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Dinesh Bohra

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Journalist | News Reporter | News Anchor @aajtak & @rajasthan_tak | RT’s and Views are personal

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"TATA पर भरोसा दिखाते हुए नई Tata Curve खरीदी, लेकिन Tata Motors के डीलर ZEDEX Mobility LLP, करोल बाग की लापरवाही ने भरोसे पर सवाल खड़ा कर दिया। बिना पेट्रोल भरी गाड़ी डिलीवर करना ब्रांड की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाता है।

"TATA पर भरोसा दिखाते हुए नई Tata Curve खरीदी, लेकिन Tata Motors के डीलर ZEDEX Mobility LLP, करोल बाग की लापरवाही ने भरोसे पर सवाल खड़ा कर दिया। बिना पेट्रोल भरी गाड़ी डिलीवर करना ब्रांड की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाता है।

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700 फीट गहरे बोरवेल में फंसी बच्ची, गांव में चूल्हा नहीं जला। कैमरे में हाथ हिलाते हुए दिखी "दुआ करें, जिंदगी की ये जंग जीत जाए। 💕"

700 फीट गहरे बोरवेल में फंसी बच्ची, गांव में चूल्हा नहीं जला। कैमरे में हाथ हिलाते हुए दिखी "दुआ करें, जिंदगी की ये जंग जीत जाए। 💕"

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शिव विधायक रवींद्र सिंह भाटी का बड़ा बयान “मैं विधानसभा और लोकसभा दोनों का चुनाव लड़ा। मुझे दोनों ही चुनाव में अल्पसंख्यक समुदाय के वोट नहीं मिले।”

शिव विधायक रवींद्र सिंह भाटी का बड़ा बयान “मैं विधानसभा और लोकसभा दोनों का चुनाव लड़ा। मुझे दोनों ही चुनाव में अल्पसंख्यक समुदाय के वोट नहीं मिले।”

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न्यायालय की अवहेलना विधायिका नहीं कर सकती। इसलिए विधायक महोदय से विनम्र निवेदन है जज साहिबा का आदेश हुआ है कि मुस्कराइए। अब अदालत का हुक्म है तो मानना ही पड़ेगा “जो आदेश, माय लॉर्ड!”

न्यायालय की अवहेलना विधायिका नहीं कर सकती। इसलिए विधायक महोदय से विनम्र निवेदन है जज साहिबा का आदेश हुआ है कि मुस्कराइए। अब अदालत का हुक्म है तो मानना ही पड़ेगा “जो आदेश, माय लॉर्ड!”

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जब दो जोधपुर वाले मिलते है. तो माला वाली औपचारिकता मायने नहीं रखती.

जब दो जोधपुर वाले मिलते है. तो माला वाली औपचारिकता मायने नहीं रखती.

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बाड़मेर की नवनियुक्त जिला कलक्टर IAS टीना डाबी बाड़मेर के सर्किट हाउस पहुंची है। जहां बाड़मेर एसडीएम समेत अधिकारियों ने उन्हें रिसीव किया। कल बाड़मेर जिला कलक्टर के रूप में कार्यभार करेंगी ग्रहण ..!!

बाड़मेर की नवनियुक्त जिला कलक्टर IAS टीना डाबी बाड़मेर के सर्किट हाउस पहुंची है। जहां बाड़मेर एसडीएम समेत अधिकारियों ने उन्हें रिसीव किया। कल बाड़मेर जिला कलक्टर के रूप में कार्यभार करेंगी ग्रहण ..!!

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इस बार पंगा भारी पड़ गया.

इस बार पंगा भारी पड़ गया.

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यह कोई मुख्यमंत्री की सभा नहीं, बल्कि शिव के निर्दलीय विधायक रवींद्र सिंह भाटी के मजदूर आंदोलन में उमड़ी जनसभा है। यह अपने लोगों का अपने नेता के प्रति प्रेम और विश्वास ही है कि लगभग 50 डिग्री तापमान में भी लोग पूरे धैर्य और गंभीरता के साथ उन्हें सुनते नजर आ रहे हैं।

यह कोई मुख्यमंत्री की सभा नहीं, बल्कि शिव के निर्दलीय विधायक रवींद्र सिंह भाटी के मजदूर आंदोलन में उमड़ी जनसभा है। यह अपने लोगों का अपने नेता के प्रति प्रेम और विश्वास ही है कि लगभग 50 डिग्री तापमान में भी लोग पूरे धैर्य और गंभीरता के साथ उन्हें सुनते नजर आ रहे हैं।

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“अगले साल से परीक्षा इसकी जो मूल जड़ है ओएमआर, अगले साल से नीट की परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट से होगी।”

“अगले साल से परीक्षा इसकी जो मूल जड़ है ओएमआर, अगले साल से नीट की परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट से होगी।”

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हनुमान बेनीवाल सुभाष चारण के बारे में “इनको देखता हूं मैं रील वगैरह बनाते है।”

हनुमान बेनीवाल सुभाष चारण के बारे में “इनको देखता हूं मैं रील वगैरह बनाते है।”

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न्यायमूर्ति समीर जैन आज राजस्थान उच्च न्यायालय साइकिल से पहुंचे और साइकिल से ही वापस लौटे।

न्यायमूर्ति समीर जैन आज राजस्थान उच्च न्यायालय साइकिल से पहुंचे और साइकिल से ही वापस लौटे।

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जब कोई योद्धा अपनी प्रकृति के लिए संघर्ष करता है और उस संघर्ष के परिणाम सामने आते हैं, तो वह दृश्य सचमुच सुकून देने वाला होता है। यह खड़ी खेजड़ी उसी संघर्ष की जीत का जीवंत प्रतीक है, जिसके लिए रवींद्र सिंह भाटी ने बरियाड़ा में इन्हें बचाने की लड़ाई लड़ी थी। आज सोलर प्लेट्स के बीच खड़ी यह खेजड़ी मानो स्वयं कह रही हो—यही होती है संघर्ष की असली जीत।

जब कोई योद्धा अपनी प्रकृति के लिए संघर्ष करता है और उस संघर्ष के परिणाम सामने आते हैं, तो वह दृश्य सचमुच सुकून देने वाला होता है। यह खड़ी खेजड़ी उसी संघर्ष की जीत का जीवंत प्रतीक है, जिसके लिए रवींद्र सिंह भाटी ने बरियाड़ा में इन्हें बचाने की लड़ाई लड़ी थी। आज सोलर प्लेट्स के बीच खड़ी यह खेजड़ी मानो स्वयं कह रही हो—यही होती है संघर्ष की असली जीत।

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गजेंद्र सिंह शेखावत बड़े ही दिलचस्प और पेचीले ढंग से अपने शब्दों का मंज़मून बाँधते हैं। जब भी रवींद्र सिंह भाटी उनके साथ मंच साझा करते हैं, तब अपने उद्बोधन में वे अक्सर उनका परिचय जेएनवीयू (JNVU) से जोड़कर ही कराते हैं। यह मात्र संयोग नहीं लगता, बल्कि एक तरह का राजनीतिक प्रयोग प्रतीत होता है। उन्हें छात्र राजनीति से जोड़कर वे जनता के बीच यह संदेश देने का प्रयास करते हैं कि रवींद्र सिंह भाटी को एक छात्र नेता की छवि से बाहर नहीं आने देना चाहते हैं। मगर जनता भी अपनी प्रतिक्रिया देने में पीछे नहीं रहती जैसे ही यह परिचय होता है, भीड़ दुगुने जोश के साथ नारे लगाने लगती है। दरअसल, राजनीति में शब्दों का यह खेल भी बड़ा कमाल का होता है, जहाँ एक ही वाक्य कई संदेश देने की क्षमता रखता है।

गजेंद्र सिंह शेखावत बड़े ही दिलचस्प और पेचीले ढंग से अपने शब्दों का मंज़मून बाँधते हैं। जब भी रवींद्र सिंह भाटी उनके साथ मंच साझा करते हैं, तब अपने उद्बोधन में वे अक्सर उनका परिचय जेएनवीयू (JNVU) से जोड़कर ही कराते हैं। यह मात्र संयोग नहीं लगता, बल्कि एक तरह का राजनीतिक प्रयोग प्रतीत होता है। उन्हें छात्र राजनीति से जोड़कर वे जनता के बीच यह संदेश देने का प्रयास करते हैं कि रवींद्र सिंह भाटी को एक छात्र नेता की छवि से बाहर नहीं आने देना चाहते हैं। मगर जनता भी अपनी प्रतिक्रिया देने में पीछे नहीं रहती जैसे ही यह परिचय होता है, भीड़ दुगुने जोश के साथ नारे लगाने लगती है। दरअसल, राजनीति में शब्दों का यह खेल भी बड़ा कमाल का होता है, जहाँ एक ही वाक्य कई संदेश देने की क्षमता रखता है।

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कितना दर्दनाक है यह हादसा! शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बच्चों के स्वास्थ्य का जायजा लिया। एक बच्चे से पूछा, "बेटा, तुम्हारा नाम क्या है?" बच्चे ने जवाब दिया, "राजू।" तभी डॉक्टर की आवाज गूंजी, "इसके माता-पिता भी नहीं हैं। जरा सोचिए, यह मासूम किसकी गोद में सिर छिपाकर रोएगा? किसे बताएगा कि मेरे ऊपर स्कूल की छत गिर गई? हृदय विदारक यह घटना हर किसी का मन दहला देती है। ईश्वर इन बच्चों को शक्ति दे और उनके घावों को जल्द भर दे।

कितना दर्दनाक है यह हादसा! शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बच्चों के स्वास्थ्य का जायजा लिया। एक बच्चे से पूछा, "बेटा, तुम्हारा नाम क्या है?" बच्चे ने जवाब दिया, "राजू।" तभी डॉक्टर की आवाज गूंजी, "इसके माता-पिता भी नहीं हैं। जरा सोचिए, यह मासूम किसकी गोद में सिर छिपाकर रोएगा? किसे बताएगा कि मेरे ऊपर स्कूल की छत गिर गई? हृदय विदारक यह घटना हर किसी का मन दहला देती है। ईश्वर इन बच्चों को शक्ति दे और उनके घावों को जल्द भर दे।

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जीवन में विरोध कभी इतना स्तरहीन नहीं होना चाहिए कि संवैधानिक पद पर बैठे विपक्षी दल के नेता के प्रति सम्मानजनक भाषा का त्याग कर दिया जाए और संवाद का स्तर गिर जाए। राजनीति में विरोध यदि विचारों, विचारधारा, नीतियों, लोकतांत्रिक मूल्यों, सरकारी योजनाओं और अभियानों के क्रियान्वयन जैसे मुद्दों पर तथ्य और तर्क के साथ किया जाए, तो वह मतदाताओं के लिए स्थायी प्रभाव छोड़ता है और सरकार में बदलाव की प्रेरणा बन सकता है। इसके विपरीत, स्तरहीन और हास्यास्पद विरोध केवल कुछ पल की सुर्खियाँ तो दिला सकता है, लेकिन वास्तविक बदलाव नहीं ला सकता। ​"जा भजनलाल घेवर लेके आ... अभी लाया हुकम घेवर। जा तू जयपुरी रजाईयां लेके आ... अभी हुकम लाया जयपुरी रजाईयां। जा तू अब धूप में खड़ा हो जा... हुकम मैं धूप में खड़ा हो गया मेरे आका। ऐसे लोग चाहिए... इन्हें सीएम थोड़े चाहिए चपरासी चाहिए... चपरासी मिल गया।"

जीवन में विरोध कभी इतना स्तरहीन नहीं होना चाहिए कि संवैधानिक पद पर बैठे विपक्षी दल के नेता के प्रति सम्मानजनक भाषा का त्याग कर दिया जाए और संवाद का स्तर गिर जाए। राजनीति में विरोध यदि विचारों, विचारधारा, नीतियों, लोकतांत्रिक मूल्यों, सरकारी योजनाओं और अभियानों के क्रियान्वयन जैसे मुद्दों पर तथ्य और तर्क के साथ किया जाए, तो वह मतदाताओं के लिए स्थायी प्रभाव छोड़ता है और सरकार में बदलाव की प्रेरणा बन सकता है। इसके विपरीत, स्तरहीन और हास्यास्पद विरोध केवल कुछ पल की सुर्खियाँ तो दिला सकता है, लेकिन वास्तविक बदलाव नहीं ला सकता। ​"जा भजनलाल घेवर लेके आ... अभी लाया हुकम घेवर। जा तू जयपुरी रजाईयां लेके आ... अभी हुकम लाया जयपुरी रजाईयां। जा तू अब धूप में खड़ा हो जा... हुकम मैं धूप में खड़ा हो गया मेरे आका। ऐसे लोग चाहिए... इन्हें सीएम थोड़े चाहिए चपरासी चाहिए... चपरासी मिल गया।"

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ज्योति मिर्धा को भाजपा द्वारा राज्यसभा भेजे जाने की अटकलों पर हनुमान बेनीवाल ने कहा कि "अगर मेरा नाम ले के किसी को फायदा हो रहा है, तो होने दो बेचारे को। बढ़िया है, अगर मेरे समाज के कोई व्यक्ति अगर मेरे नाम से, मुझे गाली देकर आगे बढ़ता है तो बढ़ने दो। नाम तो मेरा ही होगा।"

ज्योति मिर्धा को भाजपा द्वारा राज्यसभा भेजे जाने की अटकलों पर हनुमान बेनीवाल ने कहा कि "अगर मेरा नाम ले के किसी को फायदा हो रहा है, तो होने दो बेचारे को। बढ़िया है, अगर मेरे समाज के कोई व्यक्ति अगर मेरे नाम से, मुझे गाली देकर आगे बढ़ता है तो बढ़ने दो। नाम तो मेरा ही होगा।"

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कभी- कभी होने वाला ये मिलन कांग्रेस के लिए सुखद है.

कभी- कभी होने वाला ये मिलन कांग्रेस के लिए सुखद है.

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मेरा नाम गोविंद डोटासरा है अगर सांस भी निकाल दिया तो... साढ़ू साहब से पूछ लेना।

मेरा नाम गोविंद डोटासरा है अगर सांस भी निकाल दिया तो... साढ़ू साहब से पूछ लेना।

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यह कोई आम व्यक्ति नहीं, राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा हैं — सामाजिक कार्यक्रम के भंडारे में सादगी से जमीन पर बैठकर भोजन करते हुए। यही है जननेता की पहचान!

यह कोई आम व्यक्ति नहीं, राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा हैं — सामाजिक कार्यक्रम के भंडारे में सादगी से जमीन पर बैठकर भोजन करते हुए। यही है जननेता की पहचान!

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हनुमान बेनीवाल के बाद अब निर्दलीय विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने भी डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के समर्थन में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि – "किरोड़ी जी बड़े नेता हैं और संघर्षों की भट्टी में तपकर निकले हुए व्यक्ति हैं। आज जो कुछ भी हो रहा है, जिस तरीके से हो रहा है और जो तमाम घटनाएं सामने आ रही हैं, उनका उन्हें पूरा पता है। यह सब कौन करवा रहा है, इसकी भी उन्हें अच्छी तरह जानकारी है। मुझे लगता है कि एक मजबूत नेता के लिए यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। राजनीति में ऐसी बातें पहले भी होती रही हैं और आज भी हो रही हैं। यह सब एक प्रयास है, एक सोची-समझी साजिश और षड्यंत्र है। मेरा मानना है कि आने वाले दिनों में पूरी स्थिति प्रदेश के सामने स्पष्ट हो जाएगी।"

Dinesh Bohra

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4 साल का, 10 साल का और 15 साल का बच्चा ने पाछो तैयार करयो के... थने थारे बाप को, दादे को पाछो बदलो लेनो है ; राजवीर सिंह चलकाेई बाड़मेर में आयोजित सम्राट पृथ्वीराज चौहान के जयंती समारोह में मुख्य वक्ता राजवीर सिंह चलकोई ने हर किसी को भाव विभोर कर दिया। राजवीर सिंह ने कहा कि केवल राजाओं और वीर योद्धाओं का स्मरण किया जाता रहा है। लेकिन,मातृ शक्ति का योगदान में उस समय बेहद अहम था आप सोचिए राजस्थान की यह धरती जहां 18 साल तक के बालक एक योद्धा की तरह युद्ध में उतरते थे। यही कारण रहा कि 480 साल तक राजस्थान अकेले ने मुगलों को रोके रखा। किसी घर में 18 साल तक के बच्चे तक नहीं बचे थे। तो मैं इस मौके पर उन माताओं और मातृ शक्ति को भी दंडवत प्रणाम करता हूं।

Dinesh Bohra

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“मैं कांग्रेसी नहीं हूँ, हम सपोर्ट बीजेपी को करते हैं, मगर इनकी इज़्ज़त दिल से करते हैं।” बाड़मेर के पूर्व विधायक मेवाराम जैन आज अपने निजी कार्यालय में कार्यकर्ताओं, समर्थकों, शुभचिंतकों और मित्रों के साथ अपना जन्मदिन मना रहे थे। कार्यालय के बाहर भारी भीड़ देखकर कुछ युवतियाँ अपनी गाड़ी मोड़कर उम्मीद के साथ वापस कार्यालय लौट आई। इसी दौरान, मुख्य शहर में पिछले दस दिनों से बाधित जल आपूर्ति की समस्या को लेकर वही युवतियाँ वापस गाड़ी घुमा कर फिर से वहाँ पहुँचीं और अपनी पीड़ा सामने रखी। जन्मदिन के कार्यक्रम के बीच, सैकड़ों कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में भी मेवाराम जैन ने संबंधित अधिकारी को फोन किया और जल्द से जल्द इस जल समस्या के समाधान का आग्रह किया। जबकि उनका कहना था कि “मैं कांग्रेसी नहीं हूँ, हम सपोर्ट बीजेपी को करते हैं, मगर इनकी इज़्ज़त दिल से करते हैं।” इसके बावजूद इतने बड़े कार्यक्रम के बीच भी जनता की पीड़ा को प्राथमिकता देते हुए उसका तत्काल संज्ञान लेना और समाधान के लिए प्रयास करना वाकई सराहनीय है।

Dinesh Bohra

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“अभी मैंने उनसे (भजनलाल शर्मा) बात करी, मेरे बर्थडे पे उनका फोन आया था।” पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर एयरपोर्ट के बाहर मिडिया को संबोधित करते हुए कहा कि – "सरकार चली गई, मॉनिटरिंग करने का कोई हिसाब ही नहीं है इनका तो। मुख्यमंत्री को पता ही नहीं पड़ता कि ये जो प्रोजेक्ट बन रहे हैं, वो बन क्या रहे हैं? अब जिस मुख्यमंत्री को ही नहीं पता है, वो कैसे उसकी मॉनिटरिंग करेंगे? वो इंटरेस्ट ले ही नहीं रहे।..मेरा दावा है, कोई मीडिया वाला... हम खर्चा देंगे। आप जहां जाना चाहो राजस्थान के किसी गांव में, किसी भी गांव में जाओ, आपको इस सरकार की हकीकत से रूबरू हो जाओगे।”

Dinesh Bohra

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"नहीं, हमें पता नहीं था। हमने तो बस उनसे अपनी समस्या बताई थी कि हम नया गांव से आए हैं। हमें यह नहीं मालूम था कि वे कलेक्टर साहब हैं।" कहते हैं, "पता नहीं किस रूप में नारायण मिल जाए।" एक बुजुर्ग दंपति अपनी पेंशन शुरू करवाने के लिए सरकारी कार्यालयों के तीन-तीन चक्कर लगा चुके थे, लेकिन उनका काम नहीं हो पा रहा था। जीवन में कई बार ऐसा होता है कि जब सभी रास्ते बंद नजर आते हैं, तभी कोई संयोग बनता है और कोई अनजान व्यक्ति आपकी समस्या का समाधान कर देता है। इसी तरह जब यह बुजुर्ग दंपति दफ्तरों के चक्कर काटते हुए अपनी परेशानी लेकर भटक रहा था, तभी उनकी मुलाकात पाली के जिला कलेक्टर रवींद्र गोस्वामी से हो गई, जो मौके पर औचक निरीक्षण कर रहे थे। कलेक्टर ने उनकी समस्या सुनी और संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने बुजुर्ग दंपति से कहा, "आज शाम तक आपकी पेंशन शुरू हो जाएगी।" निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने यह भी देखा कि बुजुर्ग दंपति अपने कार्य के लिए सीढ़ियां चढ़कर प्रथम तल पर स्थित कार्यालय तक पहुंच रहे थे। वृद्धावस्था में होने वाली इस परेशानी को महसूस करते हुए उन्होंने तत्काल अधिकारियों को निर्देश दिए कि वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को अनावश्यक कठिनाई न हो, इसलिए संबंधित कार्यालय को प्रथम तल से भूतल पर स्थानांतरित किया जाए। बुजुर्ग महिला को यह पता नहीं था कि उनकी बात सुनने वाला व्यक्ति कौन है। लेकिन उनकी संवेदनशीलता और मदद के भाव से प्रभावित होकर वह उनके चरण स्पर्श करने का प्रयास करने लगीं। हालांकि, वहां मौजूद अधिकारियों ने उन्हें विनम्रता से ऐसा करने से रोक दिया। कई बार प्रशासनिक पद से अधिक प्रभाव मानवीय संवेदनशीलता का होता है। किसी जरूरतमंद के लिए समय पर मिली सहायता और उसकी पीड़ा को समझने की संवेदना ही प्रशासन की सबसे बड़ी पहचान बन जाती है। ऐसे ही क्षण लोगों के मन में व्यवस्था के प्रति विश्वास को और मजबूत करते हैं।

Dinesh Bohra

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