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Dipika Pandey Singh

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Minister of Rural Development and Panchayati Raj, Government of Jharkhand; MLA, Mahagama

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मेरे निवेदन पर तत्काल संज्ञान लेकर सभी घायलों की सकुशल वापसी के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी का कोटि कोटि आभार व्यक्त करती हूँ। साथ ही हादसे में मृत दो लोगों के पार्थिव शरीर को भी अब कुछ ही समय में परिवार के सुपुर्द कर दिया जाएगा। इस प्रयास को सफल करने हेतु झारखण्ड से गई टीम के सभी अधिकारियों एवं टीम मेंबर्स को हार्दिक धन्यवाद देती हूँ जिन्होंने हादसे वाली स्थल पर जाकर सुनिश्चित किया कि हर झारखण्ड निवासी को उचित मदद मिल सके। Hemant Soren Office of Chief Minister, Jharkhand DC Ranchi DC West Singhbhum Jharkhand Pradesh Congress #OdishaTrainAccident

मेरे निवेदन पर तत्काल संज्ञान लेकर सभी घायलों की सकुशल वापसी के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी का कोटि कोटि आभार व्यक्त करती हूँ। साथ ही हादसे में मृत दो लोगों के पार्थिव शरीर को भी अब कुछ ही समय में परिवार के सुपुर्द कर दिया जाएगा। इस प्रयास को सफल करने हेतु झारखण्ड से गई टीम के सभी अधिकारियों एवं टीम मेंबर्स को हार्दिक धन्यवाद देती हूँ जिन्होंने हादसे वाली स्थल पर जाकर सुनिश्चित किया कि हर झारखण्ड निवासी को उचित मदद मिल सके। Hemant Soren Office of Chief Minister, Jharkhand DC Ranchi DC West Singhbhum Jharkhand Pradesh Congress #OdishaTrainAccident

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विधानसभा में मनरेगा पर संकल्प (संक्षिप्त वक्तव्य): वर्ष 2005 में लागू मनरेगा झारखंड के ग्रामीण गरीबों के लिए जीवन रेखा है। इसने रोजगार, गरीबी उन्मूलन, पलायन रोकने और महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रस्तावित VB-GRAM अधिनियम, 2025 से रोजगार की कानूनी गारंटी कमजोर होने, राज्यों पर 60:40 वित्तीय बोझ बढ़ने, ग्राम सभाओं की शक्तियाँ घटने तथा डिजिटल जटिलताओं से श्रमिकों के वंचित होने की आशंका है। अतः मैं संकल्प प्रस्तावित करता हूँ कि मनरेगा के मांग-आधारित, अधिकार-आधारित ढाँचे को यथावत रखा जाए, केंद्र सरकार पूर्ववत वित्तीय जिम्मेदारी निभाए तथा रोजगार के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 150 दिन की जाए, ताकि झारखंड के लाखों गरीब परिवारों के हित सुरक्षित रह सकें। Rahul Gandhi

Dipika Pandey Singh

27,509 次观看 • 5 个月前

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गोड्डा की जनता तो Dr Nishikant Dubey को अच्छी तरह जानती है — सत्ता के नशे में चूर, अहंकार में डूबे हुए। लेकिन अब जो ज़हर उन्होंने देश की सर्वोच्च अदालत और माननीय जज के खिलाफ उगला है, उसने पूरी दुनिया के सामने बीजेपी की असली सोच और तानाशाही मानसिकता को उजागर कर दिया है। ‘गृहयुद्ध’ जैसे शब्द का इस्तेमाल करके सुप्रीम कोर्ट को चुनौती देना न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि यह देश की न्यायपालिका को भी सरकारी एजेंसियों की तरह अपनी जेब में डालने की साज़िश है। जब फैसले इनके पक्ष में आते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट महान होता है, लेकिन जब अदालत आम जनता, ग़रीबों और संविधान की रक्षा में खड़ी होती है — तब यही लोग उसे धमकाने लगते हैं। भारत का लोकतंत्र सुप्रीम कोर्ट की आत्मा से चलता है। देश के करोड़ों नागरिकों की आखिरी उम्मीद है न्यायपालिका। लेकिन जब एक सांसद उस संस्था पर इस तरह का हमला करता है, तो ये सवाल उठता है — क्या ये बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शह पर दिया गया है? क्या बीजेपी की यही आधिकारिक सोच है? अगर नहीं, तो प्रधानमंत्री को तुरंत सामने आकर स्थिति साफ करनी चाहिए। और अगर हां — तो देश को जानने का हक है कि अब न्यायपालिका भी बीजेपी के लिए ‘दुश्मन’ बन चुकी है। हम मांग करते हैं कि निशिकांत दुबे पर संविधान और लोकतंत्र के अनुरूप कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। अब ये बर्दाश्त नहीं होगा। न्यायपालिका पर हमला, देश पर हमला है — और देश चुप नहीं बैठेगा।

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13,528 次观看 • 1 年前

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