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एयरक्राफ्ट हादसे के दौरान दोनों पायलटों की जान बचाने वाले तीन साहसी व्यक्तियों को जिला अधिकारी प्रयागराज द्वारा सम्मानित किया गया। S.P. Goyal, Chief Secretary, GoUP CM Office, GoUP Government of UP Information and Public Relations Department, UP CDO Prayagraj

एयरक्राफ्ट हादसे के दौरान दोनों पायलटों की जान बचाने वाले तीन साहसी व्यक्तियों को जिला अधिकारी प्रयागराज द्वारा सम्मानित किया गया। S.P. Goyal, Chief Secretary, GoUP CM Office, GoUP Government of UP Information and Public Relations Department, UP CDO Prayagraj

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आगामी विधानसभा निर्वाचन के दृष्टिगत अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) द्वारा जनपद के समस्त पात्र नागरिकों से अपील की गई है कि जिन नागरिकों का नाम अभी तक निर्वाचक नामावली में पंजीकृत नहीं है, वे निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत अपना पंजीकरण कराते हुए मतदाता पहचान पत्र बनवाना सुनिश्चित करें। विशेष रूप से 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके युवाओं एवं अन्य पात्र नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे समय रहते निर्वाचक नामावली में अपना नाम सम्मिलित कराएं तथा अपने मताधिकार के प्रयोग हेतु आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कर लें। अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) ने कहा कि स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं सुदृढ़ लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक पात्र नागरिक की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। अतः सभी पात्र जनपदवासी मतदाता के रूप में अपना पंजीकरण अवश्य कराएं। S.P. Goyal, Chief Secretary, GoUP Government of UP CM Office, GoUP Information and Public Relations Department, UP CEO Uttar Pradesh Election Commission of India DEO Prayagraj

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महर्षि भारद्वाज आश्रम वर्तमान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय तथा बालसन चौराहे के मध्य स्थित है। वैदिक काल के सर्वाधिक प्राचीन एवं पूज्यतम् ऋषियों में से एक महर्षि भारद्वाज जी द्वारा स्थापित यह आश्रम एक समृद्ध एवं विस्तृत विश्वविद्यालय सदृश था तथा महर्षि भारद्वाज जी इसके कुलपति थे। इस आश्रम में विद्यार्थी ज्ञान एवं दर्शन की शिक्षा के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान किया करते थे। महर्षि भारद्वाज मुनि के ग्रन्थ ’यंत्र सर्वस्व’ में विमानिक ज्ञान का ‘अंगवोधिनी‘ नामक ग्रन्थ में जल, वायु, चुम्बक, वाष्प, विद्युत एवं अंशु का उल्लेख तथा इसमें सूर्य की किरणों से विमान चलाने का वर्णन एवं ‘यन्त्रार्णव‘ ग्रन्थ में विमान बनाने की कला का वर्णन किया गया है। ऐसा माना जाता है कि पुष्पक विमान का निर्माण यहीं पर हुआ था। श्री रामचन्द्र जी द्वारा लंका के राजा रावण का वध करने के पश्चात् पुष्पक विमान से लौटते समय ऋषि भारद्वाज जी से आशीर्वाद लेने के लिए यहॉँ आए थे।

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