जवाब भी मिल उसे मिल गया है. शाह ने कहा, “भारत के जवाब में कहा गया है कि दोनों सरकारें इतिहासकारों, सर्वेयर और इलाके के जानकार एक्सपर्ट्स की टीमें बनाएंगी और आपसी बातचीत के ज़रिए समाधान निकालेंगी.” उन्होंने कहा कि नेपाल ने बॉर्डर विवाद को लेकर #China और #Britain के साथ भी डिप्लोमैटिक बातचीत की है. शाह बोले, “हमने न सिर्फ़ भारत और चीन से बल्कि UK सरकार से भी बात की है. हमारा मानना ​​है कि UK को भी इसमें दिलचस्पी लेनी चाहिए, क्योंकि ये मामला उस समय का है जब ब्रिटिश इंडिया ने इस इलाके को छोड़ा था.”

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